श्री छठी मैया आरती

śrī chaṭhī maiyā āratī

Chhathi Maiya Aarti (Chhath Puja)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

स्रोत: पारंपरिक छठ पर्व आरती (बिहार/पूर्वांचल)

उद्भव / पृष्ठभूमि

छठी मैया सूर्यदेव की बहन व सन्तान-रक्षा तथा परिवार के सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं। छठ पर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी) पर डूबते व उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मैया की पूजा की जाती है; यह पर्व बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश व नेपाल में अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है।

आरती (लिरिक्स)

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जय छठी मैया, जय हे आदित-भगिनी। सन्तान-सुख दाता, तुम जग-हितकारिणी॥

हे छठी मैया, हे सूर्यदेव की बहन, आपकी जय हो! आप सन्तान-सुख देने वाली व समस्त जगत का हित करने वाली हैं।

घाट किनारे बैठे, व्रती अर्घ्य देते। डूबते-उगते सूरज, तुम संग पूजे जाते॥

घाट के किनारे बैठकर व्रती (व्रत रखने वाले) अर्घ्य देते हैं; डूबते व उगते सूर्य के साथ आपकी भी पूजा की जाती है।

ठेकुआ-फल नारियल, सूप सजाए जाते। निर्जल व्रत रख माता, तेरे गुण गाते॥

ठेकुआ, फल व नारियल से सूप (दौरा) सजाए जाते हैं; हे माता, निर्जल व्रत रखकर भक्त आपके गुण गाते हैं।

सन्तान की रक्षा करती, सुख-समृद्धि देती। श्रद्धा से जो पूजे, मनवांछित देती॥

आप सन्तान की रक्षा करती हैं और सुख-समृद्धि देती हैं; जो श्रद्धा से पूजता है, उसे मनोवांछित फल देती हैं।

छठी मैया आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सन्तान-सुख वह पावे, सुख-समृद्धि पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से छठी मैया की यह आरती गाता है, वह सन्तान-सुख तथा सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे छठी मैया, हे सूर्यदेव की बहन, आपकी जय हो! आप सन्तान-सुख देने वाली व समस्त जगत का हित करने वाली हैं।
  2. घाट के किनारे बैठकर व्रती (व्रत रखने वाले) अर्घ्य देते हैं; डूबते व उगते सूर्य के साथ आपकी भी पूजा की जाती है।
  3. ठेकुआ, फल व नारियल से सूप (दौरा) सजाए जाते हैं; हे माता, निर्जल व्रत रखकर भक्त आपके गुण गाते हैं।
  4. आप सन्तान की रक्षा करती हैं और सुख-समृद्धि देती हैं; जो श्रद्धा से पूजता है, उसे मनोवांछित फल देती हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से छठी मैया की यह आरती गाता है, वह सन्तान-सुख तथा सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।

लाभ

  • सन्तान की रक्षा, आरोग्य व दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
  • परिवार में सुख, समृद्धि व सौभाग्य बना रहता है।
  • श्रद्धा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

कब करें पाठ

छठ पर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी) परसूर्य को अर्घ्य देते समयचैती छठ (चैत्र) पर

पाठ विधि

छठ पर्व पर घाट/जलाशय के किनारे सूप में ठेकुआ, फल व नारियल सजाकर डूबते व उगते सूर्य को अर्घ्य दें; छठी मैया का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ। निर्जला व्रत इस पर्व का प्रमुख अंग है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

श्री छठी मैया आरती — सामान्य प्रश्न