लक्ष्मी वैदिक मंत्र — हिरण्यवर्णां हरिणीं

lakṣmī vaidika mantra — hiraṇyavarṇāṃ hariṇīṃ

Lakshmi Vedic Mantra (Sri Sukta, first rik)

समय
45 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
शुक्रवार, दीपावली व अक्षय तृतीया
उद्देश्य:समृद्धि (Prosperity)धन प्राप्ति (Wealth)शुभ आरंभ (Auspicious Start)
✓ संपूर्ण वैदिक मंत्र

लक्ष्मी का वैदिक मंत्र “ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्…” श्री सूक्त की प्रथम ऋचा है, जो ऋग्वेद की खिल (परिशिष्ट) ऋचाओं में आती है। इसमें अग्नि से प्रार्थना है कि वे स्वर्ण-वर्णा, चंद्र-समान कांति वाली लक्ष्मी को मेरे लिए ले आएँ। दीपावली व शुक्रवार पूजन में इसका पाठ विशेष है।

परिचय

माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

स्रोत: श्री सूक्त (श्रीसूक्तम्) की प्रथम ऋचा — ऋग्वेद की खिल ऋचाओं में

एक नज़र में

मंत्र / पाठलक्ष्मी वैदिक मंत्र — हिरण्यवर्णां हरिणीं
IASTlakṣmī vaidika mantra — hiraṇyavarṇāṃ hariṇīṃ
प्रकारवैदिक मंत्र
देवतामाँ लक्ष्मी
मूल स्रोतश्री सूक्त (श्रीसूक्तम्) की प्रथम ऋचा — ऋग्वेद की खिल ऋचाओं में
जप संख्या108
मालाकमलगट्टे या स्फटिक माला
शुभ दिनशुक्रवार, दीपावली व अक्षय तृतीया
पाठ समय45 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री सूक्त लक्ष्मी-उपासना का सबसे प्राचीन उपलब्ध वैदिक आधार है। यह ऋग्वेद की "खिल" ऋचाओं में गिना जाता है — खिल अर्थात् परिशिष्ट, वे सूक्त जो मुख्य संहिता के साथ जुड़े पर उससे कुछ परवर्ती माने जाते हैं। श्री विद्या की तांत्रिक परंपरा में भी श्री सूक्त केंद्रीय स्थान रखता है।

प्रथम ऋचा का भाव सुंदर है: साधक सीधे लक्ष्मी से नहीं, अग्नि (जातवेदा) से प्रार्थना करता है — "हे जातवेदा, उन स्वर्ण-वर्णा, हरिणी, स्वर्ण व रजत की माला धारण करने वाली, चंद्र-समान कांति वाली लक्ष्मी को मेरे लिए ले आइए।" यज्ञ-परंपरा में अग्नि ही देवताओं तक हविष्य पहुँचाने वाले हैं, इसलिए आह्वान उन्हीं के माध्यम से होता है।

ध्यान रहे कि यह पृष्ठ मंत्र का है, पूरे सूक्त का नहीं। सम्पूर्ण श्री सूक्त में पंद्रह से अधिक ऋचाएँ हैं (संस्करण-भेद से संख्या बदलती है); यहाँ केवल उसकी प्रथम व सर्वाधिक प्रचलित ऋचा दी गई है।

मंत्र

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ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह॥

oṃ hiraṇyavarṇāṃ hariṇīṃ suvarṇarajatasrajām | candrāṃ hiraṇmayīṃ lakṣmīṃ jātavedo ma ā vaha ||

Om Hiranyavarnam Harinim Suvarna-rajata-srajam, Chandram Hiranmayim Lakshmim Jatavedo Ma Aa Vaha.

उच्चारण मार्गदर्शन: "हिरण्यवर्णां" में "ण्य" संयुक्ताक्षर है और "ण" मूर्धन्य — इसे "हिरन्यवर्णां" न बनाएँ। "सुवर्णरजतस्रजाम्" सबसे लंबा पद है; "स्रजाम्" में "स्र" संयुक्ताक्षर स्पष्ट हो। "जातवेदो म आ वह" में "म" और "आ" अलग-अलग पद हैं, इन्हें जोड़कर "मा" न बोलें — अर्थ बदल जाता है।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

हिरण्यवर्णांस्वर्ण के समान वर्ण वाली
हरिणींहरिणी — तेजस्विनी, मनोहर
सुवर्णरजतस्रजाम्स्वर्ण व चाँदी की माला धारण करने वाली
चन्द्रांचंद्रमा के समान कांतिमान
हिरण्मयींस्वर्णमयी
लक्ष्मींलक्ष्मी को
जातवेदोहे जातवेदा (अग्नि)
म आ वहमेरे लिए ले आइए

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे जातवेदा (अग्नि), उन लक्ष्मी को मेरे लिए ले आइए — जो स्वर्ण के समान वर्ण वाली हैं, हरिणी हैं, स्वर्ण व रजत की माला धारण करती हैं, चंद्रमा के समान कांतिमान हैं और स्वर्णमयी हैं।

लाभ

  • लक्ष्मी-उपासना का सबसे प्राचीन उपलब्ध वैदिक आधार माना जाता है।
  • परंपरा में इसे समृद्धि, धन व ऐश्वर्य की कामना से जोड़ा जाता है।
  • दीपावली, अक्षय तृतीया व शुक्रवार पूजन में पाठ विहित बताया जाता है।
  • श्री विद्या की उपासना-परंपरा में भी श्री सूक्त केंद्रीय है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: कमलगट्टे या स्फटिक माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या, विशेषतः शुक्रवार

जप का उत्तम समय

दीपावली व लक्ष्मी पूजन परशुक्रवार कोअक्षय तृतीया व धनतेरस परनए व्यापार या गृह-प्रवेश के आरंभ पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

स्नान के बाद लक्ष्मी-विग्रह के समक्ष घी का दीपक जलाएँ, कमल-पुष्प व कमलगट्टे अर्पित करें और ऋचा का 11 या 108 बार पाठ करें। परंपरा में श्री सूक्त का पाठ हवन के साथ करने का विधान बताया जाता है, जिसमें हर ऋचा के बाद आहुति दी जाती है — क्योंकि आह्वान अग्नि के माध्यम से ही है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
मूल ग्रंथश्री सूक्त — ऋग्वेद खिल सूक्त
स्रोत परंपराश्री सूक्त (श्रीसूक्तम्) — ऋग्वेद खिल सूक्त, प्रथम ऋचा · श्री विद्या उपासना परंपरा में श्री सूक्त का स्थान
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ लक्ष्मी

Goddess Lakshmi

माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

देवता वर्गधन · समृद्धि · ऐश्वर्य · सौभाग्य
वाहनउल्लू
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मुख्य मंत्रॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
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