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लिपि:
॥ श्री ॥
श्री रामदेव पीर आरती
आरती
पाठ
1
जय बाबा रामदेव, रुणिचा रा धणी। पीर रामसा पीर, महिमा तेरी घणी॥
2
नीले घोड़े असवार, हाथ भाला सोहे। पंच-रंग ध्वजा फहरे, भक्त मन मोहे॥
3
हिन्दू-मुस्लिम पूजे, भेद नहीं कोई। रोगी-दुखी की पीड़ा, हरते पल में सोई॥
4
चमत्कार दिखलाए, अधर्म को टारा। गरीब-निवाज कहाए, करते भव-पारा॥
5
रामदेव की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सुख-समृद्धि वह पावे, मनवांछित पावे॥
अर्थ (हिन्दी)
- हे बाबा रामदेव, हे रुणिचा के स्वामी, आपकी जय हो! हे रामसा पीर, आपकी महिमा अति महान है।
- नीले घोड़े पर सवार, हाथ में भाला सुशोभित; पंच-रंगी ध्वजा फहराती है, जो भक्तों के मन को मोह लेती है।
- हिन्दू व मुस्लिम दोनों आपको पूजते हैं, कोई भेद नहीं; रोगी व दुखी की पीड़ा आप पल में हर लेते हैं।
- आपने चमत्कार दिखाए और अधर्म को दूर किया; आप "गरीब-निवाज" कहलाए और भक्तों को भवसागर से पार करते हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से बाबा रामदेव की यह आरती गाता है, वह सुख-समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्त करता है।
लाभ
- रोग, दुःख व संकट से रक्षा होती है।
- श्रद्धा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
- मन में भक्ति, समता व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
कब करें पाठ
भादवा (भाद्रपद) मेला पर · रामदेव जयंती (भाद्रपद शुक्ल द्वितीया) को · नित्य संध्या में
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक लोक-देवता आरती संग्रह
