समय
2 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
एकादशी; आषाढ़ी-कार्तिकी वारी
उद्देश्य:आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual growth)भक्ति (Devotion)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण
संत नामदेव की प्रचलित आरती मराठी में है — "जय जयाजी भक्तराया, जिवलग नामया"। इसमें ध्रुवपद और चार पद हैं। आरती कहती है कि पांडुरंग ने जन्म के समय ही नामदेव की जीभ पर लिख दिया था, और उन्होंने "शतकोटी अभंग" रचे। अंतिम पद में छाप है — "परिसा कर जोडुनी"।
FAQ
श्री संत नामदेव आरती — सामान्य प्रश्न
वारकरी परंपरा में "जय जयाजी भक्तराया, जिवलग नामया" गाई जाती है — मराठी में, ध्रुवपद और चार पद। आरती चालीसा, वारकरी संप्रदाय और मराठी अनलिमिटेड — तीनों प्रतियों में यह मिलती है।
शतकोटी यानी सौ करोड़। पहला पद कहता है — "शतकोटी अभंग, प्रमाण कवित्व रचिले": नामदेव ने सौ करोड़ अभंगों का प्रमाण-काव्य रचा।
अंतिम पद में छाप है — "आरती ओवाळितो, परिसा कर जोडुनी"। प्रतियों में इसके अलावा रचयिता के बारे में जानकारी नहीं।
तीन प्रकाशित प्रतियों से — आरती चालीसा (आधार), वारकरी संप्रदाय का आरती संग्रह, और मराठी अनलिमिटेड। दो जगह आधार की छपाई-भूल दूसरी प्रतियों से ठीक की गई।
पर्व
