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लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ मुरारये नमः
मंत्र · श्री कृष्ण
पाठ
1
ॐ मुरारये नमः॥
अर्थ (हिन्दी)
- मुरारि को नमस्कार। जिन्होंने मुर असुर का वध कर बंदियों को मुक्त कराया और जो साधक के बंधनों का भी नाश करते हैं — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ
- परंपरा में इसे शत्रु-बाधा व संकट से रक्षा से जोड़ा जाता है।
- बंधन-मुक्ति का भाव — "मुर" का प्रतीकार्थ पाश भी है।
- भय व अनिश्चितता के समय स्मरण किया जाता है।
- नरक चतुर्दशी की उपासना में इसका जप विशेष माना जाता है।
कब करें पाठ
नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) पर · बुधवार व एकादशी को · जन्माष्टमी पर · शत्रु-बाधा या संकट के समय
स्रोत
श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — नाम 70 "ॐ मुरारये नमः" · मुर व नरकासुर वध प्रसंग — श्रीमद्भागवत महापुराण, दशम स्कन्ध
