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लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा
मंत्र · माँ लक्ष्मी
पाठ
1
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा॥
2
ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं॥
अर्थ (हिन्दी)
- श्री-बीज, माया-बीज, काम-बीज व वाग्-बीज सहित — कमल में निवास करने वाली (लक्ष्मी) को यह आहुति समर्पित है।
- (शास्त्रीय चतुरक्षरी कमला मंत्र) चारों प्रमुख बीजाक्षर — वाग्-बीज, श्री-बीज, माया-बीज व काम-बीज।
लाभ
- परंपरा में इसे धन, समृद्धि व साधना-सिद्धि से जोड़ा जाता है।
- चारों प्रमुख बीजाक्षर एक साथ — चतुरक्षरी कमला मंत्र का समावेश।
- "स्वाहा" आहुति-पद होने से हवन-परंपरा में भी प्रयुक्त बताया जाता है।
- ध्यान दें: इसे "महामंत्र" कहना किसी स्रोत से प्रमाणित नहीं।
कब करें पाठ
शुक्रवार को · दीपावली व अमावस्या की रात्रि में · धनतेरस व लक्ष्मी हवन में · गुरु-दीक्षा प्राप्त साधकों द्वारा नियमित साधना में
स्रोत
कमला उपासना परंपरा — चतुरक्षरी मंत्र "ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं" · कमला उपासना परंपरा — दशाक्षरी मंत्र "नमः कमलवासिन्यै स्वाहा" · नोट: दोनों का यह संयुक्त रूप स्वतंत्र मंत्र के रूप में जाँची गई सूची में नहीं मिला · नोट: किसी जाँचे गए स्रोत ने इसे "महामंत्र" नहीं कहा
