ॐ गोपीजनवल्लभाय नमः

oṃ gopījanavallabhāya namaḥ

Gopijanavallabh Mantra (Om Gopijanavallabhaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
बुधवार, एकादशी व शरद पूर्णिमा
उद्देश्य:भक्ति व प्रेम (Love)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)समर्पण (Devotion)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ गोपीजनवल्लभाय नमः का अर्थ है “गोपीजनों के प्रियतम को नमस्कार”। यह पद अष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र का तीसरा चरण है, जो गोपाल तापनी उपनिषद् की परंपरा से आता है। गूढ़ अर्थ में “गोपीजन” इंद्रियों का प्रतीक भी माना जाता है।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: अष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र का तृतीय चरण — गोपाल तापनी उपनिषद् परंपरा

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ गोपीजनवल्लभाय नमः
IASToṃ gopījanavallabhāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतअष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र का तृतीय चरण — गोपाल तापनी उपनिषद् परंपरा
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार, एकादशी व शरद पूर्णिमा
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

गोपीजनवल्लभ अर्थात् "गोपीजनों के वल्लभ" — व्रज की गोपियों के प्रियतम। परंपरा में गोपी-प्रेम को भक्ति का सर्वोच्च रूप कहा जाता है, क्योंकि उसमें कोई कामना, कोई शर्त और कोई अपेक्षा नहीं है — केवल समर्पण है। इसीलिए यह नाम माधुर्य-भक्ति का प्रतिनिधि माना जाता है।

यह पद अष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र का तीसरा चरण है — "क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा" — जो गोपाल तापनी उपनिषद् की परंपरा से आता है और वैष्णव उपासना का प्रधान मंत्र माना जाता है। एक गूढ़ व्याख्या में "गोपीजन" को इंद्रियों का प्रतीक भी कहा जाता है; तब गोपीजनवल्लभ वे हैं जिनकी ओर साधक की समस्त इंद्रियाँ स्वाभाविक रूप से खिंच जाती हैं। ध्यान रहे कि स्वतंत्र नाम-मंत्र के रूप में यह अष्टोत्तर शतनामावली की सूची में नहीं आता।

मंत्र

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ॐ गोपीजनवल्लभाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ गोपीजनवल्लभाय नमः॥

oṃ gopījanavallabhāya namaḥ ||

Om Gopijanavallabhaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: यह लंबा पद है — "गो-पी-ज-न-वल्-ल-भाय" के अंशों में तोड़कर अभ्यास करें। "गो" व "पी" दोनों दीर्घ; "वल्लभ" में द्वित्व "ल्ल" स्पष्ट हो; अंत "भाय" दीर्घ व महाप्राण। आरंभ में धीमी गति रखें, गति बाद में बढ़ाएँ।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
गोपीव्रज की गोपियाँ
जनसमुदाय, जन-समूह
वल्लभप्रिय, प्रियतम
गोपीजनवल्लभायगोपीजनों के प्रियतम (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. गोपीजनवल्लभ को नमस्कार। जो व्रज की गोपियों के प्रियतम हैं और जिनकी ओर साधक की समस्त इंद्रियाँ स्वाभाविक रूप से खिंच जाती हैं — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • माधुर्य-भक्ति व निष्काम प्रेम का प्रतिनिधि नाम माना जाता है।
  • अष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र का चरण होने से वैष्णव उपासना में विशेष स्थान है।
  • इंद्रियों के स्वाभाविक नियमन का भाव — गूढ़ व्याख्या में।
  • शरद पूर्णिमा व रास-लीला की उपासना में जप प्रचलित है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

शरद पूर्णिमा की रात्रि मेंबुधवार व एकादशी कोजन्माष्टमी परप्रातः-संध्या नित्य पूजा में

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

कृष्ण की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर तुलसी माला से 108 बार जप करें। यदि अष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र का जप करना हो तो परंपरा में गुरु-दीक्षा की बात कही जाती है; यह नाम-मंत्र रूप उससे भिन्न है और सामान्य उपासना में जपा जाता है। जप के समय निष्काम समर्पण के भाव पर मन टिकाने की परंपरा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराअष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र — "क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा" · गोपाल तापनी उपनिषद् — गोपाल मंत्र परंपरा · नोट: स्वतंत्र नाम-मंत्र रूप में यह अष्टोत्तर शतनामावली की सूची में नहीं आता
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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ॐ गोपीजनवल्लभाय नमः — सामान्य प्रश्न

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