श्री सायि सहस्रनामावली
śrī sāyi sahasranāmāvalī
Shri Sai Sahasranamavali (1000 Names)
श्री सायि सहस्रनामावली शिरडी साईं बाबा के 1000 नामों की सूची है, जो वर्णमाला के क्रम से अखण्डसच्चिदानन्द से आरंभ होकर क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिक पर समाप्त होती है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें साईं सच्चरित्र के दर्जनों प्रसंग नाम बनकर दर्ज हैं। पाठ 35–45 मिनट का है।
परिचय
शिरडी के साईं बाबा श्रद्धा और सबूरी के संत हैं — सर्वधर्म समभाव और सेवा के प्रतीक।
स्रोत: शिरडी साईं बाबा के 1000 नाम; श्लोक-रूप में 265 अनुष्टुप् श्लोक तथा सद्गुरु-ध्यान
एक नज़र में
| मंत्र / पाठ | श्री सायि सहस्रनामावली |
|---|---|
| IAST | śrī sāyi sahasranāmāvalī |
| देवता | श्री साईं बाबा |
| मूल स्रोत | शिरडी साईं बाबा के 1000 नाम; श्लोक-रूप में 265 अनुष्टुप् श्लोक तथा सद्गुरु-ध्यान |
| शुभ दिन | गुरुवार; नौ गुरुवार का साईं व्रत; रामनवमी, गुरुपूर्णिमा व विजयादशमी |
| पाठ समय | 35–45 मिनट (सम्पूर्ण) |
| कठिनाई | कठिन (Advanced) |
| छंद | अनुष्टुप् |
उद्भव / पृष्ठभूमि
श्री सायि सहस्रनामावली शिरडी के साईं बाबा के 1000 नामों की सूची है। श्लोक-रूप में यह 265 अनुष्टुप् श्लोकों में है, और नाम वर्णमाला के क्रम से रखे गए हैं — अखण्डसच्चिदानन्द से आरंभ होकर क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिक पर समाप्त।
अंतिम नाम स्वयं में इस पूरे पाठ का परिचय है — *जिन्होंने अपनी शिरडी को ही तीर्थ-क्षेत्र बना दिया*। यह नाम इस बात का आंतरिक प्रमाण भी है कि यह सूची शिरडी साईं की है, सत्य साईं की नहीं।
पर इस सहस्रनाम की असली विशेषता और है, और वह किसी अन्य सहस्रनाम में नहीं मिलती: इसमें साईं सच्चरित्र के दर्जनों प्रसंग नाम बनकर दर्ज हैं — नाम व स्थान सहित।
यहाँ नाम केवल गुण नहीं गिनाते, घटनाएँ बताते हैं। नाम 511 है धूपखेडापटेल्चान्द्भाय्नष्टाश्वस्थानसूचक — *धूपखेड़ा के पाटील चाँदभाई को खोए हुए घोड़े का स्थान बताने वाले*; वही प्रसंग जिससे बाबा शिरडी पहुँचे थे। नाम 683 भागोजिकुष्ठरोगघ्न (भागोजी के कुष्ठ का नाश करने वाले), नाम 697 भीमाजीक्षयपापघ्न (भीमाजी के क्षय-रोग का नाश करने वाले), नाम 244 काकादीक्षित की रक्षा का भार स्वयं लेने वाले, नाम 749 मूलेशास्त्री के लिए गुरु घोलप महाराज का रूप धारण करने वाले, नाम 818 लेलेशास्त्री की श्रुति-प्रीति के लिए मस्जिद में वेद-घोष कराने वाले, नाम 644 भक्त के लिए अपना हाथ जला लेने वाले, नाम 813 लाठी उठाकर रोहिल्ला का दर्प नष्ट करने वाले, नाम 782 रथ के चाँदी जड़े अश्व चुरा लिए जाने पर भी अम्लान मन वाले।
भक्तों के नाम भी सीधे आते हैं — नाना चंदोरकर (520), नाना निमोणकर (521), तात्या गणपति (424), तात्या नूलकर (425), दास गणु (640), माधवराव देशपांडे (731), बूटी (706, 737), मीनातायी (743), ताराबाई (429), सखाराम (878), हरि साठे (991), भन्नूमायी (670), कापर्दे (671)। यह सहस्रनाम व्यवहार में साईं सच्चरित्र की अनुक्रमणिका की तरह काम करता है।
दूसरी परत और भी उल्लेखनीय है, और वह इस पाठ को शायद हर दूसरे सहस्रनाम से अलग करती है: इसमें इस्लामी शब्द और सूफ़ी पद संस्कृत नामों के रूप में हैं। नाम 100 अल्लानामसदावक्तृ (*सदा "अल्ला" का नाम मुख से कहने वाले*), नाम 105 अवलियेतिविश्रुत (*"अवलिया" के नाम से विश्रुत* — सूफ़ी परंपरा का संत-वाचक शब्द), नाम 45 अनह्लक (सूफ़ी पद *अनल-हक़*), नाम 84 अब्दुल्लादिपरागति, नाम 371 जवाराली नामक मौलाना की सेवा का उल्लेख, नाम 637 ब्राह्मणों के लिए मस्जिद में स्थित रहने वाले, तथा नाम 723 मशीद्यां तुलसीपूजां अग्निहोत्रं च शासक (*मस्जिद में तुलसी-पूजा तथा अग्निहोत्र का शासन करने वाले*)।
और सबसे स्पष्ट नाम 993 है — हिन्दुमुस्लिंसमूहानां मैत्रीकरणतत्पर, अर्थात *हिंदू तथा मुसलमान समूहों के बीच मैत्री कराने में तत्पर*। इसके साथ नाम 931 सर्वधर्मसमत्राता (समस्त धर्मों की समान रूप से रक्षा करने वाले), नाम 932 सर्वधर्मसुपूजित तथा नाम 947 सर्वमतसुसम्मत आते हैं। किसी संस्कृत सहस्रनाम में दो धर्मों के बीच मैत्री का नाम होना — यह अपने आप में एक ऐतिहासिक तथ्य है।
तीसरी परत गुरु-भाव की है, और वह असामान्य रूप से गहरी है। नाम 309 से 323 तक लगभग पूरा खंड गुरु पर है — *गुरु-चरणों में तीव्र भक्ति हो तो वही पर्याप्त है* (309), *गुरु की समाधि के पास नीम की छाया में निवास करने वाले* (320), *गुरु वेङ्कुश से प्राप्त वस्त्र व ईंट को सदा धारण करने वाले* (321), *गुरु-परंपरा से प्राप्त सच्चिदानंद की मूर्ति वाले* (323)। ध्यान-श्लोक भी यही कहता है, और वह भी उल्लेखनीय ढंग से — वह नया नहीं रचा गया; परंपरागत सद्गुरु-ध्यान "ब्रह्मानन्दं परमसुखदं…" में जहाँ सामान्यतः भावातीतं आता है, वहाँ सायीनाथं रख दिया गया है।
और एक बात जो शिरडी की स्मृति से मेल खाती है — भस्म (ऊदी) और धूनी के नाम: 678 *भस्म-दान से आधि-व्याधि-दुःख दूर करने वाले*, 681 *भस्म से पवित्र मस्जिद में स्थित*, 682 *भस्म से समस्त रोगों को दग्ध कर देने वाले*, 218 *भस्म को ही औषध बना देने वाले*, तथा 112 अविच्छिन्नाग्निहोत्र — *जिनका अग्निहोत्र अर्थात धूनी कभी बुझी नहीं*।
अंत में एक बात स्पष्ट कह देनी चाहिए: यह रचना आधुनिक है। शिरडी साईं बाबा 20वीं सदी के संत हैं (महासमाधि 1918), अतः यह सहस्रनाम किसी पुराण से नहीं आता। और यही इसकी शक्ति भी है — क्योंकि इसीलिए इसमें नाम व स्थान सहित घटनाएँ दर्ज हो सकीं, जो पौराणिक सहस्रनामों में संभव नहीं।
ध्यान व आरंभिक श्लोक
ध्यानम् ब्रह्मानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं तत्त्वमस्यादिलक्ष्यम्। एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधीसाक्षिभूतं सायीनाथं त्रिगुणरहितं सद्गुरुं तं नमामि॥
ध्यान: जो ब्रह्मानंद-स्वरूप हैं, परम सुख देने वाले हैं, केवल ज्ञान की मूर्ति हैं; जो द्वंद्व से अतीत, आकाश के सदृश तथा तत्त्वमसि आदि महावाक्यों के लक्ष्य हैं; जो एक, नित्य, विमल, अचल तथा समस्त बुद्धियों के साक्षी-भूत हैं — उन त्रिगुण-रहित सायिनाथ सद्गुरु को मैं नमस्कार करता हूँ। ध्यान देने योग्य बात: यह वही प्रसिद्ध सद्गुरु-ध्यान श्लोक है जो परंपरा में सामान्यतः "भावातीतं त्रिगुणरहितं सद्गुरुं तं नमामि" पढ़ा जाता है; यहाँ उसी स्थान पर सायीनाथं रख दिया गया है — और आधार-स्रोत स्वयं कोष्ठक में मूल पाठ "[भावातीतं]" दर्ज करता है। अर्थात यह ध्यान-श्लोक साईं बाबा के लिए नया नहीं रचा गया, परंपरागत सद्गुरु-ध्यान को उन पर लागू किया गया है।
॥ इति श्री सायि सहस्रनामावली सम्पूर्णा ॥
समापन: नामावली अपने अंतिम नाम क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिक — *जिन्होंने अपनी शिरडी को ही तीर्थ-क्षेत्र बना दिया* — पर समाप्त होती है, और स्रोत वहीं क्रमांक-चिह्न "१०००" देकर रचना पूर्ण करता है। इस रचना में कोई पृथक् फलश्रुति नहीं है — श्लोक-रूप भी 265वें श्लोक के अंतिम नाम पर ही समाप्त हो जाता है। यह असामान्य है, क्योंकि अधिकांश सहस्रनामों के अंत में फल-कथन आता है; यहाँ नहीं, और इसीलिए यहाँ कोई फलश्रुति जोड़ी नहीं गई।
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नाम सूची (Name List)
अ-वर्ग — अखण्डसच्चिदानन्द से अक्षरोत्तम पुरुषोत्तम (नाम 1–136)
- 1.ॐ अखण्डसच्चिदानन्दाय नमःअखण्ड सत्-चित्-आनंद स्वरूप
- 2.ॐ अखिलजीववत्सलाय नमःसमस्त जीवों पर वात्सल्य रखने वाले
- 3.ॐ अखिलवस्तुविस्ताराय नमःसमस्त वस्तुओं में विस्तृत
- 4.ॐ अक्बराज्ञाभिवन्दिताय नमःअकबर की आज्ञा से भी वंदित (पाठ अनिश्चित)
- 5.ॐ अखिलचेतनाविष्टाय नमःसमस्त चेतना में व्याप्त
- 6.ॐ अखिलवेदसम्प्रदाय नमःसमस्त वेदों को भली प्रकार देने वाले
- 7.ॐ अखिलाण्डेशरूपोऽपि पिण्डे पिण्डे प्रतिष्ठिताय नमःअखिलाण्ड के ईश होकर भी प्रत्येक पिण्ड में प्रतिष्ठित
- 8.ॐ अग्रण्ये नमःअग्रणी; सबसे आगे रहने वाले
- 9.ॐ अग्र्यभूम्ने नमःअग्रगण्य विशालता वाले
- 10.ॐ अगणितगुणाय नमःअगणित गुणों वाले
- 11.ॐ अघौघसन्निवर्तिने नमःपाप-समूह को लौटा देने वाले
- 12.ॐ अचिन्त्यमहिम्ने नमःअचिंत्य महिमा वाले
- 13.ॐ अचलाय नमःअचल
- 14.ॐ अच्युताय नमःअच्युत; कभी च्युत न होने वाले
- 15.ॐ अजाय नमःअज; जन्म-रहित
- 16.ॐ अजातशत्रवे नमःजिनका कोई शत्रु उत्पन्न ही नहीं हुआ
- 17.ॐ अज्ञानतिमिरान्धानां चक्षुरुन्मीलनक्षमाय नमःअज्ञान-रूपी अंधकार से अंधे हुए लोगों की आँखें खोल देने में समर्थ
- 18.ॐ आजन्मस्थितिनाशाय नमःजन्म, स्थिति व नाश — तीनों स्वरूप
- 19.ॐ अणिमादिविभूषिताय नमःअणिमा आदि सिद्धियों से विभूषित
- 20.ॐ अत्युन्नतधुनीज्वालामाज्ञयैवनिवर्तकाय नमःअत्यंत ऊँची उठी धूनी की ज्वाला को केवल आज्ञा से लौटा देने वाले
- 21.ॐ अत्युल्बणमहासर्पादपिभक्तसुरक्षित्रे नमःअत्यंत भयंकर महासर्प से भी भक्तों की रक्षा करने वाले
- 22.ॐ अतितीव्रतपस्तप्ताय नमःअत्यंत तीव्र तप से तप्त
- 23.ॐ अतिनम्रस्वभावकाय नमःअत्यंत नम्र स्वभाव वाले
- 24.ॐ अन्नदानसदानिष्ठाय नमःअन्न-दान में सदा निष्ठा रखने वाले
- 25.ॐ अतिथिभुक्तशेषभुजे नमःअतिथियों के भोजन से बचा हुआ ही खाने वाले
- 26.ॐ अदृश्यलोकसञ्चारिणे नमःअदृश्य लोकों में संचरण करने वाले
- 27.ॐ अदृष्टपूर्वदर्शित्रे नमःजो पहले कभी न देखा गया, वह दिखा देने वाले
- 28.ॐ अद्वैतवस्तुतत्त्वज्ञाय नमःअद्वैत वस्तु-तत्त्व को जानने वाले
- 29.ॐ अद्वैतानन्दवर्षकाय नमःअद्वैत का आनंद बरसाने वाले
- 30.ॐ अद्भुतानन्तशक्तये नमःअद्भुत व अनंत शक्ति वाले
- 31.ॐ अधिष्ठानाय नमःसमस्त का अधिष्ठान
- 32.ॐ अधोक्षजाय नमःअधोक्षज
- 33.ॐ अधर्मतरुच्छेत्रे नमःअधर्म-रूपी वृक्ष का छेदन करने वाले
- 34.ॐ अधियज्ञाय नमःअधियज्ञ-स्वरूप
- 35.ॐ अधिभूताय नमःअधिभूत-स्वरूप
- 36.ॐ अधिदैवाय नमःअधिदैव-स्वरूप
- 37.ॐ अध्यक्षाय नमःअध्यक्ष
- 38.ॐ अनघाय नमःअनघ; पाप-रहित
- 39.ॐ अनन्तनाम्ने नमःअनंत नामों वाले
- 40.ॐ अनन्तगुणभूषणाय नमःअनंत गुणों से विभूषित
- 41.ॐ अनन्तमूर्तये नमःअनंत मूर्तियों वाले
- 42.ॐ अनन्ताय नमःअनंत
- 43.ॐ अनन्तशक्तिसम्युताय नमःअनंत शक्ति से युक्त
- 44.ॐ अनन्ताश्चर्यवीर्याय नमःअनंत आश्चर्यमय पराक्रम वाले
- 45.ॐ अनह्लक अतिमानिताय नमःअनल-हक़ कहकर भी अभिमान-रहित रहने वाले (सूफ़ी पद)
- 46.ॐ अनवरतसमाधिस्थाय नमःनिरंतर समाधि में स्थित
- 47.ॐ अनाथपरिरक्षकाय नमःअनाथों की चारों ओर से रक्षा करने वाले
- 48.ॐ अनन्यप्रेमसंहृष्टगुरुपादविलीनहृदे नमःअनन्य प्रेम से हर्षित होकर गुरु-चरणों में विलीन हृदय वाले
- 49.ॐ अनाधृताष्टसिद्धये नमःअष्ट सिद्धियों को न अपनाने वाले
- 50.ॐ अनामयपदप्रदाय नमःरोग-रहित पद देने वाले
- 51.ॐ अनादिमत्परब्रह्मणे नमःअनादि परब्रह्म
- 52.ॐ अनाहतदिवाकराय नमःअनाहत का दिवाकर
- 53.ॐ अनिर्देश्यवपुषे नमःजिनका शरीर बताया न जा सके
- 54.ॐ अनिमेषेक्षितप्रजाय नमःपलक झपकाए बिना प्रजा को देखने वाले
