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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री सरस्वती आरती

आरती · माँ सरस्वती

पाठ

1

ॐ जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

2

चंद्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥

3

बाएँ कर में वीणा, दाएँ कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥

4

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥

5

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥

6

माँ त्रिभुवन की हो तुम, जन-जन की माता। हम सब बालक तेरे, तू ही रखवाला॥

7

ब्रह्मा जी ने पूजा, शंकर ने पूजा। जग ने जिसको पूजा, तू ही हमें दे भूजा॥

8

श्री सरस्वती जी की आरती, जो कोई नर गावे। हर्षित हृदय से गावे, ज्ञान-भक्ति पावे॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे सरस्वती माता, आपकी जय हो! सद्गुण और वैभव से सुशोभित, तीनों लोकों में विख्यात माता।
  2. चंद्रमुखी, कमल पर विराजमान, मंगलकारी कांति वाली; शुभ हंस की सवारी पर सुशोभित और अतुलनीय तेज धारण करने वाली माता।
  3. बाएँ हाथ में वीणा और दाएँ हाथ में माला; मस्तक पर मणिजड़ित मुकुट और गले में मोतियों की माला सुशोभित है।
  4. जो भी देवी की शरण में आया, उसका उद्धार हुआ; आपकी कृपा से ही अनेक लीलाएँ संभव हुईं।
  5. हे विद्या और ज्ञान देने वाली माता, हममें ज्ञान का प्रकाश भरो; संसार से मोह, अज्ञान और अंधकार का नाश करो।
  6. आप तीनों लोकों की और जन-जन की माता हैं; हम सब आपके बालक हैं और आप ही हमारी रक्षक हैं।
  7. ब्रह्माजी ने और शंकरजी ने जिनकी पूजा की; जगत ने जिनको पूजा — वे आप ही हैं, हमें भी अपना आशीर्वाद दें।
  8. श्री सरस्वती जी की यह आरती जो भी भक्त गाता है; प्रसन्न हृदय से गाने पर ज्ञान और भक्ति की प्राप्ति होती है।

लाभ

  • विद्या, बुद्धि और स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है।
  • विद्यार्थियों व कलाकारों को सफलता मिलती है।
  • वाणी में मधुरता और एकाग्रता आती है।

कब करें पाठ

वसंत पंचमी पर · परीक्षा व विद्यारंभ से पूर्व · प्रातः पूजा में

स्रोत

पारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह

VedikMarg · निःशुल्क भक्ति संग्रह · vedikmarg.in