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लिपि:
॥ श्री ॥

दुर्गा वैदिक मंत्र — जातवेदसे सुनवाम सोमम्

मंत्र · माँ दुर्गा

पाठ

1

ॐ जातवेदसे सुनवाम सोममरातीयतो निदहाति वेदः। स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्निः॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हम जातवेदा (अग्नि) के लिए सोम निचोड़ते हैं, जो शत्रुता रखने वालों को भस्म कर देते हैं। वे अग्नि हमें समस्त दुर्गम संकटों और पापों से उसी प्रकार पार उतारें, जैसे नौका सागर से पार उतारती है।

लाभ

  • देवी-उपासना का सबसे प्राचीन उपलब्ध वैदिक आधार माना जाता है।
  • परंपरा में इसे संकट, विघ्न व शत्रु-बाधा से पार उतरने से जोड़ा जाता है।
  • नवरात्रि की वैदिक पद्धति की पूजा व दुर्गा हवन में पाठ विहित बताया जाता है।
  • "दुर्गाणि" शब्द से दुर्गा नाम का सम्बन्ध — नाम की व्युत्पत्ति यहीं से जुड़ी है।

कब करें पाठ

नवरात्रि के नौ दिन · अष्टमी व नवमी तिथि पर · मंगलवार व शुक्रवार को · संकट या भय के समय

स्रोत

दुर्गा सूक्त — तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद), महानारायण उपनिषद् खंड · नवरात्रि वैदिक पूजा व दुर्गा हवन परंपरा

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