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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री मंगला गौरी आरती

आरती · माँ दुर्गा

पाठ

1

जय मंगला गौरी माता, मैया जय मंगला गौरी। सौभाग्य-सुख दाता, तू सुहाग की दौरी॥

2

गौर-वरण तन सुन्दर, शिव-संग शोभा पाती। श्रावण मंगल पूजे, सुहागिन तुम्हें ध्याती॥

3

अखण्ड सौभाग्य देती, सन्तान-सुख दाई। व्रत से जो तुम्हें पूजे, मनोकामना पाई॥

4

पति-पुत्र की रक्षा, घर सुख बरसाती। शरण पड़े की रक्षा, हे जग की माता॥

5

मंगला गौरी आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सुख-सौभाग्य वह पावे, मनवांछित पावे॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे मंगला गौरी माता, आपकी जय हो! आप सौभाग्य व सुख देने वाली तथा सुहाग (अखण्ड सौभाग्य) की रक्षक हैं।
  2. गौर वर्ण का सुन्दर तन, शिव के संग शोभा पाती हैं; श्रावण के मंगलवार को सुहागिन स्त्रियाँ आपको पूजती व ध्याती हैं।
  3. आप अखण्ड सौभाग्य व सन्तान-सुख देती हैं; जो व्रत रखकर आपको पूजता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।
  4. आप पति व पुत्र की रक्षा करती हैं और घर में सुख बरसाती हैं; हे जगत की माता, शरण में आए जनों की रक्षा करती हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से मंगला गौरी की यह आरती गाता है, वह सुख-सौभाग्य तथा मनोवांछित फल प्राप्त करता है।

लाभ

  • अखण्ड सौभाग्य व सुखी दाम्पत्य की प्राप्ति होती है।
  • सन्तान-सुख व पति-पुत्र की रक्षा होती है।
  • घर में सुख-शांति व मनोकामना-पूर्ति होती है।

कब करें पाठ

श्रावण मास के मंगलवार को · मंगला गौरी व्रत में · प्रातः व संध्या पूजा में

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह

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