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लिपि:
॥ श्री ॥
बाबा रामदेव आरती
आरती
पाठ
1
ॐ जय श्री रामादे स्वामी जय श्री रामादे। पिता तुम्हारे अजमल मैया मेनादे॥
2
रूप मनोहर जिसका घोड़े असवारी। कर में सोहे भाला मुक्तामणि धारी॥
3
विष्णु रूप तुम स्वामी कलियुग अवतारी। सुरनर मुनिजन ध्यावे जावे बलिहारी॥
4
दुःख दलजी का तुमने पल भर में टारा। सरजीवन भाण को तुमने कर डारा॥
5
नाव सेठ की तारी दानव को मारा। पल में कीना तुमने सरवर को खारा॥
अर्थ (हिन्दी)
- हे श्री रामदेव, हे स्वामी, आपकी जय हो! आपके पिता अजमल जी और माता मेनादे हैं।
- जिनका रूप मनोहर है, जो घोड़े पर सवार हैं; हाथ में भाला शोभा पाता है और वे मोती-मणि धारण करते हैं।
- हे स्वामी, आप विष्णु के रूप हैं, कलियुग के अवतार हैं; देवता, मनुष्य और मुनिजन आपका ध्यान करते हैं और आप पर बलिहारी जाते हैं।
- आपने दलजी का दुख पल भर में टाल दिया; और भाण को फिर से जीवित कर दिया।
- आपने सेठ की नाव पार लगाई, दानव को मारा; और पल भर में सरोवर (का पानी) खारा कर दिया।
लाभ
- संकट में सहायता की कामना — आरती बाबा के परचे गिनाती है (पद 4–5)।
- बाबा रामदेव जयंती और बीज पर गाई जाने वाली आरती।
कब करें पाठ
भादो सुदी दूज (बाबा रामदेव जयंती) पर · हर महीने की शुक्ल द्वितीया (बीज) पर · रामदेवरा (रुणिचा) की यात्रा के समय
स्रोत
रचयिता: अज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं). drikpanchang.com — श्री रामदेव आरती (आधार-पाठ) · knowledgegallery.in — श्री रामदेव जी की आरती · dharmyaatra.in — रामदेव जी की आरती
