श्री मंगला गौरी आरती

śrī maṃgalā gaurī āratī

Mangala Gauri Aarti (Jai Mangala Gauri Mata)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
8
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सावन के मंगलवार (मंगला गौरी व्रत)
उद्देश्य:सौभाग्य (Marital bliss)मंगल (Auspiciousness)सुख-समृद्धि (Prosperity)
✓ संपूर्ण

श्री मंगला गौरी आरती "जय मंगला गौरी माता, ब्रह्मा सनातन देवी शुभ फल दाता" सावन के मंगलवार को होने वाले मंगला गौरी व्रत की आरती है। इसके सात पद हैं, और अंत में — "मंगला गौरी माता की आरती जो कोई गाता, सदा सुख संपति पाता"। यह वही आरती है जो (जय पार्वती माता) नाम से भी गाई जाती है।

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: "जय मंगला गौरी माता" — मंगला गौरी व्रत की प्रचलित आरती; (जय पार्वती माता) वाली आरती का मंगला गौरी-नाम वाला रूप

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री मंगला गौरी आरती
IASTśrī maṃgalā gaurī āratī
देवतामाँ दुर्गा
मूल स्रोत"जय मंगला गौरी माता" — मंगला गौरी व्रत की प्रचलित आरती; (जय पार्वती माता) वाली आरती का मंगला गौरी-नाम वाला रूप
शुभ दिनसावन के मंगलवार (मंगला गौरी व्रत)
पाठ समय3 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

मंगला गौरी देवी पार्वती का ही मंगलकारी रूप हैं, इसलिए उनकी आरती भी पार्वती आरती ही है — बस नाम मंगला गौरी का है।

रूप (पद 2–3). "अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता" — शत्रुओं का नाश करने वाली, सेवकों की रक्षक; सिंह की सवारी, कानों में कुंडल, और देव-वधुएँ गाती-नाचती हैं।

कथा (पद 4–5). सतयुग में सती, फिर हिमालय के घर जन्म; और शुम्भ-निशुम्भ का संहार — "सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा"।

शिव के संग (पद 6–7). "सृष्टी रूप तुही जननी शिव संग रंगराता" — सृष्टि की जननी, शिव के संग; नंदी-भृंगी वीणा बजाते हैं, और भक्त ताली दे-देकर गाते हैं।

फल. "मंगला गौरी माता की आरती जो कोई गाता, सदा सुख संपति पाता"।

आरती (लिरिक्स)

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जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता। ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल दाता॥

हे मंगला गौरी माता, आपकी जय हो, जय हो! आप सनातन देवी हैं और शुभ फल देने वाली हैं।

अरिकुल पद्मा विनासनी, जय सेवक त्राता। जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥

आप शत्रुओं के कुल का नाश करने वाली और सेवकों की रक्षा करने वाली हैं, आपकी जय हो; आप जगत का जीवन हैं, जगदम्बा हैं — हरि और हर आपके गुण गाते हैं।

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा। देव वधू जहँ गावत, नृत्य करत ताथा॥

सिंह आपके वाहन के रूप में सजा है, कानों में कुंडल हैं; जहाँ देवताओं की पत्नियाँ गाती हैं और ताल पर नृत्य करती हैं।

सतयुग शील सुसुन्दर, नाम सती कहलाता। हेमांचल घर जन्मी, सखियन रंगराता॥

सतयुग में आप शील से सुंदर थीं और आपका नाम सती कहलाया; (फिर) आपने हेमांचल (हिमालय) के घर जन्म लिया और सखियों के संग आनंद में रहीं।

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता। सहस भुजा तनु धरिके, चक्र लियो हाथा॥

आपने शुम्भ और निशुम्भ को चीर डाला, आप हिमालय पर निवास करती हैं; हज़ार भुजाओं वाला शरीर धारण करके आपने हाथ में चक्र लिया।

सृष्टी रूप तुही जननी, शिव संग रंगराता। नंदी भृंगी बीन लही, सारा मद माता॥

हे जननी, सृष्टि का रूप आप ही हैं, और आप शिव के संग (प्रेम के) रंग में रंगी हैं; नंदी और भृंगी ने वीणा ली है, और सब आनंद में मग्न हैं।

देवन अरज करत, हम चित को लाता। गावत दे दे ताली, मन में रंगराता॥

देवता विनती करते हैं, और हम अपना चित्त (आपमें) लगाते हैं; ताली दे-देकर गाते हैं, और मन आपके रंग में रँग जाता है।

मंगला गौरी माता की आरती, जो कोई गाता। सदा सुख संपति पाता॥

(फलश्रुति) जो कोई मंगला गौरी माता की आरती गाता है, वह सदा सुख और संपत्ति पाता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे मंगला गौरी माता, आपकी जय हो, जय हो! आप सनातन देवी हैं और शुभ फल देने वाली हैं।
  2. आप शत्रुओं के कुल का नाश करने वाली और सेवकों की रक्षा करने वाली हैं, आपकी जय हो; आप जगत का जीवन हैं, जगदम्बा हैं — हरि और हर आपके गुण गाते हैं।
  3. सिंह आपके वाहन के रूप में सजा है, कानों में कुंडल हैं; जहाँ देवताओं की पत्नियाँ गाती हैं और ताल पर नृत्य करती हैं।
  4. सतयुग में आप शील से सुंदर थीं और आपका नाम सती कहलाया; (फिर) आपने हेमांचल (हिमालय) के घर जन्म लिया और सखियों के संग आनंद में रहीं।
  5. आपने शुम्भ और निशुम्भ को चीर डाला, आप हिमालय पर निवास करती हैं; हज़ार भुजाओं वाला शरीर धारण करके आपने हाथ में चक्र लिया।
  6. हे जननी, सृष्टि का रूप आप ही हैं, और आप शिव के संग (प्रेम के) रंग में रंगी हैं; नंदी और भृंगी ने वीणा ली है, और सब आनंद में मग्न हैं।
  7. देवता विनती करते हैं, और हम अपना चित्त (आपमें) लगाते हैं; ताली दे-देकर गाते हैं, और मन आपके रंग में रँग जाता है।
  8. (फलश्रुति) जो कोई मंगला गौरी माता की आरती गाता है, वह सदा सुख और संपत्ति पाता है।

लाभ

  • सौभाग्य और सुख — "मंगला गौरी माता की आरती जो कोई गाता, सदा सुख संपति पाता"।
  • रक्षा का भाव — "अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता" (पद 2)।
  • मंगला गौरी व्रत की पूजा का समापन।

कब करें पाठ

सावन के हर मंगलवार को (मंगला गौरी व्रत)विवाह के बाद पहले पाँच वर्ष के मंगला गौरी व्रत मेंमंगलवार की पूजा में

पाठ विधि

मंगला गौरी (पार्वती) के चित्र के समक्ष दीपक जलाएँ और सुहाग की सामग्री अर्पित करें। टेक "जय मंगला गौरी माता" हर पद के बाद दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराamarujala.com — मंगला गौरी व्रत: आरती (आधार-पाठ) · timesnowhindi.com — मंगला गौरी माता की आरती · hindi.boldsky.com — मंगला गौरी आरती · शुद्ध रूप हेतु: drikpanchang.com — श्री पार्वती माता की आरती
रचयिताअज्ञात (इस रूप में छाप नहीं; पार्वती-रूप में अंतिम पद में श्री प्रताप की छाप है)
अंतिम अद्यतनअक्टूबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
सभी पाठ देखें

श्री मंगला गौरी आरती — सामान्य प्रश्न

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