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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री राधा-कृष्ण आरती

आरती · श्री कृष्ण

पाठ

1

आरती युगल किशोर की कीजै। तन-मन-धन न्योछावर कीजै॥

2

गौर-श्याम मुख निरखत रीझै। प्रभु को रूप नयन भरि पीजै॥

3

कंचन थार कपूर की बाती। हरि आये निर्मल भई छाती॥

4

श्रीवृन्दावन-निकुंज बिहारी। राधा-कृष्ण छवि मन-हारी॥

5

युगल किशोर की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। प्रेम-भक्ति रस पावे, युगल-कृपा पावे॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. युगल किशोर (राधा-कृष्ण) की आरती कीजिए; उन पर अपना तन, मन व धन न्योछावर कर दीजिए।
  2. गौर (राधा) व श्याम (कृष्ण) के मुख को निरखकर मन रीझ जाता है; प्रभु के इस रूप को नेत्रों में भरकर (हृदय से) पान कीजिए।
  3. स्वर्ण के थाल में कपूर की बाती (आरती) सजी है; हरि के आगमन से हृदय निर्मल व पवित्र हो गया।
  4. श्रीवृन्दावन के निकुंज में विहार करने वाले; राधा-कृष्ण की युगल छवि मन को हरने वाली है।
  5. जो भक्त श्रद्धा से युगल किशोर (राधा-कृष्ण) की यह आरती गाता है, वह प्रेम-भक्ति का रस तथा युगल-सरकार की कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • प्रेम, भक्ति व मन की प्रसन्नता बढ़ती है।
  • दाम्पत्य व सम्बन्धों में प्रेम व सौहार्द आता है।
  • राधा-कृष्ण की युगल कृपा व आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

नित्य संध्या में · जन्माष्टमी व राधाष्टमी पर · एकादशी व गुरुवार को

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह

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