श्री ज्वाला जी आरती
śrī jvālā jī āratī
Jwala Ji Aarti (Jwalamukhi, Himachal)
परिचय
माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।
स्रोत: ज्वालामुखी शक्तिपीठ, ज्वालामुखी, काँगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
उद्भव / पृष्ठभूमि
माँ ज्वाला जी (ज्वालामुखी) आदिशक्ति का ज्योति-स्वरूप हैं, जो हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में नौ शाश्वत ज्योतियों (अखण्ड ज्वाला) के रूप में स्वयं प्रकट होकर जलती हैं। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ देवी सती की जिह्वा गिरी थी।
आरती (लिरिक्स)
जय ज्वाला माता, ज्योति-स्वरूपा। बिन बाती बिन तेल जले, अद्भुत तव रूपा॥
हे ज्वाला माता, हे ज्योति-स्वरूपा, आपकी जय हो! बिना बाती व बिना तेल के जलने वाली आपकी छवि अद्भुत है।
नौ ज्योतियाँ प्रकटीं, शाश्वत अग्नि-धारा। सती-जिह्वा जहँ गिरी, शक्तिपीठ प्यारा॥
नौ शाश्वत ज्योतियाँ (अग्नि-धारा) स्वयं प्रकट हुईं; जहाँ सती की जिह्वा गिरी वह प्रिय शक्तिपीठ है।
अकबर का मद तोड़ा, ज्योति न बुझ पाई। भक्तन की रक्षक तू, महिमा अधिकाई॥
(आपने) अकबर का अहंकार तोड़ा — आपकी ज्योति कभी बुझ न सकी; आप भक्तों की रक्षक हैं और आपकी महिमा अपार है।
मनोकामना पूरण, भय-संकट हरती। शरण पड़े की रक्षा, हे जग की महतारी॥
आप मनोकामना पूर्ण करती हैं और भय-संकट हरती हैं; हे जगत की माता, शरण में आए जनों की रक्षा करती हैं।
ज्वाला जी आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भय-संकट सब मिटते, मनवांछित पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से ज्वाला जी की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह मनोवांछित फल पाता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे ज्वाला माता, हे ज्योति-स्वरूपा, आपकी जय हो! बिना बाती व बिना तेल के जलने वाली आपकी छवि अद्भुत है।
- नौ शाश्वत ज्योतियाँ (अग्नि-धारा) स्वयं प्रकट हुईं; जहाँ सती की जिह्वा गिरी वह प्रिय शक्तिपीठ है।
- (आपने) अकबर का अहंकार तोड़ा — आपकी ज्योति कभी बुझ न सकी; आप भक्तों की रक्षक हैं और आपकी महिमा अपार है।
- आप मनोकामना पूर्ण करती हैं और भय-संकट हरती हैं; हे जगत की माता, शरण में आए जनों की रक्षा करती हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से ज्वाला जी की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह मनोवांछित फल पाता है।
लाभ
- भय, संकट व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
- श्रद्धा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
- भक्ति, शक्ति व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
माँ ज्वाला जी के समक्ष लाल चुनरी, पुष्प व दीप अर्पित करें, "जय माता दी" का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ। नवरात्रि में दर्शन-आरती विशेष फलदायी मानी जाती है।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
माँ दुर्गा
Goddess Durga
माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।
