श्री रामदेव पीर आरती
śrī rāmadeva pīra āratī
Ramdev Pir Aarti (Baba Ramdev / Ramsa Pir)
परिचय
स्रोत: पारंपरिक रामदेव पीर आरती (रामदेवरा)
उद्भव / पृष्ठभूमि
बाबा रामदेव (रामसा पीर) राजस्थान के लोक-देवता हैं, जिन्हें कृष्ण का अवतार माना जाता है; इनका धाम रामदेवरा (रुणिचा, जैसलमेर) में है। हिन्दू व मुस्लिम दोनों इन्हें पूजते हैं। यह आरती भादवा (भाद्रपद) मेला व नित्य पूजा में गाई जाती है।
आरती (लिरिक्स)
जय बाबा रामदेव, रुणिचा रा धणी। पीर रामसा पीर, महिमा तेरी घणी॥
हे बाबा रामदेव, हे रुणिचा के स्वामी, आपकी जय हो! हे रामसा पीर, आपकी महिमा अति महान है।
नीले घोड़े असवार, हाथ भाला सोहे। पंच-रंग ध्वजा फहरे, भक्त मन मोहे॥
नीले घोड़े पर सवार, हाथ में भाला सुशोभित; पंच-रंगी ध्वजा फहराती है, जो भक्तों के मन को मोह लेती है।
हिन्दू-मुस्लिम पूजे, भेद नहीं कोई। रोगी-दुखी की पीड़ा, हरते पल में सोई॥
हिन्दू व मुस्लिम दोनों आपको पूजते हैं, कोई भेद नहीं; रोगी व दुखी की पीड़ा आप पल में हर लेते हैं।
चमत्कार दिखलाए, अधर्म को टारा। गरीब-निवाज कहाए, करते भव-पारा॥
आपने चमत्कार दिखाए और अधर्म को दूर किया; आप "गरीब-निवाज" कहलाए और भक्तों को भवसागर से पार करते हैं।
रामदेव की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सुख-समृद्धि वह पावे, मनवांछित पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से बाबा रामदेव की यह आरती गाता है, वह सुख-समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्त करता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे बाबा रामदेव, हे रुणिचा के स्वामी, आपकी जय हो! हे रामसा पीर, आपकी महिमा अति महान है।
- नीले घोड़े पर सवार, हाथ में भाला सुशोभित; पंच-रंगी ध्वजा फहराती है, जो भक्तों के मन को मोह लेती है।
- हिन्दू व मुस्लिम दोनों आपको पूजते हैं, कोई भेद नहीं; रोगी व दुखी की पीड़ा आप पल में हर लेते हैं।
- आपने चमत्कार दिखाए और अधर्म को दूर किया; आप "गरीब-निवाज" कहलाए और भक्तों को भवसागर से पार करते हैं।
- जो भक्त श्रद्धा से बाबा रामदेव की यह आरती गाता है, वह सुख-समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्त करता है।
लाभ
- रोग, दुःख व संकट से रक्षा होती है।
- श्रद्धा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
- मन में भक्ति, समता व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
बाबा रामदेव के समक्ष पंच-रंगी ध्वजा, पुष्प व दीप अर्पित करें, "बाबा री बीज" व जयघोष के साथ आरती गाएँ। रामदेवरा (रुणिचा) मेला व जयंती पर इसका विशेष महत्व है।
