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उच्चारण (Pronunciation)
ॐ॥
oṃ ||
Om.
उच्चारण मार्गदर्शन: "ॐ" को "अ-उ-म्" के रूप में दीर्घ (ओ…म्) उच्चारित करें — अंत में "म्" की नासिक्य गूँज को धीरे-धीरे विलीन होने दें। शांत व गहरे स्वर में दोहराएँ।
शब्द-अर्थ (Word-by-Word)
असृष्टि व जाग्रत अवस्था
उस्थिति व स्वप्न अवस्था
म्लय व सुषुप्ति अवस्था
ॐतीनों का समन्वय — परब्रह्म नाद
अर्थ (हिन्दी)
ॐ प्रणव है — परब्रह्म का मूल नाद। इसमें अ-उ-म् तीन ध्वनियाँ हैं जो सृष्टि, स्थिति व लय तथा जाग्रत-स्वप्न-सुषुप्ति का प्रतीक हैं। यह समस्त मंत्रों का बीज माना जाता है।
लाभ
मन को गहन शांति व एकाग्रता मिलती है।
ध्यान व प्राणायाम में सहायता मिलती है।
सकारात्मक ऊर्जा व आध्यात्मिक उन्नति होती है।
अनुशंसित जप संख्या
जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।
माला: रुद्राक्ष या स्फटिक माला
उत्तम समय: प्रातः व संध्या
जप का उत्तम समय
प्रातः व संध्या ध्यान मेंप्राणायाम के समयकिसी भी मंत्र-जप से पूर्व
जप विधि (चैंटिंग मेथड)
स्वच्छ आसन पर शांत बैठकर आँखें मूँदकर गहरी श्वास के साथ "ॐ" का दीर्घ उच्चारण करें। 11, 21 या 108 बार जप कर ध्यान में स्थिर हों।
प्रामाणिकता व स्रोत
स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरावैदिक प्रणव परंपरा · माण्डूक्य उपनिषद्