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लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ नीलकण्ठाय नमः
मंत्र · श्री शिव
पाठ
1
ॐ नीलकण्ठाय नमः॥
अर्थ (हिन्दी)
- नीलकण्ठ शिव को नमस्कार। जिन्होंने समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष कंठ में धारण कर सृष्टि की रक्षा की और इसी से जिनका कंठ नीला हो गया — उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ
- परंपरा में इसे विष, रोग व शारीरिक कष्टों के शमन से जोड़ा जाता है।
- कंठ व वाणी संबंधी उपासना में इसका जप प्रचलित है।
- क्रोध व मानसिक ताप के शीतल होने की मान्यता है।
- श्रावण मास व सोमवार व्रत में इसका जप विशेष कहा गया है।
कब करें पाठ
श्रावण मास में प्रतिदिन · सोमवार व प्रदोष काल में · महाशिवरात्रि पर · रोग या मानसिक अशांति के समय
स्रोत
शिव शतनामावली — नाम "नीलकण्ठ" क्रम 3 (drikpanchang) · शिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — "शितिकण्ठाय" (21), "नीललोहिताय" (9) · समुद्र मंथन प्रसंग — श्रीमद्भागवत महापुराण, अष्टम स्कन्ध
