श्री नाग देवता आरती
śrī nāga devatā āratī
Naag Devta Aarti
परिचय
स्रोत: पारंपरिक नाग देवता आरती (नाग पंचमी)
उद्भव / पृष्ठभूमि
नाग देवता सर्प-रूप में पूजित दिव्य देव हैं, जो भगवान शिव के आभूषण व विष्णु की शय्या (शेषनाग) के रूप में पूजनीय हैं। नाग पंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर इनकी पूजा-आरती की जाती है, जिससे सर्प-भय व कालसर्प दोष से रक्षा होती है।
आरती (लिरिक्स)
जय नाग देवता, जय शेष-वासुकि। शिव-गल शोभा पाते, हरि-शय्या रूपी॥
हे नाग देवता, हे शेष व वासुकि, आपकी जय हो! आप शिव के गले की शोभा बढ़ाते हैं और हरि (विष्णु) की शय्या रूप हैं।
शेषनाग पर विष्णु, क्षीरसागर सोहे। पृथ्वी शीश पर धारे, त्रिभुवन मन मोहे॥
शेषनाग पर विष्णु क्षीरसागर में सुशोभित होते हैं; आप अपने शीश पर पृथ्वी को धारण करते हैं — यह रूप तीनों लोकों के मन को मोह लेता है।
नाग पंचमी पूजे, दूध-लावा अर्पित। सर्प-भय सब हरते, कालसर्प से रक्षित॥
नाग पंचमी पर दूध व लावा अर्पित कर पूजा की जाती है; आप सर्प-भय हर लेते हैं और कालसर्प दोष से रक्षा करते हैं।
जो जन तुमको पूजे, संकट सब टारे। वंश-वृद्धि सुख देते, भक्तन के प्यारे॥
जो भक्त आपको पूजता है, उसके सब संकट दूर हो जाते हैं; हे भक्तों के प्यारे, आप वंश-वृद्धि व सुख देते हैं।
नाग देवता आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सर्प-भय से छूटे, सुख-समृद्धि पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से नाग देवता की यह आरती गाता है, वह सर्प-भय से छूट जाता है और सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे नाग देवता, हे शेष व वासुकि, आपकी जय हो! आप शिव के गले की शोभा बढ़ाते हैं और हरि (विष्णु) की शय्या रूप हैं।
- शेषनाग पर विष्णु क्षीरसागर में सुशोभित होते हैं; आप अपने शीश पर पृथ्वी को धारण करते हैं — यह रूप तीनों लोकों के मन को मोह लेता है।
- नाग पंचमी पर दूध व लावा अर्पित कर पूजा की जाती है; आप सर्प-भय हर लेते हैं और कालसर्प दोष से रक्षा करते हैं।
- जो भक्त आपको पूजता है, उसके सब संकट दूर हो जाते हैं; हे भक्तों के प्यारे, आप वंश-वृद्धि व सुख देते हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से नाग देवता की यह आरती गाता है, वह सर्प-भय से छूट जाता है और सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।
लाभ
- सर्प-भय व कालसर्प दोष से रक्षा होती है।
- वंश-वृद्धि, सुख व समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- भय व बाधाओं का नाश होकर मन को शांति मिलती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
नाग देवता (अथवा नाग-प्रतिमा/चित्र) के समक्ष दूध, लावा (खील) व पुष्प अर्पित करें, दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ। नाग पंचमी पर इसका विशेष महत्व है।
