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लिपि:
॥ श्री ॥
श्री संत नामदेव आरती
आरती
पाठ
जय जयाजी भक्तराया। जिवलग नामया। आरती ओवाळितां। चित्त पालटे काया॥
1
जन्मता पांडुरंगे। जिव्हेवरी लिहिले। शतकोटी अभंग। प्रमाण कवित्व रचिले॥
2
घ्यावया भक्तिसुख। पांडुरंगे अवतार। धरुनियां तीर्थमिषें। केला जगाचा उद्धार॥
3
प्रत्यक्ष प्रचीती हे। वाळवंट परिस केला। हारपली विषमता। द्वैतबुद्धी निरसली॥
4
समाधि महाद्वारी। श्रीविठ्ठलचरणी। आरती ओवाळितो। परिसा कर जोडुनी॥
अर्थ (हिन्दी)
- (ध्रुवपद) हे भक्तों के राजा, हे प्यारे नामदेव, आपकी जय हो, जय हो! आपकी आरती उतारते ही चित्त और काया बदल जाते हैं।
- जन्मते ही पांडुरंग ने (आपकी) जीभ पर लिख दिया; (और आपने) सौ करोड़ अभंगों का प्रमाण-काव्य रचा।
- भक्ति का सुख लेने के लिए पांडुरंग ने अवतार लिया; तीर्थ-यात्रा के बहाने (आपने) जगत का उद्धार किया।
- यह प्रत्यक्ष अनुभव है — (आपने) रेतीले तट को पारस बना दिया; विषमता मिट गई और द्वैत-बुद्धि दूर हो गई।
- (आपकी) समाधि श्रीविठ्ठल के चरणों में, महाद्वार पर है; परिसा हाथ जोड़कर (आपकी) आरती उतारता है।
लाभ
- संत नामदेव का स्मरण — "जय जयाजी भक्तराया, जिवलग नामया"।
- चित्त का बदलना — "आरती ओवाळितां, चित्त पालटे काया"।
- भेद-बुद्धि का मिटना — "हारपली विषमता, द्वैतबुद्धी निरसली" (पद 3)।
कब करें पाठ
एकादशी को · आषाढ़ी और कार्तिकी वारी में · विट्ठल-पूजन के बाद
स्रोत
रचयिता: परिसा (अंतिम पद की छाप). aartichalisa.com — संत नामदेव जी की आरती (आधार-पाठ) · warkaree-sampraday.blogspot.com — आरती संग्रह: श्री संत नामदेवांची आरती · marathi-unlimited.in — आरती संग्रह: संत नामदेवांची आरती
