ॐ हरिहराय नमः

oṃ hariharāya namaḥ

Harihar Mantra (Om Hariharaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सोमवार, गुरुवार व एकादशी
उद्देश्य:समन्वय व एकता (Harmony)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ हरिहराय नमः हरि (विष्णु) और हर (शिव) के संयुक्त स्वरूप का नाम-मंत्र है — यह विशुद्ध रूप से शिव-मंत्र नहीं है। इस स्वरूप में एक ही विग्रह का आधा भाग विष्णु का और आधा शिव का होता है। परंपरा में इसे शैव-वैष्णव समन्वय व अभेद-दृष्टि से जोड़ा जाता है।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: हरिहर (विष्णु-शिव) संयुक्त स्वरूप की उपासना परंपरा

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ हरिहराय नमः
IASToṃ hariharāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री शिव
मूल स्रोतहरिहर (विष्णु-शिव) संयुक्त स्वरूप की उपासना परंपरा
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष या तुलसी माला
शुभ दिनसोमवार, गुरुवार व एकादशी
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

सबसे पहले एक बात स्पष्ट कर लेना उचित है: यह विशुद्ध रूप से शिव का नाम-मंत्र नहीं है। "हरिहर" एक संयुक्त स्वरूप है — "हरि" अर्थात् विष्णु और "हर" अर्थात् शिव। इस स्वरूप में एक ही विग्रह का आधा भाग विष्णु का होता है (शंख, चक्र, पीतांबर) और आधा शिव का (त्रिशूल, जटाजूट, भस्म, चंद्र)। इसलिए इसे केवल शिव-मंत्र कहना अधूरा होगा।

इस स्वरूप का भाव यह है कि वैष्णव और शैव — दोनों मार्ग एक ही परम तत्त्व तक पहुँचते हैं, और शिव व विष्णु में भेद करना अज्ञान माना जाता है। पुराणों में दोनों को परस्पर पूजक बताया गया है — शिव राम-नाम के जपकर्ता और विष्णु शिव-आराधक। हरिहर उपासना की जीवित पीठें आज भी हैं, जैसे महाराष्ट्र का हरिहरेश्वर और कर्नाटक का हरिहर मंदिर। परंपरा में यह नाम-मंत्र सांप्रदायिक भेद मिटाने और समन्वय-भाव जगाने से जोड़ा जाता है।

मंत्र

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ॐ हरिहराय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ हरिहराय नमः॥

oṃ hariharāya namaḥ ||

Om Hariharaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "ह-रि-ह-राय" — पहले तीन अक्षर लघु हैं और अंतिम "राय" दीर्घ। ध्यान रखें कि "हरि" और "हर" दो अलग शब्द हैं जो संधि में जुड़े हैं; बोलते समय दोनों की अलग पहचान बनी रहे तो अर्थ मन में स्पष्ट रहता है। स्वर सम व शांत रखें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
हरिभगवान विष्णु
हरभगवान शिव
हरिहरायविष्णु व शिव के संयुक्त स्वरूप को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. हरिहर को नमस्कार। जो हरि (विष्णु) और हर (शिव) — दोनों के संयुक्त स्वरूप हैं, और जिनमें दोनों मार्गों का भेद मिट जाता है — उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे शैव-वैष्णव भेद मिटाने व समन्वय-भाव जगाने से जोड़ा जाता है।
  • जिन परिवारों में दोनों परंपराएँ साथ चलती हैं, वहाँ यह मंत्र प्रचलित है।
  • मन में समता व अभेद-दृष्टि आने की मान्यता है।
  • हरिहर उपासना-पीठों में यह मूल नाम-मंत्र माना जाता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष या तुलसी माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

सोमवार (शिव) व गुरुवार (विष्णु) — दोनों दिनएकादशी व प्रदोष काल मेंमहाशिवरात्रि तथा वैष्णव पर्वों परशैव-वैष्णव समन्वय के संकल्प के साथ

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शिवलिंग व विष्णु-विग्रह — दोनों के समक्ष, या हरिहर की संयुक्त प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाकर 108 बार जप करें। परंपरा में इसके लिए तुलसी और बिल्वपत्र दोनों अर्पित करने का विधान बताया जाता है, क्योंकि तुलसी विष्णु को और बिल्वपत्र शिव को प्रिय हैं। माला रुद्राक्ष या तुलसी — दोनों में से कोई भी ली जा सकती है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराहरिहर (विष्णु-शिव) संयुक्त स्वरूप की उपासना परंपरा — हरिहरेश्वर (महाराष्ट्र), हरिहर मंदिर (कर्नाटक) · शिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — घटक नाम "हराय" क्रम 100 · नोट: "हरिहराय" संयुक्त रूप किसी शिव शतनामावली की सूची में नहीं आता; यह हरिहर उपासना परंपरा का नाम-मंत्र है
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
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मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
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ॐ हरिहराय नमः — सामान्य प्रश्न

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