श्री सायि सहस्रनामावली
पाठ
ध्यानम् ब्रह्मानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं तत्त्वमस्यादिलक्ष्यम्। एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधीसाक्षिभूतं सायीनाथं त्रिगुणरहितं सद्गुरुं तं नमामि॥
॥ इति श्री सायि सहस्रनामावली सम्पूर्णा ॥
अ-वर्ग — अखण्डसच्चिदानन्द से अक्षरोत्तम पुरुषोत्तम (नाम 1–136)
- ॐ अखण्डसच्चिदानन्दाय नमः — अखण्ड सत्-चित्-आनंद स्वरूप
- ॐ अखिलजीववत्सलाय नमः — समस्त जीवों पर वात्सल्य रखने वाले
- ॐ अखिलवस्तुविस्ताराय नमः — समस्त वस्तुओं में विस्तृत
- ॐ अक्बराज्ञाभिवन्दिताय नमः — अकबर की आज्ञा से भी वंदित (पाठ अनिश्चित)
- ॐ अखिलचेतनाविष्टाय नमः — समस्त चेतना में व्याप्त
- ॐ अखिलवेदसम्प्रदाय नमः — समस्त वेदों को भली प्रकार देने वाले
- ॐ अखिलाण्डेशरूपोऽपि पिण्डे पिण्डे प्रतिष्ठिताय नमः — अखिलाण्ड के ईश होकर भी प्रत्येक पिण्ड में प्रतिष्ठित
- ॐ अग्रण्ये नमः — अग्रणी; सबसे आगे रहने वाले
- ॐ अग्र्यभूम्ने नमः — अग्रगण्य विशालता वाले
- ॐ अगणितगुणाय नमः — अगणित गुणों वाले
- ॐ अघौघसन्निवर्तिने नमः — पाप-समूह को लौटा देने वाले
- ॐ अचिन्त्यमहिम्ने नमः — अचिंत्य महिमा वाले
- ॐ अचलाय नमः — अचल
- ॐ अच्युताय नमः — अच्युत; कभी च्युत न होने वाले
- ॐ अजाय नमः — अज; जन्म-रहित
- ॐ अजातशत्रवे नमः — जिनका कोई शत्रु उत्पन्न ही नहीं हुआ
- ॐ अज्ञानतिमिरान्धानां चक्षुरुन्मीलनक्षमाय नमः — अज्ञान-रूपी अंधकार से अंधे हुए लोगों की आँखें खोल देने में समर्थ
- ॐ आजन्मस्थितिनाशाय नमः — जन्म, स्थिति व नाश — तीनों स्वरूप
- ॐ अणिमादिविभूषिताय नमः — अणिमा आदि सिद्धियों से विभूषित
- ॐ अत्युन्नतधुनीज्वालामाज्ञयैवनिवर्तकाय नमः — अत्यंत ऊँची उठी धूनी की ज्वाला को केवल आज्ञा से लौटा देने वाले
- ॐ अत्युल्बणमहासर्पादपिभक्तसुरक्षित्रे नमः — अत्यंत भयंकर महासर्प से भी भक्तों की रक्षा करने वाले
- ॐ अतितीव्रतपस्तप्ताय नमः — अत्यंत तीव्र तप से तप्त
- ॐ अतिनम्रस्वभावकाय नमः — अत्यंत नम्र स्वभाव वाले
- ॐ अन्नदानसदानिष्ठाय नमः — अन्न-दान में सदा निष्ठा रखने वाले
- ॐ अतिथिभुक्तशेषभुजे नमः — अतिथियों के भोजन से बचा हुआ ही खाने वाले
- ॐ अदृश्यलोकसञ्चारिणे नमः — अदृश्य लोकों में संचरण करने वाले
- ॐ अदृष्टपूर्वदर्शित्रे नमः — जो पहले कभी न देखा गया, वह दिखा देने वाले
- ॐ अद्वैतवस्तुतत्त्वज्ञाय नमः — अद्वैत वस्तु-तत्त्व को जानने वाले
- ॐ अद्वैतानन्दवर्षकाय नमः — अद्वैत का आनंद बरसाने वाले
- ॐ अद्भुतानन्तशक्तये नमः — अद्भुत व अनंत शक्ति वाले
- ॐ अधिष्ठानाय नमः — समस्त का अधिष्ठान
- ॐ अधोक्षजाय नमः — अधोक्षज
- ॐ अधर्मतरुच्छेत्रे नमः — अधर्म-रूपी वृक्ष का छेदन करने वाले
- ॐ अधियज्ञाय नमः — अधियज्ञ-स्वरूप
- ॐ अधिभूताय नमः — अधिभूत-स्वरूप
- ॐ अधिदैवाय नमः — अधिदैव-स्वरूप
- ॐ अध्यक्षाय नमः — अध्यक्ष
- ॐ अनघाय नमः — अनघ; पाप-रहित
- ॐ अनन्तनाम्ने नमः — अनंत नामों वाले
- ॐ अनन्तगुणभूषणाय नमः — अनंत गुणों से विभूषित
- ॐ अनन्तमूर्तये नमः — अनंत मूर्तियों वाले
- ॐ अनन्ताय नमः — अनंत
- ॐ अनन्तशक्तिसम्युताय नमः — अनंत शक्ति से युक्त
- ॐ अनन्ताश्चर्यवीर्याय नमः — अनंत आश्चर्यमय पराक्रम वाले
- ॐ अनह्लक अतिमानिताय नमः — अनल-हक़ कहकर भी अभिमान-रहित रहने वाले (सूफ़ी पद)
- ॐ अनवरतसमाधिस्थाय नमः — निरंतर समाधि में स्थित
- ॐ अनाथपरिरक्षकाय नमः — अनाथों की चारों ओर से रक्षा करने वाले
- ॐ अनन्यप्रेमसंहृष्टगुरुपादविलीनहृदे नमः — अनन्य प्रेम से हर्षित होकर गुरु-चरणों में विलीन हृदय वाले
- ॐ अनाधृताष्टसिद्धये नमः — अष्ट सिद्धियों को न अपनाने वाले
- ॐ अनामयपदप्रदाय नमः — रोग-रहित पद देने वाले
- ॐ अनादिमत्परब्रह्मणे नमः — अनादि परब्रह्म
- ॐ अनाहतदिवाकराय नमः — अनाहत का दिवाकर
- ॐ अनिर्देश्यवपुषे नमः — जिनका शरीर बताया न जा सके
- ॐ अनिमेषेक्षितप्रजाय नमः — पलक झपकाए बिना प्रजा को देखने वाले
- ॐ अनुग्रहार्थमूर्तये नमः — अनुग्रह के लिए ही धारण की गई मूर्ति वाले
- ॐ अनुवर्तितवेङ्कूशाय नमः — अनुसरण किए गए संकेत वाले (पाठ अनिश्चित)
- ॐ अनेकदिव्यमूर्तये नमः — अनेक दिव्य मूर्तियों वाले
- ॐ अनेकाद्भुतदर्शनाय नमः — अनेक अद्भुत दर्शन कराने वाले
- ॐ अनेकजन्मजम्पापंस्मृतिमात्रेणहारकाय नमः — अनेक जन्मों के पाप स्मरण मात्र से हर लेने वाले
- ॐ अनेकजन्मवृत्तान्तंसविस्तारमुदीरयते नमः — अनेक जन्मों का वृत्तांत विस्तार सहित कह देने वाले
- ॐ अनेकजन्मसम्प्राप्तकर्मबन्धविदारणाय नमः — अनेक जन्मों में संचित कर्म-बंधन का विदारण करने वाले
- ॐ अनेकजन्मसंसिद्धशक्तिज्ञानस्वरूपवते नमः — अनेक जन्मों से सिद्ध शक्ति व ज्ञान के स्वरूप वाले
- ॐ अन्तर्बहिश्चसर्वत्रायव्याप्ताखिलचराचराय नमः — भीतर, बाहर तथा सर्वत्र — समस्त चराचर में व्याप्त
- ॐ अन्तर्हृदय आकाशाय नमः — अंतर्हृदय के आकाश-स्वरूप
- ॐ अन्तकालेऽपि रक्षकाय नमः — अंतिम काल में भी रक्षा करने वाले
- ॐ अन्तर्यामिणे नमः — अंतर्यामी
- ॐ अन्तरात्मने नमः — अंतरात्मा
- ॐ अन्नवस्त्रेप्सितप्रदाय नमः — अन्न, वस्त्र तथा अभीष्ट देने वाले
- ॐ अपराजितशक्तये नमः — अपराजित शक्ति वाले
- ॐ अपरिग्रहभूषिताय नमः — अपरिग्रह से ही विभूषित
- ॐ अपवर्गप्रदात्रे नमः — अपवर्ग अर्थात मोक्ष देने वाले
- ॐ अपवर्गमयाय नमः — अपवर्गमय
- ॐ अपान्तरात्मरूपेण स्रष्टुरिष्टप्रवर्तकाय नमः — अपान्तरात्मा के रूप में स्रष्टा की इच्छा प्रवर्तित करने वाले
- ॐ अपावृतकृपागाराय नमः — जिनका कृपा-गृह सदा खुला है
- ॐ अपारज्ञानशक्तिमते नमः — अपार ज्ञान-शक्ति वाले
- ॐ अपार्थिवदेहस्थाय नमः — अपार्थिव देह में स्थित
- ॐ अपाम्पुष्पनिबोधकाय नमः — जल में पुष्प का बोध कराने वाले
- ॐ अप्रपञ्चाय नमः — प्रपंच से रहित
- ॐ अप्रमत्ताय नमः — अप्रमत्त; कभी प्रमाद न करने वाले
- ॐ अप्रमेयगुणाकाराय नमः — अप्रमेय गुणों के आकार वाले
- ॐ अप्राकृतवपुषे नमः — अप्राकृत शरीर वाले
- ॐ अप्राकृतपराक्रमाय नमः — अप्राकृत पराक्रम वाले
- ॐ अप्रार्थितेष्टदात्रे नमः — बिना माँगे ही अभीष्ट दे देने वाले
- ॐ अब्दुल्लादि परागतये नमः — अब्दुल्ला आदि की परम गति
- ॐ अभयं सर्वभूतेभ्यो ददामीति व्रतिने नमः — समस्त प्राणियों को अभय देने के व्रत वाले
- ॐ अभिमानातिदूराय नमः — अभिमान से अत्यंत दूर
- ॐ अभिषेकचमत्कृतये नमः — अभिषेक से चमत्कृत होने वाले
- ॐ अभीष्टवरवर्षिणे नमः — अभीष्ट वर बरसाने वाले
- ॐ अभीक्ष्णदिव्यशक्तिभृते नमः — निरंतर दिव्य शक्ति धारण करने वाले
- ॐ अभेदानन्दसन्धात्रे नमः — अभेद-आनंद का सन्धान कराने वाले
- ॐ अमर्त्याय नमः — अमर्त्य; मृत्यु-रहित
- ॐ अमृतवाक्सृतये नमः — अमृतमय वाणी बहाने वाले
- ॐ अरविन्ददलाक्षाय नमः — कमल-दल सदृश नेत्रों वाले
- ॐ अमितपराक्रमाय नमः — अपरिमित पराक्रम वाले
- ॐ अरिषड्वर्गनाशिने नमः — छहों शत्रुओं का नाश करने वाले
- ॐ अरिष्टघ्नाय नमः — अरिष्टों का नाश करने वाले
- ॐ अर्हसत्तमाय नमः — पूजनीयों में श्रेष्ठ
- ॐ अलभ्यलाभसन्धात्रे नमः — जो न मिल सके, वह भी दिला देने वाले
- ॐ अल्पदानसुतोषिताय नमः — अल्प दान से भी भली प्रकार संतुष्ट होने वाले
- ॐ अल्लानामसदावक्त्रे नमः — सदा अल्ला का नाम मुख से कहने वाले
- ॐ अलम्बुध्यास्वलङ्कृताय नमः — स्वयं ही अलंकृत (पाठ अनिश्चित)
- ॐ अवतारितसर्वेशाय नमः — समस्त ईश्वरों के अवतार-स्वरूप
- ॐ अवधीरितवैभवाय नमः — वैभव की अवहेलना करने वाले
- ॐ अवलम्ब्यस्वपदाब्जाय नमः — जिनके चरण-कमल अवलंब्य हैं
- ॐ अवलियेतिविश्रुताय नमः — अवलिया के नाम से विश्रुत — सूफ़ी परंपरा का संत-वाचक शब्द
- ॐ अवधूताखिलोपाधये नमः — समस्त उपाधियों को त्याग चुके अवधूत
- ॐ अविशिष्टाय नमः — अविशिष्ट; जिनसे कुछ शेष नहीं
- ॐ अवशिष्टस्वकार्यार्थेत्यक्तदेहम्प्रविष्टवते नमः — शेष रहे अपने कार्य के लिए ही देह त्यागकर पुनः प्रविष्ट होने वाले
- ॐ अवाक्पाणिपादोरवे नमः — वाणी, हाथ, पैर व जंघा से रहित
- ॐ अवाङ्मानसगोचराय नमः — वाणी तथा मन के अगोचर
- ॐ अवाप्तसर्वकामोऽपि कर्मण्येव प्रतिष्टिताय नमः — समस्त कामनाएँ पूर्ण होने पर भी कर्म में ही प्रतिष्ठित रहने वाले
- ॐ अविच्छिन्नाग्निहोत्राय नमः — जिनका अग्निहोत्र अर्थात धूनी कभी बुझी नहीं
- ॐ अविच्छिन्नसुखप्रदाय नमः — अविच्छिन्न सुख देने वाले
- ॐ अवेक्षितदिगन्तस्थप्रजापालननिष्ठिताय नमः — दिगंत तक की प्रजा के पालन में निष्ठ
- ॐ अव्याजकरुणासिन्धवे नमः — बिना किसी बहाने के करुणा के सागर
- ॐ अव्याहतेष्टिदेशगाय नमः — जिनकी इच्छा किसी देश में अवरुद्ध नहीं
- ॐ अव्याहृतोपदेशाय नमः — जिनका उपदेश कभी व्यर्थ नहीं जाता
- ॐ अव्याहतसुखप्रदाय नमः — अबाध सुख देने वाले
- ॐ अशक्यशक्यकर्त्रे नमः — अशक्य को भी शक्य कर देने वाले
- ॐ अशुभाशयशुद्धिकृते नमः — अशुभ आशयों की शुद्धि करने वाले
- ॐ अशेषभूतहृत्स्थाणवे नमः — समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित स्थाणु
- ॐ अशोकमोहशृङ्खलाय नमः — शोक व मोह की शृंखला काट देने वाले
- ॐ अष्टैश्वर्ययुतत्यागिने नमः — आठों ऐश्वर्यों से युक्त होकर भी त्यागी
- ॐ अष्टसिद्धिपराङ्मुखाय नमः — अष्ट सिद्धियों से विमुख रहने वाले
- ॐ असम्योगयुक्तात्मने नमः — संयोग-वियोग से रहित आत्मा वाले
- ॐ असङ्गदृढशस्त्रभृते नमः — असंगता रूपी दृढ़ शस्त्र धारण करने वाले
- ॐ असङ्ख्येयावतारेषु ऋणानुबन्धिरक्षिताय नमः — असंख्य अवतारों में ऋणानुबंध से बँधे जीवों की रक्षा करने वाले
- ॐ अहम्ब्रह्मस्थितप्रज्ञाय नमः — अहं ब्रह्म में स्थित-प्रज्ञ
- ॐ अहम्भावविवर्जिताय नमः — अहं-भाव से रहित
- ॐ अहं त्वं च त्वमेवाहमिति तत्त्वप्रबोधकाय नमः — मैं ही तुम हूँ और तुम ही मैं — यह तत्त्व समझाने वाले
- ॐ अहेतुककृपासिन्धवे नमः — बिना किसी हेतु के कृपा के सागर
- ॐ अहिंसानिरताय नमः — अहिंसा में निरत
- ॐ अक्षीणसौहृदाय नमः — जिनकी मित्रता कभी क्षीण नहीं होती
- ॐ अक्षयाय नमः — अक्षय
