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लिपि:
॥ श्री ॥
श्री नाग देवता आरती
आरती
पाठ
1
श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै। तन मन धन सब अर्पण कीजै॥ नेत्र लाल भिरकुटी विशाला। चले बिन पैर सुने बिन काना। उनको अपना सर्वस्व दीजे॥
2
पाताल लोक में तेरा वासा। शंकर विघन विनायक नासा। भगतों का सर्व कष्ट हर लिजै॥
3
शीश मणि मुख विषम ज्वाला। दुष्ट जनों का करे निवाला। भगत तेरो अमृत रस पिजे॥
4
वेद पुराण सब महिमा गावें। नारद शारद शीश निवावें। सावल सा से वर तुम दीजे॥
5
नोंवी के दिन ज्योत जगावे। खीर चूरमे का भोग लगावे। रामनिवास तन मन धन सब अर्पण कीजै। आरती श्री नागदेव जी कीजै॥
अर्थ (हिन्दी)
- पंचमी के दिन श्री नागदेव की आरती कीजिए, तन-मन-धन सब अर्पण कीजिए। उनकी आँखें लाल हैं, भौंहें चौड़ी हैं; वे बिना पैरों के चलते हैं और बिना कानों के सुनते हैं — उन्हें अपना सर्वस्व दे दीजिए।
- पाताल लोक में आपका वास है; शंकर और विनायक (गणेश के साथ आप) विघ्नों का नाश करते हैं; भक्तों के सब कष्ट हर लीजिए।
- सिर पर मणि है, मुख में विष की ज्वाला है; आप दुष्टों को अपना निवाला बनाते हैं, और आपका भक्त अमृत-रस पीता है।
- वेद और पुराण सब आपकी महिमा गाते हैं, नारद और शारदा शीश नवाते हैं; "सावल सा से वर तुम दीजे" — (इस पंक्ति का ठीक अर्थ प्रतियों से स्पष्ट नहीं; आशय वरदान माँगने का है।)
- नवमी के दिन ज्योत जगाते हैं और खीर-चूरमे का भोग लगाते हैं; रामनिवास (कहते हैं) — तन-मन-धन सब अर्पण कीजिए और श्री नागदेव जी की आरती कीजिए।
लाभ
- नाग पंचमी की पूजा का समापन।
- सर्प-भय से रक्षा की कामना।
- सर्वस्व-अर्पण का भाव — "तन मन धन सब अर्पण कीजै"।
कब करें पाठ
नाग पंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर · नाग देवता के थान पर पूजा के समय
स्रोत
रचयिता: रामनिवास (अंतिम पद की छाप). jeevanjali.com — श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै (आधार-पाठ) · timesnowhindi.com — नाग पंचमी आरती
