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लिपि:
॥ श्री ॥
हनुमत् साधना मंत्र — ॐ ऐं ह्रीं श्रीं हनुमते रामदूताय
मंत्र · श्री हनुमान
पाठ
1
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं हनुमते रामदूताय लङ्का-विध्वंसनाय अञ्जनीगर्भसम्भूताय शाकिनी-डाकिनी-विध्वंसनाय किलि किलि बु बु कारेण विभीषणाय हनुमद्देवाय ॐ श्रीं ह्रीं ह्रौं ह्रां ह्रूं फट् स्वाहा॥
अर्थ (हिन्दी)
- बीजाक्षरों सहित — श्रीराम के दूत हनुमान को; लंका का विध्वंस करने वाले को; अञ्जनी के गर्भ से उत्पन्न हुए को; शाकिनी-डाकिनी आदि नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाले को; "किलि किलि बु बु" की गर्जना से भयंकर रूप धारण करने वाले को; उन हनुमद्देव को — बीज-समूह सहित आहुति समर्पित है।
लाभ
- परंपरा में इसे नकारात्मक शक्तियों व बाधाओं के नाश से जोड़ा जाता है।
- हनुमान जी के तीन स्वरूप — रामदूत, लंका-विध्वंसक व अञ्जनी-पुत्र — एक साथ आते हैं।
- तंत्र-परंपरा की दीर्घ साधना में प्रयुक्त बताया जाता है।
- ध्यान दें: परंपरा में इसके लिए गुरु-दीक्षा की शर्त कही जाती है।
कब करें पाठ
मंगलवार व शनिवार को · हनुमान जयंती पर · गुरु-दीक्षा प्राप्त साधकों द्वारा नियमित साधना में · गंभीर बाधा या भय की स्थिति में
स्रोत
हनुमान साधना/तंत्र परंपरा — दीर्घ मंत्र · प्रमाणित अंश: "रामदूताय" (मनोजवं श्लोक), "अञ्जनीगर्भसंभूत" (हनुमद्बडवानल स्तोत्र), लंका दहन (रामायण, सुन्दरकाण्ड) · नोट: सम्पूर्ण मंत्र किसी एक नामित ग्रन्थ में सत्यापित नहीं; बीज-समूह के क्रम में स्रोत-भेद भी मिलता है