- 55.ॐ अनुग्रहार्थमूर्तये नमःअनुग्रह के लिए ही धारण की गई मूर्ति वाले
- 56.ॐ अनुवर्तितवेङ्कूशाय नमःअनुसरण किए गए संकेत वाले (पाठ अनिश्चित)
- 57.ॐ अनेकदिव्यमूर्तये नमःअनेक दिव्य मूर्तियों वाले
- 58.ॐ अनेकाद्भुतदर्शनाय नमःअनेक अद्भुत दर्शन कराने वाले
- 59.ॐ अनेकजन्मजम्पापंस्मृतिमात्रेणहारकाय नमःअनेक जन्मों के पाप स्मरण मात्र से हर लेने वाले
- 60.ॐ अनेकजन्मवृत्तान्तंसविस्तारमुदीरयते नमःअनेक जन्मों का वृत्तांत विस्तार सहित कह देने वाले
- 61.ॐ अनेकजन्मसम्प्राप्तकर्मबन्धविदारणाय नमःअनेक जन्मों में संचित कर्म-बंधन का विदारण करने वाले
- 62.ॐ अनेकजन्मसंसिद्धशक्तिज्ञानस्वरूपवते नमःअनेक जन्मों से सिद्ध शक्ति व ज्ञान के स्वरूप वाले
- 63.ॐ अन्तर्बहिश्चसर्वत्रायव्याप्ताखिलचराचराय नमःभीतर, बाहर तथा सर्वत्र — समस्त चराचर में व्याप्त
- 64.ॐ अन्तर्हृदय आकाशाय नमःअंतर्हृदय के आकाश-स्वरूप
- 65.ॐ अन्तकालेऽपि रक्षकाय नमःअंतिम काल में भी रक्षा करने वाले
- 66.ॐ अन्तर्यामिणे नमःअंतर्यामी
- 67.ॐ अन्तरात्मने नमःअंतरात्मा
- 68.ॐ अन्नवस्त्रेप्सितप्रदाय नमःअन्न, वस्त्र तथा अभीष्ट देने वाले
- 69.ॐ अपराजितशक्तये नमःअपराजित शक्ति वाले
- 70.ॐ अपरिग्रहभूषिताय नमःअपरिग्रह से ही विभूषित
- 71.ॐ अपवर्गप्रदात्रे नमःअपवर्ग अर्थात मोक्ष देने वाले
- 72.ॐ अपवर्गमयाय नमःअपवर्गमय
- 73.ॐ अपान्तरात्मरूपेण स्रष्टुरिष्टप्रवर्तकाय नमःअपान्तरात्मा के रूप में स्रष्टा की इच्छा प्रवर्तित करने वाले
- 74.ॐ अपावृतकृपागाराय नमःजिनका कृपा-गृह सदा खुला है
- 75.ॐ अपारज्ञानशक्तिमते नमःअपार ज्ञान-शक्ति वाले
- 76.ॐ अपार्थिवदेहस्थाय नमःअपार्थिव देह में स्थित
- 77.ॐ अपाम्पुष्पनिबोधकाय नमःजल में पुष्प का बोध कराने वाले
- 78.ॐ अप्रपञ्चाय नमःप्रपंच से रहित
- 79.ॐ अप्रमत्ताय नमःअप्रमत्त; कभी प्रमाद न करने वाले
- 80.ॐ अप्रमेयगुणाकाराय नमःअप्रमेय गुणों के आकार वाले
- 81.ॐ अप्राकृतवपुषे नमःअप्राकृत शरीर वाले
- 82.ॐ अप्राकृतपराक्रमाय नमःअप्राकृत पराक्रम वाले
- 83.ॐ अप्रार्थितेष्टदात्रे नमःबिना माँगे ही अभीष्ट दे देने वाले
- 84.ॐ अब्दुल्लादि परागतये नमःअब्दुल्ला आदि की परम गति
- 85.ॐ अभयं सर्वभूतेभ्यो ददामीति व्रतिने नमःसमस्त प्राणियों को अभय देने के व्रत वाले
- 86.ॐ अभिमानातिदूराय नमःअभिमान से अत्यंत दूर
- 87.ॐ अभिषेकचमत्कृतये नमःअभिषेक से चमत्कृत होने वाले
- 88.ॐ अभीष्टवरवर्षिणे नमःअभीष्ट वर बरसाने वाले
- 89.ॐ अभीक्ष्णदिव्यशक्तिभृते नमःनिरंतर दिव्य शक्ति धारण करने वाले
- 90.ॐ अभेदानन्दसन्धात्रे नमःअभेद-आनंद का सन्धान कराने वाले
- 91.ॐ अमर्त्याय नमःअमर्त्य; मृत्यु-रहित
- 92.ॐ अमृतवाक्सृतये नमःअमृतमय वाणी बहाने वाले
- 93.ॐ अरविन्ददलाक्षाय नमःकमल-दल सदृश नेत्रों वाले
- 94.ॐ अमितपराक्रमाय नमःअपरिमित पराक्रम वाले
- 95.ॐ अरिषड्वर्गनाशिने नमःछहों शत्रुओं का नाश करने वाले
- 96.ॐ अरिष्टघ्नाय नमःअरिष्टों का नाश करने वाले
- 97.ॐ अर्हसत्तमाय नमःपूजनीयों में श्रेष्ठ
- 98.ॐ अलभ्यलाभसन्धात्रे नमःजो न मिल सके, वह भी दिला देने वाले
- 99.ॐ अल्पदानसुतोषिताय नमःअल्प दान से भी भली प्रकार संतुष्ट होने वाले
- 100.ॐ अल्लानामसदावक्त्रे नमःसदा अल्ला का नाम मुख से कहने वाले
- 101.ॐ अलम्बुध्यास्वलङ्कृताय नमःस्वयं ही अलंकृत (पाठ अनिश्चित)
- 102.ॐ अवतारितसर्वेशाय नमःसमस्त ईश्वरों के अवतार-स्वरूप
- 103.ॐ अवधीरितवैभवाय नमःवैभव की अवहेलना करने वाले
- 104.ॐ अवलम्ब्यस्वपदाब्जाय नमःजिनके चरण-कमल अवलंब्य हैं
- 105.ॐ अवलियेतिविश्रुताय नमःअवलिया के नाम से विश्रुत — सूफ़ी परंपरा का संत-वाचक शब्द
- 106.ॐ अवधूताखिलोपाधये नमःसमस्त उपाधियों को त्याग चुके अवधूत
- 107.ॐ अविशिष्टाय नमःअविशिष्ट; जिनसे कुछ शेष नहीं
- 108.ॐ अवशिष्टस्वकार्यार्थेत्यक्तदेहम्प्रविष्टवते नमःशेष रहे अपने कार्य के लिए ही देह त्यागकर पुनः प्रविष्ट होने वाले
- 109.ॐ अवाक्पाणिपादोरवे नमःवाणी, हाथ, पैर व जंघा से रहित
- 110.ॐ अवाङ्मानसगोचराय नमःवाणी तथा मन के अगोचर
- 111.ॐ अवाप्तसर्वकामोऽपि कर्मण्येव प्रतिष्टिताय नमःसमस्त कामनाएँ पूर्ण होने पर भी कर्म में ही प्रतिष्ठित रहने वाले
- 112.ॐ अविच्छिन्नाग्निहोत्राय नमःजिनका अग्निहोत्र अर्थात धूनी कभी बुझी नहीं
- 113.ॐ अविच्छिन्नसुखप्रदाय नमःअविच्छिन्न सुख देने वाले
- 114.ॐ अवेक्षितदिगन्तस्थप्रजापालननिष्ठिताय नमःदिगंत तक की प्रजा के पालन में निष्ठ
- 115.ॐ अव्याजकरुणासिन्धवे नमःबिना किसी बहाने के करुणा के सागर
- 116.ॐ अव्याहतेष्टिदेशगाय नमःजिनकी इच्छा किसी देश में अवरुद्ध नहीं
- 117.ॐ अव्याहृतोपदेशाय नमःजिनका उपदेश कभी व्यर्थ नहीं जाता
- 118.ॐ अव्याहतसुखप्रदाय नमःअबाध सुख देने वाले
- 119.ॐ अशक्यशक्यकर्त्रे नमःअशक्य को भी शक्य कर देने वाले
- 120.ॐ अशुभाशयशुद्धिकृते नमःअशुभ आशयों की शुद्धि करने वाले
- 121.ॐ अशेषभूतहृत्स्थाणवे नमःसमस्त प्राणियों के हृदय में स्थित स्थाणु
- 122.ॐ अशोकमोहशृङ्खलाय नमःशोक व मोह की शृंखला काट देने वाले
- 123.ॐ अष्टैश्वर्ययुतत्यागिने नमःआठों ऐश्वर्यों से युक्त होकर भी त्यागी
- 124.ॐ अष्टसिद्धिपराङ्मुखाय नमःअष्ट सिद्धियों से विमुख रहने वाले
- 125.ॐ असम्योगयुक्तात्मने नमःसंयोग-वियोग से रहित आत्मा वाले
- 126.ॐ असङ्गदृढशस्त्रभृते नमःअसंगता रूपी दृढ़ शस्त्र धारण करने वाले
- 127.ॐ असङ्ख्येयावतारेषु ऋणानुबन्धिरक्षिताय नमःअसंख्य अवतारों में ऋणानुबंध से बँधे जीवों की रक्षा करने वाले
- 128.ॐ अहम्ब्रह्मस्थितप्रज्ञाय नमःअहं ब्रह्म में स्थित-प्रज्ञ
- 129.ॐ अहम्भावविवर्जिताय नमःअहं-भाव से रहित
- 130.ॐ अहं त्वं च त्वमेवाहमिति तत्त्वप्रबोधकाय नमःमैं ही तुम हूँ और तुम ही मैं — यह तत्त्व समझाने वाले
- 131.ॐ अहेतुककृपासिन्धवे नमःबिना किसी हेतु के कृपा के सागर
- 132.ॐ अहिंसानिरताय नमःअहिंसा में निरत
- 133.ॐ अक्षीणसौहृदाय नमःजिनकी मित्रता कभी क्षीण नहीं होती
- 134.ॐ अक्षयाय नमःअक्षय
- 135.ॐ अक्षयसुखप्रदाय नमःअक्षय सुख देने वाले
- 136.ॐ अक्षरादपि कूटस्थादुत्तम पुरुषोत्तमाय नमःअक्षर तथा कूटस्थ से भी उत्तम — पुरुषोत्तम
आ से औ — आत्माराम, आपद्बान्धव व ऐक्यानन्द (नाम 137–218)
- 137.ॐ आखुवाहनमूर्तये नमःआखु-वाहन अर्थात गणेश की मूर्ति-स्वरूप
- 138.ॐ आगमाद्यन्तसन्नुताय नमःआगमों के आदि से अंत तक स्तुत
- 139.ॐ आगमातीतसद्भावाय नमःआगमों से भी परे सद्भाव वाले
- 140.ॐ आचार्यपरमाय नमःआचार्यों में परम
- 141.ॐ आत्मानुभवसन्तुष्टाय नमःआत्म-अनुभव से ही संतुष्ट
- 142.ॐ आत्मविद्याविशारदाय नमःआत्म-विद्या में विशारद
- 143.ॐ आत्मानन्दप्रकाशाय नमःआत्मानंद का प्रकाश
- 144.ॐ आत्मैवपरमात्मदृशे नमःआत्मा को ही परमात्मा के रूप में देखने वाले
- 145.ॐ आत्मैकसर्वभूतात्मने नमःआत्मा ही जिनके लिए समस्त भूतों की आत्मा है
- 146.ॐ आत्मारामाय नमःआत्मा में ही रमण करने वाले
- 147.ॐ आत्मवते नमःआत्मवान
- 148.ॐ आदित्यमध्यवर्तिने नमःआदित्य के मध्य में स्थित
- 149.ॐ आदिमध्यान्तवर्जिताय नमःआदि, मध्य व अंत से रहित
- 150.ॐ आनन्दपरमानन्दाय नमःआनंद तथा परमानंद स्वरूप
- 151.ॐ आनन्दप्रदाय नमःआनंद देने वाले
- 152.ॐ आनाकमादृताज्ञाय नमःस्वर्ग तक जिनकी आज्ञा आदृत है
- 153.ॐ आनतावननिवृतये नमःनमन करने वालों की रक्षा में तृप्त
- 154.ॐ आपदामपहर्त्रे नमःआपत्तियों का अपहरण करने वाले
- 155.ॐ आपद्बान्धवाय नमःआपत्ति में बंधु
- 156.ॐ आफ्रिकागतवैद्याय परमानन्ददायकाय नमःआफ्रिका गए हुए वैद्य को परम आनंद देने वाले
- 157.ॐ आयुरारोग्यदात्रे नमःआयु तथा आरोग्य देने वाले
- 158.ॐ आर्तत्राणपरायणाय नमःआर्तों की रक्षा में परायण
- 159.ॐ आरोपणापवादैश्च मायायोगवियोगकृते नमःआरोप तथा अपवाद के द्वारा माया का योग व वियोग करने वाले
- 160.ॐ आविष्कृत तिरोधत्त बहुरूपविडम्बनाय नमःप्रकट व तिरोहित होकर बहुरूप की लीला करने वाले
- 161.ॐ आर्द्रचित्तेन भक्तानां सदानुग्रहवर्षकाय नमःआर्द्र चित्त से भक्तों पर सदा अनुग्रह बरसाने वाले
- 162.ॐ आशापाशविमुक्ताय नमःआशा-पाश से विमुक्त
- 163.ॐ आशापाशविमोचकाय नमःआशा-पाश से मुक्त कराने वाले
- 164.ॐ इच्छाधीनजगत्सर्वाय नमःसमस्त जगत जिनकी इच्छा के अधीन है
- 165.ॐ इच्छाधीनवपुषे नमःजिनका शरीर उनकी इच्छा के अधीन है
- 166.ॐ इष्टेप्सितार्थदात्रे नमःअभीष्ट व ईप्सित अर्थ देने वाले
- 167.ॐ इच्छामोहनिवर्तकाय नमःइच्छा-जनित मोह को लौटा देने वाले
- 168.ॐ इच्छोत्थदुःखसञ्छेत्रे नमःइच्छा से उत्पन्न दुःख का छेदन करने वाले
- 169.ॐ इन्द्रियारातिदर्पघ्ने नमःइंद्रिय-रूपी शत्रुओं का दर्प नष्ट करने वाले
- 170.ॐ इन्दिरारमणाह्लादिनामसाहस्रपूतहृदे नमःलक्ष्मीपति के आह्लादकारी सहस्रनाम से पवित्र हृदय वाले
- 171.ॐ इन्दीवरदलज्योतिर्लोचनालङ्कृताननाय नमःनील कमल-दल की ज्योति सदृश नेत्रों से अलंकृत मुख वाले
- 172.ॐ इन्दुशीतलभाषिणे नमःचंद्रमा के समान शीतल भाषण करने वाले
- 173.ॐ इन्दुवत्प्रियदर्शनाय नमःचंद्रमा के समान प्रिय दर्शन वाले
- 174.ॐ इष्टापूर्तशतैर्लब्धाय नमःसैकड़ों इष्ट व पूर्त कर्मों से प्राप्त होने वाले
- 175.ॐ इष्टदैवस्वरूपधृते नमःइष्टदेव का स्वरूप धारण करने वाले
- 176.ॐ इष्टिकादानसुप्रीताय नमःईंट के दान से अत्यंत प्रसन्न होने वाले
- 177.ॐ इष्टिकालयरक्षिताय नमःईंट के आलय की रक्षा करने वाले
- 178.ॐ ईशासक्तमनोबुद्धये नमःईश में आसक्त मन व बुद्धि वाले
- 179.ॐ ईशाराधनतत्पराय नमःईश की आराधना में तत्पर
- 180.ॐ ईशिताखिलदेवाय नमःसमस्त देवों के भी शासक
- 181.ॐ ईशावास्यार्थसूचकाय नमःईशावास्य उपनिषद् का अर्थ सूचित करने वाले
- 182.ॐ उच्चारणाधृते भक्तहृदान्त उपदेशकाय नमःउच्चारण किए बिना ही भक्तों के हृदय के भीतर उपदेश देने वाले
- 183.ॐ उत्तमोत्तममार्गिणे नमःउत्तमों में भी उत्तम मार्ग पर चलने वाले
- 184.ॐ उत्तमोत्तारकर्मकृते नमःउत्तम प्रकार से तारने वाले कर्म करने वाले
- 185.ॐ उदासीनवदासीनाय नमःउदासीन के समान बैठे रहने वाले
- 186.ॐ उद्धरामीत्युदीरकाय नमःमैं उद्धार करूँगा — ऐसा कहने वाले
- 187.ॐ उद्धवाय मया प्रोक्तं भागवतमिति ब्रुवते नमःउद्धव से मैंने भागवत कहा था — ऐसा कहने वाले
- 188.ॐ उन्मत्तश्वाभिगोप्त्रे नमःपागल कुत्ते से भी रक्षा करने वाले
- 189.ॐ उन्मत्तवेषनामधृते नमःउन्मत्त का वेष तथा नाम धारण करने वाले
- 190.ॐ उपद्रवनिवारिणे नमःउपद्रवों का निवारण करने वाले
- 191.ॐ उपांशुजपबोधकाय नमःउपांशु जप का बोध कराने वाले
- 192.ॐ उमेशामेशयुक्तात्मने नमःउमापति तथा रमापति से युक्त आत्मा वाले
- 193.ॐ ऊर्जितभक्तिलक्षणाय नमःऊर्जित भक्ति के लक्षण वाले
- 194.ॐ ऊर्जितवाक्प्रदात्रे नमःऊर्जित वाणी देने वाले
- 195.ॐ ऊर्ध्वरेतसे नमःऊर्ध्वरेता
- 196.ॐ ऊर्ध्वमूलमधःशाखामश्वत्थं भस्मसात्कराय नमःऊपर मूल तथा नीचे शाखा वाले संसार-रूपी अश्वत्थ को भस्म कर देने वाले
- 197.ॐ ऊर्ध्वगतिविधात्रे नमःऊर्ध्व गति का विधान करने वाले
- 198.ॐ ऊर्ध्वबद्धद्विकेतनाय नमःऊपर बँधी दो ध्वजाओं वाले
- 199.ॐ ऋजवे नमःऋजु; सरल
- 200.ॐ ऋतम्बरप्रज्ञाय नमःऋतम्भरा प्रज्ञा वाले
