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लिपि:
॥ श्री ॥
लक्ष्मी वैदिक मंत्र — हिरण्यवर्णां हरिणीं
मंत्र · माँ लक्ष्मी
पाठ
1
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह॥
अर्थ (हिन्दी)
- हे जातवेदा (अग्नि), उन लक्ष्मी को मेरे लिए ले आइए — जो स्वर्ण के समान वर्ण वाली हैं, हरिणी हैं, स्वर्ण व रजत की माला धारण करती हैं, चंद्रमा के समान कांतिमान हैं और स्वर्णमयी हैं।
लाभ
- लक्ष्मी-उपासना का सबसे प्राचीन उपलब्ध वैदिक आधार माना जाता है।
- परंपरा में इसे समृद्धि, धन व ऐश्वर्य की कामना से जोड़ा जाता है।
- दीपावली, अक्षय तृतीया व शुक्रवार पूजन में पाठ विहित बताया जाता है।
- श्री विद्या की उपासना-परंपरा में भी श्री सूक्त केंद्रीय है।
कब करें पाठ
दीपावली व लक्ष्मी पूजन पर · शुक्रवार को · अक्षय तृतीया व धनतेरस पर · नए व्यापार या गृह-प्रवेश के आरंभ पर
स्रोत
श्री सूक्त (श्रीसूक्तम्) — ऋग्वेद खिल सूक्त, प्रथम ऋचा · श्री विद्या उपासना परंपरा में श्री सूक्त का स्थान
