श्री कुबेर चालीसा

śrī kubera cālīsā

Kuber Chalisa

समय
8–10 मिनट
श्लोक/चौपाई
42
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
शुक्रवार व धनतेरस; दीपावली
✓ संपूर्ण (40/40 श्लोक)

परिचय

स्रोत: पारंपरिक कुबेर चालीसा

संपूर्ण चालीसा

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गणपति-लक्ष्मी सुमिर कै, करूँ कुबेर गुणगान। धन-धान्य-वैभव बढ़े, कीजै नाथ निहाल॥

गणपति व लक्ष्मी का स्मरण कर मैं कुबेर का गुणगान करता हूँ; हे नाथ, धन-धान्य व वैभव बढ़े — हमें निहाल कीजिए।

जय जय श्री कुबेर भण्डारी। धन-धान्य के तुम अधिकारी॥

हे श्री कुबेर भण्डारी, आपकी जय हो; आप धन-धान्य के अधिकारी (स्वामी) हैं।

यक्षराज तुम वैश्रवण नामा। निधियों के तुम स्वामी ललामा॥

आप यक्षराज व वैश्रवण नाम से जाने जाते हैं; आप समस्त निधियों के श्रेष्ठ स्वामी हैं।

नवनिधि के तुम दाता स्वामी। धन-वैभव के तुम अनुगामी॥

आप नवनिधियों के दाता स्वामी हैं; धन व वैभव के अनुगामी हैं।

देवन के तुम कोषाध्यक्षा। धन-व्यवस्था के तुम अध्यक्षा॥

आप देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं और धन-व्यवस्था के अध्यक्ष हैं।

अलकापुरी धाम तुम्हारा। वैभव से भरा-पूरा सारा॥

अलकापुरी आपका धाम है, जो समस्त वैभव से भरा-पूरा है।

जो जन तुमको नित ही ध्यावै। धन-धान्य की कमी न पावै॥

जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, उसे धन-धान्य की कमी नहीं रहती।

लक्ष्मी-संग पूजित तुम होते। धनतेरस पर सुख जग देते॥

आप लक्ष्मी जी के संग पूजित होते हैं और धनतेरस पर जगत को सुख देते हैं।

व्यापार-धंधे में बरकत लाते। धन-वैभव घर में भर जाते॥

आप व्यापार-धंधे में बरकत लाते हैं और धन-वैभव से घर भर देते हैं।

जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। दरिद्रता ता की मिट जावै॥

जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसकी दरिद्रता मिट जाती है।

धनतेरस-दीपावली जो धारे। सुख-समृद्धि प्रभु ता पर वारे॥

जो धनतेरस-दीपावली का पूजन करते हैं, प्रभु उन पर सुख-समृद्धि न्योछावर करते हैं।

दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥

आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।

जो जन तुमको शीश नवावै। धन-धान्य-सुख सहज वह पावै॥

जो जन आपको शीश नवाता है, वह सहज ही धन, धान्य व सुख पाता है।

धन का सदुपयोग सिखाते। लोभ-कृपणता दूर हटाते॥

आप धन का सदुपयोग सिखाते हैं और लोभ व कृपणता दूर हटाते हैं।

दान-पुण्य जो जन करते। कुबेर-कृपा से सुख वे भरते॥

जो जन दान-पुण्य करते हैं, वे कुबेर-कृपा से सुख से भर जाते हैं।

जो नर निशदिन ध्यान लगावै। कुबेर-कृपा सहज वह पावै॥

जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही कुबेर-कृपा प्राप्त करता है।

मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। धन-दायक तुम सुख-साधन॥

आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; धन-दायक व सुख देने वाले हैं।

जो श्रद्धा से भोग चढ़ावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥

जो श्रद्धा से भोग चढ़ाता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।

कुबेर-यंत्र घर में जो धारै। धन-वैभव वह सहज वह पारै॥

जो कुबेर-यंत्र को घर में धारण करता है, वह सहज ही धन-वैभव को पा लेता है।

जो यह कुबेर चालीसा गावै। धन-धान्य-सुख सहज वह पावै॥

जो यह कुबेर चालीसा गाता है, वह सहज ही धन, धान्य व सुख पाता है।

नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा कुबेर की होई॥

जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर कुबेर देव की कृपा होती है।