- 201.ॐ ऋणक्लिष्टधनप्रदाय नमःऋण से क्लिष्ट जनों को धन देने वाले
- 202.ॐ ऋणानुबद्धजन्तुनां ऋणमुक्त्यै फलप्रदाय नमःऋण से बँधे प्राणियों को ऋण-मुक्ति का फल देने वाले
- 203.ॐ एकाकिने नमःएकाकी
- 204.ॐ एकभक्तये नमःएक ही भक्ति वाले
- 205.ॐ एकवाक्कायमानसाय नमःवाणी, काया तथा मन — तीनों में एक
- 206.ॐ एकादश्यां स्वभक्तानां स्वतनोकृतनिष्कृतये नमःएकादशी को अपने भक्तों के लिए अपने ही शरीर से निष्कृति करने वाले
- 207.ॐ एकाक्षरपरज्ञानिने नमःएकाक्षर के परम ज्ञानी
- 208.ॐ एकात्मा सर्वदेशदृशे नमःएक ही आत्मा जो समस्त देशों को देखती है
- 209.ॐ एकेश्वरप्रतीतये नमःएक ही ईश्वर की प्रतीति कराने वाले
- 210.ॐ एकरीत्यादृताखिलाय नमःएक ही रीति से समस्त को आदर देने वाले
- 211.ॐ ऐक्यानन्दगतद्वन्द्वाय नमःऐक्य के आनंद में द्वंद्व से परे गए हुए
- 212.ॐ ऐक्यानन्दविधायकाय नमःऐक्य का आनंद विधान करने वाले
- 213.ॐ ऐक्यकृते नमःऐक्य करने वाले
- 214.ॐ ऐक्यभूतात्मने नमःऐक्य-भूत आत्मा वाले
- 215.ॐ ऐहिकामुष्मिकप्रदाय नमःइस लोक तथा परलोक — दोनों का फल देने वाले
- 216.ॐ ओङ्कारादराय नमःओंकार का आदर करने वाले
- 217.ॐ ओजस्विने नमःओजस्वी
- 218.ॐ औषधीकृतभस्मदाय नमःभस्म को ही औषध बना देने वाले
क-वर्ग — कलौ प्रत्यक्षदैवत, कबीरदासावतार व कर्मबन्धनाश (नाम 219–282)
- 219.ॐ कथाकीर्तनपद्धत्यां नारदानुष्ठितं स्तुवते नमःकथा-कीर्तन की पद्धति में नारद द्वारा किए गए अनुष्ठान की स्तुति करने वाले
- 220.ॐ कपर्दे क्लेशनाशिने नमःकपर्दे नामक स्थान में क्लेश का नाश करने वाले
- 221.ॐ कबीर्दासावतारकाय नमःकबीरदास के अवतार
- 222.ॐ कपर्दे पुत्ररक्षार्थमनुभूत तदामयाय नमःकपर्दे में पुत्र की रक्षा के लिए स्वयं वह रोग भोगने वाले
- 223.ॐ कमलाश्लिष्टपादाब्जाय नमःकमला से आलिंगित चरण-कमलों वाले
- 224.ॐ कमलायतलोचनाय नमःकमल सदृश विशाल नेत्रों वाले
- 225.ॐ कन्दर्पदर्पविध्वंसिने नमःकंदर्प के दर्प का विध्वंस करने वाले
- 226.ॐ कमनीयगुणालयाय नमःकमनीय गुणों के आलय
- 227.ॐ कर्ताऽकर्ता अन्यथाकर्त्रे नमःकर्ता, अकर्ता तथा अन्यथा करने वाले — तीनों
- 228.ॐ कर्मयुक्तोप्यकर्मकृते नमःकर्म से युक्त होकर भी अकर्म करने वाले
- 229.ॐ कर्मकृते नमःकर्म करने वाले
- 230.ॐ कर्मनिर्मुक्ताय नमःकर्म से निर्मुक्त
- 231.ॐ कर्माऽकर्मविचक्षणाय नमःकर्म तथा अकर्म के विषय में विचक्षण
- 232.ॐ कर्मबीजक्षयङ्कर्त्रे नमःकर्म-बीज का क्षय करने वाले
- 233.ॐ कर्मनिर्मूलनक्षमाय नमःकर्मों का निर्मूलन करने में समर्थ
- 234.ॐ कर्मव्याधिव्यपोहिने नमःकर्म-रूपी व्याधि को दूर करने वाले
- 235.ॐ कर्मबन्धविनाशकाय नमःकर्म-बंधन का विनाश करने वाले
- 236.ॐ कलिमलापहारिणे नमःकलियुग के मल का अपहरण करने वाले
- 237.ॐ कलौ प्रत्यक्षदैवताय नमःकलियुग में प्रत्यक्ष देवता
- 238.ॐ कलियुगावताराय नमःकलियुग के अवतार
- 239.ॐ कल्युत्थभवभञ्जनाय नमःकलियुग से उत्पन्न भव-बंधन का भंजन करने वाले
- 240.ॐ कल्याणानन्तनाम्ने नमःकल्याणकारी अनंत नामों वाले
- 241.ॐ कल्याणगुणभूषणाय नमःकल्याणकारी गुणों से विभूषित
- 242.ॐ कविदासगणुत्रात्रे नमःकविदास तथा गणु की रक्षा करने वाले
- 243.ॐ कष्टनाशकरौषधाय नमःकष्ट का नाश करने वाली औषध-स्वरूप
- 244.ॐ काकादीक्षित रक्षायां धुरीणो अहमितीरकाय नमःकाका दीक्षित की रक्षा का भार स्वयं लेने वाले
- 245.ॐ कानाभिलादपि त्रात्रे नमःकान-भिल्ल आदि से भी रक्षा करने वाले (पाठ अनिश्चित)
- 246.ॐ कानने पानदानकृते नमःवन में जल-दान करने वाले
- 247.ॐ कामजिते नमःकाम को जीतने वाले
- 248.ॐ कामरूपिणे नमःइच्छानुसार रूप धारण करने वाले
- 249.ॐ कामसङ्कल्पवर्जिताय नमःकाम-संकल्प से रहित
- 250.ॐ कामितार्थप्रदात्रे नमःवांछित अर्थ देने वाले
- 251.ॐ कामादिशत्रुनाशनाय नमःकाम आदि शत्रुओं का नाश करने वाले
- 252.ॐ काम्यकर्मसुसन्यस्ताय नमःकाम्य कर्मों का भली प्रकार संन्यास करने वाले
- 253.ॐ कामेराशक्तिनाशकाय नमःकामना की आसक्ति का नाश करने वाले
- 254.ॐ कालाय नमःकाल-स्वरूप
- 255.ॐ कालकालाय नमःकाल के भी काल
- 256.ॐ कालातीताय नमःकाल से अतीत
- 257.ॐ कालकृते नमःकाल की रचना करने वाले
- 258.ॐ कालदर्पविनाशिने नमःकाल के दर्प का विनाश करने वाले
- 259.ॐ कालरातर्जनक्षमाय नमःकालरात्रि को भी डाँट देने में समर्थ
- 260.ॐ कालशुनकदत्तान्नं ज्वरं हरेदिति ब्रुवते नमःकाले कुत्ते को दिया गया अन्न ज्वर हर लेता है — ऐसा कहने वाले
- 261.ॐ कालाग्निसदृशक्रोधाय नमःकालाग्नि के सदृश क्रोध वाले
- 262.ॐ काशीरामसुरक्षकाय नमःकाशीराम की भली प्रकार रक्षा करने वाले
- 263.ॐ कीर्तिव्याप्तदिगन्ताय नमःजिनकी कीर्ति दिगंत तक व्याप्त है
- 264.ॐ कुप्नीवीतकलेबराय नमःकुप्नी अर्थात कफनी को ही वस्त्र रूप में धारण करने वाले
- 265.ॐ कुम्बाराग्निशिशुत्रात्रे नमःकुम्हार की भट्ठी की अग्नि से शिशु की रक्षा करने वाले
- 266.ॐ कुष्ठरोगनिवारकाय नमःकुष्ठ रोग का निवारण करने वाले
- 267.ॐ कूटस्थाय नमःकूटस्थ; अविचल
- 268.ॐ कृतज्ञाय नमःकृतज्ञ
- 269.ॐ कृत्स्नक्षेत्रप्रकाशकाय नमःसमस्त क्षेत्र को प्रकाशित करने वाले
- 270.ॐ कृत्स्नज्ञाय नमःसब कुछ जानने वाले
- 271.ॐ कृपापूर्णाय नमःकृपा से परिपूर्ण
- 272.ॐ कृपयापालितार्भकाय नमःकृपा से बालक का पालन करने वाले
- 273.ॐ कृष्णरामशिवात्रेयमारुत्यादिस्वरूपधृते नमःकृष्ण, राम, शिव, अत्रि-पुत्र दत्त तथा मारुति आदि का स्वरूप धारण करने वाले
- 274.ॐ केवलात्मानुभूतये नमःकेवल आत्म-अनुभूति स्वरूप
- 275.ॐ कैवल्यपददायकाय नमःकैवल्य पद देने वाले
- 276.ॐ कोविदाय नमःकोविद; निपुण
- 277.ॐ कोमलाङ्गाय नमःकोमल अंगों वाले
- 278.ॐ कोपव्याजशुभप्रदाय नमःक्रोध के बहाने भी शुभ देने वाले
- 279.ॐ कोऽहमिति दिवानक्तं विचारमनुशासकाय नमःमैं कौन हूँ — इस विचार का दिन-रात अनुशासन कराने वाले
- 280.ॐ क्लिष्टरक्षाधुरीणाय नमःक्लिष्टों की रक्षा का भार उठाने वाले
- 281.ॐ क्रोधजिते नमःक्रोध को जीतने वाले
- 282.ॐ क्लेशनाशनाय नमःक्लेशों का नाश करने वाले
ग, च व छ वर्ग — गुरुपरम्परा, चमत्कार व छिन्नसंशय (नाम 283–344)
- 283.ॐ गगनसौक्ष्म्यविस्ताराय नमःआकाश की सूक्ष्मता के समान विस्तार वाले
- 284.ॐ गम्भीरमधुरस्वनाय नमःगंभीर तथा मधुर स्वर वाले
- 285.ॐ गङ्गातीरनिवासिने नमःगंगा-तट पर निवास करने वाले
- 286.ॐ गङ्गोत्पत्तिपदाम्बुजाय नमःजिनके चरण-कमलों से गंगा की उत्पत्ति है
- 287.ॐ गङ्गागिरिरितिख्यात यतिश्रेष्ठेन संस्तुताय नमःगंगागिरि नाम से प्रख्यात यतिश्रेष्ठ द्वारा स्तुत
- 288.ॐ गन्धपुष्पाक्षतौ पूज्याय नमःगंध, पुष्प तथा अक्षत से पूज्य
- 289.ॐ गतिविदे नमःगति को जानने वाले
- 290.ॐ गतिसूचकाय नमःगति सूचित करने वाले
- 291.ॐ गह्वरेष्ठपुराणाय नमःगुहा में स्थित पुराण-पुरुष
- 292.ॐ गर्वमात्सर्यवर्जिताय नमःगर्व तथा मात्सर्य से रहित
- 293.ॐ गाननृत्यविनोदाय नमःगान व नृत्य में विनोद करने वाले
- 294.ॐ गालवण्कर्वरप्रदाय नमःगालवणकर को वर देने वाले
- 295.ॐ गिरीशसदृशत्यागिने नमःगिरीश अर्थात शिव के समान त्यागी
- 296.ॐ गीताचार्याय नमःगीता के आचार्य
- 297.ॐ गीताद्भुतार्थवक्त्रे नमःगीता का अद्भुत अर्थ कहने वाले
- 298.ॐ गीतारहस्यसम्प्रदाय नमःगीता का रहस्य भली प्रकार देने वाले
- 299.ॐ गीताज्ञानमयाय नमःगीता के ज्ञान से पूर्ण
- 300.ॐ गीतापूर्णोपदेशकाय नमःगीता का पूर्ण उपदेश करने वाले
- 301.ॐ गुणातीताय नमःगुणों से अतीत
- 302.ॐ गुणात्मने नमःगुणों की आत्मा
- 303.ॐ गुणदोषविवर्जिताय नमःगुण व दोष — दोनों से रहित
- 304.ॐ गुणागुणेषु वर्तन्त इत्यनासक्ति सुस्थिराय नमःगुण ही गुणों में बरतते हैं — इस अनासक्ति में भली प्रकार स्थिर
- 305.ॐ गुप्ताय नमःगुप्त
- 306.ॐ गुहाहिताय नमःहृदय-गुहा में स्थित
- 307.ॐ गूढाय नमःगूढ़
- 308.ॐ गुप्तसर्वनिबोधकाय नमःगुप्त बातें भी सब बता देने वाले
- 309.ॐ गुर्वङ्घ्रितीव्रभक्तिश्चेत्तदेवालमितीरयते नमःगुरु-चरणों में तीव्र भक्ति हो तो वही पर्याप्त है — ऐसा कहने वाले
- 310.ॐ गुरवे नमःगुरु
- 311.ॐ गुरुतमाय नमःगुरुओं में भी श्रेष्ठ
- 312.ॐ गुह्याय नमःगुह्य
- 313.ॐ गुरुपादपरायणाय नमःगुरु-चरणों में परायण
- 314.ॐ गुर्वीशाङ्घ्रिसदाध्यात्रे नमःगुरु-ईश के चरणों का सदा ध्यान करने वाले
- 315.ॐ गुरुसन्तोषवर्धनाय नमःगुरु के संतोष की वृद्धि करने वाले
- 316.ॐ गुरुप्रेमसमालब्धपरिपूर्णस्वरूपवते नमःगुरु-प्रेम से प्राप्त परिपूर्ण स्वरूप वाले
- 317.ॐ गुरूपासनसंसिद्धाय नमःगुरु की उपासना से भली प्रकार सिद्ध
- 318.ॐ गुरुमार्गप्रवर्तकाय नमःगुरु-मार्ग को प्रवर्तित करने वाले
- 319.ॐ गुर्वात्मदेवताबुद्ध्या ब्रह्मानन्दमयाय नमःगुरु को ही आत्म-देवता मानने की बुद्धि से ब्रह्मानंदमय
- 320.ॐ गुरोस्समाधिपार्श्वस्थनिम्बच्छायानिवासकृते नमःगुरु की समाधि के पास स्थित नीम की छाया में निवास करने वाले
- 321.ॐ गुरुवेङ्कुश सम्प्राप्तवस्त्रेष्टिका सदाधृताय नमःगुरु वेङ्कुश से प्राप्त वस्त्र व ईंट को सदा धारण करने वाले
- 322.ॐ गुरुपरम्परादिष्टसर्वत्यागपरायणाय नमःगुरु-परंपरा द्वारा उपदिष्ट सर्व-त्याग में परायण
- 323.ॐ गुरुपरम्पराप्राप्तसच्चिदानन्दमूर्तिमते नमःगुरु-परंपरा से प्राप्त सच्चिदानंद की मूर्ति वाले
- 324.ॐ गृहहीनमहाराजाय नमःगृह-हीन महाराज
- 325.ॐ गृहमेधिपराश्रयाय नमःगृहस्थों के परम आश्रय
- 326.ॐ गोपींस्त्राता यथा कृष्ण नाच्ने कुलावनाय नमःजैसे कृष्ण ने गोपियों की रक्षा की, वैसे ही कुल की रक्षा करने वाले
- 327.ॐ गोपालगुण्डूरायादि पुत्रपौत्रादिवर्धनाय नमःगोपाल गुण्डूराव आदि के पुत्र-पौत्रादि की वृद्धि करने वाले
- 328.ॐ गोष्पदीकृतकष्टाब्धये नमःकष्ट के समुद्र को गाय के खुर जितना कर देने वाले
- 329.ॐ गोदावरीतटागताय नमःगोदावरी के तट पर आए हुए
- 330.ॐ चतुर्भुजाय नमःचार भुजाओं वाले
- 331.ॐ चतुर्बाहुनिवारितनृसङ्कटाय नमःचार बाहुओं से मनुष्य का संकट दूर करने वाले
- 332.ॐ चमत्कारैः सङ्क्लिष्टौर्भक्तिज्ञानविवर्धनाय नमःसंक्लिष्ट चमत्कारों द्वारा भक्ति व ज्ञान की वृद्धि करने वाले
- 333.ॐ चन्दनालेपारुष्टानां दुष्टानां धर्षणक्षमाय नमःचंदन-लेप से रुष्ट हुए दुष्टों का धर्षण करने में समर्थ
- 334.ॐ चन्दोर्करादि भक्तानां सदापालननिष्ठिताय नमःचंदोरकर आदि भक्तों के सदा पालन में निष्ठ
- 335.ॐ चराचरपरिव्याप्ताय नमःचराचर में परिव्याप्त
- 336.ॐ चर्मदाहेप्यविक्रियाय नमःचर्म जल जाने पर भी विकार-रहित रहने वाले
- 337.ॐ चान्द्भायाख्य पाटेलार्थं चमत्कार सहायकृते नमःचाँदभाई नामक पाटील के लिए चमत्कार से सहायता करने वाले
- 338.ॐ चिन्तामग्न परित्राणे तस्य सर्वभारं वहाय नमःचिंता में डूबे हुए की रक्षा में उसका सारा भार वहन करने वाले
- 339.ॐ चित्रातिचित्रचारित्राय नमःविचित्र से भी विचित्र चरित्र वाले
- 340.ॐ चिन्मयानन्दाय नमःचिन्मय आनंद-स्वरूप
- 341.ॐ चिरवासकृतैर्बन्धैः शिर्डीग्रामं पुनर्गताय नमःचिरकाल के निवास से बने बंधनों के कारण शिरडी ग्राम पुनः लौट आने वाले
- 342.ॐ चोराद्याहृतवस्तूनिदत्तान्येवेतिहर्षिताय नमःचोर आदि द्वारा हरी गई वस्तुओं को भी दी हुई ही मानकर हर्षित होने वाले
