श्री संत नामदेव आरती

śrī saṃta nāmadeva āratī

Sant Namdev Aarti (Jai Jayaji Bhaktaraya — Marathi)

समय
2 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
एकादशी; आषाढ़ी-कार्तिकी वारी
उद्देश्य:आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual growth)भक्ति (Devotion)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण

संत नामदेव की प्रचलित आरती मराठी में है — "जय जयाजी भक्तराया, जिवलग नामया"। इसमें ध्रुवपद और चार पद हैं। आरती कहती है कि पांडुरंग ने जन्म के समय ही नामदेव की जीभ पर लिख दिया था, और उन्होंने "शतकोटी अभंग" रचे। अंतिम पद में छाप है — "परिसा कर जोडुनी"।

परिचय

स्रोत: "जय जयाजी भक्तराया, जिवलग नामया" — वारकरी परंपरा की मराठी आरती; अंतिम पद में छाप "परिसा"

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री संत नामदेव आरती
IASTśrī saṃta nāmadeva āratī
मूल स्रोत"जय जयाजी भक्तराया, जिवलग नामया" — वारकरी परंपरा की मराठी आरती; अंतिम पद में छाप "परिसा"
शुभ दिनएकादशी; आषाढ़ी-कार्तिकी वारी
पाठ समय2 मिनट
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

संत नामदेव पंढरपुर के विट्ठल के अनन्य भक्त थे; वारकरी परंपरा उनकी आरती में उन्हें भक्तराया — भक्तों का राजा — कहती है।

जीभ पर लिखा (पद 1). "जन्मता पांडुरंगे जिव्हेवरी लिहिले" — जन्मते ही पांडुरंग ने (नामदेव की) जीभ पर लिख दिया; और उन्होंने "शतकोटी अभंग" — सौ करोड़ अभंग — का प्रमाण रचा।

तीर्थ के बहाने (पद 2). "घ्यावया भक्तिसुख पांडुरंगे अवतार" — भक्ति का सुख लेने के लिए (नामदेव के रूप में) अवतार, और तीर्थ के बहाने जगत का उद्धार।

वाळवंट परिस (पद 3). "प्रत्यक्ष प्रचीती हे, वाळवंट परिस केला" — प्रत्यक्ष अनुभव: (चंद्रभागा का) रेतीला तट पारस बना दिया; विषमता मिट गई और द्वैत-बुद्धि दूर हुई।

समाधि (पद 4). "समाधि महाद्वारी श्रीविठ्ठलचरणी" — श्रीविठ्ठल के चरणों में, (मंदिर के) महाद्वार पर समाधि; और वहीं परिसा हाथ जोड़कर आरती उतारते हैं।

आरती (लिरिक्स)

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जय जयाजी भक्तराया। जिवलग नामया। आरती ओवाळितां। चित्त पालटे काया॥

(ध्रुवपद) हे भक्तों के राजा, हे प्यारे नामदेव, आपकी जय हो, जय हो! आपकी आरती उतारते ही चित्त और काया बदल जाते हैं।

जन्मता पांडुरंगे। जिव्हेवरी लिहिले। शतकोटी अभंग। प्रमाण कवित्व रचिले॥

जन्मते ही पांडुरंग ने (आपकी) जीभ पर लिख दिया; (और आपने) सौ करोड़ अभंगों का प्रमाण-काव्य रचा।

घ्यावया भक्तिसुख। पांडुरंगे अवतार। धरुनियां तीर्थमिषें। केला जगाचा उद्धार॥

भक्ति का सुख लेने के लिए पांडुरंग ने अवतार लिया; तीर्थ-यात्रा के बहाने (आपने) जगत का उद्धार किया।

प्रत्यक्ष प्रचीती हे। वाळवंट परिस केला। हारपली विषमता। द्वैतबुद्धी निरसली॥

यह प्रत्यक्ष अनुभव है — (आपने) रेतीले तट को पारस बना दिया; विषमता मिट गई और द्वैत-बुद्धि दूर हो गई।

समाधि महाद्वारी। श्रीविठ्ठलचरणी। आरती ओवाळितो। परिसा कर जोडुनी॥

(आपकी) समाधि श्रीविठ्ठल के चरणों में, महाद्वार पर है; परिसा हाथ जोड़कर (आपकी) आरती उतारता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. (ध्रुवपद) हे भक्तों के राजा, हे प्यारे नामदेव, आपकी जय हो, जय हो! आपकी आरती उतारते ही चित्त और काया बदल जाते हैं।
  2. जन्मते ही पांडुरंग ने (आपकी) जीभ पर लिख दिया; (और आपने) सौ करोड़ अभंगों का प्रमाण-काव्य रचा।
  3. भक्ति का सुख लेने के लिए पांडुरंग ने अवतार लिया; तीर्थ-यात्रा के बहाने (आपने) जगत का उद्धार किया।
  4. यह प्रत्यक्ष अनुभव है — (आपने) रेतीले तट को पारस बना दिया; विषमता मिट गई और द्वैत-बुद्धि दूर हो गई।
  5. (आपकी) समाधि श्रीविठ्ठल के चरणों में, महाद्वार पर है; परिसा हाथ जोड़कर (आपकी) आरती उतारता है।

लाभ

  • संत नामदेव का स्मरण — "जय जयाजी भक्तराया, जिवलग नामया"।
  • चित्त का बदलना — "आरती ओवाळितां, चित्त पालटे काया"।
  • भेद-बुद्धि का मिटना — "हारपली विषमता, द्वैतबुद्धी निरसली" (पद 3)।

कब करें पाठ

एकादशी कोआषाढ़ी और कार्तिकी वारी मेंविट्ठल-पूजन के बाद

पाठ विधि

विट्ठल-रखुमाई और संत नामदेव के चित्र के समक्ष दीपक जलाएँ। ध्रुवपद "जय जयाजी भक्तराया, जिवलग नामया" आरंभ में और हर पद के बाद गाएँ। आरती मराठी में है; हर पद का हिन्दी अर्थ साथ दिया गया है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराaartichalisa.com — संत नामदेव जी की आरती (आधार-पाठ) · warkaree-sampraday.blogspot.com — आरती संग्रह: श्री संत नामदेवांची आरती · marathi-unlimited.in — आरती संग्रह: संत नामदेवांची आरती
रचयितापरिसा (अंतिम पद की छाप)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

श्री संत नामदेव आरती — सामान्य प्रश्न

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