वापस
लिपि:
॥ श्री ॥
श्री छठी मैया आरती
आरती
पाठ
1
जय छठी मैया, जय हे आदित-भगिनी। सन्तान-सुख दाता, तुम जग-हितकारिणी॥
2
घाट किनारे बैठे, व्रती अर्घ्य देते। डूबते-उगते सूरज, तुम संग पूजे जाते॥
3
ठेकुआ-फल नारियल, सूप सजाए जाते। निर्जल व्रत रख माता, तेरे गुण गाते॥
4
सन्तान की रक्षा करती, सुख-समृद्धि देती। श्रद्धा से जो पूजे, मनवांछित देती॥
5
छठी मैया आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सन्तान-सुख वह पावे, सुख-समृद्धि पावे॥
अर्थ (हिन्दी)
- हे छठी मैया, हे सूर्यदेव की बहन, आपकी जय हो! आप सन्तान-सुख देने वाली व समस्त जगत का हित करने वाली हैं।
- घाट के किनारे बैठकर व्रती (व्रत रखने वाले) अर्घ्य देते हैं; डूबते व उगते सूर्य के साथ आपकी भी पूजा की जाती है।
- ठेकुआ, फल व नारियल से सूप (दौरा) सजाए जाते हैं; हे माता, निर्जल व्रत रखकर भक्त आपके गुण गाते हैं।
- आप सन्तान की रक्षा करती हैं और सुख-समृद्धि देती हैं; जो श्रद्धा से पूजता है, उसे मनोवांछित फल देती हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से छठी मैया की यह आरती गाता है, वह सन्तान-सुख तथा सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।
लाभ
- सन्तान की रक्षा, आरोग्य व दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
- परिवार में सुख, समृद्धि व सौभाग्य बना रहता है।
- श्रद्धा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
कब करें पाठ
छठ पर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी) पर · सूर्य को अर्घ्य देते समय · चैती छठ (चैत्र) पर
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
