श्री चामुंडा माता आरती

śrī cāmuṇḍā mātā āratī

Chamunda Mata Aarti

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: पारंपरिक चामुंडा माता आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

माँ चामुंडा आदिशक्ति का उग्र रक्षक स्वरूप हैं, जिन्होंने चण्ड व मुण्ड नामक दैत्यों का संहार किया, इसी से "चामुंडा" कहलाईं। यह आरती नवरात्रि व देवी-पूजन में गाई जाती है, जिससे भय, शत्रु व संकट से रक्षा होती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय चामुंडा माता, मैया जय चामुंडा माता। भक्तन की रखवाली, तू दुख की हर्ता॥

हे चामुंडा माता, आपकी जय हो! आप भक्तों की रक्षक तथा दुःख हरने वाली हैं।

चण्ड-मुण्ड संहारे, नाम चामुंडा पाया। खड्ग-त्रिशूल धारिणि, उग्र रूप दिखाया॥

चण्ड व मुण्ड का संहार करने से आपने "चामुंडा" नाम पाया; खड्ग व त्रिशूल धारण कर आपने उग्र रूप दिखाया।

सप्तशती में वर्णित, महिमा तेरी न्यारी। दुष्ट-दलन कर माता, करती जग-रखवारी॥

दुर्गा सप्तशती में आपकी अनुपम महिमा वर्णित है; हे माता, दुष्टों का दमन कर आप जगत की रक्षा करती हैं।

जो जन तुमको ध्याता, भय-संकट नाशे। रोग-दोष सब मिटते, सुख-सम्पति आशे॥

जो भक्त आपका ध्यान करता है, उसके भय-संकट नष्ट हो जाते हैं; रोग-दोष मिट जाते हैं और सुख-सम्पत्ति की प्राप्ति होती है।

चामुंडा माँ की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भय-संकट सब मिटते, अभय-पद वह पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से चामुंडा माँ की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह अभय-पद प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे चामुंडा माता, आपकी जय हो! आप भक्तों की रक्षक तथा दुःख हरने वाली हैं।
  2. चण्ड व मुण्ड का संहार करने से आपने "चामुंडा" नाम पाया; खड्ग व त्रिशूल धारण कर आपने उग्र रूप दिखाया।
  3. दुर्गा सप्तशती में आपकी अनुपम महिमा वर्णित है; हे माता, दुष्टों का दमन कर आप जगत की रक्षा करती हैं।
  4. जो भक्त आपका ध्यान करता है, उसके भय-संकट नष्ट हो जाते हैं; रोग-दोष मिट जाते हैं और सुख-सम्पत्ति की प्राप्ति होती है।
  5. जो भक्त श्रद्धा से चामुंडा माँ की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह अभय-पद प्राप्त करता है।

लाभ

  • भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • संकट, रोग व बाधाओं का नाश होता है।
  • साहस, शक्ति व आत्मबल में वृद्धि होती है।

कब करें पाठ

नवरात्रि व अष्टमी कोमंगलवार व शुक्रवार कोसंध्या पूजा में

पाठ विधि

माँ चामुंडा के समक्ष लाल पुष्प, सिंदूर व दीप अर्पित करें, दुर्गा सप्तशती का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। नवरात्रि की अष्टमी पर पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
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श्री चामुंडा माता आरती — सामान्य प्रश्न

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