- 343.ॐ छिन्नसंशयाय नमःजिनके संशय छिन्न हो चुके
- 344.ॐ छिन्नसंसारबन्धनाय नमःसंसार-बंधन का छेदन करने वाले
ज-वर्ग — जगन्नाटकसूत्रधृत, जातिभेदतिरस्कार व ज्ञानभास्कर (नाम 345–412)
- 345.ॐ जगत्पित्रे नमःजगत के पिता
- 346.ॐ जगन्मात्रे नमःजगत की माता
- 347.ॐ जगत्त्रात्रे नमःजगत के त्राता
- 348.ॐ जगद्धिताय नमःजगत का हित करने वाले
- 349.ॐ जगत्स्रष्टाय नमःजगत के स्रष्टा
- 350.ॐ जगत्साक्षिणे नमःजगत के साक्षी
- 351.ॐ जगद्व्यापिने नमःजगत में व्यापी
- 352.ॐ जगद्गुरवे नमःजगद्गुरु
- 353.ॐ जगत्प्रभवे नमःजगत के प्रभु
- 354.ॐ जगन्नाथाय नमःजगन्नाथ
- 355.ॐ जगदेकदिवाकराय नमःजगत के एकमात्र दिवाकर
- 356.ॐ जगन्मोहचमत्काराय नमःजगत को मोहित करने वाले चमत्कार से युक्त
- 357.ॐ जगन्नाटकसूत्रधृते नमःजगत-रूपी नाटक के सूत्रधार
- 358.ॐ जगन्मङ्गलकर्त्रे नमःजगत का मंगल करने वाले
- 359.ॐ जगन्मायेतिबोधकाय नमःजगत माया है — ऐसा बोध कराने वाले
- 360.ॐ जडोन्मत्तपिशाचाभोप्यन्तःसच्चित्सुखस्थिताय नमःजड़, उन्मत्त व पिशाच जैसे दिखकर भी भीतर सत्-चित्-सुख में स्थित
- 361.ॐ जन्मबन्धविनिर्मुक्ताय नमःजन्म-बंधन से पूर्णतः मुक्त
- 362.ॐ जन्मसाफल्यमन्त्रदाय नमःजन्म को सफल करने वाला मंत्र देने वाले
- 363.ॐ जन्मजन्मान्तरज्ञाय नमःजन्म-जन्मांतर को जानने वाले
- 364.ॐ जन्मनाशरहस्यविदे नमःजन्म व नाश के रहस्य को जानने वाले
- 365.ॐ जनजल्पमनाद्यत्य जपसिद्धि महाद्युतये नमःलोगों की बातों की उपेक्षा कर जप-सिद्धि की महती द्युति वाले
- 366.ॐ जप्तनामसुसन्तुष्टहरिप्रत्यक्षभाविताय नमःजपे गए नाम से भली प्रकार संतुष्ट होकर हरि का प्रत्यक्ष भाव कराने वाले
- 367.ॐ जपप्रेरितभक्ताय नमःभक्तों को जप की प्रेरणा देने वाले
- 368.ॐ जप्यनाम्ने नमःजपने योग्य नाम वाले
- 369.ॐ जनेश्वराय नमःजनों के ईश्वर
- 370.ॐ जलहीनस्थले खिन्नभक्तार्थं जलसृष्टिकृते नमःजल-हीन स्थान पर खिन्न भक्त के लिए जल की सृष्टि करने वाले
- 371.ॐ जवारालीति मौलानासेवने अक्लिष्टमानसाय नमःजवाराली नामक मौलाना की सेवा में अक्लिष्ट मन वाले
- 372.ॐ जातग्रामाद्गुरोर्ग्रामं तस्मात्पूर्वस्थलं व्रजते नमःजन्म-ग्राम से गुरु के ग्राम, और वहाँ से पूर्व-स्थान को जाने वाले
- 373.ॐ जातिर्भेदमतैर्भेद इति भेदतिरस्कृताय नमःजाति का भेद ही भेद है — ऐसा कहकर भेद का तिरस्कार करने वाले
- 374.ॐ जातिविद्याधनैश्चापि हीनानार्द्रहृदावनाय नमःजाति, विद्या व धन से हीन जनों की भी आर्द्र हृदय से रक्षा करने वाले
- 375.ॐ जाम्बूनदपरित्यागिने नमःस्वर्ण का परित्याग करने वाले
- 376.ॐ जागरूकावितप्रजाय नमःजागरूक रहकर प्रजा की रक्षा करने वाले
- 377.ॐ जायापत्यगृहक्षेत्रस्वजनस्वार्थवर्जिताय नमःपत्नी, संतान, गृह, क्षेत्र, स्वजन व स्वार्थ — सबसे रहित
- 378.ॐ जितद्वैतमहामोहाय नमःद्वैत के महामोह को जीतने वाले
- 379.ॐ जितक्रोधाय नमःक्रोध को जीतने वाले
- 380.ॐ जितेन्द्रियाय नमःजितेंद्रिय
- 381.ॐ जितकन्दर्पदर्पाय नमःकंदर्प के दर्प को जीतने वाले
- 382.ॐ जितात्मने नमःआत्मा को जीतने वाले
- 383.ॐ जितषड्रिपवे नमःछहों शत्रुओं को जीतने वाले
- 384.ॐ जीर्णहूणालयस्थाने पूर्वजन्मकृतं स्मरते नमःजीर्ण हूणालय के स्थान पर पूर्वजन्म का किया हुआ स्मरण करने वाले
- 385.ॐ जीर्णहूणालयं चाद्य सर्वमर्त्यालयङ्कराय नमःउसी जीर्ण हूणालय को आज समस्त मनुष्यों का आलय बना देने वाले
- 386.ॐ जीर्णवस्त्रसमं मत्वा देहं त्यक्त्वा सुखं स्थिताय नमःशरीर को जीर्ण वस्त्र के समान मानकर त्यागकर सुख में स्थित होने वाले
- 387.ॐ जीर्णवस्त्रसमं पश्यन् त्यक्त्वा देहं प्रविष्टवते नमःशरीर को जीर्ण वस्त्र के समान देखते हुए त्यागकर पुनः प्रविष्ट होने वाले
- 388.ॐ जीवन्मुक्ताय नमःजीवन्मुक्त
- 389.ॐ जीवानां मुक्तिसद्गतिदायकाय नमःजीवों को मुक्ति तथा सद्गति देने वाले
- 390.ॐ ज्योतिश्शास्त्ररहस्यज्ञाय नमःज्योतिष-शास्त्र के रहस्य को जानने वाले
- 391.ॐ ज्योतिर्ज्ञानप्रदाय नमःज्योतिर्ज्ञान देने वाले
- 392.ॐ ज्योक्चसूर्यं दृशा पश्यते नमःदृष्टि से सूर्य को चिरकाल तक देखने वाले
- 393.ॐ ज्ञानभास्करमूर्तिमते नमःज्ञान-रूपी सूर्य की मूर्ति वाले
- 394.ॐ ज्ञातसर्वरहस्याय नमःसमस्त रहस्यों को जानने वाले
- 395.ॐ ज्ञातब्रह्मपरात्पराय नमःब्रह्म तथा परात्पर को जानने वाले
- 396.ॐ ज्ञानभक्तिप्रदाय नमःज्ञान व भक्ति देने वाले
- 397.ॐ ज्ञानविज्ञाननिश्चयाय नमःज्ञान व विज्ञान में निश्चय वाले
- 398.ॐ ज्ञानशक्तिसमारूढाय नमःज्ञान-शक्ति पर आरूढ़
- 399.ॐ ज्ञानयोगव्यवस्थिताय नमःज्ञान-योग में व्यवस्थित
- 400.ॐ ज्ञानाग्निदग्धकर्मणे नमःजिनके कर्म ज्ञान-अग्नि से दग्ध हो चुके
- 401.ॐ ज्ञाननिर्धूतकल्मषाय नमःज्ञान से जिनके कल्मष धुल चुके
- 402.ॐ ज्ञानवैराग्यसन्धात्रे नमःज्ञान व वैराग्य का सन्धान कराने वाले
- 403.ॐ ज्ञानसञ्छिन्नसंशयाय नमःज्ञान से जिनके संशय छिन्न हो चुके
- 404.ॐ ज्ञानापास्तमहामोहाय नमःज्ञान से जिनका महामोह दूर हो चुका
- 405.ॐ ज्ञानीत्यात्मैव निश्चयाय नमःज्ञानी आत्मा ही है — ऐसे निश्चय वाले
- 406.ॐ ज्ञानेश्वरीपठद्दैवप्रतिबन्धनिवारकाय नमःज्ञानेश्वरी पढ़ने वालों के दैव-प्रतिबंध का निवारण करने वाले
- 407.ॐ ज्ञानाय नमःज्ञान-स्वरूप
- 408.ॐ ज्ञेयाय नमःजानने योग्य
- 409.ॐ ज्ञानगम्याय नमःज्ञान से प्राप्य
- 410.ॐ ज्ञातसर्व परं मताय नमःसब कुछ जान लेना ही जिनका परम मत है
- 411.ॐ ज्योतिषां प्रथमज्योतिषे नमःज्योतियों में प्रथम ज्योति
- 412.ॐ ज्योतिर्हीनद्युतिप्रदाय नमःज्योति-हीनों को द्युति देने वाले
त व द वर्ग — तत्त्वमूर्ति, दक्षिणामूर्ति व देहो देवालय (नाम 413–500)
- 413.ॐ तपस्सन्दीप्ततेजस्विने नमःतप से देदीप्यमान तेजस्वी
- 414.ॐ तप्तकाञ्चनसन्निभाय नमःतपाए हुए स्वर्ण के सदृश
- 415.ॐ तत्त्वज्ञानार्थदर्शिने नमःतत्त्व-ज्ञान का अर्थ दिखाने वाले
- 416.ॐ तत्त्वमस्यादिलक्षिताय नमःतत्त्वमसि आदि महावाक्यों से लक्षित
- 417.ॐ तत्त्वविदे नमःतत्त्व को जानने वाले
- 418.ॐ तत्त्वमूर्तये नमःतत्त्व की मूर्ति
- 419.ॐ तन्द्रालस्यविवर्जिताय नमःतंद्रा व आलस्य से रहित
- 420.ॐ तत्त्वमालाधराय नमःतत्त्व-रूपी माला धारण करने वाले
- 421.ॐ तत्त्वसारविशारदाय नमःतत्त्व के सार में विशारद
- 422.ॐ तर्जितान्तकदूताय नमःयम के दूतों को भी डाँट देने वाले
- 423.ॐ तमसः पराय नमःतमस् से परे
- 424.ॐ तात्यागणपतिप्रेष्ठाय नमःतात्या गणपति को अत्यंत प्रिय
- 425.ॐ तात्यानूल्कर्गतिप्रदाय नमःतात्या नूलकर को गति देने वाले
- 426.ॐ तारकब्रह्मनाम्ने नमःतारक ब्रह्म नाम वाले
- 427.ॐ तमोरजोविवर्जिताय नमःतमोगुण व रजोगुण से रहित
- 428.ॐ तामरसदलाक्षाय नमःकमल-दल सदृश नेत्रों वाले
- 429.ॐ ताराबाय्यासुरक्षाय नमःताराबाई की भली प्रकार रक्षा करने वाले
- 430.ॐ तिलकपूजिताङ्घ्रये नमःतिलक से पूजित चरणों वाले
- 431.ॐ तिर्यग्जन्तुगतिप्रदाय नमःपशु-पक्षियों तक को गति देने वाले
- 432.ॐ तीर्थकृतनिवासाय नमःतीर्थों द्वारा किए गए निवास वाले
- 433.ॐ तीर्थपादाय नमःजिनके चरण ही तीर्थ हैं
- 434.ॐ तीव्रभक्तिनृसिंहादिभक्तालीभूर्यनुग्रहाय नमःतीव्र भक्ति वाले नृसिंह आदि भक्त-समूह पर प्रचुर अनुग्रह करने वाले
- 435.ॐ तीव्रप्रेमविरागाप्तवेङ्कटेशकृपानिधये नमःतीव्र प्रेम व विराग से प्राप्त वेङ्कटेश की कृपा के निधि
- 436.ॐ तुल्यप्रियाऽप्रियाय नमःजिनके लिए प्रिय व अप्रिय समान हैं
- 437.ॐ तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतये नमःजिनके लिए निंदा व अपनी स्तुति समान हैं
- 438.ॐ तुल्याधिकविहीनाय नमःजिनके लिए समान, अधिक व हीन — सब एक हैं
- 439.ॐ तुष्टसज्जनसंवृताय नमःसंतुष्ट सज्जनों से घिरे हुए
- 440.ॐ तृप्तात्मने नमःतृप्त आत्मा वाले
- 441.ॐ तृषाहीनाय नमःतृष्णा से रहित
- 442.ॐ तृणीकृतजगद्वसवे नमःजिन्होंने जगत के वैभव को तिनके के समान कर दिया
- 443.ॐ तैलीकृतजलापूर्णदीपसञ्ज्वलितालयाय नमःजल को ही तेल बनाकर भरे दीपों से आलय जगमगाने वाले
- 444.ॐ त्रिकालज्ञाय नमःतीनों कालों को जानने वाले
- 445.ॐ त्रिमूर्तये नमःत्रिमूर्ति-स्वरूप
- 446.ॐ त्रिगुणातीताय नमःतीनों गुणों से अतीत
- 447.ॐ त्रियामायोगनिष्ठात्मा दशदिग्भक्तपालकाय नमःतीनों प्रहर योग-निष्ठ आत्मा से दसों दिशाओं के भक्तों का पालन करने वाले
- 448.ॐ त्रिवर्गमोक्षसन्धात्रे नमःत्रिवर्ग तथा मोक्ष का सन्धान कराने वाले
- 449.ॐ त्रिपुटीरहितस्थितये नमःत्रिपुटी से रहित स्थिति वाले
- 450.ॐ त्रिलोकस्वेच्छसञ्चारिणे नमःतीनों लोकों में इच्छानुसार संचरण करने वाले
- 451.ॐ त्रैलोक्यतिमिरापहाय नमःतीनों लोकों का अंधकार दूर करने वाले
- 452.ॐ त्यक्तकर्मफलासङ्गाय नमःकर्म-फल की आसक्ति त्याग चुके
- 453.ॐ त्यक्तभोगसदासुखिने नमःभोग त्यागकर सदा सुखी रहने वाले
- 454.ॐ त्यक्तदेहात्मबुद्धये नमःदेह ही आत्मा है — यह बुद्धि त्याग चुके
- 455.ॐ त्यक्तसर्वपरिग्रहाय नमःसमस्त परिग्रह त्याग चुके
- 456.ॐ त्यक्त्वा मायामयं सर्वं स्वे महिम्नि सदास्थिताय नमःमायामय सब कुछ त्यागकर अपनी ही महिमा में सदा स्थित
- 457.ॐ दण्डधृते नमःदण्ड धारण करने वाले
- 458.ॐ दण्डनार्हाणां दुष्टवृत्तेर्निवर्तकाय नमःदण्ड के योग्य दुष्टों की वृत्ति को लौटा देने वाले
- 459.ॐ दम्भदर्पातिदूराय नमःदंभ व दर्प से अत्यंत दूर
- 460.ॐ दक्षिणामूर्तये नमःदक्षिणामूर्ति-स्वरूप
- 461.ॐ दक्षिणादानकर्तृभ्यो दशधाप्रतिदायकाय नमःदक्षिणा देने वालों को दस गुना लौटा देने वाले
- 462.ॐ दक्षिणाप्रार्थनाद्वारा शुभकृत्तत्त्वबोधकाय नमःदक्षिणा की माँग के द्वारा ही शुभ करते हुए तत्त्व का बोध कराने वाले
- 463.ॐ दयापराय नमःदया में परायण
- 464.ॐ दयासिन्धवे नमःदया के सागर
- 465.ॐ दत्तात्रेयाय नमःदत्तात्रेय-स्वरूप
- 466.ॐ दरिद्रोऽयं धनीवेति भेदाचारविवर्जिताय नमःयह दरिद्र है और यह धनी — ऐसे भेद-आचार से रहित
- 467.ॐ दहराकाशभानवे नमःदहर-आकाश के सूर्य
- 468.ॐ दग्धहस्तार्भकावनाय नमःजले हुए हाथ वाले बालक की रक्षा करने वाले
- 469.ॐ दारिद्र्यदुःखभीतिघ्नाय नमःदरिद्रता, दुःख व भय का नाश करने वाले
- 470.ॐ दामोदरवरप्रदाय नमःदामोदर को वर देने वाले
- 471.ॐ दानशौण्डाय नमःदान देने में प्रवीण
- 472.ॐ दान्ताय नमःदान्त; संयमी
- 473.ॐ दानैश्चान्यान् वशं नयते नमःदान के द्वारा ही दूसरों को वश में करने वाले
- 474.ॐ दानमार्गस्खलत्पादनानाचान्दोर्करावनाय नमःदान-मार्ग से विचलित होते नाना चंदोरकर की रक्षा करने वाले
- 475.ॐ दिव्यज्ञानप्रदाय नमःदिव्य ज्ञान देने वाले
- 476.ॐ दिव्यमङ्गलविग्रहाय नमःदिव्य व मंगलमय विग्रह वाले
- 477.ॐ दीनदयापराय नमःदीनों पर दया में परायण
- 478.ॐ दीर्घदृशे नमःदूरदर्शी
- 479.ॐ दीनवत्सलाय नमःदीनों पर वात्सल्य रखने वाले
- 480.ॐ दुष्टानां दमने शक्ताय नमःदुष्टों के दमन में समर्थ
- 481.ॐ दुराधर्षतपोबलाय नमःदुर्धर्ष तप-बल वाले
- 482.ॐ दुर्भिक्षोप्यन्नदात्रे नमःदुर्भिक्ष में भी अन्न देने वाले
- 483.ॐ दुरादृष्टविनाशकृते नमःदुर्भाग्य का विनाश करने वाले
