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लिपि:
॥ श्री ॥

ॐ मुरलीधराय नमः

मंत्र · श्री कृष्ण

पाठ

1

ॐ मुरलीधराय नमः॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. मुरलीधर को नमस्कार। जो अपने अधरों पर मुरली धारण करते हैं और जिनकी वंशी-ध्वनि से समस्त व्रज मोहित हो जाता है — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे माधुर्य-भाव की भक्ति का प्रमुख नाम माना जाता है।
  • संगीत, कला व सृजनात्मक साधना में जप प्रचलित है।
  • मन की बेचैनी शांत होकर लय-भाव आने की मान्यता है।
  • शरद पूर्णिमा व रास-लीला की उपासना का केंद्रीय नाम है।

कब करें पाठ

शरद पूर्णिमा की रात्रि में · बुधवार व एकादशी को · संगीत या कला-साधना आरंभ करने से पूर्व · जन्माष्टमी पर

स्रोत

श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — सम-भाव नाम 87 "ॐ वेणुनादविशारदाय नमः" · भक्ति परंपरा — संबोधन "मुरलीधर" / "वंशीधर" · नोट: "मुरलीधर" शब्द-रूप शतनामावली व सहस्रनामावली की सूचियों में नहीं मिला

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