- ॐ अक्षयसुखप्रदाय नमः — अक्षय सुख देने वाले
- ॐ अक्षरादपि कूटस्थादुत्तम पुरुषोत्तमाय नमः — अक्षर तथा कूटस्थ से भी उत्तम — पुरुषोत्तम
आ से औ — आत्माराम, आपद्बान्धव व ऐक्यानन्द (नाम 137–218)
- ॐ आखुवाहनमूर्तये नमः — आखु-वाहन अर्थात गणेश की मूर्ति-स्वरूप
- ॐ आगमाद्यन्तसन्नुताय नमः — आगमों के आदि से अंत तक स्तुत
- ॐ आगमातीतसद्भावाय नमः — आगमों से भी परे सद्भाव वाले
- ॐ आचार्यपरमाय नमः — आचार्यों में परम
- ॐ आत्मानुभवसन्तुष्टाय नमः — आत्म-अनुभव से ही संतुष्ट
- ॐ आत्मविद्याविशारदाय नमः — आत्म-विद्या में विशारद
- ॐ आत्मानन्दप्रकाशाय नमः — आत्मानंद का प्रकाश
- ॐ आत्मैवपरमात्मदृशे नमः — आत्मा को ही परमात्मा के रूप में देखने वाले
- ॐ आत्मैकसर्वभूतात्मने नमः — आत्मा ही जिनके लिए समस्त भूतों की आत्मा है
- ॐ आत्मारामाय नमः — आत्मा में ही रमण करने वाले
- ॐ आत्मवते नमः — आत्मवान
- ॐ आदित्यमध्यवर्तिने नमः — आदित्य के मध्य में स्थित
- ॐ आदिमध्यान्तवर्जिताय नमः — आदि, मध्य व अंत से रहित
- ॐ आनन्दपरमानन्दाय नमः — आनंद तथा परमानंद स्वरूप
- ॐ आनन्दप्रदाय नमः — आनंद देने वाले
- ॐ आनाकमादृताज्ञाय नमः — स्वर्ग तक जिनकी आज्ञा आदृत है
- ॐ आनतावननिवृतये नमः — नमन करने वालों की रक्षा में तृप्त
- ॐ आपदामपहर्त्रे नमः — आपत्तियों का अपहरण करने वाले
- ॐ आपद्बान्धवाय नमः — आपत्ति में बंधु
- ॐ आफ्रिकागतवैद्याय परमानन्ददायकाय नमः — आफ्रिका गए हुए वैद्य को परम आनंद देने वाले
- ॐ आयुरारोग्यदात्रे नमः — आयु तथा आरोग्य देने वाले
- ॐ आर्तत्राणपरायणाय नमः — आर्तों की रक्षा में परायण
- ॐ आरोपणापवादैश्च मायायोगवियोगकृते नमः — आरोप तथा अपवाद के द्वारा माया का योग व वियोग करने वाले
- ॐ आविष्कृत तिरोधत्त बहुरूपविडम्बनाय नमः — प्रकट व तिरोहित होकर बहुरूप की लीला करने वाले
- ॐ आर्द्रचित्तेन भक्तानां सदानुग्रहवर्षकाय नमः — आर्द्र चित्त से भक्तों पर सदा अनुग्रह बरसाने वाले
- ॐ आशापाशविमुक्ताय नमः — आशा-पाश से विमुक्त
- ॐ आशापाशविमोचकाय नमः — आशा-पाश से मुक्त कराने वाले
- ॐ इच्छाधीनजगत्सर्वाय नमः — समस्त जगत जिनकी इच्छा के अधीन है
- ॐ इच्छाधीनवपुषे नमः — जिनका शरीर उनकी इच्छा के अधीन है
- ॐ इष्टेप्सितार्थदात्रे नमः — अभीष्ट व ईप्सित अर्थ देने वाले
- ॐ इच्छामोहनिवर्तकाय नमः — इच्छा-जनित मोह को लौटा देने वाले
- ॐ इच्छोत्थदुःखसञ्छेत्रे नमः — इच्छा से उत्पन्न दुःख का छेदन करने वाले
- ॐ इन्द्रियारातिदर्पघ्ने नमः — इंद्रिय-रूपी शत्रुओं का दर्प नष्ट करने वाले
- ॐ इन्दिरारमणाह्लादिनामसाहस्रपूतहृदे नमः — लक्ष्मीपति के आह्लादकारी सहस्रनाम से पवित्र हृदय वाले
- ॐ इन्दीवरदलज्योतिर्लोचनालङ्कृताननाय नमः — नील कमल-दल की ज्योति सदृश नेत्रों से अलंकृत मुख वाले
- ॐ इन्दुशीतलभाषिणे नमः — चंद्रमा के समान शीतल भाषण करने वाले
- ॐ इन्दुवत्प्रियदर्शनाय नमः — चंद्रमा के समान प्रिय दर्शन वाले
- ॐ इष्टापूर्तशतैर्लब्धाय नमः — सैकड़ों इष्ट व पूर्त कर्मों से प्राप्त होने वाले
- ॐ इष्टदैवस्वरूपधृते नमः — इष्टदेव का स्वरूप धारण करने वाले
- ॐ इष्टिकादानसुप्रीताय नमः — ईंट के दान से अत्यंत प्रसन्न होने वाले
- ॐ इष्टिकालयरक्षिताय नमः — ईंट के आलय की रक्षा करने वाले
- ॐ ईशासक्तमनोबुद्धये नमः — ईश में आसक्त मन व बुद्धि वाले
- ॐ ईशाराधनतत्पराय नमः — ईश की आराधना में तत्पर
- ॐ ईशिताखिलदेवाय नमः — समस्त देवों के भी शासक
- ॐ ईशावास्यार्थसूचकाय नमः — ईशावास्य उपनिषद् का अर्थ सूचित करने वाले
- ॐ उच्चारणाधृते भक्तहृदान्त उपदेशकाय नमः — उच्चारण किए बिना ही भक्तों के हृदय के भीतर उपदेश देने वाले
- ॐ उत्तमोत्तममार्गिणे नमः — उत्तमों में भी उत्तम मार्ग पर चलने वाले
- ॐ उत्तमोत्तारकर्मकृते नमः — उत्तम प्रकार से तारने वाले कर्म करने वाले
- ॐ उदासीनवदासीनाय नमः — उदासीन के समान बैठे रहने वाले
- ॐ उद्धरामीत्युदीरकाय नमः — मैं उद्धार करूँगा — ऐसा कहने वाले
- ॐ उद्धवाय मया प्रोक्तं भागवतमिति ब्रुवते नमः — उद्धव से मैंने भागवत कहा था — ऐसा कहने वाले
- ॐ उन्मत्तश्वाभिगोप्त्रे नमः — पागल कुत्ते से भी रक्षा करने वाले
- ॐ उन्मत्तवेषनामधृते नमः — उन्मत्त का वेष तथा नाम धारण करने वाले
- ॐ उपद्रवनिवारिणे नमः — उपद्रवों का निवारण करने वाले
- ॐ उपांशुजपबोधकाय नमः — उपांशु जप का बोध कराने वाले
- ॐ उमेशामेशयुक्तात्मने नमः — उमापति तथा रमापति से युक्त आत्मा वाले
- ॐ ऊर्जितभक्तिलक्षणाय नमः — ऊर्जित भक्ति के लक्षण वाले
- ॐ ऊर्जितवाक्प्रदात्रे नमः — ऊर्जित वाणी देने वाले
- ॐ ऊर्ध्वरेतसे नमः — ऊर्ध्वरेता
- ॐ ऊर्ध्वमूलमधःशाखामश्वत्थं भस्मसात्कराय नमः — ऊपर मूल तथा नीचे शाखा वाले संसार-रूपी अश्वत्थ को भस्म कर देने वाले
- ॐ ऊर्ध्वगतिविधात्रे नमः — ऊर्ध्व गति का विधान करने वाले
- ॐ ऊर्ध्वबद्धद्विकेतनाय नमः — ऊपर बँधी दो ध्वजाओं वाले
- ॐ ऋजवे नमः — ऋजु; सरल
- ॐ ऋतम्बरप्रज्ञाय नमः — ऋतम्भरा प्रज्ञा वाले
- ॐ ऋणक्लिष्टधनप्रदाय नमः — ऋण से क्लिष्ट जनों को धन देने वाले
- ॐ ऋणानुबद्धजन्तुनां ऋणमुक्त्यै फलप्रदाय नमः — ऋण से बँधे प्राणियों को ऋण-मुक्ति का फल देने वाले
- ॐ एकाकिने नमः — एकाकी
- ॐ एकभक्तये नमः — एक ही भक्ति वाले
- ॐ एकवाक्कायमानसाय नमः — वाणी, काया तथा मन — तीनों में एक
- ॐ एकादश्यां स्वभक्तानां स्वतनोकृतनिष्कृतये नमः — एकादशी को अपने भक्तों के लिए अपने ही शरीर से निष्कृति करने वाले
- ॐ एकाक्षरपरज्ञानिने नमः — एकाक्षर के परम ज्ञानी
- ॐ एकात्मा सर्वदेशदृशे नमः — एक ही आत्मा जो समस्त देशों को देखती है
- ॐ एकेश्वरप्रतीतये नमः — एक ही ईश्वर की प्रतीति कराने वाले
- ॐ एकरीत्यादृताखिलाय नमः — एक ही रीति से समस्त को आदर देने वाले
- ॐ ऐक्यानन्दगतद्वन्द्वाय नमः — ऐक्य के आनंद में द्वंद्व से परे गए हुए
- ॐ ऐक्यानन्दविधायकाय नमः — ऐक्य का आनंद विधान करने वाले
- ॐ ऐक्यकृते नमः — ऐक्य करने वाले
- ॐ ऐक्यभूतात्मने नमः — ऐक्य-भूत आत्मा वाले
- ॐ ऐहिकामुष्मिकप्रदाय नमः — इस लोक तथा परलोक — दोनों का फल देने वाले
- ॐ ओङ्कारादराय नमः — ओंकार का आदर करने वाले
- ॐ ओजस्विने नमः — ओजस्वी
- ॐ औषधीकृतभस्मदाय नमः — भस्म को ही औषध बना देने वाले
क-वर्ग — कलौ प्रत्यक्षदैवत, कबीरदासावतार व कर्मबन्धनाश (नाम 219–282)
- ॐ कथाकीर्तनपद्धत्यां नारदानुष्ठितं स्तुवते नमः — कथा-कीर्तन की पद्धति में नारद द्वारा किए गए अनुष्ठान की स्तुति करने वाले
- ॐ कपर्दे क्लेशनाशिने नमः — कपर्दे नामक स्थान में क्लेश का नाश करने वाले
- ॐ कबीर्दासावतारकाय नमः — कबीरदास के अवतार
- ॐ कपर्दे पुत्ररक्षार्थमनुभूत तदामयाय नमः — कपर्दे में पुत्र की रक्षा के लिए स्वयं वह रोग भोगने वाले
- ॐ कमलाश्लिष्टपादाब्जाय नमः — कमला से आलिंगित चरण-कमलों वाले
- ॐ कमलायतलोचनाय नमः — कमल सदृश विशाल नेत्रों वाले
- ॐ कन्दर्पदर्पविध्वंसिने नमः — कंदर्प के दर्प का विध्वंस करने वाले
- ॐ कमनीयगुणालयाय नमः — कमनीय गुणों के आलय
- ॐ कर्ताऽकर्ता अन्यथाकर्त्रे नमः — कर्ता, अकर्ता तथा अन्यथा करने वाले — तीनों
- ॐ कर्मयुक्तोप्यकर्मकृते नमः — कर्म से युक्त होकर भी अकर्म करने वाले
- ॐ कर्मकृते नमः — कर्म करने वाले
- ॐ कर्मनिर्मुक्ताय नमः — कर्म से निर्मुक्त
- ॐ कर्माऽकर्मविचक्षणाय नमः — कर्म तथा अकर्म के विषय में विचक्षण
- ॐ कर्मबीजक्षयङ्कर्त्रे नमः — कर्म-बीज का क्षय करने वाले
- ॐ कर्मनिर्मूलनक्षमाय नमः — कर्मों का निर्मूलन करने में समर्थ
- ॐ कर्मव्याधिव्यपोहिने नमः — कर्म-रूपी व्याधि को दूर करने वाले
- ॐ कर्मबन्धविनाशकाय नमः — कर्म-बंधन का विनाश करने वाले
- ॐ कलिमलापहारिणे नमः — कलियुग के मल का अपहरण करने वाले
- ॐ कलौ प्रत्यक्षदैवताय नमः — कलियुग में प्रत्यक्ष देवता
- ॐ कलियुगावताराय नमः — कलियुग के अवतार
- ॐ कल्युत्थभवभञ्जनाय नमः — कलियुग से उत्पन्न भव-बंधन का भंजन करने वाले
- ॐ कल्याणानन्तनाम्ने नमः — कल्याणकारी अनंत नामों वाले
- ॐ कल्याणगुणभूषणाय नमः — कल्याणकारी गुणों से विभूषित
- ॐ कविदासगणुत्रात्रे नमः — कविदास तथा गणु की रक्षा करने वाले
- ॐ कष्टनाशकरौषधाय नमः — कष्ट का नाश करने वाली औषध-स्वरूप
- ॐ काकादीक्षित रक्षायां धुरीणो अहमितीरकाय नमः — काका दीक्षित की रक्षा का भार स्वयं लेने वाले
- ॐ कानाभिलादपि त्रात्रे नमः — कान-भिल्ल आदि से भी रक्षा करने वाले (पाठ अनिश्चित)
- ॐ कानने पानदानकृते नमः — वन में जल-दान करने वाले
- ॐ कामजिते नमः — काम को जीतने वाले
- ॐ कामरूपिणे नमः — इच्छानुसार रूप धारण करने वाले
- ॐ कामसङ्कल्पवर्जिताय नमः — काम-संकल्प से रहित
- ॐ कामितार्थप्रदात्रे नमः — वांछित अर्थ देने वाले
- ॐ कामादिशत्रुनाशनाय नमः — काम आदि शत्रुओं का नाश करने वाले
- ॐ काम्यकर्मसुसन्यस्ताय नमः — काम्य कर्मों का भली प्रकार संन्यास करने वाले
- ॐ कामेराशक्तिनाशकाय नमः — कामना की आसक्ति का नाश करने वाले
- ॐ कालाय नमः — काल-स्वरूप
- ॐ कालकालाय नमः — काल के भी काल
- ॐ कालातीताय नमः — काल से अतीत
- ॐ कालकृते नमः — काल की रचना करने वाले
- ॐ कालदर्पविनाशिने नमः — काल के दर्प का विनाश करने वाले
- ॐ कालरातर्जनक्षमाय नमः — कालरात्रि को भी डाँट देने में समर्थ
- ॐ कालशुनकदत्तान्नं ज्वरं हरेदिति ब्रुवते नमः — काले कुत्ते को दिया गया अन्न ज्वर हर लेता है — ऐसा कहने वाले
- ॐ कालाग्निसदृशक्रोधाय नमः — कालाग्नि के सदृश क्रोध वाले
- ॐ काशीरामसुरक्षकाय नमः — काशीराम की भली प्रकार रक्षा करने वाले
- ॐ कीर्तिव्याप्तदिगन्ताय नमः — जिनकी कीर्ति दिगंत तक व्याप्त है
- ॐ कुप्नीवीतकलेबराय नमः — कुप्नी अर्थात कफनी को ही वस्त्र रूप में धारण करने वाले
- ॐ कुम्बाराग्निशिशुत्रात्रे नमः — कुम्हार की भट्ठी की अग्नि से शिशु की रक्षा करने वाले
- ॐ कुष्ठरोगनिवारकाय नमः — कुष्ठ रोग का निवारण करने वाले
- ॐ कूटस्थाय नमः — कूटस्थ; अविचल
- ॐ कृतज्ञाय नमः — कृतज्ञ
