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लिपि:
॥ श्री ॥

ॐ गोपीजनवल्लभाय नमः

मंत्र · श्री कृष्ण

पाठ

1

ॐ गोपीजनवल्लभाय नमः॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. गोपीजनवल्लभ को नमस्कार। जो व्रज की गोपियों के प्रियतम हैं और जिनकी ओर साधक की समस्त इंद्रियाँ स्वाभाविक रूप से खिंच जाती हैं — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • माधुर्य-भक्ति व निष्काम प्रेम का प्रतिनिधि नाम माना जाता है।
  • अष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र का चरण होने से वैष्णव उपासना में विशेष स्थान है।
  • इंद्रियों के स्वाभाविक नियमन का भाव — गूढ़ व्याख्या में।
  • शरद पूर्णिमा व रास-लीला की उपासना में जप प्रचलित है।

कब करें पाठ

शरद पूर्णिमा की रात्रि में · बुधवार व एकादशी को · जन्माष्टमी पर · प्रातः-संध्या नित्य पूजा में

स्रोत

अष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र — "क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा" · गोपाल तापनी उपनिषद् — गोपाल मंत्र परंपरा · नोट: स्वतंत्र नाम-मंत्र रूप में यह अष्टोत्तर शतनामावली की सूची में नहीं आता

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