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लिपि:
॥ श्री ॥

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः

मंत्र

पाठ

1

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही देव महेश्वर हैं; गुरु ही साक्षात् परब्रह्म हैं — उन श्रीगुरु को नमस्कार है।

लाभ

  • गुरु के प्रति श्रद्धा व समर्पण बढ़ता है।
  • ज्ञान, विवेक व आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त होता है।
  • मन में विनम्रता व कृतज्ञता का भाव जागता है।

कब करें पाठ

गुरुवार व गुरु पूर्णिमा को · प्रातः अध्ययन/साधना से पूर्व · गुरु-स्मरण के समय

स्रोत

गुरु गीता · पारंपरिक गुरु वंदना

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