हनुमत् साधना मंत्र — ॐ ऐं ह्रीं श्रीं हनुमते रामदूताय

hanumat sādhanā mantra

Hanumat Sadhana Mantra (extended tantric form)

समय
1 मिनट
जप संख्या
108
कठिनाई
कठिन
शुभ दिन
मंगलवार, शनिवार व हनुमान जयंती
उद्देश्य:रक्षा (Protection)भय व बाधा नाश (Fearlessness)साधना-सिद्धि (Sadhana)
✓ संपूर्ण साधना मंत्र

यह हनुमान साधना/तंत्र परंपरा का दीर्घ मंत्र है, जिसमें रामदूत, लंका-विध्वंसक और अञ्जनी-पुत्र — तीनों स्वरूप एक साथ आते हैं, बीजाक्षरों सहित। इसके कई अंश प्रमाणित हैं (रामदूताय, अञ्जनीगर्भसम्भूताय), पर सम्पूर्ण मंत्र किसी एक नामित ग्रन्थ में सत्यापित नहीं हुआ। परंपरा में इसके लिए गुरु-दीक्षा बताई जाती है।

परिचय

पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

स्रोत: हनुमान साधना/तंत्र परंपरा — दीर्घ मंत्र (किसी एक नामित ग्रन्थ में सत्यापित नहीं)

एक नज़र में

मंत्र / पाठहनुमत् साधना मंत्र — ॐ ऐं ह्रीं श्रीं हनुमते रामदूताय
IASThanumat sādhanā mantra
प्रकारसाधना मंत्र
देवताश्री हनुमान
मूल स्रोतहनुमान साधना/तंत्र परंपरा — दीर्घ मंत्र (किसी एक नामित ग्रन्थ में सत्यापित नहीं)
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनमंगलवार, शनिवार व हनुमान जयंती
पाठ समय1 मिनट
कठिनाईकठिन

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह हनुमान उपासना का सबसे विस्तृत प्रचलित मंत्र है और तंत्र-परंपरा से आता है। इसकी रचना एक क्रम में चलती है: पहले तीन बीजाक्षर (ऐं, ह्रीं, श्रीं), फिर हनुमान जी के तीन स्वरूप — रामदूत, लंका-विध्वंसक और अञ्जनी-पुत्र, फिर नकारात्मक शक्तियों के नाश का संकल्प, फिर तंत्र-परंपरा के ध्वनि-पद, और अंत में बीज-समूह के साथ "फट् स्वाहा"।

अब प्रमाण-स्थिति, अंश-वार — क्योंकि इस मंत्र में सब कुछ एक स्तर पर प्रमाणित नहीं है। "रामदूताय" पूरी तरह प्रमाणित है; "मनोजवं मारुततुल्यवेगम्" श्लोक का चौथा चरण ही "श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये" है। "अञ्जनीगर्भसम्भूताय" भी प्रमाणित है — हनुमद्बडवानल स्तोत्र में "अञ्जनीगर्भसंभूत" सम्बोधन मिलता है। "लङ्काविध्वंसनाय" रामायण के सुन्दरकाण्ड के लंका-दहन प्रसंग से सीधे जुड़ा है।

पर "शाकिनी-डाकिनी-विध्वंसनाय" और "किलि किलि बु बु कारेण" — ये तंत्र-परंपरा के पद हैं और इनका कोई नामित शास्त्रीय स्रोत जाँच में नहीं मिला। अंत के बीज-समूह के क्रम में भी स्रोतों में भेद मिलता है। इसलिए यह पृष्ठ सम्पूर्ण मंत्र को किसी ग्रन्थ का बताकर प्रस्तुत नहीं करता — यह साधना परंपरा का मंत्र है, और तंत्र-परंपरा के ऐसे मंत्रों के लिए गुरु-दीक्षा की बात परंपरा में कही जाती है।

मंत्र

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ॐ ऐं ह्रीं श्रीं हनुमते रामदूताय लङ्का-विध्वंसनाय अञ्जनीगर्भसम्भूताय शाकिनी-डाकिनी-विध्वंसनाय किलि किलि बु बु कारेण विभीषणाय हनुमद्देवाय ॐ श्रीं ह्रीं ह्रौं ह्रां ह्रूं फट् स्वाहा॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं हनुमते रामदूताय लङ्का-विध्वंसनाय अञ्जनीगर्भसम्भूताय शाकिनी-डाकिनी-विध्वंसनाय किलि किलि बु बु कारेण विभीषणाय हनुमद्देवाय ॐ श्रीं ह्रीं ह्रौं ह्रां ह्रूं फट् स्वाहा॥

oṃ aiṃ hrīṃ śrīṃ hanumate rāmadūtāya laṅkā-vidhvaṃsanāya añjanīgarbhasambhūtāya śākinī-ḍākinī-vidhvaṃsanāya kili kili bu bu kāreṇa vibhīṣaṇāya hanumaddevāya oṃ śrīṃ hrīṃ hrauṃ hrāṃ hrūṃ phaṭ svāhā ||

Om Aim Hreem Shreem Hanumate Ramadutaya, Lanka-vidhvamsanaya Anjani-garbha-sambhutaya, Shakini-Dakini-vidhvamsanaya, Kili Kili Bu Bu Karena Vibhishanaya, Hanumad-devaya Om Shreem Hreem Hraum Hraam Hroom Phat Svaha.

