शरद पूर्णिमा

Sharad Purnima

सितंबर–अक्टूबर

महत्व

शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा है, और इसे कोजागरी पूर्णिमा तथा रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि पूरे वर्ष में केवल इसी रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है।

परंपरा में इस रात्रि खुले आकाश के नीचे खीर से भरा पात्र रखने का विधान है, क्योंकि माना जाता है कि इस रात चंद्रमा से अमृत झरता है।

कृष्ण-भक्ति में इसका विशेष स्थान है — यही वह रात्रि मानी जाती है जब श्रीकृष्ण ने वृंदावन में महारास किया था। इसीलिए इसका एक नाम रास पूर्णिमा है। लक्ष्मी-उपासना में यही रात कोजागरी कहलाती है।

पूजन विधि व परंपरा

  • रात्रि में खुले आकाश के नीचे खीर रखना, फिर प्रसाद रूप में ग्रहण करना
  • चंद्र-दर्शन व चंद्रमा को अर्घ्य
  • रात्रि जागरण व भजन-कीर्तन
  • कृष्ण-रास की स्मृति में राधा-कृष्ण पूजन
  • लक्ष्मी पूजन (कोजागरी परंपरा में)

तिथि / पंचांग

तिथिपूर्णिमा
पक्षशुक्ल
माहआश्विन
समय (लगभग)सितंबर–अक्टूबर
आराध्यश्री कृष्ण, माँ लक्ष्मी
स्रोतhi.wikipedia.org/wiki/शरद_पूर्णिमा — आश्विन पूर्णिमा; कोजागरी व रास पूर्णिमा नाम; चंद्रमा की सोलह कलाएँ; खीर की परंपरा
आज का पंचांग

शरद पूर्णिमा — सामान्य प्रश्न

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