- ॐ कृत्स्नक्षेत्रप्रकाशकाय नमः — समस्त क्षेत्र को प्रकाशित करने वाले
- ॐ कृत्स्नज्ञाय नमः — सब कुछ जानने वाले
- ॐ कृपापूर्णाय नमः — कृपा से परिपूर्ण
- ॐ कृपयापालितार्भकाय नमः — कृपा से बालक का पालन करने वाले
- ॐ कृष्णरामशिवात्रेयमारुत्यादिस्वरूपधृते नमः — कृष्ण, राम, शिव, अत्रि-पुत्र दत्त तथा मारुति आदि का स्वरूप धारण करने वाले
- ॐ केवलात्मानुभूतये नमः — केवल आत्म-अनुभूति स्वरूप
- ॐ कैवल्यपददायकाय नमः — कैवल्य पद देने वाले
- ॐ कोविदाय नमः — कोविद; निपुण
- ॐ कोमलाङ्गाय नमः — कोमल अंगों वाले
- ॐ कोपव्याजशुभप्रदाय नमः — क्रोध के बहाने भी शुभ देने वाले
- ॐ कोऽहमिति दिवानक्तं विचारमनुशासकाय नमः — मैं कौन हूँ — इस विचार का दिन-रात अनुशासन कराने वाले
- ॐ क्लिष्टरक्षाधुरीणाय नमः — क्लिष्टों की रक्षा का भार उठाने वाले
- ॐ क्रोधजिते नमः — क्रोध को जीतने वाले
- ॐ क्लेशनाशनाय नमः — क्लेशों का नाश करने वाले
ग, च व छ वर्ग — गुरुपरम्परा, चमत्कार व छिन्नसंशय (नाम 283–344)
- ॐ गगनसौक्ष्म्यविस्ताराय नमः — आकाश की सूक्ष्मता के समान विस्तार वाले
- ॐ गम्भीरमधुरस्वनाय नमः — गंभीर तथा मधुर स्वर वाले
- ॐ गङ्गातीरनिवासिने नमः — गंगा-तट पर निवास करने वाले
- ॐ गङ्गोत्पत्तिपदाम्बुजाय नमः — जिनके चरण-कमलों से गंगा की उत्पत्ति है
- ॐ गङ्गागिरिरितिख्यात यतिश्रेष्ठेन संस्तुताय नमः — गंगागिरि नाम से प्रख्यात यतिश्रेष्ठ द्वारा स्तुत
- ॐ गन्धपुष्पाक्षतौ पूज्याय नमः — गंध, पुष्प तथा अक्षत से पूज्य
- ॐ गतिविदे नमः — गति को जानने वाले
- ॐ गतिसूचकाय नमः — गति सूचित करने वाले
- ॐ गह्वरेष्ठपुराणाय नमः — गुहा में स्थित पुराण-पुरुष
- ॐ गर्वमात्सर्यवर्जिताय नमः — गर्व तथा मात्सर्य से रहित
- ॐ गाननृत्यविनोदाय नमः — गान व नृत्य में विनोद करने वाले
- ॐ गालवण्कर्वरप्रदाय नमः — गालवणकर को वर देने वाले
- ॐ गिरीशसदृशत्यागिने नमः — गिरीश अर्थात शिव के समान त्यागी
- ॐ गीताचार्याय नमः — गीता के आचार्य
- ॐ गीताद्भुतार्थवक्त्रे नमः — गीता का अद्भुत अर्थ कहने वाले
- ॐ गीतारहस्यसम्प्रदाय नमः — गीता का रहस्य भली प्रकार देने वाले
- ॐ गीताज्ञानमयाय नमः — गीता के ज्ञान से पूर्ण
- ॐ गीतापूर्णोपदेशकाय नमः — गीता का पूर्ण उपदेश करने वाले
- ॐ गुणातीताय नमः — गुणों से अतीत
- ॐ गुणात्मने नमः — गुणों की आत्मा
- ॐ गुणदोषविवर्जिताय नमः — गुण व दोष — दोनों से रहित
- ॐ गुणागुणेषु वर्तन्त इत्यनासक्ति सुस्थिराय नमः — गुण ही गुणों में बरतते हैं — इस अनासक्ति में भली प्रकार स्थिर
- ॐ गुप्ताय नमः — गुप्त
- ॐ गुहाहिताय नमः — हृदय-गुहा में स्थित
- ॐ गूढाय नमः — गूढ़
- ॐ गुप्तसर्वनिबोधकाय नमः — गुप्त बातें भी सब बता देने वाले
- ॐ गुर्वङ्घ्रितीव्रभक्तिश्चेत्तदेवालमितीरयते नमः — गुरु-चरणों में तीव्र भक्ति हो तो वही पर्याप्त है — ऐसा कहने वाले
- ॐ गुरवे नमः — गुरु
- ॐ गुरुतमाय नमः — गुरुओं में भी श्रेष्ठ
- ॐ गुह्याय नमः — गुह्य
- ॐ गुरुपादपरायणाय नमः — गुरु-चरणों में परायण
- ॐ गुर्वीशाङ्घ्रिसदाध्यात्रे नमः — गुरु-ईश के चरणों का सदा ध्यान करने वाले
- ॐ गुरुसन्तोषवर्धनाय नमः — गुरु के संतोष की वृद्धि करने वाले
- ॐ गुरुप्रेमसमालब्धपरिपूर्णस्वरूपवते नमः — गुरु-प्रेम से प्राप्त परिपूर्ण स्वरूप वाले
- ॐ गुरूपासनसंसिद्धाय नमः — गुरु की उपासना से भली प्रकार सिद्ध
- ॐ गुरुमार्गप्रवर्तकाय नमः — गुरु-मार्ग को प्रवर्तित करने वाले
- ॐ गुर्वात्मदेवताबुद्ध्या ब्रह्मानन्दमयाय नमः — गुरु को ही आत्म-देवता मानने की बुद्धि से ब्रह्मानंदमय
- ॐ गुरोस्समाधिपार्श्वस्थनिम्बच्छायानिवासकृते नमः — गुरु की समाधि के पास स्थित नीम की छाया में निवास करने वाले
- ॐ गुरुवेङ्कुश सम्प्राप्तवस्त्रेष्टिका सदाधृताय नमः — गुरु वेङ्कुश से प्राप्त वस्त्र व ईंट को सदा धारण करने वाले
- ॐ गुरुपरम्परादिष्टसर्वत्यागपरायणाय नमः — गुरु-परंपरा द्वारा उपदिष्ट सर्व-त्याग में परायण
- ॐ गुरुपरम्पराप्राप्तसच्चिदानन्दमूर्तिमते नमः — गुरु-परंपरा से प्राप्त सच्चिदानंद की मूर्ति वाले
- ॐ गृहहीनमहाराजाय नमः — गृह-हीन महाराज
- ॐ गृहमेधिपराश्रयाय नमः — गृहस्थों के परम आश्रय
- ॐ गोपींस्त्राता यथा कृष्ण नाच्ने कुलावनाय नमः — जैसे कृष्ण ने गोपियों की रक्षा की, वैसे ही कुल की रक्षा करने वाले
- ॐ गोपालगुण्डूरायादि पुत्रपौत्रादिवर्धनाय नमः — गोपाल गुण्डूराव आदि के पुत्र-पौत्रादि की वृद्धि करने वाले
- ॐ गोष्पदीकृतकष्टाब्धये नमः — कष्ट के समुद्र को गाय के खुर जितना कर देने वाले
- ॐ गोदावरीतटागताय नमः — गोदावरी के तट पर आए हुए
- ॐ चतुर्भुजाय नमः — चार भुजाओं वाले
- ॐ चतुर्बाहुनिवारितनृसङ्कटाय नमः — चार बाहुओं से मनुष्य का संकट दूर करने वाले
- ॐ चमत्कारैः सङ्क्लिष्टौर्भक्तिज्ञानविवर्धनाय नमः — संक्लिष्ट चमत्कारों द्वारा भक्ति व ज्ञान की वृद्धि करने वाले
- ॐ चन्दनालेपारुष्टानां दुष्टानां धर्षणक्षमाय नमः — चंदन-लेप से रुष्ट हुए दुष्टों का धर्षण करने में समर्थ
- ॐ चन्दोर्करादि भक्तानां सदापालननिष्ठिताय नमः — चंदोरकर आदि भक्तों के सदा पालन में निष्ठ
- ॐ चराचरपरिव्याप्ताय नमः — चराचर में परिव्याप्त
- ॐ चर्मदाहेप्यविक्रियाय नमः — चर्म जल जाने पर भी विकार-रहित रहने वाले
- ॐ चान्द्भायाख्य पाटेलार्थं चमत्कार सहायकृते नमः — चाँदभाई नामक पाटील के लिए चमत्कार से सहायता करने वाले
- ॐ चिन्तामग्न परित्राणे तस्य सर्वभारं वहाय नमः — चिंता में डूबे हुए की रक्षा में उसका सारा भार वहन करने वाले
- ॐ चित्रातिचित्रचारित्राय नमः — विचित्र से भी विचित्र चरित्र वाले
- ॐ चिन्मयानन्दाय नमः — चिन्मय आनंद-स्वरूप
- ॐ चिरवासकृतैर्बन्धैः शिर्डीग्रामं पुनर्गताय नमः — चिरकाल के निवास से बने बंधनों के कारण शिरडी ग्राम पुनः लौट आने वाले
- ॐ चोराद्याहृतवस्तूनिदत्तान्येवेतिहर्षिताय नमः — चोर आदि द्वारा हरी गई वस्तुओं को भी दी हुई ही मानकर हर्षित होने वाले
- ॐ छिन्नसंशयाय नमः — जिनके संशय छिन्न हो चुके
- ॐ छिन्नसंसारबन्धनाय नमः — संसार-बंधन का छेदन करने वाले
ज-वर्ग — जगन्नाटकसूत्रधृत, जातिभेदतिरस्कार व ज्ञानभास्कर (नाम 345–412)
- ॐ जगत्पित्रे नमः — जगत के पिता
- ॐ जगन्मात्रे नमः — जगत की माता
- ॐ जगत्त्रात्रे नमः — जगत के त्राता
- ॐ जगद्धिताय नमः — जगत का हित करने वाले
- ॐ जगत्स्रष्टाय नमः — जगत के स्रष्टा
- ॐ जगत्साक्षिणे नमः — जगत के साक्षी
- ॐ जगद्व्यापिने नमः — जगत में व्यापी
- ॐ जगद्गुरवे नमः — जगद्गुरु
- ॐ जगत्प्रभवे नमः — जगत के प्रभु
- ॐ जगन्नाथाय नमः — जगन्नाथ
- ॐ जगदेकदिवाकराय नमः — जगत के एकमात्र दिवाकर
- ॐ जगन्मोहचमत्काराय नमः — जगत को मोहित करने वाले चमत्कार से युक्त
- ॐ जगन्नाटकसूत्रधृते नमः — जगत-रूपी नाटक के सूत्रधार
- ॐ जगन्मङ्गलकर्त्रे नमः — जगत का मंगल करने वाले
- ॐ जगन्मायेतिबोधकाय नमः — जगत माया है — ऐसा बोध कराने वाले
- ॐ जडोन्मत्तपिशाचाभोप्यन्तःसच्चित्सुखस्थिताय नमः — जड़, उन्मत्त व पिशाच जैसे दिखकर भी भीतर सत्-चित्-सुख में स्थित
- ॐ जन्मबन्धविनिर्मुक्ताय नमः — जन्म-बंधन से पूर्णतः मुक्त
- ॐ जन्मसाफल्यमन्त्रदाय नमः — जन्म को सफल करने वाला मंत्र देने वाले
- ॐ जन्मजन्मान्तरज्ञाय नमः — जन्म-जन्मांतर को जानने वाले
- ॐ जन्मनाशरहस्यविदे नमः — जन्म व नाश के रहस्य को जानने वाले
- ॐ जनजल्पमनाद्यत्य जपसिद्धि महाद्युतये नमः — लोगों की बातों की उपेक्षा कर जप-सिद्धि की महती द्युति वाले
- ॐ जप्तनामसुसन्तुष्टहरिप्रत्यक्षभाविताय नमः — जपे गए नाम से भली प्रकार संतुष्ट होकर हरि का प्रत्यक्ष भाव कराने वाले
- ॐ जपप्रेरितभक्ताय नमः — भक्तों को जप की प्रेरणा देने वाले
- ॐ जप्यनाम्ने नमः — जपने योग्य नाम वाले
- ॐ जनेश्वराय नमः — जनों के ईश्वर
- ॐ जलहीनस्थले खिन्नभक्तार्थं जलसृष्टिकृते नमः — जल-हीन स्थान पर खिन्न भक्त के लिए जल की सृष्टि करने वाले
- ॐ जवारालीति मौलानासेवने अक्लिष्टमानसाय नमः — जवाराली नामक मौलाना की सेवा में अक्लिष्ट मन वाले
- ॐ जातग्रामाद्गुरोर्ग्रामं तस्मात्पूर्वस्थलं व्रजते नमः — जन्म-ग्राम से गुरु के ग्राम, और वहाँ से पूर्व-स्थान को जाने वाले
- ॐ जातिर्भेदमतैर्भेद इति भेदतिरस्कृताय नमः — जाति का भेद ही भेद है — ऐसा कहकर भेद का तिरस्कार करने वाले
- ॐ जातिविद्याधनैश्चापि हीनानार्द्रहृदावनाय नमः — जाति, विद्या व धन से हीन जनों की भी आर्द्र हृदय से रक्षा करने वाले
- ॐ जाम्बूनदपरित्यागिने नमः — स्वर्ण का परित्याग करने वाले
- ॐ जागरूकावितप्रजाय नमः — जागरूक रहकर प्रजा की रक्षा करने वाले
- ॐ जायापत्यगृहक्षेत्रस्वजनस्वार्थवर्जिताय नमः — पत्नी, संतान, गृह, क्षेत्र, स्वजन व स्वार्थ — सबसे रहित
- ॐ जितद्वैतमहामोहाय नमः — द्वैत के महामोह को जीतने वाले
- ॐ जितक्रोधाय नमः — क्रोध को जीतने वाले
- ॐ जितेन्द्रियाय नमः — जितेंद्रिय
- ॐ जितकन्दर्पदर्पाय नमः — कंदर्प के दर्प को जीतने वाले
- ॐ जितात्मने नमः — आत्मा को जीतने वाले
- ॐ जितषड्रिपवे नमः — छहों शत्रुओं को जीतने वाले
- ॐ जीर्णहूणालयस्थाने पूर्वजन्मकृतं स्मरते नमः — जीर्ण हूणालय के स्थान पर पूर्वजन्म का किया हुआ स्मरण करने वाले
- ॐ जीर्णहूणालयं चाद्य सर्वमर्त्यालयङ्कराय नमः — उसी जीर्ण हूणालय को आज समस्त मनुष्यों का आलय बना देने वाले
- ॐ जीर्णवस्त्रसमं मत्वा देहं त्यक्त्वा सुखं स्थिताय नमः — शरीर को जीर्ण वस्त्र के समान मानकर त्यागकर सुख में स्थित होने वाले
- ॐ जीर्णवस्त्रसमं पश्यन् त्यक्त्वा देहं प्रविष्टवते नमः — शरीर को जीर्ण वस्त्र के समान देखते हुए त्यागकर पुनः प्रविष्ट होने वाले
- ॐ जीवन्मुक्ताय नमः — जीवन्मुक्त
- ॐ जीवानां मुक्तिसद्गतिदायकाय नमः — जीवों को मुक्ति तथा सद्गति देने वाले
- ॐ ज्योतिश्शास्त्ररहस्यज्ञाय नमः — ज्योतिष-शास्त्र के रहस्य को जानने वाले
- ॐ ज्योतिर्ज्ञानप्रदाय नमः — ज्योतिर्ज्ञान देने वाले
- ॐ ज्योक्चसूर्यं दृशा पश्यते नमः — दृष्टि से सूर्य को चिरकाल तक देखने वाले