- 484.ॐ दुःखशोकभयद्वेषमोहाद्यशुभनाशकाय नमःदुःख, शोक, भय, द्वेष व मोह आदि अशुभ का नाश करने वाले
- 485.ॐ दुष्टनिग्रहशिष्टानुग्रहरूपमहाव्रताय नमःदुष्टों का निग्रह व शिष्टों पर अनुग्रह — इसी रूप के महाव्रत वाले
- 486.ॐ दुष्टमूर्खजडादीनामप्रकाशस्वरूपवते नमःदुष्ट, मूर्ख व जड़ जनों के लिए अप्रकाश-स्वरूप रहने वाले
- 487.ॐ दुष्टजन्तुपरित्रात्रे नमःदुष्ट जंतुओं से भी रक्षा करने वाले
- 488.ॐ दूरवर्तिसमस्तदृशे नमःदूर स्थित सब कुछ देख लेने वाले
- 489.ॐ दृश्यं नश्यं न विश्वास्यमिति बुद्धि प्रबोधकाय नमःदृश्य नाशवान है, विश्वास योग्य नहीं — यह बुद्धि जगाने वाले
- 490.ॐ दृश्यं सर्वं हि चैतन्यमित्यानन्द प्रतिष्ठाय नमःदृश्य सब कुछ चैतन्य ही है — इस आनंद में प्रतिष्ठित
- 491.ॐ देहे विगलिताशाय नमःदेह में आशा-रहित
- 492.ॐ देहयात्रार्थमन्नभुजे नमःकेवल देह-यात्रा के लिए ही अन्न ग्रहण करने वाले
- 493.ॐ देहो गेहस्ततो मान्तु निन्ये गुरुरितीरकाय नमःदेह ही गेह है, इसलिए उससे परे ले चलो — ऐसा कहने वाले गुरु
- 494.ॐ देहात्मबुद्धिहीनाय नमःदेह ही आत्मा है, इस बुद्धि से रहित
- 495.ॐ देहमोहप्रभञ्जनाय नमःदेह के मोह का भंजन करने वाले
- 496.ॐ देहो देवालयस्तस्मिन् देवं पश्येत्युदीरयते नमःदेह देवालय है, उसी में देव को देखो — ऐसा कहने वाले
- 497.ॐ दैवीसम्पत्प्रपूर्णाय नमःदैवी सम्पत् से परिपूर्ण
- 498.ॐ देशोद्धारसहायकृते नमःदेश के उद्धार में सहायता करने वाले
- 499.ॐ द्वन्द्वमोहविनिर्मुक्ताय नमःद्वंद्व-मोह से पूर्णतः मुक्त
- 500.ॐ द्वन्द्वातीतविमत्सराय नमःद्वंद्व से अतीत तथा मत्सर-रहित
द्वा से न वर्ग — द्वारकामायीवासी, धर्मसेतु व नित्याग्निहोत्र (नाम 501–558)
- 501.ॐ द्वारकामायिवासिने नमःद्वारकामायी में निवास करने वाले
- 502.ॐ द्वेषद्रोहविवर्जिताय नमःद्वेष तथा द्रोह से रहित
- 503.ॐ द्वैताद्वैतविशिष्ठादीन् काले स्थाने विबोधकाय नमःद्वैत, अद्वैत व विशिष्टाद्वैत आदि का समय व स्थान देखकर बोध कराने वाले
- 504.ॐ धनहीनां धनाड्यां च समदृष्ट्यैव रक्षकाय नमःधन-हीन तथा धनवान — दोनों की समान दृष्टि से ही रक्षा करने वाले
- 505.ॐ धनदेनसमत्यागिने नमःधन देने में समान रूप से त्यागी
- 506.ॐ धरणीधरसन्निभाय नमःधरणीधर के सदृश
- 507.ॐ धर्मज्ञाय नमःधर्म को जानने वाले
- 508.ॐ धर्मसेतवे नमःधर्म के सेतु
- 509.ॐ धर्मस्थापनसम्भवाय नमःधर्म की स्थापना के लिए प्रकट होने वाले
- 510.ॐ धुमालेउपासनीपत्न्यो निर्वाणे सद्गतिप्रदाय नमःधूमाळ तथा उपासनी की पत्नियों को निर्वाण के समय सद्गति देने वाले
- 511.ॐ धूपखेडा पटेल् चान्द्भाय् नष्टाश्व स्थानसूचकाय नमःधूपखेड़ा के पाटील चाँदभाई को खोए हुए घोड़े का स्थान बताने वाले
- 512.ॐ धूमयान पतत्पाथेवारपत्नी सुरक्षकाय नमःरेलगाड़ी से गिरती हुई वारे-पत्नी की भली प्रकार रक्षा करने वाले
- 513.ॐ ध्यानावस्थितचेतसे नमःध्यान में स्थित चित्त वाले
- 514.ॐ धृत्युत्साहसमन्विताय नमःधृति तथा उत्साह से समन्वित
- 515.ॐ नतजनावनाय नमःनमन करने वाले जनों की रक्षा करने वाले
- 516.ॐ नरलोकमनोरमाय नमःनर-लोक के लिए मनोरम
- 517.ॐ नष्टदृष्टिप्रदात्रे नमःखोई हुई दृष्टि लौटा देने वाले
- 518.ॐ नरलोकविडम्बनाय नमःनर-लोक में लीला करने वाले
- 519.ॐ नागसर्पे मयूरे च समारूढ षडाननाय नमःनाग-सर्प तथा मयूर पर आरूढ़ षडानन-स्वरूप
- 520.ॐ नानाचान्दोर्कमाहूय तत्सद्गत्यै कृतोद्यमाय नमःनाना चंदोरकर को बुलाकर उनकी सद्गति के लिए उद्यम करने वाले
- 521.ॐ नानानिम्होण्करस्यान्ते स्वाङ्घ्रि ध्यानलयप्रदाय नमःनाना निमोणकर को अंत समय अपने चरणों के ध्यान में लय देने वाले
- 522.ॐ नानादेशाभिधाकाराय नमःनाना देशों के नाम व आकार वाले
- 523.ॐ नानाविधिसमर्चिताय नमःनाना विधियों से भली प्रकार अर्चित
- 524.ॐ नारायणमहाराजसंश्लाघितपदाम्बुजाय नमःनारायण महाराज द्वारा प्रशंसित चरण-कमलों वाले
- 525.ॐ नारायणपराय नमःनारायण में परायण
- 526.ॐ नामवर्जिताय नमःनाम से रहित
- 527.ॐ निगृहितेन्द्रियग्रामाय नमःइंद्रिय-समूह का निग्रह कर चुके
- 528.ॐ निगमागमगोचराय नमःनिगम व आगम से गोचर
- 529.ॐ नित्यसर्वगतस्थाणवे नमःनित्य, सर्वगत व स्थाणु
- 530.ॐ नित्यतृप्ताय नमःनित्य तृप्त
- 531.ॐ निराश्रयाय नमःआश्रय-रहित
- 532.ॐ नित्यान्नदानधर्मिष्ठाय नमःनित्य अन्न-दान के धर्म में निष्ठ
- 533.ॐ नित्यानन्दप्रवाहकाय नमःनित्य आनंद बहाने वाले
- 534.ॐ नित्यमङ्गलधाम्ने नमःनित्य मंगल के धाम
- 535.ॐ नित्याग्निहोत्रवर्धनाय नमःनित्य अग्निहोत्र अर्थात धूनी की वृद्धि करने वाले
- 536.ॐ नित्यकर्मनियोक्त्रे नमःनित्य कर्म में नियुक्त करने वाले
- 537.ॐ नित्यसत्त्वस्थिताय नमःनित्य सत्त्व में स्थित
- 538.ॐ निम्बपादपमूलस्थाय नमःनीम वृक्ष के मूल में स्थित
- 539.ॐ निरन्तराग्निरक्षित्रे नमःनिरंतर अग्नि की रक्षा करने वाले
- 540.ॐ निस्पृहाय नमःस्पृहा-रहित
- 541.ॐ निर्विकल्पाय नमःविकल्प-रहित
- 542.ॐ निरङ्कुशगतागतये नमःजिनका आना-जाना किसी अंकुश से बँधा नहीं
- 543.ॐ निर्जितकामनादोषाय नमःकामना के दोष को जीत चुके
- 544.ॐ निराशाय नमःआशा-रहित
- 545.ॐ निरञ्जनाय नमःनिरंजन; निर्दोष
- 546.ॐ निर्विकल्पसमाधिस्थाय नमःनिर्विकल्प समाधि में स्थित
- 547.ॐ निरपेक्षाय नमःअपेक्षा-रहित
- 548.ॐ निर्गुणाय नमःनिर्गुण
- 549.ॐ निर्द्वन्द्वाय नमःद्वंद्व-रहित
- 550.ॐ नित्यसत्त्वस्थाय नमःनित्य सत्त्व में स्थित
- 551.ॐ निर्विकाराय नमःविकार-रहित
- 552.ॐ निश्चलाय नमःनिश्चल
- 553.ॐ निरालम्बाय नमःआलंबन-रहित
- 554.ॐ निराकाराय नमःआकार-रहित
- 555.ॐ निवृत्तगुणदोषकाय नमःगुण व दोष से निवृत्त
- 556.ॐ नूल्कर विजयानन्द माहिषां गतिदायकाय नमःनूलकर, विजयानंद तथा माहिष को गति देने वाले
- 557.ॐ नरसिंह गणूदास दत्त प्रचारसाधनाय नमःनरसिंह तथा गणुदास को दत्त-प्रचार का साधन बनाने वाले
- 558.ॐ नैष्ठिकब्रह्मचर्याय नमःनैष्ठिक ब्रह्मचर्य वाले
प-वर्ग — पत्रिग्रामसमुद्भव, पतितपावन व प्रेममार्ग (नाम 559–620)
- 559.ॐ नैष्कर्म्यपरिनिष्ठिताय नमःनैष्कर्म्य में पूर्ण रूप से निष्ठित
- 560.ॐ पण्डरीपाण्डुरङ्गाख्याय नमःपंढरी के पांडुरंग नाम वाले
- 561.ॐ पाटिल् तात्याजी मातुलाय नमःपाटील तात्याजी के मातुल-स्वरूप
- 562.ॐ पतितपावनाय नमःपतितों को पावन करने वाले
- 563.ॐ पत्रिग्रामसमुद्भवाय नमःपत्री ग्राम में उत्पन्न
- 564.ॐ पदविसृष्टगङ्गाम्भसे नमःजिनके चरण से गंगा-जल निकला
- 565.ॐ पदाम्बुजनतावनाय नमःचरण-कमलों में नमन करने वालों की रक्षा करने वाले
- 566.ॐ परब्रह्मस्वरूपिणे नमःपरब्रह्म के स्वरूप
- 567.ॐ परमकरुणालयाय नमःपरम करुणा के आलय
- 568.ॐ परतत्त्वप्रदीपाय नमःपरतत्त्व के प्रदीप
- 569.ॐ परमार्थनिवेदकाय नमःपरमार्थ का निवेदन करने वाले
- 570.ॐ परमानन्दनिस्यन्दाय नमःपरमानंद का निस्यंद
- 571.ॐ परञ्ज्योतिषे नमःपरम ज्योति
- 572.ॐ परात्पराय नमःपरात्पर
- 573.ॐ परमेष्ठिने नमःपरमेष्ठी
- 574.ॐ परन्धाम्ने नमःपरम धाम
- 575.ॐ परमेश्वराय नमःपरमेश्वर
- 576.ॐ परमसद्गुरवे नमःपरम सद्गुरु
- 577.ॐ परमाचार्याय नमःपरम आचार्य
- 578.ॐ परधर्मभयाद्भक्तान् स्वे स्वे धर्मे नियोजकाय नमःपराए धर्म के भय से भक्तों को उनके अपने-अपने धर्म में नियुक्त करने वाले
- 579.ॐ परार्थैकान्तसम्भूतये नमःकेवल दूसरों के लिए ही प्रकट होने वाले
- 580.ॐ परमात्मने नमःपरमात्मा
- 581.ॐ परागतये नमःपरम गति
- 582.ॐ पापतापौघसंहारिणे नमःपाप व ताप के समूह का संहार करने वाले
- 583.ॐ पामरव्याजपण्डिताय नमःपामर के बहाने पंडित
- 584.ॐ पापाद्दासं समाकृष्य पुण्यमार्ग प्रवर्तकाय नमःदास को पाप से खींचकर पुण्य-मार्ग पर प्रवृत्त करने वाले
- 585.ॐ पिपीलिकासुखान्नदाय नमःचींटियों तक को सुखपूर्वक अन्न देने वाले
- 586.ॐ पिशाचेश्व व्यवस्थिताय नमःपिशाचों में भी व्यवस्थित
- 587.ॐ पुत्रकामेष्ठि यागादे ऋते सन्तानवर्धनाय नमःपुत्रकामेष्टि यज्ञ आदि के बिना ही संतान की वृद्धि करने वाले
- 588.ॐ पुनरुज्जीवितप्रेताय नमःमृत को पुनः जीवित करने वाले
- 589.ॐ पुनरावृत्तिनाशकाय नमःपुनरावृत्ति का नाश करने वाले
- 590.ॐ पुनः पुनरिहागम्य भक्तेभ्यः सद्गतिप्रदाय नमःबार-बार यहाँ आकर भक्तों को सद्गति देने वाले
- 591.ॐ पुण्डरीकायताक्षाय नमःकमल सदृश विशाल नेत्रों वाले
- 592.ॐ पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमःजिनका श्रवण व कीर्तन पुण्यकारी है
- 593.ॐ पुरन्दरादिभक्ताग्र्यपरित्राणधुरन्धराय नमःपुरंदर आदि श्रेष्ठ भक्तों की रक्षा का भार उठाने वाले
- 594.ॐ पुराणपुरुषाय नमःपुराण-पुरुष
- 595.ॐ पुरीशाय नमःपुरी के ईश
- 596.ॐ पुरुषोत्तमाय नमःपुरुषोत्तम
- 597.ॐ पूजापराङ्मुखाय नमःपूजा से विमुख रहने वाले
- 598.ॐ पूर्णाय नमःपूर्ण
- 599.ॐ पूर्णवैराग्यशोभिताय नमःपूर्ण वैराग्य से शोभित
- 600.ॐ पूर्णानन्दस्वरूपिणे नमःपूर्ण आनंद के स्वरूप
- 601.ॐ पूर्णकृपानिधये नमःपूर्ण कृपा के निधि
- 602.ॐ पूर्णचन्द्रसमाह्लादिने नमःपूर्ण चंद्रमा के समान आह्लाद देने वाले
- 603.ॐ पूर्णकामाय नमःपूर्ण-काम; जिनकी कोई कामना शेष नहीं
- 604.ॐ पूर्वजाय नमःपूर्वज
- 605.ॐ प्रणतपालनोद्युक्ताय नमःनमन करने वालों के पालन में उद्यत
- 606.ॐ प्रणतार्तिहराय नमःनमन करने वालों की पीड़ा हरने वाले
- 607.ॐ प्रत्यक्षदेवतामूर्तये नमःप्रत्यक्ष देवता की मूर्ति
- 608.ॐ प्रत्यगात्मनिदर्शकाय नमःप्रत्यगात्मा का दर्शन कराने वाले
- 609.ॐ प्रपन्नपारिजाताय नमःशरणागतों के लिए पारिजात
- 610.ॐ प्रपन्नानां परागतये नमःशरणागतों की परम गति
- 611.ॐ प्रमाणातीतचिन्मूर्तये नमःप्रमाण से अतीत चिन्मूर्ति
- 612.ॐ प्रमादाभिधमृत्युजिते नमःप्रमाद नामक मृत्यु को जीतने वाले
- 613.ॐ प्रसन्नवदनाय नमःप्रसन्न मुख वाले
- 614.ॐ प्रसादाभिमुखद्युतये नमःप्रसाद की ओर उन्मुख द्युति वाले
- 615.ॐ प्रशस्तवाचे नमःप्रशस्त वाणी वाले
- 616.ॐ प्रशान्तात्मने नमःप्रशांत आत्मा वाले
- 617.ॐ प्रियसत्यमुदाहरते नमःप्रिय तथा सत्य ही कहने वाले
- 618.ॐ प्रेमदाय नमःप्रेम देने वाले
- 619.ॐ प्रेमवश्याय नमःप्रेम से वश में होने वाले
- 620.ॐ प्रेममार्गैकसाधनाय नमःप्रेम-मार्ग ही जिनका एकमात्र साधन है
ब व भ वर्ग — ब्रह्मानन्द, भक्तानुग्रहकातर व भस्मदान (नाम 621–718)
- 621.ॐ बहुरूपनिगूढात्मने नमःबहुरूप में छिपी आत्मा वाले
- 622.ॐ बलदृप्तदमक्षमाय नमःबल के दर्प से भरे हुए का दमन करने में समर्थ
- 623.ॐ बलातिदर्पभय्याजि महागर्वविभञ्जनाय नमःबल के अतिशय दर्प वाले भय्याजी के महागर्व का भंजन करने वाले
- 624.ॐ बुधसन्तोषदाय नमःबुधों को संतोष देने वाले
- 625.ॐ बुद्धाय नमःबुद्ध-स्वरूप
- 626.ॐ बुधजनावनाय नमःबुधजनों की रक्षा करने वाले
- 627.ॐ बृहद्बन्धविमोक्त्रे नमःबड़े से बड़े बंधन से मुक्त करने वाले
- 628.ॐ बृहद्भारवहक्षमाय नमःबड़े से बड़ा भार वहन करने में समर्थ
- 629.ॐ ब्रह्मकुलसमुद्भूताय नमःब्राह्मण कुल में उत्पन्न
- 630.ॐ ब्रह्मचारिव्रतस्थिताय नमःब्रह्मचारी के व्रत में स्थित
- 631.ॐ ब्रह्मानन्दामृतेमग्नाय नमःब्रह्मानंद के अमृत में मग्न
- 632.ॐ ब्रह्मानन्दाय नमःब्रह्मानंद-स्वरूप
