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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री साईं चालीसा

चालीसा · श्री साईं बाबा

पाठ

श्रद्धा-सबूरी धार ले, सुमिर साईं का नाम। साईं-चालीसा गाइए, होवे सब के काम॥

1

जय जय साईं दयालु दानी। शिरडी धाम जगत में जानी॥

2

सबका मालिक एक बताया। हिन्दू-मुस्लिम भेद मिटाया॥

3

धूनी रमाय सदा मुस्काये। भक्तन के सब कष्ट मिटाये॥

4

जो धरि ध्यान करे नर कोई। ताकी विपदा दूर सब होई॥

5

शिरडी में पधारे साईं नाथ। भक्तन के बने रक्षक हाथ॥

6

मस्जिद में रहे फिर भी सब के। दर्शन दिए सदा अपने सबके॥

7

हिंदू-मुस्लिम आए द्वार पर। साईं ने दिया आशीर्वाद सबपर॥

8

लेंडी बाग में जाते नित्य। भक्तों संग करते पुण्य-कृत्य॥

9

दीन-दुखी की सुनते पुकार। साईं करते पार उद्धार॥

10

बीमार को दें स्वास्थ्य-वरदान। निर्धन को दें धन-सम्मान॥

11

श्रद्धा-भाव से जो कोई आए। साईं-चरण में शीश नवाए॥

12

ताकी मनोकामना पूर्ण हो जाए। जीवन में सुख-सम्पत्ति आए॥

13

उदी प्रसाद से रोग मिटाए। साईं-भक्त सुख-निद्रा पाए॥

14

रोज भिक्षा माँगने जाते। सात घर तक मध्याह्न खाते॥

15

भक्त-जन को अमृत पिलाते। साईं-कृपा से सब तर जाते॥

16

साईं-नाम सुमिरन से जीवन। होता पावन हर घड़ी क्षण-क्षण॥

17

गुरु-पूर्णिमा पर पूजन करो। साईं-कृपा से जीवन तरो॥

18

हेमाड पंत ने लिखी साईं-लीला। साईं की महिमा रही अजब-अजीला॥

19

साईं-बाबा सत्चित्-आनंद। जगत में फैलाया प्रेम-आनंद॥

20

भूत-प्रेत और भय निवारे। साईं-नाम से दुख सब टारे॥

21

धन-धान्य की वृद्धि होती। साईं-कृपा से घर में ज्योति॥

22

संकट-हरण साईं दयाल। सदा करो भक्तन पर कृपाल॥

23

नाना साहेब और काका भक्त। साईं-चरण में रहे विरक्त॥

24

माधव राव और बाबा दास। साईं-कृपा में थे हर श्वास॥

25

गुरुवार को साईं-पूजन करे। जीवन में सुख-समृद्धि भरे॥

26

साईं-चालीसा नित जो गावे। मन-वाँछित फल वो सब पावे॥

27

संतान-हीन जो करे पूजन। साईं-कृपा से मिले संतान-धन॥

28

विद्यार्थी साईं को ध्याए। परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाए॥