- ॐ ज्ञानभास्करमूर्तिमते नमः — ज्ञान-रूपी सूर्य की मूर्ति वाले
- ॐ ज्ञातसर्वरहस्याय नमः — समस्त रहस्यों को जानने वाले
- ॐ ज्ञातब्रह्मपरात्पराय नमः — ब्रह्म तथा परात्पर को जानने वाले
- ॐ ज्ञानभक्तिप्रदाय नमः — ज्ञान व भक्ति देने वाले
- ॐ ज्ञानविज्ञाननिश्चयाय नमः — ज्ञान व विज्ञान में निश्चय वाले
- ॐ ज्ञानशक्तिसमारूढाय नमः — ज्ञान-शक्ति पर आरूढ़
- ॐ ज्ञानयोगव्यवस्थिताय नमः — ज्ञान-योग में व्यवस्थित
- ॐ ज्ञानाग्निदग्धकर्मणे नमः — जिनके कर्म ज्ञान-अग्नि से दग्ध हो चुके
- ॐ ज्ञाननिर्धूतकल्मषाय नमः — ज्ञान से जिनके कल्मष धुल चुके
- ॐ ज्ञानवैराग्यसन्धात्रे नमः — ज्ञान व वैराग्य का सन्धान कराने वाले
- ॐ ज्ञानसञ्छिन्नसंशयाय नमः — ज्ञान से जिनके संशय छिन्न हो चुके
- ॐ ज्ञानापास्तमहामोहाय नमः — ज्ञान से जिनका महामोह दूर हो चुका
- ॐ ज्ञानीत्यात्मैव निश्चयाय नमः — ज्ञानी आत्मा ही है — ऐसे निश्चय वाले
- ॐ ज्ञानेश्वरीपठद्दैवप्रतिबन्धनिवारकाय नमः — ज्ञानेश्वरी पढ़ने वालों के दैव-प्रतिबंध का निवारण करने वाले
- ॐ ज्ञानाय नमः — ज्ञान-स्वरूप
- ॐ ज्ञेयाय नमः — जानने योग्य
- ॐ ज्ञानगम्याय नमः — ज्ञान से प्राप्य
- ॐ ज्ञातसर्व परं मताय नमः — सब कुछ जान लेना ही जिनका परम मत है
- ॐ ज्योतिषां प्रथमज्योतिषे नमः — ज्योतियों में प्रथम ज्योति
- ॐ ज्योतिर्हीनद्युतिप्रदाय नमः — ज्योति-हीनों को द्युति देने वाले
त व द वर्ग — तत्त्वमूर्ति, दक्षिणामूर्ति व देहो देवालय (नाम 413–500)
- ॐ तपस्सन्दीप्ततेजस्विने नमः — तप से देदीप्यमान तेजस्वी
- ॐ तप्तकाञ्चनसन्निभाय नमः — तपाए हुए स्वर्ण के सदृश
- ॐ तत्त्वज्ञानार्थदर्शिने नमः — तत्त्व-ज्ञान का अर्थ दिखाने वाले
- ॐ तत्त्वमस्यादिलक्षिताय नमः — तत्त्वमसि आदि महावाक्यों से लक्षित
- ॐ तत्त्वविदे नमः — तत्त्व को जानने वाले
- ॐ तत्त्वमूर्तये नमः — तत्त्व की मूर्ति
- ॐ तन्द्रालस्यविवर्जिताय नमः — तंद्रा व आलस्य से रहित
- ॐ तत्त्वमालाधराय नमः — तत्त्व-रूपी माला धारण करने वाले
- ॐ तत्त्वसारविशारदाय नमः — तत्त्व के सार में विशारद
- ॐ तर्जितान्तकदूताय नमः — यम के दूतों को भी डाँट देने वाले
- ॐ तमसः पराय नमः — तमस् से परे
- ॐ तात्यागणपतिप्रेष्ठाय नमः — तात्या गणपति को अत्यंत प्रिय
- ॐ तात्यानूल्कर्गतिप्रदाय नमः — तात्या नूलकर को गति देने वाले
- ॐ तारकब्रह्मनाम्ने नमः — तारक ब्रह्म नाम वाले
- ॐ तमोरजोविवर्जिताय नमः — तमोगुण व रजोगुण से रहित
- ॐ तामरसदलाक्षाय नमः — कमल-दल सदृश नेत्रों वाले
- ॐ ताराबाय्यासुरक्षाय नमः — ताराबाई की भली प्रकार रक्षा करने वाले
- ॐ तिलकपूजिताङ्घ्रये नमः — तिलक से पूजित चरणों वाले
- ॐ तिर्यग्जन्तुगतिप्रदाय नमः — पशु-पक्षियों तक को गति देने वाले
- ॐ तीर्थकृतनिवासाय नमः — तीर्थों द्वारा किए गए निवास वाले
- ॐ तीर्थपादाय नमः — जिनके चरण ही तीर्थ हैं
- ॐ तीव्रभक्तिनृसिंहादिभक्तालीभूर्यनुग्रहाय नमः — तीव्र भक्ति वाले नृसिंह आदि भक्त-समूह पर प्रचुर अनुग्रह करने वाले
- ॐ तीव्रप्रेमविरागाप्तवेङ्कटेशकृपानिधये नमः — तीव्र प्रेम व विराग से प्राप्त वेङ्कटेश की कृपा के निधि
- ॐ तुल्यप्रियाऽप्रियाय नमः — जिनके लिए प्रिय व अप्रिय समान हैं
- ॐ तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतये नमः — जिनके लिए निंदा व अपनी स्तुति समान हैं
- ॐ तुल्याधिकविहीनाय नमः — जिनके लिए समान, अधिक व हीन — सब एक हैं
- ॐ तुष्टसज्जनसंवृताय नमः — संतुष्ट सज्जनों से घिरे हुए
- ॐ तृप्तात्मने नमः — तृप्त आत्मा वाले
- ॐ तृषाहीनाय नमः — तृष्णा से रहित
- ॐ तृणीकृतजगद्वसवे नमः — जिन्होंने जगत के वैभव को तिनके के समान कर दिया
- ॐ तैलीकृतजलापूर्णदीपसञ्ज्वलितालयाय नमः — जल को ही तेल बनाकर भरे दीपों से आलय जगमगाने वाले
- ॐ त्रिकालज्ञाय नमः — तीनों कालों को जानने वाले
- ॐ त्रिमूर्तये नमः — त्रिमूर्ति-स्वरूप
- ॐ त्रिगुणातीताय नमः — तीनों गुणों से अतीत
- ॐ त्रियामायोगनिष्ठात्मा दशदिग्भक्तपालकाय नमः — तीनों प्रहर योग-निष्ठ आत्मा से दसों दिशाओं के भक्तों का पालन करने वाले
- ॐ त्रिवर्गमोक्षसन्धात्रे नमः — त्रिवर्ग तथा मोक्ष का सन्धान कराने वाले
- ॐ त्रिपुटीरहितस्थितये नमः — त्रिपुटी से रहित स्थिति वाले
- ॐ त्रिलोकस्वेच्छसञ्चारिणे नमः — तीनों लोकों में इच्छानुसार संचरण करने वाले
- ॐ त्रैलोक्यतिमिरापहाय नमः — तीनों लोकों का अंधकार दूर करने वाले
- ॐ त्यक्तकर्मफलासङ्गाय नमः — कर्म-फल की आसक्ति त्याग चुके
- ॐ त्यक्तभोगसदासुखिने नमः — भोग त्यागकर सदा सुखी रहने वाले
- ॐ त्यक्तदेहात्मबुद्धये नमः — देह ही आत्मा है — यह बुद्धि त्याग चुके
- ॐ त्यक्तसर्वपरिग्रहाय नमः — समस्त परिग्रह त्याग चुके
- ॐ त्यक्त्वा मायामयं सर्वं स्वे महिम्नि सदास्थिताय नमः — मायामय सब कुछ त्यागकर अपनी ही महिमा में सदा स्थित
- ॐ दण्डधृते नमः — दण्ड धारण करने वाले
- ॐ दण्डनार्हाणां दुष्टवृत्तेर्निवर्तकाय नमः — दण्ड के योग्य दुष्टों की वृत्ति को लौटा देने वाले
- ॐ दम्भदर्पातिदूराय नमः — दंभ व दर्प से अत्यंत दूर
- ॐ दक्षिणामूर्तये नमः — दक्षिणामूर्ति-स्वरूप
- ॐ दक्षिणादानकर्तृभ्यो दशधाप्रतिदायकाय नमः — दक्षिणा देने वालों को दस गुना लौटा देने वाले
- ॐ दक्षिणाप्रार्थनाद्वारा शुभकृत्तत्त्वबोधकाय नमः — दक्षिणा की माँग के द्वारा ही शुभ करते हुए तत्त्व का बोध कराने वाले
- ॐ दयापराय नमः — दया में परायण
- ॐ दयासिन्धवे नमः — दया के सागर
- ॐ दत्तात्रेयाय नमः — दत्तात्रेय-स्वरूप
- ॐ दरिद्रोऽयं धनीवेति भेदाचारविवर्जिताय नमः — यह दरिद्र है और यह धनी — ऐसे भेद-आचार से रहित
- ॐ दहराकाशभानवे नमः — दहर-आकाश के सूर्य
- ॐ दग्धहस्तार्भकावनाय नमः — जले हुए हाथ वाले बालक की रक्षा करने वाले
- ॐ दारिद्र्यदुःखभीतिघ्नाय नमः — दरिद्रता, दुःख व भय का नाश करने वाले
- ॐ दामोदरवरप्रदाय नमः — दामोदर को वर देने वाले
- ॐ दानशौण्डाय नमः — दान देने में प्रवीण
- ॐ दान्ताय नमः — दान्त; संयमी
- ॐ दानैश्चान्यान् वशं नयते नमः — दान के द्वारा ही दूसरों को वश में करने वाले
- ॐ दानमार्गस्खलत्पादनानाचान्दोर्करावनाय नमः — दान-मार्ग से विचलित होते नाना चंदोरकर की रक्षा करने वाले
- ॐ दिव्यज्ञानप्रदाय नमः — दिव्य ज्ञान देने वाले
- ॐ दिव्यमङ्गलविग्रहाय नमः — दिव्य व मंगलमय विग्रह वाले
- ॐ दीनदयापराय नमः — दीनों पर दया में परायण
- ॐ दीर्घदृशे नमः — दूरदर्शी
- ॐ दीनवत्सलाय नमः — दीनों पर वात्सल्य रखने वाले
- ॐ दुष्टानां दमने शक्ताय नमः — दुष्टों के दमन में समर्थ
- ॐ दुराधर्षतपोबलाय नमः — दुर्धर्ष तप-बल वाले
- ॐ दुर्भिक्षोप्यन्नदात्रे नमः — दुर्भिक्ष में भी अन्न देने वाले
- ॐ दुरादृष्टविनाशकृते नमः — दुर्भाग्य का विनाश करने वाले
- ॐ दुःखशोकभयद्वेषमोहाद्यशुभनाशकाय नमः — दुःख, शोक, भय, द्वेष व मोह आदि अशुभ का नाश करने वाले
- ॐ दुष्टनिग्रहशिष्टानुग्रहरूपमहाव्रताय नमः — दुष्टों का निग्रह व शिष्टों पर अनुग्रह — इसी रूप के महाव्रत वाले
- ॐ दुष्टमूर्खजडादीनामप्रकाशस्वरूपवते नमः — दुष्ट, मूर्ख व जड़ जनों के लिए अप्रकाश-स्वरूप रहने वाले
- ॐ दुष्टजन्तुपरित्रात्रे नमः — दुष्ट जंतुओं से भी रक्षा करने वाले
- ॐ दूरवर्तिसमस्तदृशे नमः — दूर स्थित सब कुछ देख लेने वाले
- ॐ दृश्यं नश्यं न विश्वास्यमिति बुद्धि प्रबोधकाय नमः — दृश्य नाशवान है, विश्वास योग्य नहीं — यह बुद्धि जगाने वाले
- ॐ दृश्यं सर्वं हि चैतन्यमित्यानन्द प्रतिष्ठाय नमः — दृश्य सब कुछ चैतन्य ही है — इस आनंद में प्रतिष्ठित
- ॐ देहे विगलिताशाय नमः — देह में आशा-रहित
- ॐ देहयात्रार्थमन्नभुजे नमः — केवल देह-यात्रा के लिए ही अन्न ग्रहण करने वाले
- ॐ देहो गेहस्ततो मान्तु निन्ये गुरुरितीरकाय नमः — देह ही गेह है, इसलिए उससे परे ले चलो — ऐसा कहने वाले गुरु
- ॐ देहात्मबुद्धिहीनाय नमः — देह ही आत्मा है, इस बुद्धि से रहित
- ॐ देहमोहप्रभञ्जनाय नमः — देह के मोह का भंजन करने वाले
- ॐ देहो देवालयस्तस्मिन् देवं पश्येत्युदीरयते नमः — देह देवालय है, उसी में देव को देखो — ऐसा कहने वाले
- ॐ दैवीसम्पत्प्रपूर्णाय नमः — दैवी सम्पत् से परिपूर्ण
- ॐ देशोद्धारसहायकृते नमः — देश के उद्धार में सहायता करने वाले
- ॐ द्वन्द्वमोहविनिर्मुक्ताय नमः — द्वंद्व-मोह से पूर्णतः मुक्त
- ॐ द्वन्द्वातीतविमत्सराय नमः — द्वंद्व से अतीत तथा मत्सर-रहित
द्वा से न वर्ग — द्वारकामायीवासी, धर्मसेतु व नित्याग्निहोत्र (नाम 501–558)
- ॐ द्वारकामायिवासिने नमः — द्वारकामायी में निवास करने वाले
- ॐ द्वेषद्रोहविवर्जिताय नमः — द्वेष तथा द्रोह से रहित
- ॐ द्वैताद्वैतविशिष्ठादीन् काले स्थाने विबोधकाय नमः — द्वैत, अद्वैत व विशिष्टाद्वैत आदि का समय व स्थान देखकर बोध कराने वाले
- ॐ धनहीनां धनाड्यां च समदृष्ट्यैव रक्षकाय नमः — धन-हीन तथा धनवान — दोनों की समान दृष्टि से ही रक्षा करने वाले
- ॐ धनदेनसमत्यागिने नमः — धन देने में समान रूप से त्यागी
- ॐ धरणीधरसन्निभाय नमः — धरणीधर के सदृश
- ॐ धर्मज्ञाय नमः — धर्म को जानने वाले
- ॐ धर्मसेतवे नमः — धर्म के सेतु
- ॐ धर्मस्थापनसम्भवाय नमः — धर्म की स्थापना के लिए प्रकट होने वाले
- ॐ धुमालेउपासनीपत्न्यो निर्वाणे सद्गतिप्रदाय नमः — धूमाळ तथा उपासनी की पत्नियों को निर्वाण के समय सद्गति देने वाले
- ॐ धूपखेडा पटेल् चान्द्भाय् नष्टाश्व स्थानसूचकाय नमः — धूपखेड़ा के पाटील चाँदभाई को खोए हुए घोड़े का स्थान बताने वाले
- ॐ धूमयान पतत्पाथेवारपत्नी सुरक्षकाय नमः — रेलगाड़ी से गिरती हुई वारे-पत्नी की भली प्रकार रक्षा करने वाले
- ॐ ध्यानावस्थितचेतसे नमः — ध्यान में स्थित चित्त वाले
- ॐ धृत्युत्साहसमन्विताय नमः — धृति तथा उत्साह से समन्वित
- ॐ नतजनावनाय नमः — नमन करने वाले जनों की रक्षा करने वाले
- ॐ नरलोकमनोरमाय नमः — नर-लोक के लिए मनोरम
- ॐ नष्टदृष्टिप्रदात्रे नमः — खोई हुई दृष्टि लौटा देने वाले
