श्री रामदेव पीर चालीसा

śrī rāmadeva pīra cālīsā

Ramdev Pir Chalisa (Ramdevra, Rajasthan)

समय
8–10 मिनट
श्लोक/चौपाई
42
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
भादवा सुदी (रामदेव जयंती); रविवार
✓ संपूर्ण (40/40 श्लोक)

परिचय

स्रोत: रामदेवरा (रुणिचा) मंदिर, जैसलमेर (राजस्थान)

संपूर्ण चालीसा

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गणपति-गुरु-पद वंदना, सुमिर हृदय धरि ध्यान। रामदेव पीर की करूँ, चालीसा गुणगान॥

गणपति व गुरु के चरणों की वंदना कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं रामदेव पीर की चालीसा का गुणगान करता हूँ।

जय बाबा रामदेव पीरा। भक्तन के हरते सब पीरा॥

हे बाबा रामदेव पीर, आपकी जय हो; आप भक्तों की सब पीड़ा हरते हैं।

रुणिचा-धाम विराजे प्यारे। हिन्दू-मुस्लिम सब तुम्हें पुकारे॥

आप रुणिचा-धाम में विराजते हैं; हिन्दू-मुस्लिम सब आपको पुकारते हैं।

अजमल-सुत तुम कृष्ण-अवतारा। भक्त-हेतु लिया अवतारा॥

आप अजमल जी के पुत्र व कृष्ण-अवतार माने जाते हैं; भक्तों के हेतु आपने अवतार लिया।

घोड़ी-सवार छवि अति प्यारी। नेजा-धारी तुम जग-हितकारी॥

घोड़ी पर सवार आपकी छवि अति प्यारी है; नेजा (ध्वज-भाला) धारण किए आप जगत-हितकारी हैं।

पाँच पीर तुम्हें जग माने। चमत्कार सब जग ने जाने॥

पाँच पीरों ने भी आपको स्वीकार किया; आपके चमत्कार समस्त जगत ने जाने।

जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।

दीन-दुखी के तुम रखवारे। भक्त-गण नित तुम्हें पुकारे॥

आप दीन-दुखियों के रक्षक हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।

रामदेवरा-धाम सुहाये। भक्त-गण नित दरस को धाये॥

रामदेवरा-धाम सुहावना है; भक्तगण नित्य दर्शन को दौड़े आते हैं।

जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥

जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।

भादवा-मेला भरे सुहाना। दूर-दूर से आवें जाना॥

भादवा मास में सुहावना मेला भरता है; दूर-दूर से भक्तजन आते हैं।

दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥

आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।

जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।

घोड़ा-नेजा भक्त चढ़ावैं। श्रद्धा से बाबा को रिझावैं॥

भक्त घोड़ा व नेजा चढ़ाते हैं और श्रद्धा से बाबा को रिझाते हैं।

रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-समृद्धि घर में लाते॥

आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।

जो नर निशदिन ध्यान लगावै। रामदेव-कृपा वह पावै॥

जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह रामदेव-कृपा प्राप्त करता है।

मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥

आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।

समता का संदेश सुनाया। ऊँच-नीच का भेद मिटाया॥

आपने समता का संदेश सुनाया और ऊँच-नीच का भेद मिटाया।

जो श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥

जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।

जो यह रामदेव चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥

जो यह रामदेव चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।

नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा रामदेव की होई॥

जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर बाबा रामदेव की कृपा होती है।

मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥

सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।

रामदेव-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥

जिन पर बाबा रामदेव की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।

अंधे को आँखें तुम दीनी। रोगी की पीड़ा हर लीनी॥

आपने अंधों को आँखें दीं और रोगियों की पीड़ा हर ली।

जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत रामदेव देवा॥

जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर बाबा रामदेव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।

संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥

आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।

महिमा तुम्हरी अति अपारा। जन-जन गाता जयकारा॥

आपकी महिमा अति अपार है; जन-जन आपका जयकारा गाता है।

पंथ-भेद सब दूर हटाया। प्रेम-समता का पाठ पढ़ाया॥

आपने सब पंथ-भेद दूर हटाया और प्रेम व समता का पाठ पढ़ाया।

घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥

घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।

दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥

जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।

रामदेव-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥

जो जन रामदेव-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।

रुणिचा-धाम की महिमा भारी। भव-तारण तुम जग-हितकारी॥

रुणिचा-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।

सत्य-धर्म का बल बताते। सन्मार्ग जग को दिखलाते॥

आप सत्य व धर्म का बल बताते हैं और जगत को सन्मार्ग दिखलाते हैं।

दीन-रक्षक तुम कल्याणी। भव-तारण तुम सुख-दानी॥

आप दीनों के रक्षक व कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।

जो जन रामदेव गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥

जो जन रामदेव के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।

रामदेव-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥

जो जन रामदेव-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।

सुख-शान्ति-समृद्धि घर में आवै। भक्ति-श्रद्धा-संतोष बढ़ावै॥

घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है और भक्ति, श्रद्धा व संतोष बढ़ता है।

