ॐ (प्रणव मंत्र)

oṃ (praṇava mantra)

Om (Pranava Mantra)

समय
20 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
नित्य
उद्देश्य:शांति (Peace)ध्यान (Meditation)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण वैदिक मंत्र

ॐ (प्रणव मंत्र) एक वैदिक मंत्र है — वैदिक प्रणव — समस्त मंत्रों का मूल बीज। ॐ प्रणव है — परब्रह्म का मूल नाद। परंपरा में इसे मुख्यतः शांति, ध्यान, आध्यात्मिक उन्नति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।

परिचय

स्रोत: वैदिक प्रणव — समस्त मंत्रों का मूल बीज

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ (प्रणव मंत्र)
IASToṃ (praṇava mantra)
प्रकारवैदिक मंत्र
मूल स्रोतवैदिक प्रणव — समस्त मंत्रों का मूल बीज
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष या स्फटिक माला
शुभ दिननित्य
पाठ समय20 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

ॐ (प्रणव मंत्र) वैदिक प्रणव — समस्त मंत्रों का मूल बीज के रूप में जाना जाता है। ॐ प्रणव है — परब्रह्म का मूल नाद। इसमें अ-उ-म् तीन ध्वनियाँ हैं जो सृष्टि, स्थिति व लय तथा जाग्रत-स्वप्न-सुषुप्ति का प्रतीक हैं। यह समस्त मंत्रों का बीज माना जाता है।

मंत्र के प्रत्येक पद का अपना अर्थ है: अ — सृष्टि व जाग्रत अवस्था; उ — स्थिति व स्वप्न अवस्था; म् — लय व सुषुप्ति अवस्था; ॐ — तीनों का समन्वय — परब्रह्म नाद। इन्हीं पदों के मेल से पूरे मंत्र का भाव बनता है, इसलिए जप करते समय इनका स्मरण रखना उपयोगी कहा जाता है।

यह वैदिक मंत्र है। वैदिक मंत्रों में स्वर का भी विधान होता है, इसलिए परंपरा में इन्हें गुरु के मुख से सीखना श्रेष्ठ कहा जाता है।

परंपरा में इसका जप 108 बार — एक माला — कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष या स्फटिक माला बताई जाती है। इसके लिए नित्य विशेष कहे जाते हैं। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि संख्या से अधिक महत्व नियमितता का है।

मंत्र

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ॐ॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ॥

oṃ ||

Om.

उच्चारण मार्गदर्शन: "ॐ" को "अ-उ-म्" के रूप में दीर्घ (ओ…म्) उच्चारित करें — अंत में "म्" की नासिक्य गूँज को धीरे-धीरे विलीन होने दें। शांत व गहरे स्वर में दोहराएँ।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

असृष्टि व जाग्रत अवस्था
उस्थिति व स्वप्न अवस्था
म्लय व सुषुप्ति अवस्था
ॐतीनों का समन्वय — परब्रह्म नाद

अर्थ (हिन्दी)

  1. ॐ प्रणव है — परब्रह्म का मूल नाद। इसमें अ-उ-म् तीन ध्वनियाँ हैं जो सृष्टि, स्थिति व लय तथा जाग्रत-स्वप्न-सुषुप्ति का प्रतीक हैं। यह समस्त मंत्रों का बीज माना जाता है।

लाभ

  • मन को गहन शांति व एकाग्रता मिलती है।
  • ध्यान व प्राणायाम में सहायता मिलती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा व आध्यात्मिक उन्नति होती है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष या स्फटिक माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

प्रातः व संध्या ध्यान मेंप्राणायाम के समयकिसी भी मंत्र-जप से पूर्व

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

स्वच्छ आसन पर शांत बैठकर आँखें मूँदकर गहरी श्वास के साथ "ॐ" का दीर्घ उच्चारण करें। 11, 21 या 108 बार जप कर ध्यान में स्थिर हों।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरावैदिक प्रणव परंपरा · माण्डूक्य उपनिषद्
अंतिम अद्यतनजून 2026

ॐ (प्रणव मंत्र) — सामान्य प्रश्न