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लिपि:
॥ श्री ॥

ॐ (प्रणव मंत्र)

मंत्र

पाठ

1

ॐ॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. ॐ प्रणव है — परब्रह्म का मूल नाद। इसमें अ-उ-म् तीन ध्वनियाँ हैं जो सृष्टि, स्थिति व लय तथा जाग्रत-स्वप्न-सुषुप्ति का प्रतीक हैं। यह समस्त मंत्रों का बीज माना जाता है।

लाभ

  • मन को गहन शांति व एकाग्रता मिलती है।
  • ध्यान व प्राणायाम में सहायता मिलती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा व आध्यात्मिक उन्नति होती है।

कब करें पाठ

प्रातः व संध्या ध्यान में · प्राणायाम के समय · किसी भी मंत्र-जप से पूर्व

स्रोत

वैदिक प्रणव परंपरा · माण्डूक्य उपनिषद्

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