- ॐ नरलोकविडम्बनाय नमः — नर-लोक में लीला करने वाले
- ॐ नागसर्पे मयूरे च समारूढ षडाननाय नमः — नाग-सर्प तथा मयूर पर आरूढ़ षडानन-स्वरूप
- ॐ नानाचान्दोर्कमाहूय तत्सद्गत्यै कृतोद्यमाय नमः — नाना चंदोरकर को बुलाकर उनकी सद्गति के लिए उद्यम करने वाले
- ॐ नानानिम्होण्करस्यान्ते स्वाङ्घ्रि ध्यानलयप्रदाय नमः — नाना निमोणकर को अंत समय अपने चरणों के ध्यान में लय देने वाले
- ॐ नानादेशाभिधाकाराय नमः — नाना देशों के नाम व आकार वाले
- ॐ नानाविधिसमर्चिताय नमः — नाना विधियों से भली प्रकार अर्चित
- ॐ नारायणमहाराजसंश्लाघितपदाम्बुजाय नमः — नारायण महाराज द्वारा प्रशंसित चरण-कमलों वाले
- ॐ नारायणपराय नमः — नारायण में परायण
- ॐ नामवर्जिताय नमः — नाम से रहित
- ॐ निगृहितेन्द्रियग्रामाय नमः — इंद्रिय-समूह का निग्रह कर चुके
- ॐ निगमागमगोचराय नमः — निगम व आगम से गोचर
- ॐ नित्यसर्वगतस्थाणवे नमः — नित्य, सर्वगत व स्थाणु
- ॐ नित्यतृप्ताय नमः — नित्य तृप्त
- ॐ निराश्रयाय नमः — आश्रय-रहित
- ॐ नित्यान्नदानधर्मिष्ठाय नमः — नित्य अन्न-दान के धर्म में निष्ठ
- ॐ नित्यानन्दप्रवाहकाय नमः — नित्य आनंद बहाने वाले
- ॐ नित्यमङ्गलधाम्ने नमः — नित्य मंगल के धाम
- ॐ नित्याग्निहोत्रवर्धनाय नमः — नित्य अग्निहोत्र अर्थात धूनी की वृद्धि करने वाले
- ॐ नित्यकर्मनियोक्त्रे नमः — नित्य कर्म में नियुक्त करने वाले
- ॐ नित्यसत्त्वस्थिताय नमः — नित्य सत्त्व में स्थित
- ॐ निम्बपादपमूलस्थाय नमः — नीम वृक्ष के मूल में स्थित
- ॐ निरन्तराग्निरक्षित्रे नमः — निरंतर अग्नि की रक्षा करने वाले
- ॐ निस्पृहाय नमः — स्पृहा-रहित
- ॐ निर्विकल्पाय नमः — विकल्प-रहित
- ॐ निरङ्कुशगतागतये नमः — जिनका आना-जाना किसी अंकुश से बँधा नहीं
- ॐ निर्जितकामनादोषाय नमः — कामना के दोष को जीत चुके
- ॐ निराशाय नमः — आशा-रहित
- ॐ निरञ्जनाय नमः — निरंजन; निर्दोष
- ॐ निर्विकल्पसमाधिस्थाय नमः — निर्विकल्प समाधि में स्थित
- ॐ निरपेक्षाय नमः — अपेक्षा-रहित
- ॐ निर्गुणाय नमः — निर्गुण
- ॐ निर्द्वन्द्वाय नमः — द्वंद्व-रहित
- ॐ नित्यसत्त्वस्थाय नमः — नित्य सत्त्व में स्थित
- ॐ निर्विकाराय नमः — विकार-रहित
- ॐ निश्चलाय नमः — निश्चल
- ॐ निरालम्बाय नमः — आलंबन-रहित
- ॐ निराकाराय नमः — आकार-रहित
- ॐ निवृत्तगुणदोषकाय नमः — गुण व दोष से निवृत्त
- ॐ नूल्कर विजयानन्द माहिषां गतिदायकाय नमः — नूलकर, विजयानंद तथा माहिष को गति देने वाले
- ॐ नरसिंह गणूदास दत्त प्रचारसाधनाय नमः — नरसिंह तथा गणुदास को दत्त-प्रचार का साधन बनाने वाले
- ॐ नैष्ठिकब्रह्मचर्याय नमः — नैष्ठिक ब्रह्मचर्य वाले
प-वर्ग — पत्रिग्रामसमुद्भव, पतितपावन व प्रेममार्ग (नाम 559–620)
- ॐ नैष्कर्म्यपरिनिष्ठिताय नमः — नैष्कर्म्य में पूर्ण रूप से निष्ठित
- ॐ पण्डरीपाण्डुरङ्गाख्याय नमः — पंढरी के पांडुरंग नाम वाले
- ॐ पाटिल् तात्याजी मातुलाय नमः — पाटील तात्याजी के मातुल-स्वरूप
- ॐ पतितपावनाय नमः — पतितों को पावन करने वाले
- ॐ पत्रिग्रामसमुद्भवाय नमः — पत्री ग्राम में उत्पन्न
- ॐ पदविसृष्टगङ्गाम्भसे नमः — जिनके चरण से गंगा-जल निकला
- ॐ पदाम्बुजनतावनाय नमः — चरण-कमलों में नमन करने वालों की रक्षा करने वाले
- ॐ परब्रह्मस्वरूपिणे नमः — परब्रह्म के स्वरूप
- ॐ परमकरुणालयाय नमः — परम करुणा के आलय
- ॐ परतत्त्वप्रदीपाय नमः — परतत्त्व के प्रदीप
- ॐ परमार्थनिवेदकाय नमः — परमार्थ का निवेदन करने वाले
- ॐ परमानन्दनिस्यन्दाय नमः — परमानंद का निस्यंद
- ॐ परञ्ज्योतिषे नमः — परम ज्योति
- ॐ परात्पराय नमः — परात्पर
- ॐ परमेष्ठिने नमः — परमेष्ठी
- ॐ परन्धाम्ने नमः — परम धाम
- ॐ परमेश्वराय नमः — परमेश्वर
- ॐ परमसद्गुरवे नमः — परम सद्गुरु
- ॐ परमाचार्याय नमः — परम आचार्य
- ॐ परधर्मभयाद्भक्तान् स्वे स्वे धर्मे नियोजकाय नमः — पराए धर्म के भय से भक्तों को उनके अपने-अपने धर्म में नियुक्त करने वाले
- ॐ परार्थैकान्तसम्भूतये नमः — केवल दूसरों के लिए ही प्रकट होने वाले
- ॐ परमात्मने नमः — परमात्मा
- ॐ परागतये नमः — परम गति
- ॐ पापतापौघसंहारिणे नमः — पाप व ताप के समूह का संहार करने वाले
- ॐ पामरव्याजपण्डिताय नमः — पामर के बहाने पंडित
- ॐ पापाद्दासं समाकृष्य पुण्यमार्ग प्रवर्तकाय नमः — दास को पाप से खींचकर पुण्य-मार्ग पर प्रवृत्त करने वाले
- ॐ पिपीलिकासुखान्नदाय नमः — चींटियों तक को सुखपूर्वक अन्न देने वाले
- ॐ पिशाचेश्व व्यवस्थिताय नमः — पिशाचों में भी व्यवस्थित
- ॐ पुत्रकामेष्ठि यागादे ऋते सन्तानवर्धनाय नमः — पुत्रकामेष्टि यज्ञ आदि के बिना ही संतान की वृद्धि करने वाले
- ॐ पुनरुज्जीवितप्रेताय नमः — मृत को पुनः जीवित करने वाले
- ॐ पुनरावृत्तिनाशकाय नमः — पुनरावृत्ति का नाश करने वाले
- ॐ पुनः पुनरिहागम्य भक्तेभ्यः सद्गतिप्रदाय नमः — बार-बार यहाँ आकर भक्तों को सद्गति देने वाले
- ॐ पुण्डरीकायताक्षाय नमः — कमल सदृश विशाल नेत्रों वाले
- ॐ पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः — जिनका श्रवण व कीर्तन पुण्यकारी है
- ॐ पुरन्दरादिभक्ताग्र्यपरित्राणधुरन्धराय नमः — पुरंदर आदि श्रेष्ठ भक्तों की रक्षा का भार उठाने वाले
- ॐ पुराणपुरुषाय नमः — पुराण-पुरुष
- ॐ पुरीशाय नमः — पुरी के ईश
- ॐ पुरुषोत्तमाय नमः — पुरुषोत्तम
- ॐ पूजापराङ्मुखाय नमः — पूजा से विमुख रहने वाले
- ॐ पूर्णाय नमः — पूर्ण
- ॐ पूर्णवैराग्यशोभिताय नमः — पूर्ण वैराग्य से शोभित
- ॐ पूर्णानन्दस्वरूपिणे नमः — पूर्ण आनंद के स्वरूप
- ॐ पूर्णकृपानिधये नमः — पूर्ण कृपा के निधि
- ॐ पूर्णचन्द्रसमाह्लादिने नमः — पूर्ण चंद्रमा के समान आह्लाद देने वाले
- ॐ पूर्णकामाय नमः — पूर्ण-काम; जिनकी कोई कामना शेष नहीं
- ॐ पूर्वजाय नमः — पूर्वज
- ॐ प्रणतपालनोद्युक्ताय नमः — नमन करने वालों के पालन में उद्यत
- ॐ प्रणतार्तिहराय नमः — नमन करने वालों की पीड़ा हरने वाले
- ॐ प्रत्यक्षदेवतामूर्तये नमः — प्रत्यक्ष देवता की मूर्ति
- ॐ प्रत्यगात्मनिदर्शकाय नमः — प्रत्यगात्मा का दर्शन कराने वाले
- ॐ प्रपन्नपारिजाताय नमः — शरणागतों के लिए पारिजात
- ॐ प्रपन्नानां परागतये नमः — शरणागतों की परम गति
- ॐ प्रमाणातीतचिन्मूर्तये नमः — प्रमाण से अतीत चिन्मूर्ति
- ॐ प्रमादाभिधमृत्युजिते नमः — प्रमाद नामक मृत्यु को जीतने वाले
- ॐ प्रसन्नवदनाय नमः — प्रसन्न मुख वाले
- ॐ प्रसादाभिमुखद्युतये नमः — प्रसाद की ओर उन्मुख द्युति वाले
- ॐ प्रशस्तवाचे नमः — प्रशस्त वाणी वाले
- ॐ प्रशान्तात्मने नमः — प्रशांत आत्मा वाले
- ॐ प्रियसत्यमुदाहरते नमः — प्रिय तथा सत्य ही कहने वाले
- ॐ प्रेमदाय नमः — प्रेम देने वाले
- ॐ प्रेमवश्याय नमः — प्रेम से वश में होने वाले
- ॐ प्रेममार्गैकसाधनाय नमः — प्रेम-मार्ग ही जिनका एकमात्र साधन है
ब व भ वर्ग — ब्रह्मानन्द, भक्तानुग्रहकातर व भस्मदान (नाम 621–718)
- ॐ बहुरूपनिगूढात्मने नमः — बहुरूप में छिपी आत्मा वाले
- ॐ बलदृप्तदमक्षमाय नमः — बल के दर्प से भरे हुए का दमन करने में समर्थ
- ॐ बलातिदर्पभय्याजि महागर्वविभञ्जनाय नमः — बल के अतिशय दर्प वाले भय्याजी के महागर्व का भंजन करने वाले
- ॐ बुधसन्तोषदाय नमः — बुधों को संतोष देने वाले
- ॐ बुद्धाय नमः — बुद्ध-स्वरूप
- ॐ बुधजनावनाय नमः — बुधजनों की रक्षा करने वाले
- ॐ बृहद्बन्धविमोक्त्रे नमः — बड़े से बड़े बंधन से मुक्त करने वाले
- ॐ बृहद्भारवहक्षमाय नमः — बड़े से बड़ा भार वहन करने में समर्थ
- ॐ ब्रह्मकुलसमुद्भूताय नमः — ब्राह्मण कुल में उत्पन्न
- ॐ ब्रह्मचारिव्रतस्थिताय नमः — ब्रह्मचारी के व्रत में स्थित
- ॐ ब्रह्मानन्दामृतेमग्नाय नमः — ब्रह्मानंद के अमृत में मग्न
- ॐ ब्रह्मानन्दाय नमः — ब्रह्मानंद-स्वरूप
- ॐ ब्रह्मानन्दलसद्दृष्टये नमः — ब्रह्मानंद से देदीप्यमान दृष्टि वाले
- ॐ ब्रह्मवादिने नमः — ब्रह्मवादी
- ॐ बृहच्छ्रवसे नमः — महान कीर्ति वाले
- ॐ ब्राह्मणस्त्रीविसृष्टोल्कातर्जितश्वाकृतये नमः — ब्राह्मणी द्वारा फेंकी गई जलती लकड़ी से डाँटे गए कुत्ते के रूप वाले
- ॐ ब्राह्मणानां मशीदिस्थाय नमः — ब्राह्मणों के लिए मस्जिद में स्थित रहने वाले
- ॐ ब्रह्मण्याय नमः — ब्रह्मण्य; ब्राह्मणों के हितकारी
- ॐ ब्रह्मवित्तमाय नमः — ब्रह्म को जानने वालों में श्रेष्ठ
- ॐ भक्तदासगणूप्राणमानवृत्त्यादिरक्षकाय नमः — भक्त दास गणु के प्राण, मान व वृत्ति आदि की रक्षा करने वाले
- ॐ भक्तात्यन्तहितैषिणे नमः — भक्तों का अत्यंत हित चाहने वाले
- ॐ भक्ताश्रितदयापराय नमः — भक्तों व आश्रितों पर दया में परायण
- ॐ भक्तार्थे धृतदेहाय नमः — भक्तों के लिए ही देह धारण करने वाले
- ॐ भक्तार्थे दग्धहस्तकाय नमः — भक्त के लिए अपना हाथ जला लेने वाले
- ॐ भक्तपरागतये नमः — भक्तों की परम गति
- ॐ भक्तवत्सलाय नमः — भक्तों पर वात्सल्य रखने वाले
- ॐ भक्तमानसवासिने नमः — भक्तों के मन में निवास करने वाले
- ॐ भक्तातिसुलभाय नमः — भक्तों के लिए अत्यंत सुलभ
- ॐ भक्तभवाब्धिपोताय नमः — भक्तों के लिए भव-सागर की नौका
- ॐ भगवते नमः — भगवान
- ॐ भजतां सुहृदे नमः — भजन करने वालों के सुहृद्
- ॐ भक्तसर्वस्वहारिणे नमः — भक्तों का सर्वस्व हर लेने वाले
- ॐ भक्तानुग्रहकातराय नमः — भक्तों पर अनुग्रह करने के लिए व्याकुल
- ॐ भक्तरास्न्यादि सर्वेषां अमोघाभयसम्प्रदाय नमः — भक्त रास्ने आदि सबको अमोघ अभय देने वाले
- ॐ भक्तावनसमर्थाय नमः — भक्तों की रक्षा में समर्थ
- ॐ भक्तावनधुरन्धराय नमः — भक्तों की रक्षा का भार उठाने वाले
- ॐ भक्तभावपराधीनाय नमः — भक्तों के भाव के अधीन
- ॐ भक्तात्यन्तहितौषधाय नमः — भक्तों के लिए अत्यंत हितकारी औषध
- ॐ भक्तावनप्रतिज्ञाय नमः — भक्तों की रक्षा की प्रतिज्ञा करने वाले
- ॐ भजतामिष्टकामधुहे नमः — भजन करने वालों की अभीष्ट कामनाओं की कामधेनु
- ॐ भक्तहृत्पद्मवासिने नमः — भक्तों के हृदय-कमल में निवास करने वाले
- ॐ भक्तिमार्गप्रदर्शकाय नमः — भक्ति-मार्ग दिखाने वाले
- ॐ भक्ताशयविहारिणे नमः — भक्तों के आशय में विहार करने वाले
