श्री रामदेव पीर चालीसा
पाठ
गणपति-गुरु-पद वंदना, सुमिर हृदय धरि ध्यान। रामदेव पीर की करूँ, चालीसा गुणगान॥
जय बाबा रामदेव पीरा। भक्तन के हरते सब पीरा॥
रुणिचा-धाम विराजे प्यारे। हिन्दू-मुस्लिम सब तुम्हें पुकारे॥
अजमल-सुत तुम कृष्ण-अवतारा। भक्त-हेतु लिया अवतारा॥
घोड़ी-सवार छवि अति प्यारी। नेजा-धारी तुम जग-हितकारी॥
पाँच पीर तुम्हें जग माने। चमत्कार सब जग ने जाने॥
जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
दीन-दुखी के तुम रखवारे। भक्त-गण नित तुम्हें पुकारे॥
रामदेवरा-धाम सुहाये। भक्त-गण नित दरस को धाये॥
जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥
भादवा-मेला भरे सुहाना। दूर-दूर से आवें जाना॥
दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥
जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
घोड़ा-नेजा भक्त चढ़ावैं। श्रद्धा से बाबा को रिझावैं॥
रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-समृद्धि घर में लाते॥
जो नर निशदिन ध्यान लगावै। रामदेव-कृपा वह पावै॥
मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥
समता का संदेश सुनाया। ऊँच-नीच का भेद मिटाया॥
जो श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥
जो यह रामदेव चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥
नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा रामदेव की होई॥
मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥
रामदेव-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥
अंधे को आँखें तुम दीनी। रोगी की पीड़ा हर लीनी॥
जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत रामदेव देवा॥
संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥
महिमा तुम्हरी अति अपारा। जन-जन गाता जयकारा॥
पंथ-भेद सब दूर हटाया। प्रेम-समता का पाठ पढ़ाया॥
घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥
दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥
रामदेव-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥
रुणिचा-धाम की महिमा भारी। भव-तारण तुम जग-हितकारी॥
सत्य-धर्म का बल बताते। सन्मार्ग जग को दिखलाते॥
दीन-रक्षक तुम कल्याणी। भव-तारण तुम सुख-दानी॥
जो जन रामदेव गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥
रामदेव-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥
सुख-शान्ति-समृद्धि घर में आवै। भक्ति-श्रद्धा-संतोष बढ़ावै॥
भय-संकट सब दूर हटावै। रामदेव जो जन नित ध्यावै॥
सन्मार्ग वह सहज वह पावै। रामदेव-नाम जो जन गावै॥
प्रेम-सुख-शान्ति घर में लावै। भक्ति-श्रद्धा सब बढ़ावै॥
जय जय जय बाबा रामदेवा। रक्षा करो प्रभु शरण सेवा॥
रामदेव चालीसा सरल, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-संकट सब दूर हो, बाबा-कृपा बरसाय॥
अर्थ (हिन्दी)
- गणपति व गुरु के चरणों की वंदना कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं रामदेव पीर की चालीसा का गुणगान करता हूँ।
- हे बाबा रामदेव पीर, आपकी जय हो; आप भक्तों की सब पीड़ा हरते हैं।
- आप रुणिचा-धाम में विराजते हैं; हिन्दू-मुस्लिम सब आपको पुकारते हैं।
- आप अजमल जी के पुत्र व कृष्ण-अवतार माने जाते हैं; भक्तों के हेतु आपने अवतार लिया।
- घोड़ी पर सवार आपकी छवि अति प्यारी है; नेजा (ध्वज-भाला) धारण किए आप जगत-हितकारी हैं।
- पाँच पीरों ने भी आपको स्वीकार किया; आपके चमत्कार समस्त जगत ने जाने।
- जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- आप दीन-दुखियों के रक्षक हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।
- रामदेवरा-धाम सुहावना है; भक्तगण नित्य दर्शन को दौड़े आते हैं।
- जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
- भादवा मास में सुहावना मेला भरता है; दूर-दूर से भक्तजन आते हैं।
- आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
- जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- भक्त घोड़ा व नेजा चढ़ाते हैं और श्रद्धा से बाबा को रिझाते हैं।
- आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह रामदेव-कृपा प्राप्त करता है।
- आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
- आपने समता का संदेश सुनाया और ऊँच-नीच का भेद मिटाया।
- जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
- जो यह रामदेव चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
- जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर बाबा रामदेव की कृपा होती है।
- सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जिन पर बाबा रामदेव की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
- आपने अंधों को आँखें दीं और रोगियों की पीड़ा हर ली।
- जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर बाबा रामदेव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
- आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
- आपकी महिमा अति अपार है; जन-जन आपका जयकारा गाता है।
- आपने सब पंथ-भेद दूर हटाया और प्रेम व समता का पाठ पढ़ाया।
- घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
- जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
- जो जन रामदेव-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
- रुणिचा-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
- आप सत्य व धर्म का बल बताते हैं और जगत को सन्मार्ग दिखलाते हैं।
- आप दीनों के रक्षक व कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
- जो जन रामदेव के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
- जो जन रामदेव-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
- घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है और भक्ति, श्रद्धा व संतोष बढ़ता है।
- जो जन रामदेव का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
- जो जन रामदेव-नाम गाता है, वह सहज ही सन्मार्ग पा लेता है।
- घर में प्रेम, सुख व शांति आती है और भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है।
- हे बाबा रामदेव, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए सेवक की रक्षा कीजिए।
- जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल रामदेव चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और बाबा की कृपा बरसती है।
लाभ
- भय, रोग व संकट से रक्षा होती है।
- मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और मन्नतें फलती हैं।
- भक्ति, समता व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- घर में सुख-समृद्धि व बाबा की कृपा बनी रहती है।
कब करें पाठ
भादवा सुदी (रामदेव जयंती) पर · रविवार को · मेला व पूजा के समय
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक रामदेव पीर चालीसा · राजस्थानी लोक-भजन परंपरा
