ॐ नीलकण्ठाय नमः

oṃ nīlakaṇṭhāya namaḥ

Neelkanth Mantra (Om Neelkanthaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सोमवार, प्रदोष व श्रावण मास
उद्देश्य:स्वास्थ्य (Health)रक्षा (Protection)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ नीलकण्ठाय नमः का अर्थ है “नीले कंठ वाले शिव को नमस्कार”। समुद्र मंथन में निकला हलाहल विष शिव ने कंठ में धारण किया, इसी से यह नाम पड़ा। परंपरा में इसे विष, रोग व मानसिक ताप के शमन से जोड़ा जाता है। श्रावण मास व सोमवार इसके जप के लिए विशेष माने जाते हैं।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: शिव शतनामावली — नाम "नीलकण्ठ" (समुद्र मंथन प्रसंग)

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ नीलकण्ठाय नमः
IASToṃ nīlakaṇṭhāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री शिव
मूल स्रोतशिव शतनामावली — नाम "नीलकण्ठ" (समुद्र मंथन प्रसंग)
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनसोमवार, प्रदोष व श्रावण मास
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

नीलकण्ठ नाम शिव को समुद्र मंथन के प्रसंग से मिला। जब देवों और असुरों के मंथन से सबसे पहले हलाहल विष निकला और उसकी ज्वाला से तीनों लोक व्याकुल हो उठे, तब शिव ने वह विष स्वयं पी लिया। माता पार्वती ने उसे कंठ से नीचे नहीं उतरने दिया, जिससे विष वहीं ठहर गया और शिव का कंठ नीला पड़ गया — इसी से वे "नीलकण्ठ" कहलाए।

यह नाम केवल एक घटना का स्मरण नहीं, एक भाव का प्रतीक माना जाता है — जो दूसरों का विष अपने भीतर धारण कर ले, वही महादेव है। इसी कारण परंपरा में इस नाम-मंत्र को विष, रोग और नकारात्मकता के शमन से जोड़ा जाता है। श्रावण मास की उपासना का सीधा संबंध इसी प्रसंग से बताया जाता है।

मंत्र

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ॐ नीलकण्ठाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ नीलकण्ठाय नमः॥

oṃ nīlakaṇṭhāya namaḥ ||

Om Neelkanthaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "नी" दीर्घ है — "नि" नहीं। "कण्ठ" में मूर्धन्य "ण" और महाप्राण "ठ" दोनों स्पष्ट होने चाहिए। हिन्दी में यह प्रायः "नीलकंठ" (अनुस्वार सहित) लिखा जाता है, संस्कृत में "नीलकण्ठ" — उच्चारण दोनों का एक ही है। मंत्र को शीतल व स्थिर स्वर में दोहराएँ।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
नीलनीला
कण्ठगला
नीलकण्ठायनीले कंठ वाले (शिव) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. नीलकण्ठ शिव को नमस्कार। जिन्होंने समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष कंठ में धारण कर सृष्टि की रक्षा की और इसी से जिनका कंठ नीला हो गया — उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे विष, रोग व शारीरिक कष्टों के शमन से जोड़ा जाता है।
  • कंठ व वाणी संबंधी उपासना में इसका जप प्रचलित है।
  • क्रोध व मानसिक ताप के शीतल होने की मान्यता है।
  • श्रावण मास व सोमवार व्रत में इसका जप विशेष कहा गया है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: प्रातः व प्रदोष काल

जप का उत्तम समय

श्रावण मास में प्रतिदिनसोमवार व प्रदोष काल मेंमहाशिवरात्रि पररोग या मानसिक अशांति के समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शिवलिंग पर शीतल जल, दूध व बिल्वपत्र अर्पित कर रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। श्रावण मास में जलाभिषेक के साथ इसका जप विशेष माना जाता है। जप के समय समुद्र मंथन के प्रसंग का स्मरण करते हुए शिव के त्याग-भाव पर मन टिकाने की परंपरा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराशिव शतनामावली — नाम "नीलकण्ठ" क्रम 3 (drikpanchang) · शिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — "शितिकण्ठाय" (21), "नीललोहिताय" (9) · समुद्र मंथन प्रसंग — श्रीमद्भागवत महापुराण, अष्टम स्कन्ध
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
संबंधित वारसोमवार
मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
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ॐ नीलकण्ठाय नमः — सामान्य प्रश्न

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