श्री ज्वाला देवी आरती

śrī jvālā devī āratī

Jwala Ji Aarti (Om Jai Jwala Mai — Jwalamukhi)

समय
5 मिनट
श्लोक/चौपाई
13
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
नवरात्रि; मंगलवार व शुक्रवार
उद्देश्य:रक्षा (Protection)संकट-निवारण (Relief from troubles)मनोकामना (Wish fulfilment)
✓ संपूर्ण

"ॐ जय ज्वाला माई, मैया जय ज्वाला माई" ज्वाला देवी की प्रचलित आरती है। इसके तेरह पद माँ की अखंड ज्योति के गीत हैं — "अटल अखंड तेरी ज्योति, युग युग से ही जगे" — और उस प्रसंग का भी, जब अभिमानी राजा ज्योति बुझाने आए और हार गए। आरती भक्त ध्यानु का नाम भी लेती है।

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: "ॐ जय ज्वाला माई" — ज्वाला देवी (ज्वालामुखी) की परंपरागत आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री ज्वाला देवी आरती
IASTśrī jvālā devī āratī
देवतामाँ दुर्गा
मूल स्रोत"ॐ जय ज्वाला माई" — ज्वाला देवी (ज्वालामुखी) की परंपरागत आरती
शुभ दिननवरात्रि; मंगलवार व शुक्रवार
पाठ समय5 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

ज्वाला देवी का धाम उस ज्योति के लिए प्रसिद्ध है जो बिना बाती और बिना तेल के जलती है; यह आरती बार-बार उसी ज्योति पर लौटती है।

अखंड ज्योति (पद 2, 4). "अटल अखंड तेरी ज्योति, युग युग से ही जगे" — युगों से जलती अटल, अखंड ज्योति; और "लाखों सूरज फीके, ज्योति तेरी आगे" — उसके आगे लाखों सूर्य फीके हैं।

देवी के रूप (पद 3, 6, 11). पार्वती-रूप शिव-शक्ति, अम्बा, जगदम्बा; दुर्गति नाश करने वाली चंडिका, दानवों का दलन करने वाली; अष्टभुजा, सिंहवाहिनी रुद्राणी।

ध्यानु (पद 8). "चरण कमल तेरे धोकर, ध्यानु ने रस था पिया; तेरी धुन में खोकर, शीश तेरे भेंट किया" — भक्त ध्यानु ने माँ के चरण धोकर रस पिया और उनकी धुन में खोकर अपना शीश भेंट कर दिया।

ज्योति बुझाने आए राजा (पद 12). "ज्योति बुझाने आये, राजे अभिमानी; हार गए वो तुमसे, मूढ़ मति अज्ञानी" — अभिमानी राजा ज्योति बुझाने आए, पर हार गए।

आरती (लिरिक्स)

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ॐ जय ज्वाला माई, मैया जय ज्वाला माई। कष्ट हरण तेरा अर्चन, सुमिरण सुख दाई॥

हे ज्वाला माई, हे मैया, तेरी जय हो! तेरी पूजा कष्ट हरती है, और तेरा स्मरण सुख देता है।

अटल अखंड तेरी ज्योति, युग युग से ही जगे। ऋषि मुनि सुर नर सबको, बड़ी प्यारी माँ लगे॥

तेरी ज्योति अटल और अखंड है, युगों-युगों से जग रही है; ऋषि, मुनि, देवता और मनुष्य — सबको माँ बड़ी प्यारी लगती है।

पार्वती रूप शिव शक्ति, तू ही माँ अम्बे। पूजे तुम्हे त्रिभुवन के, देवता जगदम्बे॥

तू पार्वती-रूप, शिव की शक्ति है, तू ही माँ अम्बा है; हे जगदम्बा, तीनों लोकों के देवता तेरी पूजा करते हैं।

लाखों सूरज फीके, ज्योति तेरी आगे। तेरे चिंतन से माँ, भवका भय भागे॥

तेरी ज्योति के आगे लाखों सूर्य फीके हैं; हे माँ, तेरे चिंतन से संसार का भय भाग जाता है।

चरण शरण में चल के, जो तेरे द्वारे आये। खाली कभी न जाए, वांछित फल पाए॥

जो चलकर तेरे चरणों की शरण में, तेरे द्वार आता है, वह कभी खाली नहीं जाता — मनचाहा फल पाता है।

दुर्गति नाशक चंडिका, तू दानव दलनी। दीन हीन की रक्षक, तू ही सुख करनी॥

तू दुर्गति का नाश करने वाली चंडिका है, दानवों का दलन करने वाली; तू दीन-हीन की रक्षक और सुख देने वाली है।

आठों सिद्धियाँ तेरे, द्वार भरे पानी। दान माँ तुझसे लेते, बड़े बड़े महादानी॥

आठों सिद्धियाँ तेरे द्वार पर पानी भरती हैं; हे माँ, बड़े-बड़े महादानी भी तुझसे दान लेते हैं।