- 633.ॐ ब्रह्मानन्दलसद्दृष्टये नमःब्रह्मानंद से देदीप्यमान दृष्टि वाले
- 634.ॐ ब्रह्मवादिने नमःब्रह्मवादी
- 635.ॐ बृहच्छ्रवसे नमःमहान कीर्ति वाले
- 636.ॐ ब्राह्मणस्त्रीविसृष्टोल्कातर्जितश्वाकृतये नमःब्राह्मणी द्वारा फेंकी गई जलती लकड़ी से डाँटे गए कुत्ते के रूप वाले
- 637.ॐ ब्राह्मणानां मशीदिस्थाय नमःब्राह्मणों के लिए मस्जिद में स्थित रहने वाले
- 638.ॐ ब्रह्मण्याय नमःब्रह्मण्य; ब्राह्मणों के हितकारी
- 639.ॐ ब्रह्मवित्तमाय नमःब्रह्म को जानने वालों में श्रेष्ठ
- 640.ॐ भक्तदासगणूप्राणमानवृत्त्यादिरक्षकाय नमःभक्त दास गणु के प्राण, मान व वृत्ति आदि की रक्षा करने वाले
- 641.ॐ भक्तात्यन्तहितैषिणे नमःभक्तों का अत्यंत हित चाहने वाले
- 642.ॐ भक्ताश्रितदयापराय नमःभक्तों व आश्रितों पर दया में परायण
- 643.ॐ भक्तार्थे धृतदेहाय नमःभक्तों के लिए ही देह धारण करने वाले
- 644.ॐ भक्तार्थे दग्धहस्तकाय नमःभक्त के लिए अपना हाथ जला लेने वाले
- 645.ॐ भक्तपरागतये नमःभक्तों की परम गति
- 646.ॐ भक्तवत्सलाय नमःभक्तों पर वात्सल्य रखने वाले
- 647.ॐ भक्तमानसवासिने नमःभक्तों के मन में निवास करने वाले
- 648.ॐ भक्तातिसुलभाय नमःभक्तों के लिए अत्यंत सुलभ
- 649.ॐ भक्तभवाब्धिपोताय नमःभक्तों के लिए भव-सागर की नौका
- 650.ॐ भगवते नमःभगवान
- 651.ॐ भजतां सुहृदे नमःभजन करने वालों के सुहृद्
- 652.ॐ भक्तसर्वस्वहारिणे नमःभक्तों का सर्वस्व हर लेने वाले
- 653.ॐ भक्तानुग्रहकातराय नमःभक्तों पर अनुग्रह करने के लिए व्याकुल
- 654.ॐ भक्तरास्न्यादि सर्वेषां अमोघाभयसम्प्रदाय नमःभक्त रास्ने आदि सबको अमोघ अभय देने वाले
- 655.ॐ भक्तावनसमर्थाय नमःभक्तों की रक्षा में समर्थ
- 656.ॐ भक्तावनधुरन्धराय नमःभक्तों की रक्षा का भार उठाने वाले
- 657.ॐ भक्तभावपराधीनाय नमःभक्तों के भाव के अधीन
- 658.ॐ भक्तात्यन्तहितौषधाय नमःभक्तों के लिए अत्यंत हितकारी औषध
- 659.ॐ भक्तावनप्रतिज्ञाय नमःभक्तों की रक्षा की प्रतिज्ञा करने वाले
- 660.ॐ भजतामिष्टकामधुहे नमःभजन करने वालों की अभीष्ट कामनाओं की कामधेनु
- 661.ॐ भक्तहृत्पद्मवासिने नमःभक्तों के हृदय-कमल में निवास करने वाले
- 662.ॐ भक्तिमार्गप्रदर्शकाय नमःभक्ति-मार्ग दिखाने वाले
- 663.ॐ भक्ताशयविहारिणे नमःभक्तों के आशय में विहार करने वाले
- 664.ॐ भक्तसर्वमलापहाय नमःभक्तों के समस्त मल दूर करने वाले
- 665.ॐ भक्तबोधैकनिष्ठाय नमःभक्तों को बोध कराने में ही एकनिष्ठ
- 666.ॐ भक्तानां सद्गतिप्रदाय नमःभक्तों को सद्गति देने वाले
- 667.ॐ भद्रमार्गप्रदर्शिने नमःकल्याण-मार्ग दिखाने वाले
- 668.ॐ भद्रं भद्रमिति ब्रुवते नमःभला होगा, भला होगा — ऐसा कहने वाले
- 669.ॐ भद्रश्रवसे नमःकल्याणकारी कीर्ति वाले
- 670.ॐ भन्नूमायि साध्वीमहितशासनाय नमःसाध्वी भन्नूमायी का सम्मानपूर्वक शासन करने वाले
- 671.ॐ भयसन्त्रस्त कापर्दे अमोघाभयवरप्रदाय नमःभय से त्रस्त कापर्दे को अमोघ अभय-वर देने वाले
- 672.ॐ भयहीनाय नमःभय-रहित
- 673.ॐ भयत्रात्रे नमःभय से रक्षा करने वाले
- 674.ॐ भयकृते नमःभय उत्पन्न करने वाले
- 675.ॐ भयनाशनाय नमःभय का नाश करने वाले
- 676.ॐ भववारिधिपोताय नमःभव-सागर की नौका
- 677.ॐ भवलुण्ठनकोविदाय नमःभव को लूट लेने में निपुण
- 678.ॐ भस्मदाननिरस्ताधिव्याधिदुःखाऽशुभाऽखिलाय नमःभस्म के दान से आधि, व्याधि, दुःख व समस्त अशुभ दूर करने वाले
- 679.ॐ भस्मसात्कृतभक्तारये नमःभक्तों के शत्रुओं को भस्म कर देने वाले
- 680.ॐ भस्मसात्कृतमन्मथाय नमःकामदेव को भस्म कर देने वाले
- 681.ॐ भस्मपूतमशीदिस्थाय नमःभस्म से पवित्र मस्जिद में स्थित
- 682.ॐ भस्मदग्धाखिलामयाय नमःभस्म से समस्त रोगों को दग्ध कर देने वाले
- 683.ॐ भागोजि कुष्ठरोगघ्नाय नमःभागोजी के कुष्ठ रोग का नाश करने वाले
- 684.ॐ भाषाखिलसुवेदिताय नमःसमस्त भाषाओं को भली प्रकार जानने वाले
- 685.ॐ भाष्यकृते नमःभाष्य करने वाले
- 686.ॐ भावगम्याय नमःभाव से प्राप्य
- 687.ॐ भारसर्वपरिग्रहाय नमःसमस्त का भार स्वयं ग्रहण करने वाले
- 688.ॐ भागवतसहायाय नमःभागवत की सहायता करने वाले
- 689.ॐ भावना शून्यतः सुखिने नमःभावना की शून्यता से ही सुखी
- 690.ॐ भागवतप्रधानाय नमःभागवतों में प्रधान
- 691.ॐ भागवतोत्तमाय नमःभागवतों में उत्तम
- 692.ॐ भाटेद्वेषं समाकृष्य भक्तिं तस्मै प्रदत्तवते नमःभाटे के द्वेष को खींचकर उन्हें भक्ति दे देने वाले
- 693.ॐ भिल्लरूपेण दत्ताम्भसे नमःभील का रूप धारण कर जल देने वाले
- 694.ॐ भिक्षान्नदानशेषभुजे नमःभिक्षा से मिले अन्न के दान से बचा हुआ ही खाने वाले
- 695.ॐ भिक्षाधर्ममहाराजाय नमःभिक्षा-धर्म के महाराज
- 696.ॐ भिक्षौघदत्तभोजनाय नमःभिक्षा के समूह से भोजन देने वाले
- 697.ॐ भीमाजी क्षयपापघ्ने नमःभीमाजी के क्षय-रोग रूपी पाप का नाश करने वाले
- 698.ॐ भीमबलान्विताय नमःभीम बल से युक्त
- 699.ॐ भीतानां भीतिनाशिने नमःभयभीतों का भय नष्ट करने वाले
- 700.ॐ भीषणभीषणाय नमःभयंकरों के लिए भी भयंकर
- 701.ॐ भीषाचालितसुर्याग्निमघवन्मृत्युमारुताय नमःजिनके भय से सूर्य, अग्नि, इंद्र, मृत्यु व वायु संचालित होते हैं
- 702.ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदात्रे नमःभुक्ति तथा मुक्ति देने वाले
- 703.ॐ भुजगाद्रक्षितप्रजाय नमःसर्प से प्रजा की रक्षा करने वाले
- 704.ॐ भुजङ्गरूपमाविश्य सहस्रजनपूजिताय नमःसर्प का रूप धारण कर सहस्र जनों द्वारा पूजित होने वाले
- 705.ॐ भुक्त्वा भोजनदातॄणां दग्धप्रागुत्तराऽशुभाय नमःभोजन कराने वालों के पूर्व व उत्तर के अशुभ को भोजन करके दग्ध कर देने वाले
- 706.ॐ भूटिद्वारा गृहं बद्ध्वा कृतसर्वमतालयाय नमःबूटी के द्वारा गृह बनवाकर उसे सब मतों का आलय कर देने वाले
- 707.ॐ भूभृत्समोपकारिणे नमःपर्वत के समान उपकार करने वाले
- 708.ॐ भूम्ने नमःभूमा; विशालता-स्वरूप
- 709.ॐ भूशयाय नमःभूमि पर शयन करने वाले
- 710.ॐ भूतशरण्यभूताय नमःप्राणियों के शरण-भूत
- 711.ॐ भूतात्मने नमःभूतों की आत्मा
- 712.ॐ भूतभावनाय नमःभूतों की भावना करने वाले
- 713.ॐ भूतप्रेतपिशाचादीन् धर्ममार्गे नियोजयते नमःभूत, प्रेत व पिशाच आदि को भी धर्म-मार्ग में नियुक्त करने वाले
- 714.ॐ भृत्यस्यभृत्यसेवाकृते नमःसेवक के सेवक की भी सेवा करने वाले
- 715.ॐ भृत्यभारवहाय नमःसेवकों का भार वहन करने वाले
- 716.ॐ भेकं दत्त वरं स्मृत्वा सर्पस्यादपि रक्षकाय नमःमेंढक को दिए गए वर का स्मरण कर उसे सर्प से भी बचाने वाले
- 717.ॐ भोगैश्वर्येष्वसक्तात्मने नमःभोग व ऐश्वर्य में आसक्ति-रहित आत्मा वाले
- 718.ॐ भैषज्येभिषजां वराय नमःऔषध देने वाले वैद्यों में श्रेष्ठ
म-वर्ग — महायोगेश्वर, मायामानुषरूप व मूर्तिपूजानुशास्ता (नाम 719–810)
- 719.ॐ मर्करूपेण भक्तस्य रक्षणे तेन ताडिताय नमःबंदर का रूप धारण कर भक्त की रक्षा करते हुए उसी से ताड़ित होने वाले
- 720.ॐ मन्त्रघोषमशीदिस्थाय नमःमंत्र-घोष से गूँजती मस्जिद में स्थित
- 721.ॐ मदाभिमानवर्जिताय नमःमद तथा अभिमान से रहित
- 722.ॐ मधुपानभृशासक्तिं दिव्यशक्त्य व्यपोहकाय नमःमद्यपान की तीव्र आसक्ति को दिव्य शक्ति से दूर कर देने वाले
- 723.ॐ मशीध्यां तुलसीपूजां अग्निहोत्रं च शासकाय नमःमस्जिद में तुलसी-पूजा तथा अग्निहोत्र का शासन करने वाले
- 724.ॐ महावाक्यसुधामग्नाय नमःमहावाक्य रूपी अमृत में मग्न
- 725.ॐ महाभागवताय नमःमहाभागवत
- 726.ॐ महानुभावतेजस्विने नमःमहानुभाव तथा तेजस्वी
- 727.ॐ महायोगेश्वराय नमःमहायोगेश्वर
- 728.ॐ महाभयपरित्रात्रे नमःमहान भय से रक्षा करने वाले
- 729.ॐ महात्मने नमःमहात्मा
- 730.ॐ महाबलाय नमःमहाबली
- 731.ॐ माधवरायदेश्पाण्डे सख्युः साहाय्यकृते नमःमाधवराव देशपांडे नामक सखा की सहायता करने वाले
- 732.ॐ मानापमानयोस्तुल्याय नमःमान तथा अपमान में समान
- 733.ॐ मार्गबन्धवे नमःमार्ग में बंधु
- 734.ॐ मारुतये नमःमारुति-स्वरूप
- 735.ॐ मायामानुष रूपेण गूढैश्वर्यपरात्पराय नमःमाया से धारण किए मानुष रूप में ऐश्वर्य छिपाए हुए परात्पर
- 736.ॐ मार्गस्थदेवसत्कारः कार्य इत्यनुशासित्रे नमःमार्ग में मिले देव का सत्कार करना चाहिए — ऐसा अनुशासन करने वाले
- 737.ॐ मारीग्रस्थ बूटीत्रात्रे नमःमहामारी से ग्रस्त बूटी की रक्षा करने वाले
- 738.ॐ मार्जालोच्छिष्ठभोजनाय नमःबिल्ली का जूठा भी भोजन कर लेने वाले
- 739.ॐ मिरीकरं सर्पगण्डात् दैवाज्ञाप्ताद्विमोचयते नमःदैव द्वारा प्राप्त सर्प-दंश से मिरीकर को मुक्त कराने वाले
- 740.ॐ मितवाचे नमःमित भाषण करने वाले
- 741.ॐ मितभुजे नमःमित भोजन करने वाले
- 742.ॐ मित्रेशत्रौसदासमाय नमःमित्र व शत्रु में सदा समान
- 743.ॐ मीनातायी प्रसूत्यर्थं प्रेषिताय रथं ददते नमःमीनातायी के प्रसव के लिए रथ भेजकर दे देने वाले
- 744.ॐ मुक्तसङ्ग आनंवादिने नमःआसक्ति से मुक्त होकर आनंद कहने वाले
- 745.ॐ मुक्तसंसृतिबन्धनाय नमःसंसार-बंधन से मुक्त
- 746.ॐ मुहुर्देवावतारादि नामोच्चारण निवृताय नमःबार-बार देव-अवतार आदि के नाम-उच्चारण से तृप्त होने वाले
- 747.ॐ मूर्तिपूजानुशास्त्रे नमःमूर्ति-पूजा का अनुशासन करने वाले
- 748.ॐ मूर्तिमानप्यमूर्तिमते नमःमूर्तिमान होकर भी अमूर्त
- 749.ॐ मूलेशास्त्री गुरोर्घोलप महाराजस्य रूपधृते नमःमूले शास्त्री के लिए गुरु घोलप महाराज का रूप धारण करने वाले
- 750.ॐ मृतसूनुं समाकृष्य पूर्वमातरि योजयते नमःमृत पुत्र को खींचकर पुनः उसकी माता से मिला देने वाले
- 751.ॐ मृदालयनिवासिने नमःमिट्टी के आलय में निवास करने वाले
- 752.ॐ मृत्युभीतिव्यपोहकाय नमःमृत्यु के भय को दूर कर देने वाले
- 753.ॐ मेघश्यामायपूजार्थं शिवलिङ्गमुपाहरते नमःमेघश्याम की पूजा के लिए शिवलिंग ला देने वाले
- 754.ॐ मोहकलिलतीर्णाय नमःमोह के दलदल से पार उतर चुके
- 755.ॐ मोहसंशयनाशकाय नमःमोह तथा संशय का नाश करने वाले
- 756.ॐ मोहिनीराजपूजायां कुल्कर्ण्यप्पा नियोजकाय नमःमोहिनीराज की पूजा में कुलकर्णी अप्पा को नियुक्त करने वाले
- 757.ॐ मोक्षमार्गसहायाय नमःमोक्ष-मार्ग में सहायक
- 758.ॐ मौनव्याख्याप्रबोधकाय नमःमौन की व्याख्या से ही बोध कराने वाले
- 759.ॐ यज्ञदानतपोनिष्ठाय नमःयज्ञ, दान व तप में निष्ठ
- 760.ॐ यज्ञशिष्ठान्नभोजनाय नमःयज्ञ से बचे हुए अन्न का भोजन करने वाले
- 761.ॐ यतीन्द्रियमनोबुद्धये नमःइंद्रियों, मन व बुद्धि को संयत कर चुके
- 762.ॐ यतिधर्मसुपालकाय नमःयति-धर्म का भली प्रकार पालन करने वाले
- 763.ॐ यतो वाचो निवर्तन्ते तदानन्द सुनिष्ठिताय नमःजहाँ से वाणी लौट आती है, उस आनंद में भली प्रकार निष्ठित
- 764.ॐ यत्नातिशयसेवाप्त गुरुपूर्णकृपाबलाय नमःअत्यधिक यत्नपूर्वक की गई सेवा से प्राप्त गुरु की पूर्ण कृपा के बल वाले
- 765.ॐ यथेच्छसूक्ष्मसञ्चारिणे नमःइच्छानुसार सूक्ष्म रूप में संचरण करने वाले
- 766.ॐ यथेष्टदानधर्मकृते नमःइच्छानुसार दान-धर्म करने वाले
- 767.ॐ यन्त्रारूढं जगत्सर्वं मायया भ्रामयत्प्रभवे नमःयंत्र पर चढ़े समस्त जगत को माया से घुमाने वाले प्रभु
- 768.ॐ यमकिङ्करसन्त्रस्त सामन्तस्य सहायकृते नमःयम-किंकरों से त्रस्त सामंत की सहायता करने वाले
