वापस
लिपि:
॥ श्री ॥

श्री मनसा देवी आरती

आरती · माँ दुर्गा

पाठ

1

जय मनसा माता, मैया जय मनसा माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥

2

जरत्कारु मुनि पत्नी, तुम बासुक भगिनी। कश्यप की तुम कन्या, आस्तिक की माता॥

3

गर्व धन्वन्तरी नाशिनी, हंसवाहिनी देवी। सुर-नर-मुनि-गण ध्यावत॥

4

पर्वतवासिनी संकटनाशिनी, अक्षय धनदात्री। पुत्र पौत्रादि प्रदायिनी, मनवांछित फल दाता॥

मनसा जी की आरती, जो कोई नर गाता। कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपति पाता॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे मनसा माता, हे मैया, आपकी जय हो! जो मनुष्य आपका ध्यान करता है, वह मनचाहा फल पाता है।
  2. आप मुनि जरत्कारु की पत्नी हैं, वासुकि (नाग) की बहन हैं; आप कश्यप की कन्या और आस्तिक की माता हैं।
  3. आप धन्वंतरि का गर्व नष्ट करने वाली, हंस पर सवार देवी हैं; देवता, मनुष्य और मुनिगण आपका ध्यान करते हैं।
  4. आप पर्वत पर बसने वाली, संकट का नाश करने वाली, अक्षय धन देने वाली हैं; पुत्र-पौत्र आदि देने वाली और मनचाहा फल देने वाली हैं।
  5. (फलश्रुति) जो कोई मनुष्य मनसा जी की यह आरती गाता है — स्वामी शिवानंद कहते हैं — वह सुख और संपत्ति पाता है।

लाभ

  • नाग-भय से रक्षा की कामना — मनसा नागों की देवी और वासुकि की बहन हैं।
  • संतान-सुख — "पुत्र पौत्रादि प्रदायिनी"।
  • फलश्रुति: सुख और संपत्ति।

कब करें पाठ

नाग पंचमी पर · नवरात्रि में · हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर के दर्शन पर

स्रोत

रचयिता: शिवानंद स्वामी (फलश्रुति की छाप). hindunidhi.com — श्री मनसा देवी आरती (आधार-पाठ) · shridharam.com — श्री मनसा देवी की आरती · knowledgegallery.in — श्री मनसा देवी की आरती

VedikMarg · निःशुल्क भक्ति संग्रह · vedikmarg.in