श्री नाग देवता आरती

śrī nāga devatā āratī

Naag Devta Aarti (Nag Panchami)

समय
2 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
नाग पंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी)
उद्देश्य:रक्षा (Protection)सर्प-भय से मुक्ति (Freedom from fear of snakes)समृद्धि (Prosperity)
✓ संपूर्ण

नाग पंचमी पर गाई जाने वाली नाग देवता की लोक-आरती है — "श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै"। इसके पाँच पद नाग देवता का रूप गाते हैं — "नेत्र लाल भिरकुटी विशाला, चले बिन पैर सुने बिन काना" — और अंत में खीर-चूरमे के भोग की बात करते हैं। अंतिम पद में छाप है — "रामनिवास"।

परिचय

स्रोत: "श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै" — नाग पंचमी की लोक-आरती; छाप "रामनिवास"

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री नाग देवता आरती
IASTśrī nāga devatā āratī
मूल स्रोत"श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै" — नाग पंचमी की लोक-आरती; छाप "रामनिवास"
शुभ दिननाग पंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी)
पाठ समय2 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती किसी ग्रंथ की नहीं, गाँव की पूजा की आरती है — इसलिए इसमें खीर-चूरमे का भोग और ज्योत का दिन भी है।

नाग का रूप (पद 1). "नेत्र लाल भिरकुटी विशाला, चले बिन पैर सुने बिन काना" — लाल आँखें, चौड़ी भौंहें; बिना पैरों के चलते हैं और बिना कानों के सुनते हैं।

पाताल (पद 2). "पाताल लोक में तेरा वासा" — नागों का वास पाताल में है।

मणि और विष (पद 3). "शीश मणि मुख विषम ज्वाला" — सिर पर मणि, मुख में विष की ज्वाला; दुष्टों का नाश करते हैं, और भक्त अमृत-रस पीता है।

भोग (पद 5). "नोंवी के दिन ज्योत जगावे, खीर चूरमे का भोग लगावे" — नवमी के दिन ज्योत जगाना और खीर-चूरमे का भोग — और छाप: "रामनिवास तन मन धन सब अर्पण कीजै"।

आरती (लिरिक्स)

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श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै। तन मन धन सब अर्पण कीजै॥ नेत्र लाल भिरकुटी विशाला। चले बिन पैर सुने बिन काना। उनको अपना सर्वस्व दीजे॥

पंचमी के दिन श्री नागदेव की आरती कीजिए, तन-मन-धन सब अर्पण कीजिए। उनकी आँखें लाल हैं, भौंहें चौड़ी हैं; वे बिना पैरों के चलते हैं और बिना कानों के सुनते हैं — उन्हें अपना सर्वस्व दे दीजिए।

पाताल लोक में तेरा वासा। शंकर विघन विनायक नासा। भगतों का सर्व कष्ट हर लिजै॥

पाताल लोक में आपका वास है; शंकर और विनायक (गणेश के साथ आप) विघ्नों का नाश करते हैं; भक्तों के सब कष्ट हर लीजिए।

शीश मणि मुख विषम ज्वाला। दुष्ट जनों का करे निवाला। भगत तेरो अमृत रस पिजे॥

सिर पर मणि है, मुख में विष की ज्वाला है; आप दुष्टों को अपना निवाला बनाते हैं, और आपका भक्त अमृत-रस पीता है।

वेद पुराण सब महिमा गावें। नारद शारद शीश निवावें। सावल सा से वर तुम दीजे॥

वेद और पुराण सब आपकी महिमा गाते हैं, नारद और शारदा शीश नवाते हैं; "सावल सा से वर तुम दीजे" — (इस पंक्ति का ठीक अर्थ प्रतियों से स्पष्ट नहीं; आशय वरदान माँगने का है।)

नोंवी के दिन ज्योत जगावे। खीर चूरमे का भोग लगावे। रामनिवास तन मन धन सब अर्पण कीजै। आरती श्री नागदेव जी कीजै॥

नवमी के दिन ज्योत जगाते हैं और खीर-चूरमे का भोग लगाते हैं; रामनिवास (कहते हैं) — तन-मन-धन सब अर्पण कीजिए और श्री नागदेव जी की आरती कीजिए।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. पंचमी के दिन श्री नागदेव की आरती कीजिए, तन-मन-धन सब अर्पण कीजिए। उनकी आँखें लाल हैं, भौंहें चौड़ी हैं; वे बिना पैरों के चलते हैं और बिना कानों के सुनते हैं — उन्हें अपना सर्वस्व दे दीजिए।
  2. पाताल लोक में आपका वास है; शंकर और विनायक (गणेश के साथ आप) विघ्नों का नाश करते हैं; भक्तों के सब कष्ट हर लीजिए।
  3. सिर पर मणि है, मुख में विष की ज्वाला है; आप दुष्टों को अपना निवाला बनाते हैं, और आपका भक्त अमृत-रस पीता है।
  4. वेद और पुराण सब आपकी महिमा गाते हैं, नारद और शारदा शीश नवाते हैं; "सावल सा से वर तुम दीजे" — (इस पंक्ति का ठीक अर्थ प्रतियों से स्पष्ट नहीं; आशय वरदान माँगने का है।)
  5. नवमी के दिन ज्योत जगाते हैं और खीर-चूरमे का भोग लगाते हैं; रामनिवास (कहते हैं) — तन-मन-धन सब अर्पण कीजिए और श्री नागदेव जी की आरती कीजिए।

लाभ

  • नाग पंचमी की पूजा का समापन।
  • सर्प-भय से रक्षा की कामना।
  • सर्वस्व-अर्पण का भाव — "तन मन धन सब अर्पण कीजै"।

कब करें पाठ

नाग पंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) परनाग देवता के थान पर पूजा के समय

पाठ विधि

नाग पंचमी को नाग देवता के चित्र या थान के समक्ष दीपक जलाएँ, और परंपरा अनुसार दूध और खीर-चूरमे का भोग रखें — अंतिम पद यही भोग बताता है। टेक "श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै" आरंभ में गाएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराjeevanjali.com — श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै (आधार-पाठ) · timesnowhindi.com — नाग पंचमी आरती
रचयितारामनिवास (अंतिम पद की छाप)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

श्री नाग देवता आरती — सामान्य प्रश्न