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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री कुबेर चालीसा

चालीसा

पाठ

गणपति-लक्ष्मी सुमिर कै, करूँ कुबेर गुणगान। धन-धान्य-वैभव बढ़े, कीजै नाथ निहाल॥

1

जय जय श्री कुबेर भण्डारी। धन-धान्य के तुम अधिकारी॥

2

यक्षराज तुम वैश्रवण नामा। निधियों के तुम स्वामी ललामा॥

3

नवनिधि के तुम दाता स्वामी। धन-वैभव के तुम अनुगामी॥

4

देवन के तुम कोषाध्यक्षा। धन-व्यवस्था के तुम अध्यक्षा॥

5

अलकापुरी धाम तुम्हारा। वैभव से भरा-पूरा सारा॥

6

जो जन तुमको नित ही ध्यावै। धन-धान्य की कमी न पावै॥

7

लक्ष्मी-संग पूजित तुम होते। धनतेरस पर सुख जग देते॥

8

व्यापार-धंधे में बरकत लाते। धन-वैभव घर में भर जाते॥

9

जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। दरिद्रता ता की मिट जावै॥

10

धनतेरस-दीपावली जो धारे। सुख-समृद्धि प्रभु ता पर वारे॥

11

दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥

12

जो जन तुमको शीश नवावै। धन-धान्य-सुख सहज वह पावै॥

13

धन का सदुपयोग सिखाते। लोभ-कृपणता दूर हटाते॥

14

दान-पुण्य जो जन करते। कुबेर-कृपा से सुख वे भरते॥

15

जो नर निशदिन ध्यान लगावै। कुबेर-कृपा सहज वह पावै॥

16

मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। धन-दायक तुम सुख-साधन॥

17

जो श्रद्धा से भोग चढ़ावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥

18

कुबेर-यंत्र घर में जो धारै। धन-वैभव वह सहज वह पारै॥

19

जो यह कुबेर चालीसा गावै। धन-धान्य-सुख सहज वह पावै॥

20

नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा कुबेर की होई॥

21

मन-इच्छित फल सब जन पावैं। धन-वैभव घर में लावैं॥

22

कुबेर-कृपा जिन पर होई। धन की कमी रहे न कोई॥

23

व्यापार-नौकरी में उन्नति आवै। आय-वृद्धि घर में बढ़ावै॥

24

दीपावली पर पूजन कीजै। लक्ष्मी-कुबेर कृपा लीजै॥

25

जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत कुबेर देवा॥

26

संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥

27

महिमा तुम्हरी अति अपारा। वेद-पुराण करत विस्तारा॥

28

शिव-सखा तुम धन-अधिकारी। लोकपाल तुम जग-हितकारी॥

29

घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥

30

धन-संचय का मार्ग दिखाते। सुख-समृद्धि जग में लाते॥

31

ऋण-संकट से जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥

32

कुबेर-स्तुति जो जन गावै। आर्थिक-बाधा दूर भगावै॥

33

धन-धान्य-समृद्धि के दानी। कुबेर तुम जग-विख्याता ज्ञानी॥

34

जो जन कुबेर गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥

35

कुबेर-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥

36

धन-धान्य-समृद्धि घर में आवै। सुख-शान्ति-संतोष बढ़ावै॥

37

भय-संकट सब दूर हटावै। कुबेर जो जन नित ध्यावै॥

38

आर्थिक-स्थिरता वह सहज वह पावै। कुबेर-नाम जो जन गावै॥

39

वैभव-सुख-समृद्धि लावै। भक्ति-संतोष सब बढ़ावै॥

40

जय जय जय श्री कुबेर धनेशा। धन-वैभव-सुख देहु हमेशा॥

कुबेर चालीसा सरल यह, पढ़े प्रेम मन लाय। धन-धान्य-वैभव-सुख सब, घर में बसैं सदाय॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. गणपति व लक्ष्मी का स्मरण कर मैं कुबेर का गुणगान करता हूँ; हे नाथ, धन-धान्य व वैभव बढ़े — हमें निहाल कीजिए।
  2. हे श्री कुबेर भण्डारी, आपकी जय हो; आप धन-धान्य के अधिकारी (स्वामी) हैं।
  3. आप यक्षराज व वैश्रवण नाम से जाने जाते हैं; आप समस्त निधियों के श्रेष्ठ स्वामी हैं।
  4. आप नवनिधियों के दाता स्वामी हैं; धन व वैभव के अनुगामी हैं।
  5. आप देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं और धन-व्यवस्था के अध्यक्ष हैं।
  6. अलकापुरी आपका धाम है, जो समस्त वैभव से भरा-पूरा है।
