FAQ
शरद पूर्णिमा — सामान्य प्रश्न
शरद पूर्णिमा पूर्णिमा तिथि, शुक्ल पक्ष, आश्विन को मनाया जाता है। सटीक तिथि हर वर्ष पंचांग के अनुसार बदलती है — इसी संग्रह का पंचांग पृष्ठ देखें।
शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा है, और इसे कोजागरी पूर्णिमा तथा रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि पूरे वर्ष में केवल इसी रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है।
शरद पूर्णिमा मुख्यतः श्री कृष्ण व माँ लक्ष्मी की आराधना का पर्व माना जाता है। इसी पृष्ठ पर उनसे जुड़े आरती, चालीसा व मंत्र भी दिए गए हैं।
परंपरा में इस दिन रात्रि में खुले आकाश के नीचे खीर रखना, फिर प्रसाद रूप में ग्रहण करना, चंद्र-दर्शन व चंद्रमा को अर्घ्य, रात्रि जागरण व भजन-कीर्तन, कृष्ण-रास की स्मृति में राधा-कृष्ण पूजन का विधान बताया जाता है। ये परंपरागत मान्यताएँ हैं; क्षेत्र और परिवार के अनुसार विधि में अंतर मिलता है।
अनुशंसित पाठ
शरद पूर्णिमा के लिए अनुशंसित आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र
आराध्य देव
