श्री नामदेव आरती
śrī nāmadeva āratī
Sant Namdev Aarti
परिचय
स्रोत: पारंपरिक संत नामदेव आरती
उद्भव / पृष्ठभूमि
संत नामदेव महाराष्ट्र के वारकरी सम्प्रदाय के महान संत व विठोबा (पंढरपुर) के परम भक्त हैं, जिनकी वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में भी संकलित है। यह आरती नामदेव जयंती व विठ्ठल-भक्ति सत्संग में गाई जाती है।
आरती (लिरिक्स)
जय जय संत नामदेव, विठ्ठल के प्यारे। नाम-भक्ति सिखलाई, तुम जग के तारे॥
हे संत नामदेव, हे विठ्ठल के प्यारे, आपकी जय हो! आपने नाम-भक्ति सिखाई और जगत को तारा।
पंढरपुर के वासी, विठोबा गुण गाए। भाव-भक्ति के बल पर, प्रभु को रिझाए॥
पंढरपुर के निवासी, आपने विठोबा (विठ्ठल) के गुण गाए; भाव व भक्ति के बल पर आपने प्रभु को प्रसन्न कर लिया।
अभंग रचे अनेक, हरि-गुण बरसाए। जाति-भेद को तजकर, समता दरसाए॥
आपने अनेक अभंग (भक्ति-पद) रचे और हरि-गुणों की वर्षा की; जाति-भेद त्यागकर समता का आदर्श दिखाया।
नाम-सुमिरन की महिमा, जग को समझाई। भक्तन के मन-मंदिर, नामदेव समाई॥
आपने नाम-स्मरण की महिमा जगत को समझाई; हे नामदेव, आप भक्तों के मन-मंदिर में समाए हुए हैं।
नामदेव जी की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। नाम-भक्ति रस पावे, सहज शान्ति पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से संत नामदेव की यह आरती गाता है, वह नाम-भक्ति का रस तथा सहज शांति प्राप्त करता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे संत नामदेव, हे विठ्ठल के प्यारे, आपकी जय हो! आपने नाम-भक्ति सिखाई और जगत को तारा।
- पंढरपुर के निवासी, आपने विठोबा (विठ्ठल) के गुण गाए; भाव व भक्ति के बल पर आपने प्रभु को प्रसन्न कर लिया।
- आपने अनेक अभंग (भक्ति-पद) रचे और हरि-गुणों की वर्षा की; जाति-भेद त्यागकर समता का आदर्श दिखाया।
- आपने नाम-स्मरण की महिमा जगत को समझाई; हे नामदेव, आप भक्तों के मन-मंदिर में समाए हुए हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से संत नामदेव की यह आरती गाता है, वह नाम-भक्ति का रस तथा सहज शांति प्राप्त करता है।
लाभ
- नाम-स्मरण व भक्ति का भाव गहरा होता है।
- मन को सहज शांति व समता की प्राप्ति होती है।
- भक्ति-रस व आध्यात्मिक उन्नति बढ़ती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
भगवान विठ्ठल व संत नामदेव के समक्ष तुलसी व पुष्प अर्पित करें, अभंग व नाम-कीर्तन करते हुए श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ। एकादशी व वारकरी सत्संग में इसका विशेष महत्व है।
