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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री नामदेव आरती

आरती

पाठ

1

जय जय संत नामदेव, विठ्ठल के प्यारे। नाम-भक्ति सिखलाई, तुम जग के तारे॥

2

पंढरपुर के वासी, विठोबा गुण गाए। भाव-भक्ति के बल पर, प्रभु को रिझाए॥

3

अभंग रचे अनेक, हरि-गुण बरसाए। जाति-भेद को तजकर, समता दरसाए॥

4

नाम-सुमिरन की महिमा, जग को समझाई। भक्तन के मन-मंदिर, नामदेव समाई॥

5

नामदेव जी की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। नाम-भक्ति रस पावे, सहज शान्ति पावे॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे संत नामदेव, हे विठ्ठल के प्यारे, आपकी जय हो! आपने नाम-भक्ति सिखाई और जगत को तारा।
  2. पंढरपुर के निवासी, आपने विठोबा (विठ्ठल) के गुण गाए; भाव व भक्ति के बल पर आपने प्रभु को प्रसन्न कर लिया।
  3. आपने अनेक अभंग (भक्ति-पद) रचे और हरि-गुणों की वर्षा की; जाति-भेद त्यागकर समता का आदर्श दिखाया।
  4. आपने नाम-स्मरण की महिमा जगत को समझाई; हे नामदेव, आप भक्तों के मन-मंदिर में समाए हुए हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से संत नामदेव की यह आरती गाता है, वह नाम-भक्ति का रस तथा सहज शांति प्राप्त करता है।

लाभ

  • नाम-स्मरण व भक्ति का भाव गहरा होता है।
  • मन को सहज शांति व समता की प्राप्ति होती है।
  • भक्ति-रस व आध्यात्मिक उन्नति बढ़ती है।

कब करें पाठ

नामदेव जयंती पर · आषाढ़ी/कार्तिकी एकादशी (वारी) पर · नित्य संध्या व सत्संग में

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक संत आरती संग्रह

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