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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री ज्वाला देवी आरती

आरती · माँ दुर्गा

पाठ

1

ॐ जय ज्वाला माई, मैया जय ज्वाला माई। कष्ट हरण तेरा अर्चन, सुमिरण सुख दाई॥

2

अटल अखंड तेरी ज्योति, युग युग से ही जगे। ऋषि मुनि सुर नर सबको, बड़ी प्यारी माँ लगे॥

3

पार्वती रूप शिव शक्ति, तू ही माँ अम्बे। पूजे तुम्हे त्रिभुवन के, देवता जगदम्बे॥

4

लाखों सूरज फीके, ज्योति तेरी आगे। तेरे चिंतन से माँ, भवका भय भागे॥

5

चरण शरण में चल के, जो तेरे द्वारे आये। खाली कभी न जाए, वांछित फल पाए॥

6

दुर्गति नाशक चंडिका, तू दानव दलनी। दीन हीन की रक्षक, तू ही सुख करनी॥

7

आठों सिद्धियाँ तेरे, द्वार भरे पानी। दान माँ तुझसे लेते, बड़े बड़े महादानी॥

8

चरण कमल तेरे धोकर, ध्यानु ने रस था पिया। तेरी धुन में खोकर, शीश तेरे भेंट किया॥

9

भक्तों के काज असंभव, संभव तू करती। सुख रत्नों से सबकी, झोलियाँ तू भरती॥

10

धूप दीप पुष्पों से, होए तेरा अभिषेक। तेरे दर रंक को राजा, बनते हुए देखा॥

11

अष्ट भुजी सिंह वाहिनी, तू माँ रुद्राणी। धन वैभव यश देना, हमको महारानी॥

12

ज्योति बुझाने आये, राजे अभिमानी। हार गए वो तुमसे, मूढ़ मति अज्ञानी॥

13

माई ज्वाला तेरी आरती, श्रद्धा से जो गाये। वो निर्दोष उपासक, भव से तर जाए॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे ज्वाला माई, हे मैया, तेरी जय हो! तेरी पूजा कष्ट हरती है, और तेरा स्मरण सुख देता है।
  2. तेरी ज्योति अटल और अखंड है, युगों-युगों से जग रही है; ऋषि, मुनि, देवता और मनुष्य — सबको माँ बड़ी प्यारी लगती है।
  3. तू पार्वती-रूप, शिव की शक्ति है, तू ही माँ अम्बा है; हे जगदम्बा, तीनों लोकों के देवता तेरी पूजा करते हैं।
  4. तेरी ज्योति के आगे लाखों सूर्य फीके हैं; हे माँ, तेरे चिंतन से संसार का भय भाग जाता है।
  5. जो चलकर तेरे चरणों की शरण में, तेरे द्वार आता है, वह कभी खाली नहीं जाता — मनचाहा फल पाता है।
  6. तू दुर्गति का नाश करने वाली चंडिका है, दानवों का दलन करने वाली; तू दीन-हीन की रक्षक और सुख देने वाली है।
  7. आठों सिद्धियाँ तेरे द्वार पर पानी भरती हैं; हे माँ, बड़े-बड़े महादानी भी तुझसे दान लेते हैं।
  8. तेरे चरण-कमल धोकर ध्यानु ने (उसका) रस पिया था; तेरी धुन में खोकर उसने अपना शीश तुझे भेंट कर दिया।
  9. भक्तों के असंभव काम तू संभव कर देती है; सुख के रत्नों से तू सबकी झोलियाँ भरती है।
  10. धूप, दीप और फूलों से तेरा अभिषेक होता है; तेरे दर पर रंक को राजा बनते देखा है।
  11. तू अष्टभुजा, सिंहवाहिनी, रुद्राणी माँ है; हे महारानी, हमें धन, वैभव और यश देना।
  12. अभिमानी राजा (तेरी) ज्योति बुझाने आए; वे मूढ़-बुद्धि, अज्ञानी तुझसे हार गए।
  13. हे माई ज्वाला, जो श्रद्धा से तेरी आरती गाता है, वह निर्दोष उपासक संसार-सागर से तर जाता है।

लाभ

  • ज्वाला देवी की अखंड ज्योति का ध्यान — "अटल अखंड तेरी ज्योति"।
  • मनोकामना-पूर्ति — "खाली कभी न जाए, वांछित फल पाए"।
  • फलश्रुति: श्रद्धा से आरती गाने वाला भवसागर से तर जाता है।

कब करें पाठ

नवरात्रि में · मंगलवार और शुक्रवार को · ज्वालामुखी के दर्शन पर

स्रोत

रचयिता: अज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं). knowledgegallery.in — माँ ज्वाला देवी की आरती (आधार-पाठ) · nakshatravichar.com — माँ ज्वाला देवी की आरती

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