श्री नृसिंह चालीसा
पाठ
गणपति-गुरु-पद वंदना, करूँ हृदय धरि ध्यान। नृसिंह प्रभु की वंदना, देहु अभय वरदान॥
जय जय नृसिंह भगवाना। भक्त-वत्सल जग-कल्याणा॥
नर-हरि रूप अनूपम धारा। अर्ध सिंह नर देह तुम्हारा॥
विष्णु-अवतार तुम कहलाते। भक्तन हेतु प्रगट हो जाते॥
खम्भ फाड़ प्रगट तुम भये। भक्त प्रह्लाद उबार लये॥
हिरण्यकश्यप का नाश कराया। धर्म-ध्वजा जग में फहराया॥
न दिन न रात न भीतर बाहर। वध किया तुमने दहलीज पर॥
न शस्त्र न अस्त्र से मारा। नख से ही उसका वध डारा॥
उग्र रूप अति भीषण भारी। भक्तन हेतु दयालु मुरारी॥
जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
शत्रु-संकट सब टारन हारे। भक्तन के तुम सदा सहारे॥
भूत-प्रेत बाधा सब टारो। नजर-टोना सब संहारो॥
काल-भय से तुम रखवाले। हर लेते सब विपदा-जाले॥
जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥
नृसिंह जयंती व्रत जो धारे। सकल मनोरथ प्रभु ते सारे॥
जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-समृद्धि घर में लाते॥
दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥
साहस-बल तुम भक्तन देते। निर्भयता का वर तुम देते॥
लक्ष्मी-नृसिंह संग विराजे। भक्तन के सब संकट भाजे॥
जो नर निशदिन ध्यान लगावै। नृसिंह-कृपा सहज वह पावै॥
भूत-पिशाच निकट नहिं आवैं। जहँ नृसिंह-नाम सुनावैं॥
मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥
जो श्रद्धा से भोग चढ़ावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥
जो यह नृसिंह चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥
नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा नृसिंह की होई॥
मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥
नृसिंह-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥
रात्रि-काल जो पाठ करावै। भय-बाधा सब दूर भगावै॥
जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत नृसिंह देवा॥
संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥
महिमा तुम्हरी अति अपारा। वेद-पुराण करत विस्तारा॥
भक्तन की लज्जा तुम राखो। प्रह्लाद-सम सब को निबाहो॥
घोर विपत्ति में जो पुकारे। तुरत दौड़ कर प्रभु उबारे॥
अहंकार का नाश कराते। भक्ति-मार्ग जग को दिखलाते॥
घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥
नृसिंह-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥
जो जन नृसिंह गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥
सुख-समृद्धि घर में आवै। भक्ति-शक्ति-बल सब बढ़ावै॥
भय-संकट सब दूर हटावै। नृसिंह-नाम जो जन ध्यावै॥
जय जय जय नृसिंह भयहारी। रक्षा करो प्रभु शरण हमारी॥
नृसिंह चालीसा सरल यह, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-संकट सब दूर हो, प्रभु की कृपा बरसाय॥
अर्थ (हिन्दी)
- गणपति व गुरु के चरणों की वंदना कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं नृसिंह प्रभु की वंदना करता हूँ; हे प्रभु, अभय वरदान दीजिए।
- हे नृसिंह भगवान, आपकी जय हो; आप भक्त-वत्सल व जगत का कल्याण करने वाले हैं।
- आपने अनुपम नर-हरि रूप धारण किया; आपका शरीर आधा सिंह व आधा मनुष्य है।
- आप विष्णु के अवतार कहलाते हैं और भक्तों के लिए प्रकट हो जाते हैं।
- आप खम्भे को फाड़कर प्रकट हुए और भक्त प्रह्लाद का उद्धार किया।
- आपने हिरण्यकशिपु का नाश किया और जगत में धर्म की ध्वजा फहराई।
- न दिन में, न रात में, न भीतर, न बाहर — आपने उसका वध देहरी पर किया (वरदान की रक्षा करते हुए)।
- न शस्त्र से, न अस्त्र से — आपने अपने नखों से ही उसका वध कर डाला।
- आपका उग्र रूप अति भीषण है; किन्तु भक्तों के लिए आप दयालु मुरारी (विष्णु) हैं।
- जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- आप शत्रु व संकट सब दूर करने वाले हैं; आप भक्तों के सदा सहारे हैं।
- आप भूत-प्रेत बाधा दूर करते हैं और नजर-टोना आदि का नाश करते हैं।
- आप काल के भय से रक्षा करते हैं और विपत्तियों के जाल को हर लेते हैं।
- जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
- जो नृसिंह जयंती का व्रत धारण करता है, प्रभु उसके समस्त मनोरथ पूर्ण करते हैं।
- जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
- आप भक्तों को साहस व बल देते हैं तथा निर्भयता का वरदान देते हैं।
- लक्ष्मी जी आपके (नृसिंह के) संग विराजती हैं; भक्तों के सब संकट भाग जाते हैं।
- जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही नृसिंह-कृपा प्राप्त करता है।
- जहाँ नृसिंह-नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत-पिशाच निकट नहीं आते।
- आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
- जो श्रद्धा से भोग चढ़ाता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
- जो यह नृसिंह चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
- जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर नृसिंह भगवान की कृपा होती है।
- सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जिन पर नृसिंह की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
- जो रात्रि-काल में पाठ करता है, वह भय व बाधा सब दूर भगा देता है।
- जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर नृसिंह देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
- आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
- आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।
- आप भक्तों की लाज रखते हैं; प्रह्लाद के समान सबको निभा (पार लगा) देते हैं।
- घोर विपत्ति में जो पुकारता है, हे प्रभु, आप तुरंत दौड़कर उसका उद्धार करते हैं।
- आप अहंकार का नाश करते हैं और जगत को भक्ति का मार्ग दिखाते हैं।
- घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
- जो जन नृसिंह-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
- जो जन नृसिंह के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
- घर में सुख-समृद्धि आती है और भक्ति, शक्ति व बल सब बढ़ता है।
- जो जन नृसिंह-नाम का ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
- हे भय हरने वाले नृसिंह, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
- जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल नृसिंह चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और प्रभु की कृपा बरसती है।
लाभ
- भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
- संकट व विपत्ति का शीघ्र नाश होता है।
- भूत-प्रेत, तंत्र-बाधा व नजर-दोष का नाश होता है।
- भक्ति, साहस व आत्मबल में वृद्धि होती है।
कब करें पाठ
नृसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) पर · शनिवार व एकादशी को · भय या संकट के समय
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक नृसिंह चालीसा · गीता प्रेस, गोरखपुर — चालीसा संग्रह