- ॐ भक्तसर्वमलापहाय नमः — भक्तों के समस्त मल दूर करने वाले
- ॐ भक्तबोधैकनिष्ठाय नमः — भक्तों को बोध कराने में ही एकनिष्ठ
- ॐ भक्तानां सद्गतिप्रदाय नमः — भक्तों को सद्गति देने वाले
- ॐ भद्रमार्गप्रदर्शिने नमः — कल्याण-मार्ग दिखाने वाले
- ॐ भद्रं भद्रमिति ब्रुवते नमः — भला होगा, भला होगा — ऐसा कहने वाले
- ॐ भद्रश्रवसे नमः — कल्याणकारी कीर्ति वाले
- ॐ भन्नूमायि साध्वीमहितशासनाय नमः — साध्वी भन्नूमायी का सम्मानपूर्वक शासन करने वाले
- ॐ भयसन्त्रस्त कापर्दे अमोघाभयवरप्रदाय नमः — भय से त्रस्त कापर्दे को अमोघ अभय-वर देने वाले
- ॐ भयहीनाय नमः — भय-रहित
- ॐ भयत्रात्रे नमः — भय से रक्षा करने वाले
- ॐ भयकृते नमः — भय उत्पन्न करने वाले
- ॐ भयनाशनाय नमः — भय का नाश करने वाले
- ॐ भववारिधिपोताय नमः — भव-सागर की नौका
- ॐ भवलुण्ठनकोविदाय नमः — भव को लूट लेने में निपुण
- ॐ भस्मदाननिरस्ताधिव्याधिदुःखाऽशुभाऽखिलाय नमः — भस्म के दान से आधि, व्याधि, दुःख व समस्त अशुभ दूर करने वाले
- ॐ भस्मसात्कृतभक्तारये नमः — भक्तों के शत्रुओं को भस्म कर देने वाले
- ॐ भस्मसात्कृतमन्मथाय नमः — कामदेव को भस्म कर देने वाले
- ॐ भस्मपूतमशीदिस्थाय नमः — भस्म से पवित्र मस्जिद में स्थित
- ॐ भस्मदग्धाखिलामयाय नमः — भस्म से समस्त रोगों को दग्ध कर देने वाले
- ॐ भागोजि कुष्ठरोगघ्नाय नमः — भागोजी के कुष्ठ रोग का नाश करने वाले
- ॐ भाषाखिलसुवेदिताय नमः — समस्त भाषाओं को भली प्रकार जानने वाले
- ॐ भाष्यकृते नमः — भाष्य करने वाले
- ॐ भावगम्याय नमः — भाव से प्राप्य
- ॐ भारसर्वपरिग्रहाय नमः — समस्त का भार स्वयं ग्रहण करने वाले
- ॐ भागवतसहायाय नमः — भागवत की सहायता करने वाले
- ॐ भावना शून्यतः सुखिने नमः — भावना की शून्यता से ही सुखी
- ॐ भागवतप्रधानाय नमः — भागवतों में प्रधान
- ॐ भागवतोत्तमाय नमः — भागवतों में उत्तम
- ॐ भाटेद्वेषं समाकृष्य भक्तिं तस्मै प्रदत्तवते नमः — भाटे के द्वेष को खींचकर उन्हें भक्ति दे देने वाले
- ॐ भिल्लरूपेण दत्ताम्भसे नमः — भील का रूप धारण कर जल देने वाले
- ॐ भिक्षान्नदानशेषभुजे नमः — भिक्षा से मिले अन्न के दान से बचा हुआ ही खाने वाले
- ॐ भिक्षाधर्ममहाराजाय नमः — भिक्षा-धर्म के महाराज
- ॐ भिक्षौघदत्तभोजनाय नमः — भिक्षा के समूह से भोजन देने वाले
- ॐ भीमाजी क्षयपापघ्ने नमः — भीमाजी के क्षय-रोग रूपी पाप का नाश करने वाले
- ॐ भीमबलान्विताय नमः — भीम बल से युक्त
- ॐ भीतानां भीतिनाशिने नमः — भयभीतों का भय नष्ट करने वाले
- ॐ भीषणभीषणाय नमः — भयंकरों के लिए भी भयंकर
- ॐ भीषाचालितसुर्याग्निमघवन्मृत्युमारुताय नमः — जिनके भय से सूर्य, अग्नि, इंद्र, मृत्यु व वायु संचालित होते हैं
- ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदात्रे नमः — भुक्ति तथा मुक्ति देने वाले
- ॐ भुजगाद्रक्षितप्रजाय नमः — सर्प से प्रजा की रक्षा करने वाले
- ॐ भुजङ्गरूपमाविश्य सहस्रजनपूजिताय नमः — सर्प का रूप धारण कर सहस्र जनों द्वारा पूजित होने वाले
- ॐ भुक्त्वा भोजनदातॄणां दग्धप्रागुत्तराऽशुभाय नमः — भोजन कराने वालों के पूर्व व उत्तर के अशुभ को भोजन करके दग्ध कर देने वाले
- ॐ भूटिद्वारा गृहं बद्ध्वा कृतसर्वमतालयाय नमः — बूटी के द्वारा गृह बनवाकर उसे सब मतों का आलय कर देने वाले
- ॐ भूभृत्समोपकारिणे नमः — पर्वत के समान उपकार करने वाले
- ॐ भूम्ने नमः — भूमा; विशालता-स्वरूप
- ॐ भूशयाय नमः — भूमि पर शयन करने वाले
- ॐ भूतशरण्यभूताय नमः — प्राणियों के शरण-भूत
- ॐ भूतात्मने नमः — भूतों की आत्मा
- ॐ भूतभावनाय नमः — भूतों की भावना करने वाले
- ॐ भूतप्रेतपिशाचादीन् धर्ममार्गे नियोजयते नमः — भूत, प्रेत व पिशाच आदि को भी धर्म-मार्ग में नियुक्त करने वाले
- ॐ भृत्यस्यभृत्यसेवाकृते नमः — सेवक के सेवक की भी सेवा करने वाले
- ॐ भृत्यभारवहाय नमः — सेवकों का भार वहन करने वाले
- ॐ भेकं दत्त वरं स्मृत्वा सर्पस्यादपि रक्षकाय नमः — मेंढक को दिए गए वर का स्मरण कर उसे सर्प से भी बचाने वाले
- ॐ भोगैश्वर्येष्वसक्तात्मने नमः — भोग व ऐश्वर्य में आसक्ति-रहित आत्मा वाले
- ॐ भैषज्येभिषजां वराय नमः — औषध देने वाले वैद्यों में श्रेष्ठ
म-वर्ग — महायोगेश्वर, मायामानुषरूप व मूर्तिपूजानुशास्ता (नाम 719–810)
- ॐ मर्करूपेण भक्तस्य रक्षणे तेन ताडिताय नमः — बंदर का रूप धारण कर भक्त की रक्षा करते हुए उसी से ताड़ित होने वाले
- ॐ मन्त्रघोषमशीदिस्थाय नमः — मंत्र-घोष से गूँजती मस्जिद में स्थित
- ॐ मदाभिमानवर्जिताय नमः — मद तथा अभिमान से रहित
- ॐ मधुपानभृशासक्तिं दिव्यशक्त्य व्यपोहकाय नमः — मद्यपान की तीव्र आसक्ति को दिव्य शक्ति से दूर कर देने वाले
- ॐ मशीध्यां तुलसीपूजां अग्निहोत्रं च शासकाय नमः — मस्जिद में तुलसी-पूजा तथा अग्निहोत्र का शासन करने वाले
- ॐ महावाक्यसुधामग्नाय नमः — महावाक्य रूपी अमृत में मग्न
- ॐ महाभागवताय नमः — महाभागवत
- ॐ महानुभावतेजस्विने नमः — महानुभाव तथा तेजस्वी
- ॐ महायोगेश्वराय नमः — महायोगेश्वर
- ॐ महाभयपरित्रात्रे नमः — महान भय से रक्षा करने वाले
- ॐ महात्मने नमः — महात्मा
- ॐ महाबलाय नमः — महाबली
- ॐ माधवरायदेश्पाण्डे सख्युः साहाय्यकृते नमः — माधवराव देशपांडे नामक सखा की सहायता करने वाले
- ॐ मानापमानयोस्तुल्याय नमः — मान तथा अपमान में समान
- ॐ मार्गबन्धवे नमः — मार्ग में बंधु
- ॐ मारुतये नमः — मारुति-स्वरूप
- ॐ मायामानुष रूपेण गूढैश्वर्यपरात्पराय नमः — माया से धारण किए मानुष रूप में ऐश्वर्य छिपाए हुए परात्पर
- ॐ मार्गस्थदेवसत्कारः कार्य इत्यनुशासित्रे नमः — मार्ग में मिले देव का सत्कार करना चाहिए — ऐसा अनुशासन करने वाले
- ॐ मारीग्रस्थ बूटीत्रात्रे नमः — महामारी से ग्रस्त बूटी की रक्षा करने वाले
- ॐ मार्जालोच्छिष्ठभोजनाय नमः — बिल्ली का जूठा भी भोजन कर लेने वाले
- ॐ मिरीकरं सर्पगण्डात् दैवाज्ञाप्ताद्विमोचयते नमः — दैव द्वारा प्राप्त सर्प-दंश से मिरीकर को मुक्त कराने वाले
- ॐ मितवाचे नमः — मित भाषण करने वाले
- ॐ मितभुजे नमः — मित भोजन करने वाले
- ॐ मित्रेशत्रौसदासमाय नमः — मित्र व शत्रु में सदा समान
- ॐ मीनातायी प्रसूत्यर्थं प्रेषिताय रथं ददते नमः — मीनातायी के प्रसव के लिए रथ भेजकर दे देने वाले
- ॐ मुक्तसङ्ग आनंवादिने नमः — आसक्ति से मुक्त होकर आनंद कहने वाले
- ॐ मुक्तसंसृतिबन्धनाय नमः — संसार-बंधन से मुक्त
- ॐ मुहुर्देवावतारादि नामोच्चारण निवृताय नमः — बार-बार देव-अवतार आदि के नाम-उच्चारण से तृप्त होने वाले
- ॐ मूर्तिपूजानुशास्त्रे नमः — मूर्ति-पूजा का अनुशासन करने वाले
- ॐ मूर्तिमानप्यमूर्तिमते नमः — मूर्तिमान होकर भी अमूर्त
- ॐ मूलेशास्त्री गुरोर्घोलप महाराजस्य रूपधृते नमः — मूले शास्त्री के लिए गुरु घोलप महाराज का रूप धारण करने वाले
- ॐ मृतसूनुं समाकृष्य पूर्वमातरि योजयते नमः — मृत पुत्र को खींचकर पुनः उसकी माता से मिला देने वाले
- ॐ मृदालयनिवासिने नमः — मिट्टी के आलय में निवास करने वाले
- ॐ मृत्युभीतिव्यपोहकाय नमः — मृत्यु के भय को दूर कर देने वाले
- ॐ मेघश्यामायपूजार्थं शिवलिङ्गमुपाहरते नमः — मेघश्याम की पूजा के लिए शिवलिंग ला देने वाले
- ॐ मोहकलिलतीर्णाय नमः — मोह के दलदल से पार उतर चुके
- ॐ मोहसंशयनाशकाय नमः — मोह तथा संशय का नाश करने वाले
- ॐ मोहिनीराजपूजायां कुल्कर्ण्यप्पा नियोजकाय नमः — मोहिनीराज की पूजा में कुलकर्णी अप्पा को नियुक्त करने वाले
- ॐ मोक्षमार्गसहायाय नमः — मोक्ष-मार्ग में सहायक
- ॐ मौनव्याख्याप्रबोधकाय नमः — मौन की व्याख्या से ही बोध कराने वाले
- ॐ यज्ञदानतपोनिष्ठाय नमः — यज्ञ, दान व तप में निष्ठ
- ॐ यज्ञशिष्ठान्नभोजनाय नमः — यज्ञ से बचे हुए अन्न का भोजन करने वाले
- ॐ यतीन्द्रियमनोबुद्धये नमः — इंद्रियों, मन व बुद्धि को संयत कर चुके
- ॐ यतिधर्मसुपालकाय नमः — यति-धर्म का भली प्रकार पालन करने वाले
- ॐ यतो वाचो निवर्तन्ते तदानन्द सुनिष्ठिताय नमः — जहाँ से वाणी लौट आती है, उस आनंद में भली प्रकार निष्ठित
- ॐ यत्नातिशयसेवाप्त गुरुपूर्णकृपाबलाय नमः — अत्यधिक यत्नपूर्वक की गई सेवा से प्राप्त गुरु की पूर्ण कृपा के बल वाले
- ॐ यथेच्छसूक्ष्मसञ्चारिणे नमः — इच्छानुसार सूक्ष्म रूप में संचरण करने वाले
- ॐ यथेष्टदानधर्मकृते नमः — इच्छानुसार दान-धर्म करने वाले
- ॐ यन्त्रारूढं जगत्सर्वं मायया भ्रामयत्प्रभवे नमः — यंत्र पर चढ़े समस्त जगत को माया से घुमाने वाले प्रभु
- ॐ यमकिङ्करसन्त्रस्त सामन्तस्य सहायकृते नमः — यम-किंकरों से त्रस्त सामंत की सहायता करने वाले
- ॐ यमदूतपरिक्लिष्टपुरन्दरसुरक्षकाय नमः — यमदूतों से परिक्लिष्ट पुरंदर की भली प्रकार रक्षा करने वाले
- ॐ यमभीतिविनाशिने नमः — यम के भय का विनाश करने वाले
- ॐ यवनालयभूषणाय नमः — यवन-आलय अर्थात मस्जिद के भूषण
- ॐ यशसापिमहाराजाय नमः — यश से भी महाराज
- ॐ यशःपूरितभारताय नमः — जिनके यश से भारत भर गया
- ॐ यक्षरक्षःपिशाचानां सान्निध्यादेवनाशकाय नमः — यक्ष, राक्षस व पिशाचों का अपने सान्निध्य मात्र से नाश करने वाले
- ॐ युक्तभोजननिद्राय नमः — युक्त भोजन व निद्रा वाले
- ॐ युगान्तरचरित्रविदे नमः — युगांतरों के चरित्र को जानने वाले
- ॐ योगशक्तिजितस्वप्नाय नमः — योग-शक्ति से स्वप्न को जीत चुके
- ॐ योगमायासमावृताय नमः — योगमाया से समावृत
- ॐ योगवीक्षणसन्दत्तपरमानन्दमूर्तिमते नमः — योग-दृष्टि से परमानंद की मूर्ति प्रदान करने वाले
- ॐ योगिभिर्ध्यानगम्याय नमः — योगियों द्वारा ध्यान से प्राप्य
- ॐ योगक्षेमवहाय नमः — योग-क्षेम का वहन करने वाले
- ॐ रथस्य रजताश्वेषु हृतेष्वम्लान मानसाय नमः — रथ के चाँदी जड़े अश्व चुरा लिए जाने पर भी अम्लान मन वाले
- ॐ रसाय नमः — रस-स्वरूप
- ॐ रससारज्ञाय नमः — रस के सार को जानने वाले
- ॐ रसनारसजिते नमः — रसना के रस को जीत चुके
- ॐ रसोप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तित महायशसे नमः — इसका रस भी पर को देखकर लौट जाता है — ऐसे महान यश वाले