मन-इच्छित फल सब जन पावैं। धन-वैभव घर में लावैं॥

सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में धन-वैभव लाते हैं।

कुबेर-कृपा जिन पर होई। धन की कमी रहे न कोई॥

जिन पर कुबेर की कृपा होती है, उनमें धन की कोई कमी नहीं रहती।

व्यापार-नौकरी में उन्नति आवै। आय-वृद्धि घर में बढ़ावै॥

व्यापार व नौकरी में उन्नति आती है और घर में आय-वृद्धि बढ़ती है।

दीपावली पर पूजन कीजै। लक्ष्मी-कुबेर कृपा लीजै॥

दीपावली पर पूजन कीजिए और लक्ष्मी-कुबेर की कृपा प्राप्त कीजिए।

जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत कुबेर देवा॥

जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर कुबेर देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।

संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥

आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।

महिमा तुम्हरी अति अपारा। वेद-पुराण करत विस्तारा॥

आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।

शिव-सखा तुम धन-अधिकारी। लोकपाल तुम जग-हितकारी॥

आप शिव के सखा व धन के अधिकारी हैं; आप (उत्तर दिशा के) लोकपाल व जगत-हितकारी हैं।

घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥

घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।

धन-संचय का मार्ग दिखाते। सुख-समृद्धि जग में लाते॥

आप धन-संचय का मार्ग दिखाते हैं और जगत में सुख-समृद्धि लाते हैं।

ऋण-संकट से जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥

जो जन ऋण-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।

कुबेर-स्तुति जो जन गावै। आर्थिक-बाधा दूर भगावै॥

जो जन कुबेर-स्तुति गाता है, वह आर्थिक बाधा दूर भगा देता है।

धन-धान्य-समृद्धि के दानी। कुबेर तुम जग-विख्याता ज्ञानी॥

आप धन, धान्य व समृद्धि के दाता हैं; हे कुबेर, आप जगत-विख्यात व ज्ञानी हैं।

जो जन कुबेर गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥

जो जन कुबेर के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।

कुबेर-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥

जो जन कुबेर-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।

धन-धान्य-समृद्धि घर में आवै। सुख-शान्ति-संतोष बढ़ावै॥

घर में धन, धान्य व समृद्धि आती है और सुख, शांति व संतोष बढ़ता है।

भय-संकट सब दूर हटावै। कुबेर जो जन नित ध्यावै॥

जो जन कुबेर का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।

आर्थिक-स्थिरता वह सहज वह पावै। कुबेर-नाम जो जन गावै॥

जो जन कुबेर-नाम गाता है, वह सहज ही आर्थिक स्थिरता पा लेता है।

वैभव-सुख-समृद्धि लावै। भक्ति-संतोष सब बढ़ावै॥

आप वैभव, सुख व समृद्धि लाते हैं और भक्ति व संतोष बढ़ाते हैं।

जय जय जय श्री कुबेर धनेशा। धन-वैभव-सुख देहु हमेशा॥

हे श्री कुबेर धनेश, आपकी जय हो; हमें सदा धन, वैभव व सुख दीजिए।

कुबेर चालीसा सरल यह, पढ़े प्रेम मन लाय। धन-धान्य-वैभव-सुख सब, घर में बसैं सदाय॥

जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल कुबेर चालीसा पढ़ता है, उसके घर में धन, धान्य, वैभव व सुख सदा बसता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. गणपति व लक्ष्मी का स्मरण कर मैं कुबेर का गुणगान करता हूँ; हे नाथ, धन-धान्य व वैभव बढ़े — हमें निहाल कीजिए।
  2. हे श्री कुबेर भण्डारी, आपकी जय हो; आप धन-धान्य के अधिकारी (स्वामी) हैं।
  3. आप यक्षराज व वैश्रवण नाम से जाने जाते हैं; आप समस्त निधियों के श्रेष्ठ स्वामी हैं।
  4. आप नवनिधियों के दाता स्वामी हैं; धन व वैभव के अनुगामी हैं।
  5. आप देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं और धन-व्यवस्था के अध्यक्ष हैं।
  6. अलकापुरी आपका धाम है, जो समस्त वैभव से भरा-पूरा है।
  7. जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, उसे धन-धान्य की कमी नहीं रहती।
  8. आप लक्ष्मी जी के संग पूजित होते हैं और धनतेरस पर जगत को सुख देते हैं।
