श्री झूलेलाल आरती

śrī jhūlelāla āratī

Jhulelal Aarti (Om Jai Doolah Deva — Sindhi)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
6
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
चेटीचंड; संध्या पूजा
उद्देश्य:रक्षा (Protection)समृद्धि (Prosperity)मनोकामना (Wish fulfilment)
✓ संपूर्ण

झूलेलाल की प्रचलित आरती सिंधी में है — "ॐ जय दूलह देवा, साईं जय दूलह देवा; पूजा कनि था प्रेमी, सिदुक रखी सेवा"। इसमें टेक और छह पद हैं, और आरती झूलेलाल को "अमरलाल" और "लाल" कहकर पुकारती है। अंतिम पद में छाप है — "जेठानंद आनंद कर, पूरन करियो आशा"।

परिचय

स्रोत: "ॐ जय दूलह देवा" — झूलेलाल की सिंधी आरती; अंतिम पद में छाप "जेठानंद"

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री झूलेलाल आरती
IASTśrī jhūlelāla āratī
मूल स्रोत"ॐ जय दूलह देवा" — झूलेलाल की सिंधी आरती; अंतिम पद में छाप "जेठानंद"
शुभ दिनचेटीचंड; संध्या पूजा
पाठ समय3 मिनट
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

झूलेलाल सिंधी समाज के इष्टदेव हैं, जिन्हें वरुण-देव का अवतार माना जाता है; यह आरती सिंधी भाषा में है, और इसका हर पद उनकी दया और जल-देवता के रूप की बात करता है।

दर पर कोई खाली नहीं (पद 1). "तुहिंजे दर दे केई सजण अचनि सवाली" — आपके दर पर अनेक सज्जन याचक बनकर आते हैं, और कोई खाली नहीं लौटता।

अंधे को आँखें (पद 2). "अंधड़नि खे दिनव अखडियूँ, दुखियनि खे दारुं" — अंधों को आँखें और दुखियों को दवा।

अन्न और जल (पद 3, 5). खेतों में फल-फूल-मेवा-सब्ज़ी पकती है और आपकी कृपा से अन्न भी अपार होता है; "जगु जा जीव सभेई, पाणिअ बिन प्यास" — जगत के सब जीव जल के बिना प्यासे हैं — जल-देव के रूप में झूलेलाल से यही प्रार्थना।

अमरलाल (पद 4). "ज्योति जगे थी जगु में, लाल तुहिंजी लाली; अमरलाल अचु मूं वटी" — जगत में आपकी ज्योति जगती है; हे अमरलाल, मेरे पास आइए।

आरती (लिरिक्स)

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ॐ जय दूलह देवा, साईं जय दूलह देवा। पूजा कनि था प्रेमी, सिदुक रखी सेवा॥

(टेक — भावार्थ) हे दूल्हे-से सजे देव, हे साईं, आपकी जय हो! प्रेमी भक्त सच्ची श्रद्धा (सिदुक) रखकर आपकी पूजा और सेवा करते हैं।

तुहिंजे दर दे केई, सजण अचनि सवाली। दान वठन सभु दिलि, सां कोन दिठुभ खाली॥

(भावार्थ) आपके दर पर अनेक सज्जन याचक बनकर आते हैं; सब मन से दान पाते हैं — किसी को खाली हाथ नहीं देखा।

अंधड़नि खे दिनव, अखडियूँ – दुखियनि खे दारुं। पाए मन जूं मुरादूं, सेवक कनि थारू॥

(भावार्थ) आपने अंधों को आँखें दीं और दुखियों को दवा; मन की मुरादें पाकर सेवक (आपका) गुणगान करते हैं।

फल फूलमेवा सब्जिऊ, पोखनि मंझि पचिन। तुहिजे महिर मयासा अन्न, बि आपर अपार थियनी॥

(भावार्थ) फल, फूल, मेवा और सब्ज़ियाँ खेतों में पकती हैं; आपकी मेहर से अन्न भी अपार हो जाता है।

ज्योति जगे थी जगु में, लाल तुहिंजी लाली। अमरलाल अचु मूं वटी, हे विश्व संदा वाली॥

(भावार्थ) हे लाल, जगत में आपकी ज्योति जगती है, आपकी ही लाली है; हे अमरलाल, हे विश्व के रक्षक, मेरे पास आइए।

जगु जा जीव सभेई, पाणिअ बिन प्यास। जेठानंद आनंद कर, पूरन करियो आशा॥

(भावार्थ) जगत के सब जीव पानी के बिना प्यासे हैं; जेठानंद (कहते हैं) — आनंद कीजिए और आशा पूरी कीजिए।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. (टेक — भावार्थ) हे दूल्हे-से सजे देव, हे साईं, आपकी जय हो! प्रेमी भक्त सच्ची श्रद्धा (सिदुक) रखकर आपकी पूजा और सेवा करते हैं।
  2. (भावार्थ) आपके दर पर अनेक सज्जन याचक बनकर आते हैं; सब मन से दान पाते हैं — किसी को खाली हाथ नहीं देखा।
  3. (भावार्थ) आपने अंधों को आँखें दीं और दुखियों को दवा; मन की मुरादें पाकर सेवक (आपका) गुणगान करते हैं।
  4. (भावार्थ) फल, फूल, मेवा और सब्ज़ियाँ खेतों में पकती हैं; आपकी मेहर से अन्न भी अपार हो जाता है।
  5. (भावार्थ) हे लाल, जगत में आपकी ज्योति जगती है, आपकी ही लाली है; हे अमरलाल, हे विश्व के रक्षक, मेरे पास आइए।
  6. (भावार्थ) जगत के सब जीव पानी के बिना प्यासे हैं; जेठानंद (कहते हैं) — आनंद कीजिए और आशा पूरी कीजिए।

लाभ

  • चेटीचंड की पूजा का समापन।
  • मनोकामना-पूर्ति का भाव — "पाए मन जूं मुरादूं"।
  • अन्न और जल की समृद्धि की प्रार्थना (पद 3, 5)।

कब करें पाठ

चेटीचंड परसंध्या पूजा में

पाठ विधि

झूलेलाल के चित्र के समक्ष दीपक (ज्योत) जलाएँ और पूजा करें। टेक "ॐ जय दूलह देवा, साईं जय दूलह देवा" आरंभ में और हर पद के बाद गाएँ। आरती सिंधी में है; हिन्दी भावार्थ हर पद के साथ दिया गया है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराhindunidhi.com — श्री झूलेलाल आरती (आधार-पाठ) · knowledgegallery.in — श्री झूलेलाल जी की आरती
रचयिताजेठानंद (अंतिम पद की छाप)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

श्री झूलेलाल आरती — सामान्य प्रश्न