उच्चारण मार्गदर्शन: यह इस संग्रह के सबसे कठिन मंत्रों में है — इसे अंश-वार सीखें, एक साथ नहीं। "ऐं ह्रीं श्रीं" तीनों बीजाक्षरों का अनुस्वार नासिक्य ध्वनि सहित छोड़ें। "लङ्का" में "ङ्क" संयुक्ताक्षर है। "अञ्जनीगर्भसम्भूताय" सबसे लंबा पद है — "अञ्-ज-नी-गर्भ-सम्-भू-ताय" में तोड़ें। "विध्वंसनाय" में "ध्व" संयुक्ताक्षर, "ध" महाप्राण। "किलि किलि बु बु" ध्वनि-पद हैं, इन्हें लयबद्ध बोला जाता है। अंत "फट्" को स्फोट-सहित छोड़ा जाता है और "स्वाहा" दीर्घ। परंपरा में ऐसे मंत्र गुरु से सुनकर ही सीखने का विधान बताया जाता है।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ऐं ह्रीं श्रींवाग्-बीज, माया-बीज व श्री-बीज
हनुमतेहनुमान को
रामदूतायश्रीराम के दूत को
लङ्काविध्वंसनायलंका का विध्वंस करने वाले को
अञ्जनीगर्भसम्भूतायमाता अञ्जनी के गर्भ से उत्पन्न हुए को
शाकिनी-डाकिनीतंत्र परंपरा में वर्णित नकारात्मक शक्तियाँ
विध्वंसनायनाश करने वाले को
किलि किलि बु बुतंत्र परंपरा के ध्वनि-पद (गर्जना-सूचक)
विभीषणायभयंकर रूप धारण करने वाले को
हनुमद्देवायहनुमद्देव को
फट्अस्त्र-बीज — तंत्र परंपरा का स्फोट-पद
स्वाहाआहुति-समर्पण का वाचक पद

अर्थ (हिन्दी)

  1. बीजाक्षरों सहित — श्रीराम के दूत हनुमान को; लंका का विध्वंस करने वाले को; अञ्जनी के गर्भ से उत्पन्न हुए को; शाकिनी-डाकिनी आदि नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाले को; "किलि किलि बु बु" की गर्जना से भयंकर रूप धारण करने वाले को; उन हनुमद्देव को — बीज-समूह सहित आहुति समर्पित है।

लाभ

  • परंपरा में इसे नकारात्मक शक्तियों व बाधाओं के नाश से जोड़ा जाता है।
  • हनुमान जी के तीन स्वरूप — रामदूत, लंका-विध्वंसक व अञ्जनी-पुत्र — एक साथ आते हैं।
  • तंत्र-परंपरा की दीर्घ साधना में प्रयुक्त बताया जाता है।
  • ध्यान दें: परंपरा में इसके लिए गुरु-दीक्षा की शर्त कही जाती है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: मंगलवार व शनिवार, ब्रह्म मुहूर्त

जप का उत्तम समय

मंगलवार व शनिवार कोहनुमान जयंती परगुरु-दीक्षा प्राप्त साधकों द्वारा नियमित साधना मेंगंभीर बाधा या भय की स्थिति में

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

परंपरा में यह दीक्षा-सापेक्ष मंत्र माना जाता है — इसे गुरु से सुनकर, विधि व नियम सहित सीखने का विधान बताया जाता है, स्वयं पुस्तक या इंटरनेट से आरंभ करने का नहीं। दीक्षित साधक हनुमान जी के विग्रह के समक्ष चमेली के तेल का दीपक जलाकर, सिंदूर व लाल पुष्प अर्पित कर रुद्राक्ष माला से जप करते हैं। जिन्हें दीक्षा न मिली हो, उनके लिए हनुमान मूल मंत्र, हनुमान चालीसा या "मनोजवं मारुततुल्यवेगम्" का विधान बताया जाता है — इस संग्रह में तीनों उपलब्ध हैं।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराहनुमान साधना/तंत्र परंपरा — दीर्घ मंत्र · प्रमाणित अंश: "रामदूताय" (मनोजवं श्लोक), "अञ्जनीगर्भसंभूत" (हनुमद्बडवानल स्तोत्र), लंका दहन (रामायण, सुन्दरकाण्ड) · नोट: सम्पूर्ण मंत्र किसी एक नामित ग्रन्थ में सत्यापित नहीं; बीज-समूह के क्रम में स्रोत-भेद भी मिलता है
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री हनुमान

Lord Hanuman

पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

देवता वर्गशक्ति · भक्ति · रक्षा · साहस · संकटमोचन
संबंधित वारमंगलवार
मुख्य मंत्रॐ हं हनुमते नमः
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