श्री छठी मैया आरती
śrī chaṭhī maiyā āratī
Chhathi Maiya Aarti (Chhath Puja)
परिचय
स्रोत: पारंपरिक छठ पर्व आरती (बिहार/पूर्वांचल)
उद्भव / पृष्ठभूमि
छठी मैया सूर्यदेव की बहन व सन्तान-रक्षा तथा परिवार के सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं। छठ पर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी) पर डूबते व उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मैया की पूजा की जाती है; यह पर्व बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश व नेपाल में अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है।
आरती (लिरिक्स)
जय छठी मैया, जय हे आदित-भगिनी। सन्तान-सुख दाता, तुम जग-हितकारिणी॥
हे छठी मैया, हे सूर्यदेव की बहन, आपकी जय हो! आप सन्तान-सुख देने वाली व समस्त जगत का हित करने वाली हैं।
घाट किनारे बैठे, व्रती अर्घ्य देते। डूबते-उगते सूरज, तुम संग पूजे जाते॥
घाट के किनारे बैठकर व्रती (व्रत रखने वाले) अर्घ्य देते हैं; डूबते व उगते सूर्य के साथ आपकी भी पूजा की जाती है।
ठेकुआ-फल नारियल, सूप सजाए जाते। निर्जल व्रत रख माता, तेरे गुण गाते॥
ठेकुआ, फल व नारियल से सूप (दौरा) सजाए जाते हैं; हे माता, निर्जल व्रत रखकर भक्त आपके गुण गाते हैं।
सन्तान की रक्षा करती, सुख-समृद्धि देती। श्रद्धा से जो पूजे, मनवांछित देती॥
आप सन्तान की रक्षा करती हैं और सुख-समृद्धि देती हैं; जो श्रद्धा से पूजता है, उसे मनोवांछित फल देती हैं।
छठी मैया आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सन्तान-सुख वह पावे, सुख-समृद्धि पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से छठी मैया की यह आरती गाता है, वह सन्तान-सुख तथा सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे छठी मैया, हे सूर्यदेव की बहन, आपकी जय हो! आप सन्तान-सुख देने वाली व समस्त जगत का हित करने वाली हैं।
- घाट के किनारे बैठकर व्रती (व्रत रखने वाले) अर्घ्य देते हैं; डूबते व उगते सूर्य के साथ आपकी भी पूजा की जाती है।
- ठेकुआ, फल व नारियल से सूप (दौरा) सजाए जाते हैं; हे माता, निर्जल व्रत रखकर भक्त आपके गुण गाते हैं।
- आप सन्तान की रक्षा करती हैं और सुख-समृद्धि देती हैं; जो श्रद्धा से पूजता है, उसे मनोवांछित फल देती हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से छठी मैया की यह आरती गाता है, वह सन्तान-सुख तथा सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।
लाभ
- सन्तान की रक्षा, आरोग्य व दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
- परिवार में सुख, समृद्धि व सौभाग्य बना रहता है।
- श्रद्धा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
कब करें पाठ
पाठ विधि
छठ पर्व पर घाट/जलाशय के किनारे सूप में ठेकुआ, फल व नारियल सजाकर डूबते व उगते सूर्य को अर्घ्य दें; छठी मैया का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ। निर्जला व्रत इस पर्व का प्रमुख अंग है।
