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लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ नन्दनन्दनाय नमः
मंत्र · श्री कृष्ण
पाठ
1
ॐ नन्दनन्दनाय नमः॥
अर्थ (हिन्दी)
- नन्दनन्दन को नमस्कार। जो नन्द बाबा के पुत्र हैं और जो सबको आनंद देने वाले हैं — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ
- व्रज-भक्ति परंपरा में वात्सल्य-भाव का प्रमुख नाम माना जाता है।
- परंपरा में इसे संतान-सुख व पारिवारिक स्नेह से जोड़ा जाता है।
- मन में सहज आनंद व निश्छलता जगने की मान्यता है।
- नन्दोत्सव व जन्माष्टमी की उपासना में इसका जप विशेष है।
कब करें पाठ
जन्माष्टमी व नन्दोत्सव पर · बुधवार व एकादशी को · प्रातः-संध्या नित्य पूजा में · संतान-कल्याण के संकल्प के साथ
स्रोत
श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — सम-अर्थी नाम 14 "ॐ नन्दगोपप्रियात्मजाय नमः" · व्रज-भक्ति परंपरा — संबोधन "नन्दनन्दन" · नोट: ठीक यह शब्द-रूप शतनामावली व सहस्रनामावली की सूचियों में नहीं मिला