चरण कमल तेरे धोकर, ध्यानु ने रस था पिया। तेरी धुन में खोकर, शीश तेरे भेंट किया॥

तेरे चरण-कमल धोकर ध्यानु ने (उसका) रस पिया था; तेरी धुन में खोकर उसने अपना शीश तुझे भेंट कर दिया।

भक्तों के काज असंभव, संभव तू करती। सुख रत्नों से सबकी, झोलियाँ तू भरती॥

भक्तों के असंभव काम तू संभव कर देती है; सुख के रत्नों से तू सबकी झोलियाँ भरती है।

धूप दीप पुष्पों से, होए तेरा अभिषेक। तेरे दर रंक को राजा, बनते हुए देखा॥

धूप, दीप और फूलों से तेरा अभिषेक होता है; तेरे दर पर रंक को राजा बनते देखा है।

अष्ट भुजी सिंह वाहिनी, तू माँ रुद्राणी। धन वैभव यश देना, हमको महारानी॥

तू अष्टभुजा, सिंहवाहिनी, रुद्राणी माँ है; हे महारानी, हमें धन, वैभव और यश देना।

ज्योति बुझाने आये, राजे अभिमानी। हार गए वो तुमसे, मूढ़ मति अज्ञानी॥

अभिमानी राजा (तेरी) ज्योति बुझाने आए; वे मूढ़-बुद्धि, अज्ञानी तुझसे हार गए।

माई ज्वाला तेरी आरती, श्रद्धा से जो गाये। वो निर्दोष उपासक, भव से तर जाए॥

हे माई ज्वाला, जो श्रद्धा से तेरी आरती गाता है, वह निर्दोष उपासक संसार-सागर से तर जाता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे ज्वाला माई, हे मैया, तेरी जय हो! तेरी पूजा कष्ट हरती है, और तेरा स्मरण सुख देता है।
  2. तेरी ज्योति अटल और अखंड है, युगों-युगों से जग रही है; ऋषि, मुनि, देवता और मनुष्य — सबको माँ बड़ी प्यारी लगती है।
  3. तू पार्वती-रूप, शिव की शक्ति है, तू ही माँ अम्बा है; हे जगदम्बा, तीनों लोकों के देवता तेरी पूजा करते हैं।
  4. तेरी ज्योति के आगे लाखों सूर्य फीके हैं; हे माँ, तेरे चिंतन से संसार का भय भाग जाता है।
  5. जो चलकर तेरे चरणों की शरण में, तेरे द्वार आता है, वह कभी खाली नहीं जाता — मनचाहा फल पाता है।
  6. तू दुर्गति का नाश करने वाली चंडिका है, दानवों का दलन करने वाली; तू दीन-हीन की रक्षक और सुख देने वाली है।
  7. आठों सिद्धियाँ तेरे द्वार पर पानी भरती हैं; हे माँ, बड़े-बड़े महादानी भी तुझसे दान लेते हैं।
  8. तेरे चरण-कमल धोकर ध्यानु ने (उसका) रस पिया था; तेरी धुन में खोकर उसने अपना शीश तुझे भेंट कर दिया।
  9. भक्तों के असंभव काम तू संभव कर देती है; सुख के रत्नों से तू सबकी झोलियाँ भरती है।
  10. धूप, दीप और फूलों से तेरा अभिषेक होता है; तेरे दर पर रंक को राजा बनते देखा है।
  11. तू अष्टभुजा, सिंहवाहिनी, रुद्राणी माँ है; हे महारानी, हमें धन, वैभव और यश देना।
  12. अभिमानी राजा (तेरी) ज्योति बुझाने आए; वे मूढ़-बुद्धि, अज्ञानी तुझसे हार गए।
  13. हे माई ज्वाला, जो श्रद्धा से तेरी आरती गाता है, वह निर्दोष उपासक संसार-सागर से तर जाता है।

लाभ

  • ज्वाला देवी की अखंड ज्योति का ध्यान — "अटल अखंड तेरी ज्योति"।
  • मनोकामना-पूर्ति — "खाली कभी न जाए, वांछित फल पाए"।
  • फलश्रुति: श्रद्धा से आरती गाने वाला भवसागर से तर जाता है।

कब करें पाठ

नवरात्रि मेंमंगलवार और शुक्रवार कोज्वालामुखी के दर्शन पर

पाठ विधि

माँ ज्वाला के समक्ष अखंड ज्योति या घी का दीपक जलाएँ, और धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें — दसवाँ पद यही अभिषेक बताता है। टेक "ॐ जय ज्वाला माई, मैया जय ज्वाला माई" हर पद के बाद दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराknowledgegallery.in — माँ ज्वाला देवी की आरती (आधार-पाठ) · nakshatravichar.com — माँ ज्वाला देवी की आरती
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
सभी पाठ देखें

श्री ज्वाला देवी आरती — सामान्य प्रश्न

संबंधित पर्व व व्रत

माँ दुर्गा भक्ति संग्रह

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