29

व्यापारी साईं को स्मरण करे। व्यापार में लाभ-वृद्धि मिले॥

30

रोगी साईं को याद करे। रोग-विकार दूर सब हो जाए॥

31

दुखी साईं का नाम ले ले। सब दुःख-पीड़ा दूर हो जाए॥

32

साईं-भक्ति महा-मंत्र है। संसार-सागर तरने का यंत्र है॥

33

जो जन साईं की शरण में आए। उसको कोई विपद न सताए॥

34

अल्लाह-मालिक है एक जान। साईं देते सबको समान॥

35

साईं-चालीसा जो जन पढ़े। उसके जीवन में पुण्य जड़े॥

36

सात बार जो नित पाठ करे। साईं-कृपा से जीवन तरे॥

37

साईं-नाम जपे जो नर-नारी। उसकी होती सब विपद दूर भारी॥

38

जय साईं बाबा दयानिधान। शिरडी धाम जगत-कल्याण॥

39

साईं-नाम रटे जो दिन-रात। उसके बिगड़े बनें सब काम॥

40

साईं-कृपा सब जन पर हो। जीवन में आनंद ही आनंद हो॥

साईं-चालीसा पाठ से, होवे मन-संतोष। श्रद्धा-सबूरी राखिए, साईं दें आशीष॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. श्रद्धा और सबूरी को धारण करके साईं का नाम स्मरण करो; साईं-चालीसा गाने से सब काम सिद्ध होते हैं।
  2. हे दयालु और दानी साईं की जय हो; शिरडी धाम को सारा जगत जानता है।
  3. सबका मालिक एक है यह बताया; हिन्दू-मुस्लिम का भेद मिटाया।
  4. धूनी जलाकर सदा मुस्काते रहे; भक्तों के सब कष्ट मिटाए।
  5. जो मनुष्य साईं का ध्यान धारण करे, उसकी सब विपदाएँ दूर होती हैं।
  6. साईंनाथ शिरडी में पधारे; वे भक्तों के रक्षक हाथ बने।
  7. मस्जिद में रहते हुए भी सबके थे; सभी को सदा दर्शन दिए।
  8. हिन्दू-मुस्लिम सभी द्वार पर आए; साईं ने सभी को आशीर्वाद दिया।
  9. नित्य लेंडी बाग में जाते थे; भक्तों के संग पुण्य कार्य करते थे।
  10. दीन-दुखियों की पुकार सुनते थे; साईं पार उद्धार करते थे।
  11. बीमारों को स्वास्थ्य का वरदान देते; निर्धनों को धन और सम्मान देते।
  12. श्रद्धा-भाव से जो कोई आए और साईं-चरणों में शीश नवाए।
  13. उसकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है; जीवन में सुख और सम्पत्ति आती है।
  14. उदी प्रसाद से रोग मिटते हैं; साईं-भक्त सुख-निद्रा पाता है।
  15. रोज भिक्षा माँगने जाते थे; सात घर तक मध्याह्न का भोजन करते थे।
  16. भक्तजनों को अमृत पिलाते थे; साईं-कृपा से सब तर जाते हैं।
  17. साईं-नाम स्मरण से जीवन पवित्र होता है; हर घड़ी, हर क्षण।
  18. गुरु-पूर्णिमा पर साईं का पूजन करो; साईं-कृपा से जीवन तर जाएगा।
  19. हेमाड पंत ने साईं-लीला लिखी; साईं की महिमा अजब और अनोखी रही।
  20. साईं-बाबा सत्चित्-आनंद हैं; उन्होंने जगत में प्रेम-आनंद फैलाया।
  21. भूत-प्रेत और भय निवारण होता है; साईं-नाम से सब दुख दूर होते हैं।
  22. धन-धान्य की वृद्धि होती है; साईं-कृपा से घर में ज्योति होती है।
  23. संकट-हरण और दयालु साईं; सदा भक्तों पर कृपालु रहो।
  24. नाना साहेब और काका भक्त थे; साईं-चरणों में विरक्त-भाव से रहे।
  25. माधव राव और बाबा दास साईं-कृपा में हर श्वास लेते थे।
  26. गुरुवार को साईं-पूजन करे; जीवन में सुख-समृद्धि भर जाती है।
  27. जो नित्य साईं-चालीसा गाए; वह मनचाहा फल पाता है।
  28. संतान-हीन जो पूजन करे; साईं-कृपा से संतान-धन मिलता है।
  29. विद्यार्थी साईं का ध्यान करे; परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाए।
  30. व्यापारी साईं का स्मरण करे; व्यापार में लाभ और वृद्धि मिले।
  31. रोगी साईं को याद करे; रोग और विकार सब दूर हो जाएँ।
  32. दुखी व्यक्ति साईं का नाम ले; सब दुःख-पीड़ा दूर हो जाए।
  33. साईं-भक्ति महा-मंत्र है; यह संसार-सागर तरने का यंत्र है।
  34. जो साईं की शरण में आए; उसे कोई विपद न सताए।
  35. "अल्लाह-मालिक" एक है यह जानो; साईं सबको समान रूप से देते हैं।
  36. जो साईं-चालीसा पढ़े; उसके जीवन में पुण्य जड़ पकड़ता है।
  37. जो नित्य सात बार पाठ करे; साईं-कृपा से जीवन तर जाए।
  38. जो नर-नारी साईं-नाम जपे; उसकी सब भारी विपदाएँ दूर होती हैं।
  39. जय हो साईं-बाबा दया-निधान; शिरडी धाम जगत का कल्याण करने वाला है।
  40. जो दिन-रात साईं-नाम रटे; उसके बिगड़े सब काम बन जाते हैं।
  41. साईं-कृपा सब जन पर हो; जीवन में आनंद ही आनंद हो।
  42. साईं-चालीसा पाठ से मन को संतोष मिलता है; श्रद्धा और सबूरी रखें, साईं आशीर्वाद देंगे।

लाभ

  • श्रद्धा और सबूरी से जीवन में शांति मिलती है।
  • रोग, भय और संकट दूर होते हैं।
  • धन-धान्य और संतान का आशीर्वाद मिलता है।
  • गुरुवार पाठ से विशेष फल मिलता है।

कब करें पाठ

गुरुवार को · गुरु-पूर्णिमा पर · नित्य प्रातः-संध्या

स्रोत

शिरडी साईं परंपरा · श्री साईं सच्चरित (हेमाड पंत) · गीता प्रेस, गोरखपुर

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