- 769.ॐ यमदूतपरिक्लिष्टपुरन्दरसुरक्षकाय नमःयमदूतों से परिक्लिष्ट पुरंदर की भली प्रकार रक्षा करने वाले
- 770.ॐ यमभीतिविनाशिने नमःयम के भय का विनाश करने वाले
- 771.ॐ यवनालयभूषणाय नमःयवन-आलय अर्थात मस्जिद के भूषण
- 772.ॐ यशसापिमहाराजाय नमःयश से भी महाराज
- 773.ॐ यशःपूरितभारताय नमःजिनके यश से भारत भर गया
- 774.ॐ यक्षरक्षःपिशाचानां सान्निध्यादेवनाशकाय नमःयक्ष, राक्षस व पिशाचों का अपने सान्निध्य मात्र से नाश करने वाले
- 775.ॐ युक्तभोजननिद्राय नमःयुक्त भोजन व निद्रा वाले
- 776.ॐ युगान्तरचरित्रविदे नमःयुगांतरों के चरित्र को जानने वाले
- 777.ॐ योगशक्तिजितस्वप्नाय नमःयोग-शक्ति से स्वप्न को जीत चुके
- 778.ॐ योगमायासमावृताय नमःयोगमाया से समावृत
- 779.ॐ योगवीक्षणसन्दत्तपरमानन्दमूर्तिमते नमःयोग-दृष्टि से परमानंद की मूर्ति प्रदान करने वाले
- 780.ॐ योगिभिर्ध्यानगम्याय नमःयोगियों द्वारा ध्यान से प्राप्य
- 781.ॐ योगक्षेमवहाय नमःयोग-क्षेम का वहन करने वाले
- 782.ॐ रथस्य रजताश्वेषु हृतेष्वम्लान मानसाय नमःरथ के चाँदी जड़े अश्व चुरा लिए जाने पर भी अम्लान मन वाले
- 783.ॐ रसाय नमःरस-स्वरूप
- 784.ॐ रससारज्ञाय नमःरस के सार को जानने वाले
- 785.ॐ रसनारसजिते नमःरसना के रस को जीत चुके
- 786.ॐ रसोप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तित महायशसे नमःइसका रस भी पर को देखकर लौट जाता है — ऐसे महान यश वाले
- 787.ॐ रक्षणात्पोषणात् सर्वपितृमातृगुरुप्रभवे नमःरक्षा व पोषण के कारण सबके पिता, माता तथा गुरु-रूप प्रभु
- 788.ॐ रागद्वेषवियुक्तात्मने नमःराग व द्वेष से रहित आत्मा वाले
- 789.ॐ राकाचन्द्रसमाननाय नमःपूर्णिमा के चंद्र के समान मुख वाले
- 790.ॐ राजीवलोचनाय नमःकमल सदृश नेत्रों वाले
- 791.ॐ राजभिश्चाभिवन्दिताय नमःराजाओं द्वारा भी वंदित
- 792.ॐ रामभक्तिप्रपूर्णाय नमःराम-भक्ति से परिपूर्ण
- 793.ॐ रामरूपप्रदर्शकाय नमःराम का रूप दिखाने वाले
- 794.ॐ रामसारूप्यलब्धाय नमःराम के सारूप्य को प्राप्त
- 795.ॐ रामसायीति विश्रुताय नमः"रामसाईं" के नाम से विश्रुत
- 796.ॐ रामदूतमयाय नमःराम-दूत हनुमान-स्वरूप
- 797.ॐ राममन्त्रोपदेशकाय नमःराम-मंत्र का उपदेश करने वाले
- 798.ॐ राममूर्त्यादिशङ्कर्त्रे नमःराम की मूर्ति आदि की स्थापना करने वाले
- 799.ॐ रासनेकुलवर्धनाय नमःरास्ने के कुल की वृद्धि करने वाले
- 800.ॐ रुद्रतुल्यप्रकोपाय नमःरुद्र के तुल्य प्रकोप वाले
- 801.ॐ रुद्रकोपदमक्षमाय नमःरुद्र के कोप का भी दमन करने में समर्थ
- 802.ॐ रुद्रविष्णुकृताभेदाय नमःरुद्र तथा विष्णु में अभेद करने वाले
- 803.ॐ रूपिणीरूप्यमोहजिते नमःरूपिणी तथा चाँदी के मोह को जीत चुके
- 804.ॐ रूपेरूपे चिदात्मानं पश्यध्वमिति बोधकाय नमःप्रत्येक रूप में चैतन्य आत्मा को देखो — ऐसा बोध कराने वाले
- 805.ॐ रूपाद्रूपान्तरं यातोऽमृत इत्यभयप्रदाय नमःएक रूप से दूसरे रूप में जाने वाला अमृत है — ऐसा कहकर अभय देने वाले
- 806.ॐ रेगे शिशोः तथान्धस्य सतां गति विधायकाय नमःरेगे के शिशु तथा एक अंधे को सज्जनों की गति देने वाले
- 807.ॐ रोगदारिद्र्यदुःखादीन् भस्मदानेन वारयते नमःरोग, दरिद्रता व दुःख आदि को भस्म के दान से दूर कर देने वाले
- 808.ॐ रोदनातार्द्रचित्ताय नमःरोदन से आर्द्र चित्त वाले
- 809.ॐ रोमहर्षादवाकृतये नमःरोमांच तक से रहित आकृति वाले
- 810.ॐ लघ्वाशिने नमःअल्प भोजन करने वाले
य, र, ल व व वर्ग — योगक्षेमवह, रामसाईं व वैराग्यपूर्णचरित (नाम 811–878)
- 811.ॐ लघुनिद्राय नमःअल्प निद्रा वाले
- 812.ॐ लब्धाश्वग्रामणिस्तुताय नमःखोया हुआ घोड़ा पा लेने वाले ग्राम-मुखिया द्वारा स्तुत
- 813.ॐ लगुडोद्धृतरोहिल्लास्तम्भनाद्दर्पनाशकाय नमःलाठी उठाकर रोहिल्ला को स्तंभित कर उसका दर्प नष्ट करने वाले
- 814.ॐ ललिताद्भुतचारित्राय नमःललित तथा अद्भुत चरित्र वाले
- 815.ॐ लक्ष्मीनारायणाय नमःलक्ष्मीनारायण-स्वरूप
- 816.ॐ लीलामानुषदेहस्थाय नमःलीला से धारण किए मानुष देह में स्थित
- 817.ॐ लीलामानुषकर्मकृते नमःलीला से मानुष कर्म करने वाले
- 818.ॐ लेलेशास्त्रि श्रुतिप्रीत्या मशीदि वेदघोषणाय नमःलेले शास्त्री की श्रुति-प्रीति के लिए मस्जिद में वेद-घोष कराने वाले
- 819.ॐ लोकाभिरामाय नमःलोकों के लिए अभिराम
- 820.ॐ लोकेशाय नमःलोकों के ईश
- 821.ॐ लोलुपत्वविवर्जिताय नमःलोलुपता से रहित
- 822.ॐ लोकेषु विहरंश्चापि सच्चिदानन्दसंस्थिताय नमःलोकों में विहार करते हुए भी सच्चिदानंद में स्थित
- 823.ॐ लोणिवार्ण्यगणूदासं महापायाद्विमोचकाय नमःलोणिवारी में गणुदास को महान संकट से मुक्त कराने वाले
- 824.ॐ वस्त्रवद्वपुरुद्वीक्ष्य स्वेच्छत्यक्तकलेबराय नमःशरीर को वस्त्र के समान देखकर स्वेच्छा से देह त्याग देने वाले
- 825.ॐ वस्त्रवद्देहमुत्सृज्य पुनर्देहं प्रविष्टवते नमःवस्त्र के समान देह त्यागकर पुनः देह में प्रविष्ट होने वाले
- 826.ॐ वन्ध्यादोषविमुक्त्यर्थं तद्वस्त्रे नारिकेलदाय नमःवंध्या-दोष से मुक्ति के लिए उसके वस्त्र में नारियल देने वाले
- 827.ॐ वासुदेवैकसन्तुष्टये नमःवासुदेव से ही संतुष्ट रहने वाले
- 828.ॐ वादद्वेषमदायाऽप्रियाय नमःवाद, द्वेष तथा मद से अप्रीति रखने वाले
- 829.ॐ विद्याविनयसम्पन्नाय नमःविद्या तथा विनय से सम्पन्न
- 830.ॐ विधेयात्मने नमःविधेय आत्मा वाले
- 831.ॐ वीर्यवते नमःवीर्यवान
- 832.ॐ विविक्तदेशसेविने नमःएकांत स्थान का सेवन करने वाले
- 833.ॐ विश्वभावनभाविताय नमःविश्व की भावना से भावित
- 834.ॐ विश्वमङ्गलमाङ्गल्याय नमःविश्व के मंगलों में भी मंगल
- 835.ॐ विषयात् संहृतेन्द्रियाय नमःइंद्रियों को विषयों से समेट चुके
- 836.ॐ वीतरागभयक्रोधाय नमःराग, भय तथा क्रोध से रहित
- 837.ॐ वृद्धान्धेक्षणसम्प्रदाय नमःवृद्ध अंधे को दृष्टि दे देने वाले
- 838.ॐ वेदान्ताम्बुजसूर्याय नमःवेदांत-रूपी कमल के सूर्य
- 839.ॐ वेदिस्थाग्निविवर्धनाय नमःवेदी पर स्थित अग्नि की वृद्धि करने वाले
- 840.ॐ वैराग्यपूर्णचारित्राय नमःवैराग्य से परिपूर्ण चरित्र वाले
- 841.ॐ वैकुण्ठप्रियकर्मकृते नमःवैकुंठ को प्रिय कर्म करने वाले
- 842.ॐ वैहायसगतये नमःआकाश-मार्ग से गति करने वाले
- 843.ॐ व्यामोहप्रशमौषधाय नमःव्यामोह का प्रशमन करने वाली औषध
- 844.ॐ शत्रुच्छेदैकमन्त्राय नमःशत्रु-नाश का एकमात्र मंत्र
- 845.ॐ शरणागतवत्सलाय नमःशरणागतों पर वात्सल्य रखने वाले
- 846.ॐ शरणागतभीमाजीश्वान्धभेकादिरक्षकाय नमःशरणागत भीमाजी, कुत्ते, अंधे व मेंढक आदि की रक्षा करने वाले
- 847.ॐ शरीरस्थाशरीरस्थाय नमःशरीर में स्थित होकर भी शरीर से परे स्थित
- 848.ॐ शरीरानेकसम्भृताय नमःअनेक शरीर धारण करने वाले
- 849.ॐ शश्वत्परार्थसर्वेहाय नमःसदा दूसरों के लिए ही समस्त चेष्टा करने वाले
- 850.ॐ शरीरकर्मकेवलाय नमःकेवल शरीर-निर्वाह के लिए ही कर्म करने वाले
- 851.ॐ शाश्वतधर्मगोप्त्रे नमःशाश्वत धर्म की रक्षा करने वाले
- 852.ॐ शान्तिदान्तिविभूषिताय नमःशांति तथा दांति से विभूषित
- 853.ॐ शिरस्तम्भितगङ्गाम्भसे नमःमस्तक पर गंगा-जल को स्तंभित करने वाले
- 854.ॐ शान्ताकाराय नमःशांत आकार वाले
- 855.ॐ शिष्टधर्ममनुप्राप्य मौलाना पादसेविताय नमःशिष्ट-धर्म को प्राप्त कर मौलाना के चरणों की सेवा करने वाले
- 856.ॐ शिवदाय नमःकल्याण देने वाले
- 857.ॐ शिवरूपाय नमःशिव-स्वरूप
- 858.ॐ शिवशक्तियुताय नमःशिव तथा शक्ति से युक्त
- 859.ॐ शिरीयानसुतोद्वाहं यथोक्तं परिपूरयते नमःशिरीयान के पुत्र का विवाह जैसा कहा था वैसा ही पूर्ण करने वाले
- 860.ॐ शीतोष्णसुखदुःखेषु समाय नमःशीत-उष्ण तथा सुख-दुःख में समान
- 861.ॐ शीतलवाक्सुधाय नमःशीतल वाणी रूपी अमृत वाले
- 862.ॐ शिर्डिन्यस्तगुरोर्देहाय नमःशिरडी में जिन्होंने गुरु का देह रखा
- 863.ॐ शिर्डित्यक्तकलेबराय नमःशिरडी में ही जिन्होंने अपना शरीर त्यागा
- 864.ॐ शुक्लाम्बरधराय नमःश्वेत वस्त्र धारण करने वाले
- 865.ॐ शुद्धसत्त्वगुणस्थिताय नमःशुद्ध सत्त्वगुण में स्थित
- 866.ॐ शुद्धज्ञानस्वरूपाय नमःशुद्ध ज्ञान-स्वरूप
- 867.ॐ शुभाशुभविवर्जिताय नमःशुभ तथा अशुभ — दोनों से रहित
- 868.ॐ शुभ्रमार्गेण नेता नॄन् तद्विष्णोः परमं पदाय नमःमनुष्यों को शुभ्र मार्ग से विष्णु के परम पद तक ले जाने वाले
- 869.ॐ शेलुगुरुकुलेवासिने नमःशेलु के गुरुकुल में निवास करने वाले
- 870.ॐ शेषशायिने नमःशेष-शय्या पर शयन करने वाले
- 871.ॐ श्रीकण्ठाय नमःश्रीकंठ
- 872.ॐ श्रीकराय नमःश्री करने वाले
- 873.ॐ श्रीमते नमःश्रीमान
- 874.ॐ श्रेष्ठाय नमःश्रेष्ठ
- 875.ॐ श्रेयोविधायकाय नमःकल्याण का विधान करने वाले
- 876.ॐ श्रुतिस्मृतिशिरोरत्नविभूषितपदाम्बुजाय नमःश्रुति व स्मृति रूपी शिरोरत्नों से विभूषित चरण-कमलों वाले
- 877.ॐ श्रेयान् स्वधर्म इत्युक्त्वा स्वेस्वेधर्मनियोजकाय नमःअपना धर्म ही श्रेयस्कर है — यह कहकर सबको अपने-अपने धर्म में नियुक्त करने वाले
- 878.ॐ सखारामसशिष्याय नमःसखाराम को शिष्य बनाने वाले
श व स वर्ग — सर्वधर्मसमत्राता, सर्वमतसुसम्मत व सद्गुरु (नाम 879–960)
- 879.ॐ सकलाश्रयकामदुहे नमःसमस्त आश्रितों की कामधेनु
- 880.ॐ सगुणोनिर्गुणाय नमःसगुण होकर भी निर्गुण
- 881.ॐ सच्चिदानन्दमूर्तिमते नमःसच्चिदानंद की मूर्ति वाले
- 882.ॐ सज्जनमानसव्योमराजमानसुधाकराय नमःसज्जनों के मानस-आकाश में सुशोभित चंद्रमा
- 883.ॐ सत्कर्मनिरताय नमःसत्कर्म में निरत
- 884.ॐ सत्सन्तानवरप्रदाय नमःउत्तम संतान का वर देने वाले
- 885.ॐ सत्यव्रताय नमःसत्य के व्रत वाले
- 886.ॐ सत्याय नमःसत्य-स्वरूप
- 887.ॐ सत्सुलभोऽन्यदुर्लभाय नमःसज्जनों के लिए सुलभ, अन्यों के लिए दुर्लभ
- 888.ॐ सत्यवाचे नमःसत्य वाणी वाले
- 889.ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमःसत्य संकल्प वाले
- 890.ॐ सत्यधर्मपरायणाय नमःसत्य तथा धर्म में परायण
- 891.ॐ सत्यपराक्रमाय नमःसत्य पराक्रम वाले
- 892.ॐ सत्यद्रष्ट्रे नमःसत्य को देखने वाले
- 893.ॐ सनातनाय नमःसनातन
- 894.ॐ सत्यनारायणाय नमःसत्यनारायण-स्वरूप
- 895.ॐ सत्यतत्त्वप्रबोधकाय नमःसत्य-तत्त्व का बोध कराने वाले
- 896.ॐ सत्पुरुषाय नमःसत्पुरुष
- 897.ॐ सदाचाराय नमःसदाचार-स्वरूप
- 898.ॐ सदापरहितेरताय नमःसदा दूसरों के हित में रत
- 899.ॐ सदाक्षिप्तनिजानन्दाय नमःसदा अपने ही आनंद में डूबे रहने वाले
- 900.ॐ सदानन्दाय नमःसदा आनंद-स्वरूप
- 901.ॐ सद्गुरवे नमःसद्गुरु
- 902.ॐ सदाजनहितोद्युक्ताय नमःसदा जन-हित में उद्यत
- 903.ॐ सदात्मने नमःसदा आत्मा में स्थित
- 904.ॐ सदाशिवाय नमःसदाशिव
- 905.ॐ सदार्द्रचित्ताय नमःसदा आर्द्र चित्त वाले
- 906.ॐ सद्रूपिणे नमःसत्-रूप
- 907.ॐ सदाश्रयाय नमःसदा आश्रय देने वाले
- 908.ॐ सदाजिताय नमःसदा अजित
- 909.ॐ सन्यासयोगयुक्तात्मने नमःसंन्यास-योग से युक्त आत्मा वाले
- 910.ॐ सन्मार्गस्थापनव्रताय नमःसन्मार्ग की स्थापना के व्रत वाले
- 911.ॐ सबीजं फलमादाय निर्बीजं परिणामकाय नमःसबीज फल लेकर उसे निर्बीज कर देने वाले
- 912.ॐ समदुःखसुखस्वस्थाय नमःसुख-दुःख में समान रहकर स्वस्थ
- 913.ॐ समलोष्टाश्मकाञ्चनाय नमःमिट्टी के ढेले, पत्थर व स्वर्ण को समान मानने वाले
