ॐ मुरलीधराय नमः

oṃ muralīdharāya namaḥ

Muralidhar Mantra (Om Muralidharaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार, एकादशी व शरद पूर्णिमा
उद्देश्य:भक्ति व प्रेम (Love)कला व सृजन (Creativity)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ मुरलीधराय नमः का अर्थ है “वंशी धारण करने वाले कृष्ण को नमस्कार”। यह नाम शतनामावली में नहीं मिलता; वहाँ सम-भाव नाम “वेणुनादविशारदाय” (क्रम 87) है। वंशी का खोखलापन साधक के आत्म-रिक्तीकरण का प्रतीक माना जाता है। शरद पूर्णिमा इसके जप के लिए विशेष है।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: भक्ति परंपरा; शतनामावली में सम-भाव नाम "वेणुनादविशारदाय" (87)

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ मुरलीधराय नमः
IASToṃ muralīdharāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतभक्ति परंपरा; शतनामावली में सम-भाव नाम "वेणुनादविशारदाय" (87)
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार, एकादशी व शरद पूर्णिमा
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

मुरलीधर अर्थात् "मुरली (वंशी) धारण करने वाले"। कृष्ण की पहचान जितनी उनके श्याम वर्ण और मोरपंख से है, उतनी ही उनकी वंशी से। परंपरा में कहा जाता है कि उनकी वंशी की ध्वनि सुनकर गोपियाँ घर-गृहस्थी भूलकर वृंदावन की ओर दौड़ पड़ती थीं, गायें चरना छोड़ देती थीं और यमुना का प्रवाह तक ठहर जाता था।

वंशी का प्रतीक-अर्थ भी गहरा माना जाता है। वंशी भीतर से पूरी तरह खोखली होती है — उसमें अपना कुछ नहीं बचता, इसीलिए उसमें से भगवान का स्वर निकल पाता है। परंपरा में यही साधक का आदर्श कहा जाता है: जो स्वयं को खाली कर ले, उसी में से दिव्य स्वर बजता है। शरद पूर्णिमा की रात्रि, जब महारास हुआ माना जाता है, इस नाम की उपासना के लिए विशेष मानी जाती है।

मंत्र

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ॐ मुरलीधराय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ मुरलीधराय नमः॥

oṃ muralīdharāya namaḥ ||

Om Muralidharaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "मुरली" में "ली" दीर्घ है — "मुरलि" नहीं। "धराय" का "ध" महाप्राण है, इसे "दराय" न बनाएँ। पूरा रूप "मु-र-ली-ध-राय न-मः"; अंत "राय" दीर्घ। यह माधुर्य-भाव का नाम है, इसलिए स्वर मधुर व लयबद्ध रखें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
मुरलीवंशी, बाँसुरी
धरधारण करने वाला
मुरलीधरायवंशी धारण करने वाले (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. मुरलीधर को नमस्कार। जो अपने अधरों पर मुरली धारण करते हैं और जिनकी वंशी-ध्वनि से समस्त व्रज मोहित हो जाता है — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे माधुर्य-भाव की भक्ति का प्रमुख नाम माना जाता है।
  • संगीत, कला व सृजनात्मक साधना में जप प्रचलित है।
  • मन की बेचैनी शांत होकर लय-भाव आने की मान्यता है।
  • शरद पूर्णिमा व रास-लीला की उपासना का केंद्रीय नाम है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: संध्या व रात्रि

जप का उत्तम समय

शरद पूर्णिमा की रात्रि मेंबुधवार व एकादशी कोसंगीत या कला-साधना आरंभ करने से पूर्वजन्माष्टमी पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

वंशीधारी कृष्ण की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर तुलसी माला से 108 बार जप करें। परंपरा में इस मंत्र का जप संगीत या कीर्तन के साथ करना विशेष माना जाता है, क्योंकि यह नाद का ही नाम है। जप के समय वंशी के खोखलेपन का भाव — स्वयं को खाली कर देना — मन में रखने की परंपरा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराश्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — सम-भाव नाम 87 "ॐ वेणुनादविशारदाय नमः" · भक्ति परंपरा — संबोधन "मुरलीधर" / "वंशीधर" · नोट: "मुरलीधर" शब्द-रूप शतनामावली व सहस्रनामावली की सूचियों में नहीं मिला
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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