- ॐ रक्षणात्पोषणात् सर्वपितृमातृगुरुप्रभवे नमः — रक्षा व पोषण के कारण सबके पिता, माता तथा गुरु-रूप प्रभु
- ॐ रागद्वेषवियुक्तात्मने नमः — राग व द्वेष से रहित आत्मा वाले
- ॐ राकाचन्द्रसमाननाय नमः — पूर्णिमा के चंद्र के समान मुख वाले
- ॐ राजीवलोचनाय नमः — कमल सदृश नेत्रों वाले
- ॐ राजभिश्चाभिवन्दिताय नमः — राजाओं द्वारा भी वंदित
- ॐ रामभक्तिप्रपूर्णाय नमः — राम-भक्ति से परिपूर्ण
- ॐ रामरूपप्रदर्शकाय नमः — राम का रूप दिखाने वाले
- ॐ रामसारूप्यलब्धाय नमः — राम के सारूप्य को प्राप्त
- ॐ रामसायीति विश्रुताय नमः — "रामसाईं" के नाम से विश्रुत
- ॐ रामदूतमयाय नमः — राम-दूत हनुमान-स्वरूप
- ॐ राममन्त्रोपदेशकाय नमः — राम-मंत्र का उपदेश करने वाले
- ॐ राममूर्त्यादिशङ्कर्त्रे नमः — राम की मूर्ति आदि की स्थापना करने वाले
- ॐ रासनेकुलवर्धनाय नमः — रास्ने के कुल की वृद्धि करने वाले
- ॐ रुद्रतुल्यप्रकोपाय नमः — रुद्र के तुल्य प्रकोप वाले
- ॐ रुद्रकोपदमक्षमाय नमः — रुद्र के कोप का भी दमन करने में समर्थ
- ॐ रुद्रविष्णुकृताभेदाय नमः — रुद्र तथा विष्णु में अभेद करने वाले
- ॐ रूपिणीरूप्यमोहजिते नमः — रूपिणी तथा चाँदी के मोह को जीत चुके
- ॐ रूपेरूपे चिदात्मानं पश्यध्वमिति बोधकाय नमः — प्रत्येक रूप में चैतन्य आत्मा को देखो — ऐसा बोध कराने वाले
- ॐ रूपाद्रूपान्तरं यातोऽमृत इत्यभयप्रदाय नमः — एक रूप से दूसरे रूप में जाने वाला अमृत है — ऐसा कहकर अभय देने वाले
- ॐ रेगे शिशोः तथान्धस्य सतां गति विधायकाय नमः — रेगे के शिशु तथा एक अंधे को सज्जनों की गति देने वाले
- ॐ रोगदारिद्र्यदुःखादीन् भस्मदानेन वारयते नमः — रोग, दरिद्रता व दुःख आदि को भस्म के दान से दूर कर देने वाले
- ॐ रोदनातार्द्रचित्ताय नमः — रोदन से आर्द्र चित्त वाले
- ॐ रोमहर्षादवाकृतये नमः — रोमांच तक से रहित आकृति वाले
- ॐ लघ्वाशिने नमः — अल्प भोजन करने वाले
य, र, ल व व वर्ग — योगक्षेमवह, रामसाईं व वैराग्यपूर्णचरित (नाम 811–878)
- ॐ लघुनिद्राय नमः — अल्प निद्रा वाले
- ॐ लब्धाश्वग्रामणिस्तुताय नमः — खोया हुआ घोड़ा पा लेने वाले ग्राम-मुखिया द्वारा स्तुत
- ॐ लगुडोद्धृतरोहिल्लास्तम्भनाद्दर्पनाशकाय नमः — लाठी उठाकर रोहिल्ला को स्तंभित कर उसका दर्प नष्ट करने वाले
- ॐ ललिताद्भुतचारित्राय नमः — ललित तथा अद्भुत चरित्र वाले
- ॐ लक्ष्मीनारायणाय नमः — लक्ष्मीनारायण-स्वरूप
- ॐ लीलामानुषदेहस्थाय नमः — लीला से धारण किए मानुष देह में स्थित
- ॐ लीलामानुषकर्मकृते नमः — लीला से मानुष कर्म करने वाले
- ॐ लेलेशास्त्रि श्रुतिप्रीत्या मशीदि वेदघोषणाय नमः — लेले शास्त्री की श्रुति-प्रीति के लिए मस्जिद में वेद-घोष कराने वाले
- ॐ लोकाभिरामाय नमः — लोकों के लिए अभिराम
- ॐ लोकेशाय नमः — लोकों के ईश
- ॐ लोलुपत्वविवर्जिताय नमः — लोलुपता से रहित
- ॐ लोकेषु विहरंश्चापि सच्चिदानन्दसंस्थिताय नमः — लोकों में विहार करते हुए भी सच्चिदानंद में स्थित
- ॐ लोणिवार्ण्यगणूदासं महापायाद्विमोचकाय नमः — लोणिवारी में गणुदास को महान संकट से मुक्त कराने वाले
- ॐ वस्त्रवद्वपुरुद्वीक्ष्य स्वेच्छत्यक्तकलेबराय नमः — शरीर को वस्त्र के समान देखकर स्वेच्छा से देह त्याग देने वाले
- ॐ वस्त्रवद्देहमुत्सृज्य पुनर्देहं प्रविष्टवते नमः — वस्त्र के समान देह त्यागकर पुनः देह में प्रविष्ट होने वाले
- ॐ वन्ध्यादोषविमुक्त्यर्थं तद्वस्त्रे नारिकेलदाय नमः — वंध्या-दोष से मुक्ति के लिए उसके वस्त्र में नारियल देने वाले
- ॐ वासुदेवैकसन्तुष्टये नमः — वासुदेव से ही संतुष्ट रहने वाले
- ॐ वादद्वेषमदायाऽप्रियाय नमः — वाद, द्वेष तथा मद से अप्रीति रखने वाले
- ॐ विद्याविनयसम्पन्नाय नमः — विद्या तथा विनय से सम्पन्न
- ॐ विधेयात्मने नमः — विधेय आत्मा वाले
- ॐ वीर्यवते नमः — वीर्यवान
- ॐ विविक्तदेशसेविने नमः — एकांत स्थान का सेवन करने वाले
- ॐ विश्वभावनभाविताय नमः — विश्व की भावना से भावित
- ॐ विश्वमङ्गलमाङ्गल्याय नमः — विश्व के मंगलों में भी मंगल
- ॐ विषयात् संहृतेन्द्रियाय नमः — इंद्रियों को विषयों से समेट चुके
- ॐ वीतरागभयक्रोधाय नमः — राग, भय तथा क्रोध से रहित
- ॐ वृद्धान्धेक्षणसम्प्रदाय नमः — वृद्ध अंधे को दृष्टि दे देने वाले
- ॐ वेदान्ताम्बुजसूर्याय नमः — वेदांत-रूपी कमल के सूर्य
- ॐ वेदिस्थाग्निविवर्धनाय नमः — वेदी पर स्थित अग्नि की वृद्धि करने वाले
- ॐ वैराग्यपूर्णचारित्राय नमः — वैराग्य से परिपूर्ण चरित्र वाले
- ॐ वैकुण्ठप्रियकर्मकृते नमः — वैकुंठ को प्रिय कर्म करने वाले
- ॐ वैहायसगतये नमः — आकाश-मार्ग से गति करने वाले
- ॐ व्यामोहप्रशमौषधाय नमः — व्यामोह का प्रशमन करने वाली औषध
- ॐ शत्रुच्छेदैकमन्त्राय नमः — शत्रु-नाश का एकमात्र मंत्र
- ॐ शरणागतवत्सलाय नमः — शरणागतों पर वात्सल्य रखने वाले
- ॐ शरणागतभीमाजीश्वान्धभेकादिरक्षकाय नमः — शरणागत भीमाजी, कुत्ते, अंधे व मेंढक आदि की रक्षा करने वाले
- ॐ शरीरस्थाशरीरस्थाय नमः — शरीर में स्थित होकर भी शरीर से परे स्थित
- ॐ शरीरानेकसम्भृताय नमः — अनेक शरीर धारण करने वाले
- ॐ शश्वत्परार्थसर्वेहाय नमः — सदा दूसरों के लिए ही समस्त चेष्टा करने वाले
- ॐ शरीरकर्मकेवलाय नमः — केवल शरीर-निर्वाह के लिए ही कर्म करने वाले
- ॐ शाश्वतधर्मगोप्त्रे नमः — शाश्वत धर्म की रक्षा करने वाले
- ॐ शान्तिदान्तिविभूषिताय नमः — शांति तथा दांति से विभूषित
- ॐ शिरस्तम्भितगङ्गाम्भसे नमः — मस्तक पर गंगा-जल को स्तंभित करने वाले
- ॐ शान्ताकाराय नमः — शांत आकार वाले
- ॐ शिष्टधर्ममनुप्राप्य मौलाना पादसेविताय नमः — शिष्ट-धर्म को प्राप्त कर मौलाना के चरणों की सेवा करने वाले
- ॐ शिवदाय नमः — कल्याण देने वाले
- ॐ शिवरूपाय नमः — शिव-स्वरूप
- ॐ शिवशक्तियुताय नमः — शिव तथा शक्ति से युक्त
- ॐ शिरीयानसुतोद्वाहं यथोक्तं परिपूरयते नमः — शिरीयान के पुत्र का विवाह जैसा कहा था वैसा ही पूर्ण करने वाले
- ॐ शीतोष्णसुखदुःखेषु समाय नमः — शीत-उष्ण तथा सुख-दुःख में समान
- ॐ शीतलवाक्सुधाय नमः — शीतल वाणी रूपी अमृत वाले
- ॐ शिर्डिन्यस्तगुरोर्देहाय नमः — शिरडी में जिन्होंने गुरु का देह रखा
- ॐ शिर्डित्यक्तकलेबराय नमः — शिरडी में ही जिन्होंने अपना शरीर त्यागा
- ॐ शुक्लाम्बरधराय नमः — श्वेत वस्त्र धारण करने वाले
- ॐ शुद्धसत्त्वगुणस्थिताय नमः — शुद्ध सत्त्वगुण में स्थित
- ॐ शुद्धज्ञानस्वरूपाय नमः — शुद्ध ज्ञान-स्वरूप
- ॐ शुभाशुभविवर्जिताय नमः — शुभ तथा अशुभ — दोनों से रहित
- ॐ शुभ्रमार्गेण नेता नॄन् तद्विष्णोः परमं पदाय नमः — मनुष्यों को शुभ्र मार्ग से विष्णु के परम पद तक ले जाने वाले
- ॐ शेलुगुरुकुलेवासिने नमः — शेलु के गुरुकुल में निवास करने वाले
- ॐ शेषशायिने नमः — शेष-शय्या पर शयन करने वाले
- ॐ श्रीकण्ठाय नमः — श्रीकंठ
- ॐ श्रीकराय नमः — श्री करने वाले
- ॐ श्रीमते नमः — श्रीमान
- ॐ श्रेष्ठाय नमः — श्रेष्ठ
- ॐ श्रेयोविधायकाय नमः — कल्याण का विधान करने वाले
- ॐ श्रुतिस्मृतिशिरोरत्नविभूषितपदाम्बुजाय नमः — श्रुति व स्मृति रूपी शिरोरत्नों से विभूषित चरण-कमलों वाले
- ॐ श्रेयान् स्वधर्म इत्युक्त्वा स्वेस्वेधर्मनियोजकाय नमः — अपना धर्म ही श्रेयस्कर है — यह कहकर सबको अपने-अपने धर्म में नियुक्त करने वाले
- ॐ सखारामसशिष्याय नमः — सखाराम को शिष्य बनाने वाले
श व स वर्ग — सर्वधर्मसमत्राता, सर्वमतसुसम्मत व सद्गुरु (नाम 879–960)
- ॐ सकलाश्रयकामदुहे नमः — समस्त आश्रितों की कामधेनु
- ॐ सगुणोनिर्गुणाय नमः — सगुण होकर भी निर्गुण
- ॐ सच्चिदानन्दमूर्तिमते नमः — सच्चिदानंद की मूर्ति वाले
- ॐ सज्जनमानसव्योमराजमानसुधाकराय नमः — सज्जनों के मानस-आकाश में सुशोभित चंद्रमा
- ॐ सत्कर्मनिरताय नमः — सत्कर्म में निरत
- ॐ सत्सन्तानवरप्रदाय नमः — उत्तम संतान का वर देने वाले
- ॐ सत्यव्रताय नमः — सत्य के व्रत वाले
- ॐ सत्याय नमः — सत्य-स्वरूप
- ॐ सत्सुलभोऽन्यदुर्लभाय नमः — सज्जनों के लिए सुलभ, अन्यों के लिए दुर्लभ
- ॐ सत्यवाचे नमः — सत्य वाणी वाले
- ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमः — सत्य संकल्प वाले
- ॐ सत्यधर्मपरायणाय नमः — सत्य तथा धर्म में परायण
- ॐ सत्यपराक्रमाय नमः — सत्य पराक्रम वाले
- ॐ सत्यद्रष्ट्रे नमः — सत्य को देखने वाले
- ॐ सनातनाय नमः — सनातन
- ॐ सत्यनारायणाय नमः — सत्यनारायण-स्वरूप
- ॐ सत्यतत्त्वप्रबोधकाय नमः — सत्य-तत्त्व का बोध कराने वाले
- ॐ सत्पुरुषाय नमः — सत्पुरुष
- ॐ सदाचाराय नमः — सदाचार-स्वरूप
- ॐ सदापरहितेरताय नमः — सदा दूसरों के हित में रत
- ॐ सदाक्षिप्तनिजानन्दाय नमः — सदा अपने ही आनंद में डूबे रहने वाले
- ॐ सदानन्दाय नमः — सदा आनंद-स्वरूप
- ॐ सद्गुरवे नमः — सद्गुरु
- ॐ सदाजनहितोद्युक्ताय नमः — सदा जन-हित में उद्यत
- ॐ सदात्मने नमः — सदा आत्मा में स्थित
- ॐ सदाशिवाय नमः — सदाशिव
- ॐ सदार्द्रचित्ताय नमः — सदा आर्द्र चित्त वाले
- ॐ सद्रूपिणे नमः — सत्-रूप
- ॐ सदाश्रयाय नमः — सदा आश्रय देने वाले
- ॐ सदाजिताय नमः — सदा अजित
- ॐ सन्यासयोगयुक्तात्मने नमः — संन्यास-योग से युक्त आत्मा वाले
- ॐ सन्मार्गस्थापनव्रताय नमः — सन्मार्ग की स्थापना के व्रत वाले
- ॐ सबीजं फलमादाय निर्बीजं परिणामकाय नमः — सबीज फल लेकर उसे निर्बीज कर देने वाले
- ॐ समदुःखसुखस्वस्थाय नमः — सुख-दुःख में समान रहकर स्वस्थ
- ॐ समलोष्टाश्मकाञ्चनाय नमः — मिट्टी के ढेले, पत्थर व स्वर्ण को समान मानने वाले
- ॐ समर्थसद्गुरुश्रेष्ठाय नमः — समर्थ सद्गुरुओं में श्रेष्ठ
- ॐ समानरहिताय नमः — जिनके समान कोई नहीं
- ॐ समाश्रितजनत्राणव्रतपालनतत्पराय नमः — शरणागत जनों की रक्षा के व्रत-पालन में तत्पर
- ॐ समुद्रसमगाम्भीर्याय नमः — समुद्र के समान गंभीरता वाले
- ॐ सङ्कल्परहिताय नमः — संकल्प से रहित
- ॐ संसारतापहार्यङ्घ्रये नमः — जिनके चरण संसार का ताप हर लेते हैं
- ॐ संसारवर्जिताय नमः — संसार से रहित