- 914.ॐ समर्थसद्गुरुश्रेष्ठाय नमःसमर्थ सद्गुरुओं में श्रेष्ठ
- 915.ॐ समानरहिताय नमःजिनके समान कोई नहीं
- 916.ॐ समाश्रितजनत्राणव्रतपालनतत्पराय नमःशरणागत जनों की रक्षा के व्रत-पालन में तत्पर
- 917.ॐ समुद्रसमगाम्भीर्याय नमःसमुद्र के समान गंभीरता वाले
- 918.ॐ सङ्कल्परहिताय नमःसंकल्प से रहित
- 919.ॐ संसारतापहार्यङ्घ्रये नमःजिनके चरण संसार का ताप हर लेते हैं
- 920.ॐ संसारवर्जिताय नमःसंसार से रहित
- 921.ॐ संसारोत्तारनाम्ने नमःजिनका नाम संसार से पार उतारने वाला है
- 922.ॐ सरोजदलकोमलाय नमःकमल-दल के समान कोमल
- 923.ॐ सर्पादिभयहारिणे नमःसर्प आदि के भय को हरने वाले
- 924.ॐ सर्परूपेप्यवस्थिताय नमःसर्प के रूप में भी स्थित रहने वाले
- 925.ॐ सर्वकर्मफलत्यागिने नमःसमस्त कर्म-फलों का त्याग करने वाले
- 926.ॐ सर्वत्रसमवस्थिताय नमःसर्वत्र समान रूप से स्थित
- 927.ॐ सर्वतःपाणिपादाय नमःसब ओर हाथ व पैर वाले
- 928.ॐ सर्वतोऽक्षिशिरोमुखाय नमःसब ओर नेत्र, शिर व मुख वाले
- 929.ॐ सर्वतःश्रुतिमन्मूर्तये नमःसब ओर श्रवण वाली मूर्ति
- 930.ॐ सर्वमावृत्यसंस्थिताय नमःसब कुछ आवृत करके स्थित
- 931.ॐ सर्वधर्मसमत्रात्रे नमःसमस्त धर्मों की समान रूप से रक्षा करने वाले
- 932.ॐ सर्वधर्मसुपूजिताय नमःसमस्त धर्मों द्वारा भली प्रकार पूजित
- 933.ॐ सर्वधर्मान् परित्यज्य गुर्वीशं शरणं गताय नमःसमस्त धर्मों को त्यागकर गुरु-ईश की शरण में गए हुए
- 934.ॐ सर्वधीसाक्षिभूताय नमःसमस्त बुद्धियों के साक्षी-भूत
- 935.ॐ सर्वनामाभिसूचिताय नमःसमस्त नामों से सूचित
- 936.ॐ सर्वभूतान्तरात्मने नमःसमस्त भूतों की अंतरात्मा
- 937.ॐ सर्वभूताशयस्थिताय नमःसमस्त भूतों के आशय में स्थित
- 938.ॐ सर्वभूतादिवासाय नमःसमस्त भूतों के आदि-निवास
- 939.ॐ सर्वभूतहितेरताय नमःसमस्त भूतों के हित में रत
- 940.ॐ सर्वभूतात्मभूतात्मने नमःसमस्त भूतों की आत्मा ही जिनकी आत्मा है
- 941.ॐ सर्वभूतसुहृदे नमःसमस्त भूतों के सुहृद्
- 942.ॐ सर्वभूतनिशोन्निद्राय नमःजब समस्त भूतों की रात्रि होती है तब भी जागते रहने वाले
- 943.ॐ सर्वभूतसमादृताय नमःसमस्त भूतों द्वारा समादृत
- 944.ॐ सर्वज्ञाय नमःसर्वज्ञ
- 945.ॐ सर्वविदे नमःसब कुछ जानने वाले
- 946.ॐ सर्वस्मै नमःसर्व-स्वरूप
- 947.ॐ सर्वमतसुसम्मताय नमःसमस्त मतों में भली प्रकार सम्मत
- 948.ॐ सर्वब्रह्ममयं द्रष्ट्रे नमःसब कुछ ब्रह्ममय ही देखने वाले
- 949.ॐ सर्वशक्त्युपबृंहिताय नमःसमस्त शक्तियों से पुष्ट
- 950.ॐ सर्वसङ्कल्पसन्यासिने नमःसमस्त संकल्पों का संन्यास कर चुके
- 951.ॐ सर्वसङ्गविवर्जिताय नमःसमस्त संग से रहित
- 952.ॐ सर्वलोकशरण्याय नमःसमस्त लोकों के शरण्य
- 953.ॐ सर्वलोकमहेश्वराय नमःसमस्त लोकों के महेश्वर
- 954.ॐ सर्वेशाय नमःसर्वेश
- 955.ॐ सर्वरूपिणे नमःसर्व-रूप
- 956.ॐ सर्वशत्रुनिबर्हणाय नमःसमस्त शत्रुओं का नाश करने वाले
- 957.ॐ सर्वैश्वर्यैकमन्त्राय नमःसमस्त ऐश्वर्य का एकमात्र मंत्र
- 958.ॐ सर्वेप्सितफलप्रदाय नमःसमस्त ईप्सित फल देने वाले
- 959.ॐ सर्वोपकारकारिणे नमःसबका उपकार करने वाले
- 960.ॐ सर्वोपास्यपदाम्बुजाय नमःजिनके चरण-कमल सबके उपास्य हैं
सहस्रशीर्ष से क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिक — समापन (नाम 961–1000)
- 961.ॐ सहस्रशिर्षमूर्तये नमःसहस्र मस्तकों वाली मूर्ति
- 962.ॐ सहस्राक्षाय नमःसहस्र नेत्रों वाले
- 963.ॐ सहस्रपदे नमःसहस्र चरणों वाले
- 964.ॐ सहस्रनामसुश्लाघिने नमःसहस्रनाम से भली प्रकार श्लाघित
- 965.ॐ सहस्रनामलक्षिताय नमःसहस्रनाम से लक्षित
- 966.ॐ साकारोपि निराकाराय नमःसाकार होकर भी निराकार
- 967.ॐ साकारार्चासुमानिताय नमःसाकार अर्चा में भी भली प्रकार मान्य
- 968.ॐ साधुजनपरित्रात्रे नमःसाधु जनों की रक्षा करने वाले
- 969.ॐ साधुपोषकस्तथैवाय नमःसाधुओं का पोषण करने वाले
- 970.ॐ सायीति सज्जानैः प्रोक्तः सायीदेवाय नमःसज्जनों द्वारा "साईं" कहे गए — साईं-देव
- 971.ॐ सायीरामाय नमःसाईंराम
- 972.ॐ सायिनाथाय नमःसायिनाथ
- 973.ॐ सायीशाय नमःसाईं-ईश
- 974.ॐ सायिसत्तमाय नमःसाईं-सत्तम; साईं जनों में श्रेष्ठ
- 975.ॐ सालोक्यसार्ष्टिसामीप्यसायुज्यपददायकाय नमःसालोक्य, सार्ष्टि, सामीप्य तथा सायुज्य — चारों पद देने वाले
- 976.ॐ साक्षात्कृतहरिप्रीत्या सर्वशक्तियुताय नमःसाक्षात्कृत हरि की प्रीति से समस्त शक्तियों से युक्त
- 977.ॐ साक्षात्कारप्रदात्रे नमःसाक्षात्कार देने वाले
- 978.ॐ साक्षान्मन्मथमर्दनाय नमःसाक्षात् मन्मथ का मर्दन करने वाले
- 979.ॐ सिद्धेशाय नमःसिद्धों के ईश
- 980.ॐ सिद्धसङ्कल्पाय नमःसिद्ध संकल्प वाले
- 981.ॐ सिद्धिदाय नमःसिद्धि देने वाले
- 982.ॐ सिद्धवाङ्मुखाय नमःसिद्ध वाणी वाले मुख से युक्त
- 983.ॐ सुकृतदुष्कृतातीताय नमःसुकृत तथा दुष्कृत — दोनों से अतीत
- 984.ॐ सुखेषुविगतस्पृहाय नमःसुखों में स्पृहा-रहित
- 985.ॐ सुखदुःखसमाय नमःसुख व दुःख में समान
- 986.ॐ सुधास्यन्दिमुखोज्वलाय नमःअमृत बहाते हुए उज्ज्वल मुख वाले
- 987.ॐ स्वेच्छामात्रजडद्देहाय नमःकेवल अपनी इच्छा से ही देह धारण करने वाले
- 988.ॐ स्वेच्छोपात्ततनवे नमःअपनी इच्छा से ग्रहण किए शरीर वाले
- 989.ॐ स्वीकृतभक्तरोगाय नमःभक्तों के रोग स्वयं स्वीकार कर लेने वाले
- 990.ॐ स्वेमहिम्निप्रतिष्ठिताय नमःअपनी ही महिमा में प्रतिष्ठित
- 991.ॐ हरिसाठे तथा नानां कामादेः परिरक्षकाय नमःहरि साठे तथा नाना को काम आदि से भली प्रकार बचाने वाले
- 992.ॐ हर्षामर्षभयोद्वेगैर्निर्मुक्तविमलाशयाय नमःहर्ष, अमर्ष, भय व उद्वेग से मुक्त निर्मल आशय वाले
- 993.ॐ हिन्दुमुस्लिंसमूहानां मैत्रीकरणतत्पराय नमःहिंदू तथा मुसलमान समूहों के बीच मैत्री कराने में तत्पर
- 994.ॐ हूङ्कारेणैव सुक्षिप्रं स्तब्धप्रचण्डमारुताय नमःकेवल हुंकार से ही प्रचंड आँधी को शीघ्र स्तब्ध कर देने वाले
- 995.ॐ हृदयग्रन्थिभेदिने नमःहृदय की ग्रंथि का भेदन करने वाले
- 996.ॐ हृदयग्रन्थिवर्जिताय नमःहृदय-ग्रंथि से रहित
- 997.ॐ क्षान्तानन्तदौर्जन्याय नमःअनंत दुर्जनता को भी क्षमा कर चुके
- 998.ॐ क्षितिपालादिसेविताय नमःराजाओं आदि द्वारा सेवित
- 999.ॐ क्षिप्रप्रसाददात्रे नमःशीघ्र प्रसाद देने वाले
- 1000.ॐ क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिकाय नमःअपनी शिरडी को ही तीर्थ-क्षेत्र बना देने वाले
अर्थ (हिन्दी)
- ध्यान: जो ब्रह्मानंद-स्वरूप हैं, परम सुख देने वाले हैं, केवल ज्ञान की मूर्ति हैं; जो द्वंद्व से अतीत, आकाश के सदृश तथा तत्त्वमसि आदि महावाक्यों के लक्ष्य हैं; जो एक, नित्य, विमल, अचल तथा समस्त बुद्धियों के साक्षी-भूत हैं — उन त्रिगुण-रहित सायिनाथ सद्गुरु को मैं नमस्कार करता हूँ। ध्यान देने योग्य बात: यह वही प्रसिद्ध सद्गुरु-ध्यान श्लोक है जो परंपरा में सामान्यतः "भावातीतं त्रिगुणरहितं सद्गुरुं तं नमामि" पढ़ा जाता है; यहाँ उसी स्थान पर सायीनाथं रख दिया गया है — और आधार-स्रोत स्वयं कोष्ठक में मूल पाठ "[भावातीतं]" दर्ज करता है। अर्थात यह ध्यान-श्लोक साईं बाबा के लिए नया नहीं रचा गया, परंपरागत सद्गुरु-ध्यान को उन पर लागू किया गया है।
- समापन: नामावली अपने अंतिम नाम क्षेत्रीकृतस्वशिर्डिक — *जिन्होंने अपनी शिरडी को ही तीर्थ-क्षेत्र बना दिया* — पर समाप्त होती है, और स्रोत वहीं क्रमांक-चिह्न "१०००" देकर रचना पूर्ण करता है। इस रचना में कोई पृथक् फलश्रुति नहीं है — श्लोक-रूप भी 265वें श्लोक के अंतिम नाम पर ही समाप्त हो जाता है। यह असामान्य है, क्योंकि अधिकांश सहस्रनामों के अंत में फल-कथन आता है; यहाँ नहीं, और इसीलिए यहाँ कोई फलश्रुति जोड़ी नहीं गई।
लाभ
- नाम 653 भक्तानुग्रहकातर — *भक्तों पर अनुग्रह करने के लिए व्याकुल*; "कातर" शब्द कृपा को विवशता की तरह कहता है।
- नाम 678 तथा 682 के अनुसार भस्म (ऊदी) के दान से आधि, व्याधि, दुःख व समस्त अशुभ दूर होते हैं — यह शिरडी की जीवित परंपरा है।
- नाम 68 अन्नवस्त्रेप्सितप्रद तथा 157 आयुरारोग्यदाता — अन्न, वस्त्र, आयु व आरोग्य के भाव से पढ़े जाते हैं।
- नाम 993 हिन्दुमुस्लिंसमूहानां मैत्रीकरणतत्पर — किसी संस्कृत सहस्रनाम में दो धर्मों के बीच मैत्री का नाम होना अपने आप में उल्लेखनीय है।
- नाम 975 के अनुसार वे सालोक्य, सार्ष्टि, सामीप्य तथा सायुज्य — चारों मुक्ति-पद देने वाले हैं।
कब करें पाठ
पाठ विधि
सम्पूर्ण पाठ 35–45 मिनट का है, अतः एक ही आसन पर बिना उठे करने का संकल्प लेकर बैठें। क्रम यह है — पहले ध्यान श्लोक ("ब्रह्मानन्दं परमसुखदं…"), फिर 1000 नाम। ध्यान रहे कि इस रचना में कोई पृथक् फलश्रुति नहीं है, अतः पाठ अंतिम नाम पर ही पूर्ण होता है। नामावली-रूप में प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ते हुए एक पीत पुष्प, अक्षत अथवा तुलसी-दल अर्पित किया जाता है; श्लोक-रूप में यह 265 अनुष्टुप् श्लोकों में पढ़ा जाता है। साईं बाबा के चित्र के समक्ष घी का दीप जलाकर, पीले वस्त्र धारण कर पाठ करने की परंपरा है, और अंत में आरती करके ऊदी व प्रसाद वितरित किया जाता है। यदि सम्पूर्ण पाठ का समय न हो तो साईं अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम, 8–10 मिनट) पढ़ी जा सकती है — पर वह स्वतंत्र रचना है, इसका संक्षेप नहीं।
प्रामाणिकता व स्रोत
संपादकीय टिप्पणी: इस सहस्रनाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें साईं सच्चरित्र के प्रसंग नाम व स्थान सहित नाम बनकर दर्ज हैं — धूपखेड़ा के चाँदभाई (511), भागोजी का कुष्ठ (683), भीमाजी का क्षय (697), काका दीक्षित (244), मूले शास्त्री व घोलप महाराज (749), लेले शास्त्री (818), रोहिल्ला (813), तथा नाना चंदोरकर, दास गणु, माधवराव देशपांडे, बूटी, ताराबाई आदि भक्तों के नाम। दूसरी उल्लेखनीय बात यह है कि इसमें इस्लामी शब्द व सूफ़ी पद संस्कृत नामों के रूप में हैं — अल्ला-नाम (100), अवलिया (105), अनल-हक़ (45), अब्दुल्ला (84), मौलाना जवाराली (371) — और नाम 993 हिन्दुमुस्लिंसमूहानां मैत्रीकरणतत्पर है। कोई फलश्रुति नहीं है: श्लोक-रूप 265वें श्लोक के अंतिम नाम पर ही समाप्त हो जाता है, अतः यहाँ कोई फलश्रुति जोड़ी नहीं गई। ध्यान-श्लोक नया नहीं रचा गया — वह परंपरागत सद्गुरु-ध्यान है जिसमें "भावातीतं" के स्थान पर "सायीनाथं" रखा गया है; स्रोत स्वयं कोष्ठक में मूल पाठ दर्ज करता है। यह पृष्ठ दो-स्रोत मानक पर खरा नहीं उतरता — दोनों संदर्भ एक ही प्रकाशक के हैं; जो जाँच संभव थी वह की गई (नामावली-रूप बनाम श्लोक-रूप), और आधार-स्रोत के 50 क्रमांक-चिह्न यंत्रवत् जाँचकर पूर्णतः संरेखित पाए गए। रचना-काल आधुनिक है (महासमाधि 1918); रचयिता का नाम किसी स्रोत ने नहीं दिया। यह साईं अष्टोत्तर शतनामावली का विस्तार नहीं है — 108-सूची के केवल 22 नाम (20.4%) ही इसमें मिले। नाम 4, 56, 101 तथा 245 का पाठ अनिश्चित है और वह उसी नाम के अर्थ में चिह्नित है।
देव परिचय
श्री साईं बाबा
Shirdi Sai Baba
शिरडी के साईं बाबा श्रद्धा और सबूरी के संत हैं — सर्वधर्म समभाव और सेवा के प्रतीक।