  9. आप व्यापार-धंधे में बरकत लाते हैं और धन-वैभव से घर भर देते हैं।
  10. जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसकी दरिद्रता मिट जाती है।
  11. जो धनतेरस-दीपावली का पूजन करते हैं, प्रभु उन पर सुख-समृद्धि न्योछावर करते हैं।
  12. आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
  13. जो जन आपको शीश नवाता है, वह सहज ही धन, धान्य व सुख पाता है।
  14. आप धन का सदुपयोग सिखाते हैं और लोभ व कृपणता दूर हटाते हैं।
  15. जो जन दान-पुण्य करते हैं, वे कुबेर-कृपा से सुख से भर जाते हैं।
  16. जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही कुबेर-कृपा प्राप्त करता है।
  17. आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; धन-दायक व सुख देने वाले हैं।
  18. जो श्रद्धा से भोग चढ़ाता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
  19. जो कुबेर-यंत्र को घर में धारण करता है, वह सहज ही धन-वैभव को पा लेता है।
  20. जो यह कुबेर चालीसा गाता है, वह सहज ही धन, धान्य व सुख पाता है।
  21. जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर कुबेर देव की कृपा होती है।
  22. सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में धन-वैभव लाते हैं।
  23. जिन पर कुबेर की कृपा होती है, उनमें धन की कोई कमी नहीं रहती।
  24. व्यापार व नौकरी में उन्नति आती है और घर में आय-वृद्धि बढ़ती है।
  25. दीपावली पर पूजन कीजिए और लक्ष्मी-कुबेर की कृपा प्राप्त कीजिए।
  26. जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर कुबेर देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
  27. आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
  28. आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।
  29. आप शिव के सखा व धन के अधिकारी हैं; आप (उत्तर दिशा के) लोकपाल व जगत-हितकारी हैं।
  30. घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
  31. आप धन-संचय का मार्ग दिखाते हैं और जगत में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  32. जो जन ऋण-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
  33. जो जन कुबेर-स्तुति गाता है, वह आर्थिक बाधा दूर भगा देता है।
  34. आप धन, धान्य व समृद्धि के दाता हैं; हे कुबेर, आप जगत-विख्यात व ज्ञानी हैं।
  35. जो जन कुबेर के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
  36. जो जन कुबेर-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
  37. घर में धन, धान्य व समृद्धि आती है और सुख, शांति व संतोष बढ़ता है।
  38. जो जन कुबेर का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
  39. जो जन कुबेर-नाम गाता है, वह सहज ही आर्थिक स्थिरता पा लेता है।
  40. आप वैभव, सुख व समृद्धि लाते हैं और भक्ति व संतोष बढ़ाते हैं।
  41. हे श्री कुबेर धनेश, आपकी जय हो; हमें सदा धन, वैभव व सुख दीजिए।
  42. जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल कुबेर चालीसा पढ़ता है, उसके घर में धन, धान्य, वैभव व सुख सदा बसता है।

लाभ

  • धन, धान्य व समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • व्यापार व आय में वृद्धि तथा आर्थिक स्थिरता आती है।
  • दरिद्रता व ऋण-संकट दूर होकर घर में सुख-शांति आती है।
  • धन के सदुपयोग व संचय की प्रेरणा मिलती है।

कब करें पाठ

धनतेरस व दीपावली परशुक्रवार कोलक्ष्मी-पूजन के साथ

पाठ विधि

कुबेर व लक्ष्मी जी के समक्ष घी का दीपक जलाएँ, पुष्प व मिष्ठान्न अर्पित करें और "ॐ यक्षाय कुबेराय..." का स्मरण करते हुए चालीसा का पाठ करें। धनतेरस व दीपावली पर इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण (40/40 श्लोक)
स्रोत परंपरापारंपरिक कुबेर चालीसा · गीता प्रेस, गोरखपुर — चालीसा संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

श्री कुबेर चालीसा — सामान्य प्रश्न

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