- ॐ संसारोत्तारनाम्ने नमः — जिनका नाम संसार से पार उतारने वाला है
- ॐ सरोजदलकोमलाय नमः — कमल-दल के समान कोमल
- ॐ सर्पादिभयहारिणे नमः — सर्प आदि के भय को हरने वाले
- ॐ सर्परूपेप्यवस्थिताय नमः — सर्प के रूप में भी स्थित रहने वाले
- ॐ सर्वकर्मफलत्यागिने नमः — समस्त कर्म-फलों का त्याग करने वाले
- ॐ सर्वत्रसमवस्थिताय नमः — सर्वत्र समान रूप से स्थित
- ॐ सर्वतःपाणिपादाय नमः — सब ओर हाथ व पैर वाले
- ॐ सर्वतोऽक्षिशिरोमुखाय नमः — सब ओर नेत्र, शिर व मुख वाले
- ॐ सर्वतःश्रुतिमन्मूर्तये नमः — सब ओर श्रवण वाली मूर्ति
- ॐ सर्वमावृत्यसंस्थिताय नमः — सब कुछ आवृत करके स्थित
- ॐ सर्वधर्मसमत्रात्रे नमः — समस्त धर्मों की समान रूप से रक्षा करने वाले
- ॐ सर्वधर्मसुपूजिताय नमः — समस्त धर्मों द्वारा भली प्रकार पूजित
- ॐ सर्वधर्मान् परित्यज्य गुर्वीशं शरणं गताय नमः — समस्त धर्मों को त्यागकर गुरु-ईश की शरण में गए हुए
- ॐ सर्वधीसाक्षिभूताय नमः — समस्त बुद्धियों के साक्षी-भूत
- ॐ सर्वनामाभिसूचिताय नमः — समस्त नामों से सूचित
- ॐ सर्वभूतान्तरात्मने नमः — समस्त भूतों की अंतरात्मा
- ॐ सर्वभूताशयस्थिताय नमः — समस्त भूतों के आशय में स्थित
- ॐ सर्वभूतादिवासाय नमः — समस्त भूतों के आदि-निवास
- ॐ सर्वभूतहितेरताय नमः — समस्त भूतों के हित में रत
- ॐ सर्वभूतात्मभूतात्मने नमः — समस्त भूतों की आत्मा ही जिनकी आत्मा है
- ॐ सर्वभूतसुहृदे नमः — समस्त भूतों के सुहृद्
- ॐ सर्वभूतनिशोन्निद्राय नमः — जब समस्त भूतों की रात्रि होती है तब भी जागते रहने वाले
- ॐ सर्वभूतसमादृताय नमः — समस्त भूतों द्वारा समादृत
- ॐ सर्वज्ञाय नमः — सर्वज्ञ
- ॐ सर्वविदे नमः — सब कुछ जानने वाले
- ॐ सर्वस्मै नमः — सर्व-स्वरूप
- ॐ सर्वमतसुसम्मताय नमः — समस्त मतों में भली प्रकार सम्मत
- ॐ सर्वब्रह्ममयं द्रष्ट्रे नमः — सब कुछ ब्रह्ममय ही देखने वाले
- ॐ सर्वशक्त्युपबृंहिताय नमः — समस्त शक्तियों से पुष्ट
- ॐ सर्वसङ्कल्पसन्यासिने नमः — समस्त संकल्पों का संन्यास कर चुके
- ॐ सर्वसङ्गविवर्जिताय नमः — समस्त संग से रहित
- ॐ सर्वलोकशरण्याय नमः — समस्त लोकों के शरण्य
- ॐ सर्वलोकमहेश्वराय नमः — समस्त लोकों के महेश्वर
- ॐ सर्वेशाय नमः — सर्वेश
- ॐ सर्वरूपिणे नमः — सर्व-रूप
- ॐ सर्वशत्रुनिबर्हणाय नमः — समस्त शत्रुओं का नाश करने वाले
- ॐ सर्वैश्वर्यैकमन्त्राय नमः — समस्त ऐश्वर्य का एकमात्र मंत्र
- ॐ सर्वेप्सितफलप्रदाय नमः — समस्त ईप्सित फल देने वाले
- ॐ सर्वोपकारकारिणे नमः — सबका उपकार करने वाले
- ॐ सर्वोपास्यपदाम्बुजाय नमः — जिनके चरण-कमल सबके उपास्य हैं
सहस्रशीर्ष से क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिक — समापन (नाम 961–1000)
- ॐ सहस्रशिर्षमूर्तये नमः — सहस्र मस्तकों वाली मूर्ति
- ॐ सहस्राक्षाय नमः — सहस्र नेत्रों वाले
- ॐ सहस्रपदे नमः — सहस्र चरणों वाले
- ॐ सहस्रनामसुश्लाघिने नमः — सहस्रनाम से भली प्रकार श्लाघित
- ॐ सहस्रनामलक्षिताय नमः — सहस्रनाम से लक्षित
- ॐ साकारोपि निराकाराय नमः — साकार होकर भी निराकार
- ॐ साकारार्चासुमानिताय नमः — साकार अर्चा में भी भली प्रकार मान्य
- ॐ साधुजनपरित्रात्रे नमः — साधु जनों की रक्षा करने वाले
- ॐ साधुपोषकस्तथैवाय नमः — साधुओं का पोषण करने वाले
- ॐ सायीति सज्जानैः प्रोक्तः सायीदेवाय नमः — सज्जनों द्वारा "साईं" कहे गए — साईं-देव
- ॐ सायीरामाय नमः — साईंराम
- ॐ सायिनाथाय नमः — सायिनाथ
- ॐ सायीशाय नमः — साईं-ईश
- ॐ सायिसत्तमाय नमः — साईं-सत्तम; साईं जनों में श्रेष्ठ
- ॐ सालोक्यसार्ष्टिसामीप्यसायुज्यपददायकाय नमः — सालोक्य, सार्ष्टि, सामीप्य तथा सायुज्य — चारों पद देने वाले
- ॐ साक्षात्कृतहरिप्रीत्या सर्वशक्तियुताय नमः — साक्षात्कृत हरि की प्रीति से समस्त शक्तियों से युक्त
- ॐ साक्षात्कारप्रदात्रे नमः — साक्षात्कार देने वाले
- ॐ साक्षान्मन्मथमर्दनाय नमः — साक्षात् मन्मथ का मर्दन करने वाले
- ॐ सिद्धेशाय नमः — सिद्धों के ईश
- ॐ सिद्धसङ्कल्पाय नमः — सिद्ध संकल्प वाले
- ॐ सिद्धिदाय नमः — सिद्धि देने वाले
- ॐ सिद्धवाङ्मुखाय नमः — सिद्ध वाणी वाले मुख से युक्त
- ॐ सुकृतदुष्कृतातीताय नमः — सुकृत तथा दुष्कृत — दोनों से अतीत
- ॐ सुखेषुविगतस्पृहाय नमः — सुखों में स्पृहा-रहित
- ॐ सुखदुःखसमाय नमः — सुख व दुःख में समान
- ॐ सुधास्यन्दिमुखोज्वलाय नमः — अमृत बहाते हुए उज्ज्वल मुख वाले
- ॐ स्वेच्छामात्रजडद्देहाय नमः — केवल अपनी इच्छा से ही देह धारण करने वाले
- ॐ स्वेच्छोपात्ततनवे नमः — अपनी इच्छा से ग्रहण किए शरीर वाले
- ॐ स्वीकृतभक्तरोगाय नमः — भक्तों के रोग स्वयं स्वीकार कर लेने वाले
- ॐ स्वेमहिम्निप्रतिष्ठिताय नमः — अपनी ही महिमा में प्रतिष्ठित
- ॐ हरिसाठे तथा नानां कामादेः परिरक्षकाय नमः — हरि साठे तथा नाना को काम आदि से भली प्रकार बचाने वाले
- ॐ हर्षामर्षभयोद्वेगैर्निर्मुक्तविमलाशयाय नमः — हर्ष, अमर्ष, भय व उद्वेग से मुक्त निर्मल आशय वाले
- ॐ हिन्दुमुस्लिंसमूहानां मैत्रीकरणतत्पराय नमः — हिंदू तथा मुसलमान समूहों के बीच मैत्री कराने में तत्पर
- ॐ हूङ्कारेणैव सुक्षिप्रं स्तब्धप्रचण्डमारुताय नमः — केवल हुंकार से ही प्रचंड आँधी को शीघ्र स्तब्ध कर देने वाले
- ॐ हृदयग्रन्थिभेदिने नमः — हृदय की ग्रंथि का भेदन करने वाले
- ॐ हृदयग्रन्थिवर्जिताय नमः — हृदय-ग्रंथि से रहित
- ॐ क्षान्तानन्तदौर्जन्याय नमः — अनंत दुर्जनता को भी क्षमा कर चुके
- ॐ क्षितिपालादिसेविताय नमः — राजाओं आदि द्वारा सेवित
- ॐ क्षिप्रप्रसाददात्रे नमः — शीघ्र प्रसाद देने वाले
- ॐ क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिकाय नमः — अपनी शिरडी को ही तीर्थ-क्षेत्र बना देने वाले
अर्थ (हिन्दी)
- ध्यान: जो ब्रह्मानंद-स्वरूप हैं, परम सुख देने वाले हैं, केवल ज्ञान की मूर्ति हैं; जो द्वंद्व से अतीत, आकाश के सदृश तथा तत्त्वमसि आदि महावाक्यों के लक्ष्य हैं; जो एक, नित्य, विमल, अचल तथा समस्त बुद्धियों के साक्षी-भूत हैं — उन त्रिगुण-रहित सायिनाथ सद्गुरु को मैं नमस्कार करता हूँ। ध्यान देने योग्य बात: यह वही प्रसिद्ध सद्गुरु-ध्यान श्लोक है जो परंपरा में सामान्यतः "भावातीतं त्रिगुणरहितं सद्गुरुं तं नमामि" पढ़ा जाता है; यहाँ उसी स्थान पर सायीनाथं रख दिया गया है — और आधार-स्रोत स्वयं कोष्ठक में मूल पाठ "[भावातीतं]" दर्ज करता है। अर्थात यह ध्यान-श्लोक साईं बाबा के लिए नया नहीं रचा गया, परंपरागत सद्गुरु-ध्यान को उन पर लागू किया गया है।
- समापन: नामावली अपने अंतिम नाम क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिक — *जिन्होंने अपनी शिरडी को ही तीर्थ-क्षेत्र बना दिया* — पर समाप्त होती है, और स्रोत वहीं क्रमांक-चिह्न "१०००" देकर रचना पूर्ण करता है। इस रचना में कोई पृथक् फलश्रुति नहीं है — श्लोक-रूप भी 265वें श्लोक के अंतिम नाम पर ही समाप्त हो जाता है। यह असामान्य है, क्योंकि अधिकांश सहस्रनामों के अंत में फल-कथन आता है; यहाँ नहीं, और इसीलिए यहाँ कोई फलश्रुति जोड़ी नहीं गई।
लाभ
- नाम 653 भक्तानुग्रहकातर — *भक्तों पर अनुग्रह करने के लिए व्याकुल*; "कातर" शब्द कृपा को विवशता की तरह कहता है।
- नाम 678 तथा 682 के अनुसार भस्म (ऊदी) के दान से आधि, व्याधि, दुःख व समस्त अशुभ दूर होते हैं — यह शिरडी की जीवित परंपरा है।
- नाम 68 अन्नवस्त्रेप्सितप्रद तथा 157 आयुरारोग्यदाता — अन्न, वस्त्र, आयु व आरोग्य के भाव से पढ़े जाते हैं।
- नाम 993 हिन्दुमुस्लिंसमूहानां मैत्रीकरणतत्पर — किसी संस्कृत सहस्रनाम में दो धर्मों के बीच मैत्री का नाम होना अपने आप में उल्लेखनीय है।
- नाम 975 के अनुसार वे सालोक्य, सार्ष्टि, सामीप्य तथा सायुज्य — चारों मुक्ति-पद देने वाले हैं।
कब करें पाठ
गुरुवार को सम्पूर्ण पाठ — शिरडी परंपरा का मुख्य वार · नौ गुरुवार के साईं व्रत में · रामनवमी, गुरुपूर्णिमा तथा विजयादशमी — शिरडी के तीन प्रमुख उत्सव · शिरडी यात्रा अथवा साईं मंदिर के दर्शन के अवसर पर
स्रोत
रचयिता: अज्ञात (रचयिता का नाम किसी स्रोत ने नहीं दिया). stotranidhi.com — श्री सायि सहस्रनामावली ("श्री शिर्डी साईबाबा स्तोत्राणि" वर्ग); आधार सूची, 1000 नाम। इसमें हर बीसवें नाम पर क्रमांक-चिह्न है (२०, ४०, … १०००); सभी 50 चिह्न यंत्रवत् जाँचे गए — एक भी विचलन नहीं। · stotranidhi.com — श्री सायि सहस्रनाम स्तोत्रम् (श्लोक-रूप; ध्यान तथा 265 अनुष्टुप् नाम-श्लोक)। इससे पद-विच्छेद की जाँच हुई। · ⚠️ यह पृष्ठ दो-स्रोत मानक पर खरा नहीं उतरता, और यह छिपाया नहीं गया — दोनों संदर्भ एक ही प्रकाशक के हैं; sanskritdocuments तथा hindunidhi पर शिरडी साईं की कोई सहस्रनामावली नहीं मिली। जो जाँच संभव थी वह की गई (नामावली-रूप बनाम श्लोक-रूप, तथा 50 क्रमांक-चिह्न)। · ⚠️ इसमें कोई फलश्रुति नहीं है — श्लोक-रूप 265वें श्लोक के अंतिम नाम पर ही समाप्त हो जाता है; अतः कोई फलश्रुति जोड़ी नहीं गई। · ⚠️ ध्यान-श्लोक नया नहीं रचा गया — वह परंपरागत सद्गुरु-ध्यान ("ब्रह्मानन्दं परमसुखदं…") है, जिसमें "भावातीतं" के स्थान पर "सायीनाथं" रखा गया है; स्रोत स्वयं कोष्ठक में "[भावातीतं]" दर्ज करता है। · ⚠️ रचना-काल आधुनिक है — महासमाधि 1918; यह किसी पुराण से नहीं आता। रचयिता का नाम किसी स्रोत ने नहीं दिया, अतः कुछ गढ़ा नहीं गया। · ⚠️ शिरडी साईं और सत्य साईं भिन्न व्यक्ति हैं; यह सूची शिरडी की है — आंतरिक प्रमाण अंतिम नाम 1000 क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिक है। · ℹ️ यह साईं अष्टोत्तर शतनामावली का विस्तार नहीं है — तुलना करने पर 108-सूची के केवल 22 नाम (20.4%) ही इसमें शब्दशः मिले; दोनों स्वतंत्र रचनाएँ हैं। · ⚠️ नाम 4, 56, 101 तथा 245 का पाठ अनिश्चित है; संभावित अर्थ दिया गया है और उसे उसी नाम पर चिह्नित किया गया है, गढ़ा हुआ निश्चित अर्थ नहीं। · हिंदी अर्थ सत्यापित संस्कृत से अनूदित (1000/1000)।