  7. जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, उसे धन-धान्य की कमी नहीं रहती।
  8. आप लक्ष्मी जी के संग पूजित होते हैं और धनतेरस पर जगत को सुख देते हैं।
  9. आप व्यापार-धंधे में बरकत लाते हैं और धन-वैभव से घर भर देते हैं।
  10. जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसकी दरिद्रता मिट जाती है।
  11. जो धनतेरस-दीपावली का पूजन करते हैं, प्रभु उन पर सुख-समृद्धि न्योछावर करते हैं।
  12. आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
  13. जो जन आपको शीश नवाता है, वह सहज ही धन, धान्य व सुख पाता है।
  14. आप धन का सदुपयोग सिखाते हैं और लोभ व कृपणता दूर हटाते हैं।
  15. जो जन दान-पुण्य करते हैं, वे कुबेर-कृपा से सुख से भर जाते हैं।
  16. जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही कुबेर-कृपा प्राप्त करता है।
  17. आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; धन-दायक व सुख देने वाले हैं।
  18. जो श्रद्धा से भोग चढ़ाता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
  19. जो कुबेर-यंत्र को घर में धारण करता है, वह सहज ही धन-वैभव को पा लेता है।
  20. जो यह कुबेर चालीसा गाता है, वह सहज ही धन, धान्य व सुख पाता है।
  21. जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर कुबेर देव की कृपा होती है।
  22. सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में धन-वैभव लाते हैं।
  23. जिन पर कुबेर की कृपा होती है, उनमें धन की कोई कमी नहीं रहती।
  24. व्यापार व नौकरी में उन्नति आती है और घर में आय-वृद्धि बढ़ती है।
  25. दीपावली पर पूजन कीजिए और लक्ष्मी-कुबेर की कृपा प्राप्त कीजिए।
  26. जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर कुबेर देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
  27. आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
  28. आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।
  29. आप शिव के सखा व धन के अधिकारी हैं; आप (उत्तर दिशा के) लोकपाल व जगत-हितकारी हैं।
  30. घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
  31. आप धन-संचय का मार्ग दिखाते हैं और जगत में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  32. जो जन ऋण-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
  33. जो जन कुबेर-स्तुति गाता है, वह आर्थिक बाधा दूर भगा देता है।
  34. आप धन, धान्य व समृद्धि के दाता हैं; हे कुबेर, आप जगत-विख्यात व ज्ञानी हैं।
  35. जो जन कुबेर के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
  36. जो जन कुबेर-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
  37. घर में धन, धान्य व समृद्धि आती है और सुख, शांति व संतोष बढ़ता है।
  38. जो जन कुबेर का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
  39. जो जन कुबेर-नाम गाता है, वह सहज ही आर्थिक स्थिरता पा लेता है।
  40. आप वैभव, सुख व समृद्धि लाते हैं और भक्ति व संतोष बढ़ाते हैं।
  41. हे श्री कुबेर धनेश, आपकी जय हो; हमें सदा धन, वैभव व सुख दीजिए।
  42. जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल कुबेर चालीसा पढ़ता है, उसके घर में धन, धान्य, वैभव व सुख सदा बसता है।

लाभ

  • धन, धान्य व समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • व्यापार व आय में वृद्धि तथा आर्थिक स्थिरता आती है।
  • दरिद्रता व ऋण-संकट दूर होकर घर में सुख-शांति आती है।
  • धन के सदुपयोग व संचय की प्रेरणा मिलती है।

कब करें पाठ

धनतेरस व दीपावली पर · शुक्रवार को · लक्ष्मी-पूजन के साथ

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक कुबेर चालीसा · गीता प्रेस, गोरखपुर — चालीसा संग्रह

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