वापस
लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ पार्थसारथये नमः
मंत्र · श्री कृष्ण
पाठ
1
ॐ पार्थसारथये नमः॥
अर्थ (हिन्दी)
- पार्थसारथि को नमस्कार। जो अर्जुन के सारथि बने और कुरुक्षेत्र में रथ खड़ा कर उसे गीता का उपदेश दिया — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ
- परंपरा में इसे कठिन निर्णय व दुविधा में मार्गदर्शन से जोड़ा जाता है।
- कर्तव्य-पालन का भाव — गीता का मूल उपदेश इसी नाम से जुड़ा है।
- संघर्ष व प्रतिस्पर्धा में स्थिरता आने की मान्यता है।
- गीता जयंती व गीता-पाठ के आरंभ में इसका जप प्रचलित है।
कब करें पाठ
गीता जयंती (मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी) पर · भगवद्गीता का पाठ आरंभ करने से पूर्व · बुधवार व एकादशी को · किसी कठिन निर्णय या दुविधा के समय
स्रोत
श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — नाम 92 "ॐ पार्थसारथये नमः" · भगवद्गीता — कृष्ण का सारथि-रूप व अर्जुन को उपदेश · श्री पार्थसारथी मंदिर, चेन्नई — दिव्य देश परंपरा
