दुर्गा वैदिक मंत्र — जातवेदसे सुनवाम सोमम्

durgā vaidika mantra — jātavedase sunavāma somam

Durga Vedic Mantra (Durga Suktam, first rik)

समय
45 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
नवरात्रि, अष्टमी व मंगलवार
उद्देश्य:रक्षा (Protection)संकट मोचन (Relief from Crisis)विजय (Victory)
✓ संपूर्ण वैदिक मंत्र

दुर्गा का वैदिक मंत्र “जातवेदसे सुनवाम सोमम्…” दुर्गा सूक्त की प्रथम ऋचा है, जिसका स्रोत कृष्ण यजुर्वेद का तैत्तिरीय आरण्यक है। इसमें अग्नि से प्रार्थना है कि वे नौका की भाँति हमें समस्त दुर्गम संकटों से पार उतारें। “दुर्गाणि” शब्द से ही दुर्गा नाम का सम्बन्ध जोड़ा जाता है।

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: दुर्गा सूक्त की प्रथम ऋचा — तैत्तिरीय आरण्यक, महानारायण उपनिषद् खंड

एक नज़र में

मंत्र / पाठदुर्गा वैदिक मंत्र — जातवेदसे सुनवाम सोमम्
IASTdurgā vaidika mantra — jātavedase sunavāma somam
प्रकारवैदिक मंत्र
देवतामाँ दुर्गा
मूल स्रोतदुर्गा सूक्त की प्रथम ऋचा — तैत्तिरीय आरण्यक, महानारायण उपनिषद् खंड
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष या स्फटिक माला
शुभ दिननवरात्रि, अष्टमी व मंगलवार
पाठ समय45 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

दुर्गा सूक्त देवी-उपासना के सबसे प्राचीन उपलब्ध वैदिक आधारों में है। इसका स्रोत कृष्ण यजुर्वेद का तैत्तिरीय आरण्यक है, जिसका एक खंड महानारायण उपनिषद् कहलाता है। नवरात्रि की वैदिक पद्धति की पूजा में इसका पाठ विहित बताया जाता है।

प्रथम ऋचा का भाव यह है: "हम जातवेदा (अग्नि) के लिए सोम निचोड़ते हैं — वे जो शत्रुओं को भस्म कर देते हैं। वही अग्नि हमें समस्त दुर्गम संकटों से पार उतारें, जैसे नौका सागर से पार उतारती है।" यहाँ प्रयुक्त "दुर्गाणि" शब्द का अर्थ है दुर्गम, कठिन, पार करने में दुष्कर — और परंपरा इसी शब्द से "दुर्गा" नाम का सम्बन्ध जोड़ती है: वे जो दुर्गम को पार कराती हैं।

ध्यान देने योग्य है कि ऋचा का सीधा सम्बोधन अग्नि है, देवी नहीं। यह उसी परंपरा का अंग है जिसमें वैदिक आह्वान अग्नि के माध्यम से होता है। ध्यान रहे कि यह पृष्ठ मंत्र का है — सम्पूर्ण दुर्गा सूक्त में सात या उससे अधिक ऋचाएँ हैं, यहाँ केवल प्रथम दी गई है।

मंत्र

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ॐ जातवेदसे सुनवाम सोममरातीयतो निदहाति वेदः। स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्निः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ जातवेदसे सुनवाम सोममरातीयतो निदहाति वेदः। स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्निः॥

oṃ jātavedase sunavāma somam arātīyato nidahāti vedaḥ | sa naḥ parṣad ati durgāṇi viśvā nāveva sindhuṃ duritāty agniḥ ||

Om Jatavedase Sunavama Somam Aratiyato Nidahati Vedah, Sa Nah Parshad Ati Durgani Vishva Naveva Sindhum Duritaty Agnih.

उच्चारण मार्गदर्शन: "जातवेदसे" में "से" चतुर्थी विभक्ति है — "जातवेदस" नहीं। "अरातीयतो" लंबा पद है, इसे "अ-रा-ती-य-तो" में तोड़ें। "पर्षदति" में "र्ष" संयुक्ताक्षर और "ष" मूर्धन्य है। "नावेव" वास्तव में "नावा + इव" (नौका के समान) की संधि है — अर्थ समझने के लिए यह जानना उपयोगी है। वैदिक स्वर-सहित पाठ का विधान है; उसके बिना भी श्रद्धापूर्वक पाठ की परंपरा है।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

जातवेदसेजातवेदा (अग्नि) के लिए
सुनवाम सोमम्हम सोम निचोड़ते हैं
अरातीयतःशत्रुता रखने वालों को
निदहातिभस्म कर देते हैं
पर्षत्पार उतारें
दुर्गाणिदुर्गम संकट, कठिनाइयाँ
नावा इवनौका के समान
सिन्धुंसागर को
दुरितात्पाप व दुष्कर्म से
अग्निःअग्नि

अर्थ (हिन्दी)

  1. हम जातवेदा (अग्नि) के लिए सोम निचोड़ते हैं, जो शत्रुता रखने वालों को भस्म कर देते हैं। वे अग्नि हमें समस्त दुर्गम संकटों और पापों से उसी प्रकार पार उतारें, जैसे नौका सागर से पार उतारती है।

लाभ

  • देवी-उपासना का सबसे प्राचीन उपलब्ध वैदिक आधार माना जाता है।
  • परंपरा में इसे संकट, विघ्न व शत्रु-बाधा से पार उतरने से जोड़ा जाता है।
  • नवरात्रि की वैदिक पद्धति की पूजा व दुर्गा हवन में पाठ विहित बताया जाता है।
  • "दुर्गाणि" शब्द से दुर्गा नाम का सम्बन्ध — नाम की व्युत्पत्ति यहीं से जुड़ी है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष या स्फटिक माला

उत्तम समय: प्रातः, विशेषतः नवरात्रि में

जप का उत्तम समय

नवरात्रि के नौ दिनअष्टमी व नवमी तिथि परमंगलवार व शुक्रवार कोसंकट या भय के समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

स्नान के बाद देवी-विग्रह के समक्ष दीपक जलाएँ, लाल पुष्प अर्पित करें और ऋचा का 11 या 108 बार पाठ करें। परंपरा में दुर्गा सूक्त का पाठ हवन के साथ करने का विधान बताया जाता है, जिसमें हर ऋचा के बाद आहुति दी जाती है — क्योंकि आह्वान अग्नि के माध्यम से है। नवरात्रि में नौ दिन नियमित पाठ की परंपरा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
मूल ग्रंथदुर्गा सूक्त — तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद)
स्रोत परंपरादुर्गा सूक्त — तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद), महानारायण उपनिषद् खंड · नवरात्रि वैदिक पूजा व दुर्गा हवन परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
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दुर्गा वैदिक मंत्र — जातवेदसे सुनवाम सोमम् — सामान्य प्रश्न

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