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लिपि:
॥ श्री ॥
गणेश सहस्रनाम
सहस्रनाम · श्री गणेश
पाठ
॥ ध्यानम् ॥ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
आरंभिक नाम (नाम 1–10)
- गणेश्वरः — गणों के ईश्वर
- गणक्रीडः — गणों के साथ क्रीड़ा करने वाले
- गणनाथः — गणों के नाथ
- गणाधिपः — गणों के अधिपति
- एकदन्तः — एक दाँत वाले
- वक्रतुण्डः — वक्र सूँड वाले
- गजवक्त्रः — गजमुख वाले
- महोदरः — विशाल उदर वाले
- लम्बोदरः — लंबे उदर वाले
- धूम्रवर्णः — धूम्र वर्ण वाले
अर्थ (हिन्दी)
- वक्र सूँड वाले, विशाल काय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी हे देव! मेरे समस्त कार्यों को सदा निर्विघ्न कीजिए।
लाभ
- कार्यों में विघ्नों का नाश व सफलता मिलती है।
- बुद्धि, विवेक व एकाग्रता बढ़ती है।
- घर में सुख-समृद्धि व मंगल का वास होता है।
कब करें पाठ
बुधवार को · गणेश चतुर्थी पर · किसी नए कार्य के आरंभ में
स्रोत
रचयिता: गणेश पुराण परंपरा. गणेश पुराण — उपासना खण्ड
