वापस
लिपि:
॥ श्री ॥

श्री रामदेव पीर चालीसा

चालीसा

पाठ

गणपति-गुरु-पद वंदना, सुमिर हृदय धरि ध्यान। रामदेव पीर की करूँ, चालीसा गुणगान॥

1

जय बाबा रामदेव पीरा। भक्तन के हरते सब पीरा॥

2

रुणिचा-धाम विराजे प्यारे। हिन्दू-मुस्लिम सब तुम्हें पुकारे॥

3

अजमल-सुत तुम कृष्ण-अवतारा। भक्त-हेतु लिया अवतारा॥

4

घोड़ी-सवार छवि अति प्यारी। नेजा-धारी तुम जग-हितकारी॥

5

पाँच पीर तुम्हें जग माने। चमत्कार सब जग ने जाने॥

6

जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

7

दीन-दुखी के तुम रखवारे। भक्त-गण नित तुम्हें पुकारे॥

8

रामदेवरा-धाम सुहाये। भक्त-गण नित दरस को धाये॥

9

जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥

10

भादवा-मेला भरे सुहाना। दूर-दूर से आवें जाना॥

11

दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥

12

जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

13

घोड़ा-नेजा भक्त चढ़ावैं। श्रद्धा से बाबा को रिझावैं॥

14

रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-समृद्धि घर में लाते॥

15

जो नर निशदिन ध्यान लगावै। रामदेव-कृपा वह पावै॥

16

मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥

17

समता का संदेश सुनाया। ऊँच-नीच का भेद मिटाया॥

18

जो श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥

19

जो यह रामदेव चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥

20

नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा रामदेव की होई॥

21

मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥

22

रामदेव-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥

23

अंधे को आँखें तुम दीनी। रोगी की पीड़ा हर लीनी॥

24

जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत रामदेव देवा॥

25

संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥

26

महिमा तुम्हरी अति अपारा। जन-जन गाता जयकारा॥

27

पंथ-भेद सब दूर हटाया। प्रेम-समता का पाठ पढ़ाया॥

28

घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥

29

दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥

30

रामदेव-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥

31

रुणिचा-धाम की महिमा भारी। भव-तारण तुम जग-हितकारी॥

32

सत्य-धर्म का बल बताते। सन्मार्ग जग को दिखलाते॥

33

दीन-रक्षक तुम कल्याणी। भव-तारण तुम सुख-दानी॥

34

जो जन रामदेव गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥

35

रामदेव-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥

36

सुख-शान्ति-समृद्धि घर में आवै। भक्ति-श्रद्धा-संतोष बढ़ावै॥

37

भय-संकट सब दूर हटावै। रामदेव जो जन नित ध्यावै॥

38

सन्मार्ग वह सहज वह पावै। रामदेव-नाम जो जन गावै॥

39

प्रेम-सुख-शान्ति घर में लावै। भक्ति-श्रद्धा सब बढ़ावै॥

40

जय जय जय बाबा रामदेवा। रक्षा करो प्रभु शरण सेवा॥

रामदेव चालीसा सरल, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-संकट सब दूर हो, बाबा-कृपा बरसाय॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. गणपति व गुरु के चरणों की वंदना कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं रामदेव पीर की चालीसा का गुणगान करता हूँ।
  2. हे बाबा रामदेव पीर, आपकी जय हो; आप भक्तों की सब पीड़ा हरते हैं।
  3. आप रुणिचा-धाम में विराजते हैं; हिन्दू-मुस्लिम सब आपको पुकारते हैं।
  4. आप अजमल जी के पुत्र व कृष्ण-अवतार माने जाते हैं; भक्तों के हेतु आपने अवतार लिया।
  5. घोड़ी पर सवार आपकी छवि अति प्यारी है; नेजा (ध्वज-भाला) धारण किए आप जगत-हितकारी हैं।
  6. पाँच पीरों ने भी आपको स्वीकार किया; आपके चमत्कार समस्त जगत ने जाने।
  7. जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  8. आप दीन-दुखियों के रक्षक हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।
  9. रामदेवरा-धाम सुहावना है; भक्तगण नित्य दर्शन को दौड़े आते हैं।
  10. जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
  11. भादवा मास में सुहावना मेला भरता है; दूर-दूर से भक्तजन आते हैं।
  12. आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
  13. जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  14. भक्त घोड़ा व नेजा चढ़ाते हैं और श्रद्धा से बाबा को रिझाते हैं।
  15. आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  16. जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह रामदेव-कृपा प्राप्त करता है।
  17. आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
  18. आपने समता का संदेश सुनाया और ऊँच-नीच का भेद मिटाया।
  19. जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
  20. जो यह रामदेव चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
  21. जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर बाबा रामदेव की कृपा होती है।
  22. सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  23. जिन पर बाबा रामदेव की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
  24. आपने अंधों को आँखें दीं और रोगियों की पीड़ा हर ली।
  25. जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर बाबा रामदेव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
  26. आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
  27. आपकी महिमा अति अपार है; जन-जन आपका जयकारा गाता है।
  28. आपने सब पंथ-भेद दूर हटाया और प्रेम व समता का पाठ पढ़ाया।
  29. घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
  30. जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
  31. जो जन रामदेव-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
  32. रुणिचा-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
  33. आप सत्य व धर्म का बल बताते हैं और जगत को सन्मार्ग दिखलाते हैं।
  34. आप दीनों के रक्षक व कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
  35. जो जन रामदेव के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
  36. जो जन रामदेव-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
  37. घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है और भक्ति, श्रद्धा व संतोष बढ़ता है।
  38. जो जन रामदेव का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
  39. जो जन रामदेव-नाम गाता है, वह सहज ही सन्मार्ग पा लेता है।
  40. घर में प्रेम, सुख व शांति आती है और भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है।
  41. हे बाबा रामदेव, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए सेवक की रक्षा कीजिए।
  42. जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल रामदेव चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और बाबा की कृपा बरसती है।

लाभ

  • भय, रोग व संकट से रक्षा होती है।
  • मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और मन्नतें फलती हैं।
  • भक्ति, समता व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • घर में सुख-समृद्धि व बाबा की कृपा बनी रहती है।

कब करें पाठ

भादवा सुदी (रामदेव जयंती) पर · रविवार को · मेला व पूजा के समय

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक रामदेव पीर चालीसा · राजस्थानी लोक-भजन परंपरा

VedikMarg · निःशुल्क भक्ति संग्रह · vedikmarg.in