भय-संकट सब दूर हटावै। रामदेव जो जन नित ध्यावै॥

जो जन रामदेव का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।

सन्मार्ग वह सहज वह पावै। रामदेव-नाम जो जन गावै॥

जो जन रामदेव-नाम गाता है, वह सहज ही सन्मार्ग पा लेता है।

प्रेम-सुख-शान्ति घर में लावै। भक्ति-श्रद्धा सब बढ़ावै॥

घर में प्रेम, सुख व शांति आती है और भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है।

जय जय जय बाबा रामदेवा। रक्षा करो प्रभु शरण सेवा॥

हे बाबा रामदेव, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए सेवक की रक्षा कीजिए।

रामदेव चालीसा सरल, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-संकट सब दूर हो, बाबा-कृपा बरसाय॥

जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल रामदेव चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और बाबा की कृपा बरसती है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. गणपति व गुरु के चरणों की वंदना कर, हृदय में ध्यान धरकर मैं रामदेव पीर की चालीसा का गुणगान करता हूँ।
  2. हे बाबा रामदेव पीर, आपकी जय हो; आप भक्तों की सब पीड़ा हरते हैं।
  3. आप रुणिचा-धाम में विराजते हैं; हिन्दू-मुस्लिम सब आपको पुकारते हैं।
  4. आप अजमल जी के पुत्र व कृष्ण-अवतार माने जाते हैं; भक्तों के हेतु आपने अवतार लिया।
  5. घोड़ी पर सवार आपकी छवि अति प्यारी है; नेजा (ध्वज-भाला) धारण किए आप जगत-हितकारी हैं।
  6. पाँच पीरों ने भी आपको स्वीकार किया; आपके चमत्कार समस्त जगत ने जाने।
  7. जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  8. आप दीन-दुखियों के रक्षक हैं; भक्तगण नित्य आपको पुकारते हैं।
  9. रामदेवरा-धाम सुहावना है; भक्तगण नित्य दर्शन को दौड़े आते हैं।
  10. जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
  11. भादवा मास में सुहावना मेला भरता है; दूर-दूर से भक्तजन आते हैं।
  12. आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
  13. जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  14. भक्त घोड़ा व नेजा चढ़ाते हैं और श्रद्धा से बाबा को रिझाते हैं।
  15. आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  16. जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह रामदेव-कृपा प्राप्त करता है।
  17. आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
  18. आपने समता का संदेश सुनाया और ऊँच-नीच का भेद मिटाया।
  19. जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
  20. जो यह रामदेव चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
  21. जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर बाबा रामदेव की कृपा होती है।
  22. सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  23. जिन पर बाबा रामदेव की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
  24. आपने अंधों को आँखें दीं और रोगियों की पीड़ा हर ली।
  25. जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर बाबा रामदेव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
  26. आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
  27. आपकी महिमा अति अपार है; जन-जन आपका जयकारा गाता है।
  28. आपने सब पंथ-भेद दूर हटाया और प्रेम व समता का पाठ पढ़ाया।
  29. घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
  30. जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
  31. जो जन रामदेव-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
  32. रुणिचा-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
  33. आप सत्य व धर्म का बल बताते हैं और जगत को सन्मार्ग दिखलाते हैं।
  34. आप दीनों के रक्षक व कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
  35. जो जन रामदेव के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
  36. जो जन रामदेव-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
  37. घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है और भक्ति, श्रद्धा व संतोष बढ़ता है।
  38. जो जन रामदेव का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
  39. जो जन रामदेव-नाम गाता है, वह सहज ही सन्मार्ग पा लेता है।
  40. घर में प्रेम, सुख व शांति आती है और भक्ति व श्रद्धा बढ़ती है।
  41. हे बाबा रामदेव, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए सेवक की रक्षा कीजिए।
  42. जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल रामदेव चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और बाबा की कृपा बरसती है।

लाभ

  • भय, रोग व संकट से रक्षा होती है।
  • मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और मन्नतें फलती हैं।
  • भक्ति, समता व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • घर में सुख-समृद्धि व बाबा की कृपा बनी रहती है।

कब करें पाठ

भादवा सुदी (रामदेव जयंती) पररविवार कोमेला व पूजा के समय

पाठ विधि

बाबा रामदेव के समक्ष घोड़ा, नेजा (ध्वज) व पुष्प-दीप अर्पित करें, "बाबे री बीज" व "जय रामदेव" का स्मरण करते हुए चालीसा का पाठ करें। भादवा मेले व रामदेव जयंती पर विशेष फलदायी।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण (40/40 श्लोक)
स्रोत परंपरापारंपरिक रामदेव पीर चालीसा · राजस्थानी लोक-भजन परंपरा
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

श्री रामदेव पीर चालीसा — सामान्य प्रश्न