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लिपि:
॥ श्री ॥
श्री गजानन महाराज आरती
आरती
पाठ
1
जय जय सद्गुरु गजानन, अवलिया अवतारा। शेगांव में विराजे, करते भव-तारा॥
2
दिगम्बर रूप मनोहर, मस्त फकीरी छाई। "गण गण गणात बोते", धुन मन को भाई॥
3
भक्तन के दुख हरते, चमत्कार दिखाए। श्रद्धा से जो सुमिरे, संकट सब जाए॥
4
दत्त-परम्परा शोभे, ज्ञान-वैराग्य धारा। शरण पड़े की रक्षा, करते गजानन प्यारा॥
5
गजानन की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सुख-शान्ति वह पावे, गुरु-कृपा पावे॥
अर्थ (हिन्दी)
- हे सद्गुरु गजानन, हे अवलिया (सिद्ध) अवतार, आपकी जय हो! शेगांव में विराजमान आप भक्तों को भवसागर से तारते हैं।
- दिगम्बर मनोहर रूप, मस्त फकीरी छाई हुई; "गण गण गणात बोते" की धुन मन को भा जाती है।
- आप भक्तों के दुःख हरते हैं और चमत्कार दिखाते हैं; जो श्रद्धा से स्मरण करता है, उसके सब संकट दूर हो जाते हैं।
- दत्त-परम्परा में सुशोभित, ज्ञान व वैराग्य की धारा बहाने वाले; हे प्यारे गजानन, आप शरणागत की रक्षा करते हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से गजानन महाराज की यह आरती गाता है, वह सुख-शांति तथा गुरु-कृपा प्राप्त करता है।
लाभ
- भय, संकट व विपत्ति का नाश होता है।
- गुरु-कृपा, भक्ति व मन की शांति प्राप्त होती है।
- श्रद्धा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
कब करें पाठ
गुरुवार को · ऋषि पंचमी (प्रकट दिन) पर · नित्य प्रातः व संध्या में
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक गजानन महाराज आरती संग्रह
