बाबा रामदेव आरती

bābā rāmadeva āratī

Ramdev Pir Aarti (Om Jai Shri Ramade Swami)

समय
2–3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
भादो सुदी दूज (रामदेव जयंती); बाबा री बीज
उद्देश्य:रक्षा (Protection)संकट-निवारण (Relief from troubles)समृद्धि (Prosperity)
✓ संपूर्ण

"ॐ जय श्री रामादे स्वामी, जय श्री रामादे" राजस्थान के लोक-देवता बाबा रामदेव (रामसा पीर) की प्रचलित आरती है। इसके पाँच पद हैं। पहला ही पद उनका परिचय देता है — "पिता तुम्हारे अजमल, मैया मेनादे" — और आरती उन्हें "विष्णु रूप … कलियुग अवतारी" कहती है, जो घोड़े पर सवार हैं और हाथ में भाला धारण करते हैं।

परिचय

स्रोत: "ॐ जय श्री रामादे स्वामी" — बाबा रामदेव (रामसा पीर) की प्रचलित आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठबाबा रामदेव आरती
IASTbābā rāmadeva āratī
मूल स्रोत"ॐ जय श्री रामादे स्वामी" — बाबा रामदेव (रामसा पीर) की प्रचलित आरती
शुभ दिनभादो सुदी दूज (रामदेव जयंती); बाबा री बीज
पाठ समय2–3 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

बाबा रामदेव राजस्थान के लोक-देवता हैं, जिन्हें हिन्दू "रामदेव जी" और मुसलमान "रामसा पीर" के नाम से पूजते हैं। यह आरती छोटी है, पर उनकी पहचान और उनके परचे (चमत्कार) दोनों गिनाती है।

परिचय (पद 1–2). "पिता तुम्हारे अजमल, मैया मेनादे" — पिता अजमल जी और माता मेनादे। रूप मनोहर है, घोड़े की सवारी है, हाथ में भाला और गले में मुक्ता-मणि।

अवतार (पद 3). "विष्णु रूप तुम स्वामी, कलियुग अवतारी" — आरती उन्हें कलियुग में विष्णु का अवतार मानती है।

परचे (पद 4–5). आरती उनके कुछ परचे गिनाती है — दलजी का दुख पल भर में टाला, भाण को फिर से जीवित किया, सेठ की नाव पार लगाई, दानव को मारा, और पल भर में सरोवर का पानी खारा कर दिया।

आरती (लिरिक्स)

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ॐ जय श्री रामादे स्वामी जय श्री रामादे। पिता तुम्हारे अजमल मैया मेनादे॥

हे श्री रामदेव, हे स्वामी, आपकी जय हो! आपके पिता अजमल जी और माता मेनादे हैं।

रूप मनोहर जिसका घोड़े असवारी। कर में सोहे भाला मुक्तामणि धारी॥

जिनका रूप मनोहर है, जो घोड़े पर सवार हैं; हाथ में भाला शोभा पाता है और वे मोती-मणि धारण करते हैं।

विष्णु रूप तुम स्वामी कलियुग अवतारी। सुरनर मुनिजन ध्यावे जावे बलिहारी॥

हे स्वामी, आप विष्णु के रूप हैं, कलियुग के अवतार हैं; देवता, मनुष्य और मुनिजन आपका ध्यान करते हैं और आप पर बलिहारी जाते हैं।

दुःख दलजी का तुमने पल भर में टारा। सरजीवन भाण को तुमने कर डारा॥

आपने दलजी का दुख पल भर में टाल दिया; और भाण को फिर से जीवित कर दिया।

नाव सेठ की तारी दानव को मारा। पल में कीना तुमने सरवर को खारा॥

आपने सेठ की नाव पार लगाई, दानव को मारा; और पल भर में सरोवर (का पानी) खारा कर दिया।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे श्री रामदेव, हे स्वामी, आपकी जय हो! आपके पिता अजमल जी और माता मेनादे हैं।
  2. जिनका रूप मनोहर है, जो घोड़े पर सवार हैं; हाथ में भाला शोभा पाता है और वे मोती-मणि धारण करते हैं।
  3. हे स्वामी, आप विष्णु के रूप हैं, कलियुग के अवतार हैं; देवता, मनुष्य और मुनिजन आपका ध्यान करते हैं और आप पर बलिहारी जाते हैं।
  4. आपने दलजी का दुख पल भर में टाल दिया; और भाण को फिर से जीवित कर दिया।
  5. आपने सेठ की नाव पार लगाई, दानव को मारा; और पल भर में सरोवर (का पानी) खारा कर दिया।

लाभ

  • संकट में सहायता की कामना — आरती बाबा के परचे गिनाती है (पद 4–5)।
  • बाबा रामदेव जयंती और बीज पर गाई जाने वाली आरती।

कब करें पाठ

भादो सुदी दूज (बाबा रामदेव जयंती) परहर महीने की शुक्ल द्वितीया (बीज) पररामदेवरा (रुणिचा) की यात्रा के समय

पाठ विधि

बाबा रामदेव के चित्र के समक्ष दीपक जलाएँ और पुष्प अर्पित करें। टेक "ॐ जय श्री रामादे, स्वामी जय श्री रामादे" हर पद के बाद दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — श्री रामदेव आरती (आधार-पाठ) · knowledgegallery.in — श्री रामदेव जी की आरती · dharmyaatra.in — रामदेव जी की आरती
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

बाबा रामदेव आरती — सामान्य प्रश्न