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लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ हरिहराय नमः
मंत्र · श्री शिव
पाठ
1
ॐ हरिहराय नमः॥
अर्थ (हिन्दी)
- हरिहर को नमस्कार। जो हरि (विष्णु) और हर (शिव) — दोनों के संयुक्त स्वरूप हैं, और जिनमें दोनों मार्गों का भेद मिट जाता है — उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ
- परंपरा में इसे शैव-वैष्णव भेद मिटाने व समन्वय-भाव जगाने से जोड़ा जाता है।
- जिन परिवारों में दोनों परंपराएँ साथ चलती हैं, वहाँ यह मंत्र प्रचलित है।
- मन में समता व अभेद-दृष्टि आने की मान्यता है।
- हरिहर उपासना-पीठों में यह मूल नाम-मंत्र माना जाता है।
कब करें पाठ
सोमवार (शिव) व गुरुवार (विष्णु) — दोनों दिन · एकादशी व प्रदोष काल में · महाशिवरात्रि तथा वैष्णव पर्वों पर · शैव-वैष्णव समन्वय के संकल्प के साथ
स्रोत
हरिहर (विष्णु-शिव) संयुक्त स्वरूप की उपासना परंपरा — हरिहरेश्वर (महाराष्ट्र), हरिहर मंदिर (कर्नाटक) · शिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — घटक नाम "हराय" क्रम 100 · नोट: "हरिहराय" संयुक्त रूप किसी शिव शतनामावली की सूची में नहीं आता; यह हरिहर उपासना परंपरा का नाम-मंत्र है
