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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री झूलेलाल आरती

आरती

पाठ

1

जय जय झूलेलाल, उडेरोलाल स्वामी। जल-देव वरुण अवतारी, तुम अन्तर्यामी॥

2

पल्लव-वस्त्र विराजे, मीन पर असवारी। श्वेत दाढ़ी शोभे, छवि अति प्यारी॥

3

सिंधी जन के रक्षक, अत्याचार मिटाया। धर्म-रक्षा हित तुमने, अवतार है पाया॥

4

जो जन तुमको ध्याता, संकट सब टारे। सुख-समृद्धि देते, भक्तन के प्यारे॥

5

झूलेलाल की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सुख-समृद्धि वह पावे, मनवांछित पावे॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे झूलेलाल, हे उडेरोलाल स्वामी, आपकी जय हो! आप जल-देव वरुण के अवतार व सबके अन्तर्यामी हैं।
  2. सुन्दर वस्त्र धारण किए, मीन (मछली) पर सवारी करते हुए; श्वेत दाढ़ी से सुशोभित आपकी छवि अति प्यारी है।
  3. आप सिंधी जनों के रक्षक हैं, आपने अत्याचार मिटाया; धर्म की रक्षा हेतु आपने अवतार लिया।
  4. जो भक्त आपका ध्यान करता है, उसके सब संकट दूर हो जाते हैं; हे भक्तों के प्यारे, आप सुख-समृद्धि देते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से झूलेलाल की यह आरती गाता है, वह सुख-समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्त करता है।

लाभ

  • भय, संकट व विपत्ति से रक्षा होती है।
  • सुख, समृद्धि व मनोकामना-पूर्ति होती है।
  • मन में भक्ति, साहस व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

कब करें पाठ

चेटीचंड (सिंधी नववर्ष) पर · जल-पूजन व जन्मोत्सव पर · नित्य संध्या में

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक सिंधी आरती संग्रह

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