समय
1 मिनट
जप संख्या
108
कठिनाई
कठिन
शुभ दिन
मंगलवार, शनिवार व हनुमान जयंती
उद्देश्य:रक्षा (Protection)भय व बाधा नाश (Fearlessness)साधना-सिद्धि (Sadhana)
✓ संपूर्ण साधना मंत्र
यह हनुमान साधना/तंत्र परंपरा का दीर्घ मंत्र है, जिसमें रामदूत, लंका-विध्वंसक और अञ्जनी-पुत्र — तीनों स्वरूप एक साथ आते हैं, बीजाक्षरों सहित। इसके कई अंश प्रमाणित हैं (रामदूताय, अञ्जनीगर्भसम्भूताय), पर सम्पूर्ण मंत्र किसी एक नामित ग्रन्थ में सत्यापित नहीं हुआ। परंपरा में इसके लिए गुरु-दीक्षा बताई जाती है।
FAQ
हनुमत् साधना मंत्र — ॐ ऐं ह्रीं श्रीं हनुमते रामदूताय — सामान्य प्रश्न
सम्पूर्ण मंत्र किसी एक नामित ग्रन्थ में सत्यापित नहीं हुआ। इसके कुछ अंश अवश्य प्रमाणित हैं — "रामदूताय" (मनोजवं श्लोक का चौथा चरण), "अञ्जनीगर्भसम्भूत" (हनुमद्बडवानल स्तोत्र) और लंका-दहन प्रसंग (सुन्दरकाण्ड)। पर "शाकिनी-डाकिनी-विध्वंसनाय" व "किलि किलि बु बु" जैसे पद तंत्र-परंपरा के हैं और उनका नामित स्रोत नहीं मिला।
परंपरा में हाँ। यह दीक्षा-सापेक्ष तांत्रिक मंत्र माना जाता है और इसे गुरु से सुनकर, विधि व नियम सहित सीखने का विधान बताया जाता है। जिन्हें दीक्षा न मिली हो, उनके लिए हनुमान मूल मंत्र, हनुमान चालीसा या "मनोजवं मारुततुल्यवेगम्" का विधान बताया जाता है।
"ॐ ऐं ह्रीं हनुमते रामदूताय नमः" संक्षिप्त मंत्र है; यह उससे कहीं विस्तृत स्वतंत्र मंत्र है, जिसमें तीन स्वरूप, नकारात्मक शक्तियों का नाश-संकल्प और अंत में बीज-समूह सहित "फट् स्वाहा" आता है। दोनों variant नहीं, अलग मंत्र हैं; इस संग्रह में दोनों के अलग पृष्ठ हैं।
ये तंत्र-परंपरा के ध्वनि-पद हैं, जिन्हें गर्जना-सूचक माना जाता है — इनका वाक्य-अर्थ नहीं होता, ध्वनि स्वयं प्रभाव मानी जाती है। इनका कोई नामित शास्त्रीय स्रोत जाँच में नहीं मिला; ये साधना परंपरा से आते हैं।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय मंगलवार व शनिवार, ब्रह्म मुहूर्त है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है — प्रतिदिन एक माला, बीच-बीच में छोड़कर की गई अधिक संख्या से श्रेष्ठ कही जाती है।
परंपरा में इसके लिए मंगलवार, शनिवार व हनुमान जयंती विशेष कहे जाते हैं। दैनिक जप का सुझाया गया समय मंगलवार व शनिवार, ब्रह्म मुहूर्त है। इसके अतिरिक्त परंपरा में ये अवसर बताए जाते हैं — मंगलवार व शनिवार को; हनुमान जयंती पर; गुरु-दीक्षा प्राप्त साधकों द्वारा नियमित साधना में; गंभीर बाधा या भय की स्थिति में। सामान्य नियम यह कहा जाता है कि समय जो भी चुनें, वह प्रतिदिन एक ही रहे — इससे जप में स्थिरता आती है।
यह इस संग्रह के सबसे कठिन मंत्रों में है — इसे अंश-वार सीखें, एक साथ नहीं। परंपरा में कहा जाता है कि मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
पर्व
